Posted on 22 August 2010 by admin
कांग्रेसी युवराज राहुल गांधी को उनके जन्मदिन की बधाई देने के लिए तब नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने कई-कई बार राहुल को फोन लगाया था पर राहुल के ऑफिस वाले सुषमा को राहुल से ‘कनेक्ट’ कर पाने में असफल रहे थे। तब थक-हार कर सुषमा ने राहुल को उनके जन्मदिन पर एक बधाई-पत्र ही भेज दिया, अभी कुछ रोज पूर्व राहुल ने उस बधाई पत्र के धन्यवाद में सुषमा को एक पत्र लिखा है, पत्र खूबसूरत है, अंग्रेजी में है, उसका लब्बोलुआब है कि ‘आपकी स्नेहिल भावनाओं के अतिरेक से मैं भावुक हूं…’ आदि-आदि। पर राहुल के इस पत्र में सुषमा स्वराज, नेता लोकसभा लिखा हुआ है। अब यह राहुल के दफ्तर की भूल है या इस भूल में कोई सियासी शूल है, यही बात तो समझने की है।
Posted on 15 August 2010 by admin
आईबी के निवर्तमान मुखिया राजीव माथुर और रॉ के चीफ के.सी.वर्मा इसी वर्ष के आखिर यानी दिसंबर में रिटायर हो रहे हैं, देश की दोनों शीर्ष खुफिया एजेंसियों का सिरमौर बनने के लिए सियासी कदमताल तेज हैं। अभी सितंबर-अक्तूबर में ही माथुर व वर्मा के उत्तराधिकारियों का फैसला हो जाना है। सरकार ने नीतिगत तौर पर एक फैसला ले लिया है कि आईबी चीफ इसी सर्विस से होगा यानी आईबी से ही आएगा वह, पर रॉ चीफ बाहर से लाया जाएगा। आईबी में दो अफसर अभी सबसे ज्यादा सीनियर हैं, नेचल संधु 1973 बैच के आईपीएस हैं और वे अगले रॉ-चीफ हो सकते हैं, हिमाचल कैडर के 1974 बैच के आईपीएस अजीत लाल अगले आईबी प्रमुख हो सकते हैं। सनद रहे कि आईबी-रॉ चीफ बनवाने में सबसे ज्यादा अहम भूमिका निभाने वाले एम.के.नारायणन इस बार इस पूरे खेल में अप्रसांगिक हो गए हैं, जब कभी नारायणन आईबी के मुखिया हुआ करते थे तब वर्मा और माथुर इनसे काफी जूनियर थे। नारायणन जब से गवर्नर बने हैं तो आईबी, रॉ मामलों में उनकी जानकारी और हस्तक्षेप दोनों ही काफी कम हो गए हैं।
Posted on 10 August 2010 by admin
दक्षिण के नेताओं और अभिनेताओं को चैनल और अखबार खरीदने की पुरानी बीमारी है, इसे वे अपनी ‘शान पट्टी’ समझते हैं। येदुरप्पा भी जब दक्षिण के भगवा राजनीति में अवतरित हुए थे तो वे राजनीति में नैतिकता व शुचिता की दुहाई देते नहीं थकते थे, पर दक्षिण की सियासत की मिजाज को बदलते-बदलते वे खुद ही बदल गए, इतना बदल गए कि उन्होंने व इनके परिवार ने भी हालिया दिनों में एक कन्नड़ अखबार 200 करोड़ रुपए में खरीद लिया, अब सीएम के नजदीकी किसी माकूल न्यूज चैनल की तलाश में दरबदर भटक रहे हैं। कोई ‘प्रभा’ का प्रभाव तो दिखाए।
Posted on 01 August 2010 by admin
चुनांचे सत्ता के गालियारों में यह खबर और भी कहीं ज्यादा पुख्ता भाव से फैलने लगी कि जो चुनाव आयुक्त का रिक्त पद है वहां कोई महिला ही आसीन होगी, और इस पद के लिए सुधा पिल्लै का दावा फिलवक्त सबसे ज्यादा मजबूत दिखता है, क्योंकि एक तो वह चंडीगढ़ की खन्ना पंजाबी हैं, वहीं पति के पिल्लै होने के चलते सरकार में मजबूत मलयाली लॉबी का भी समर्थन उन्हें मिल रहा है, उनकी छवि भी एक ईमानदार नौकरशाह की है और फिलवक्त सुधा पिल्लै, योजना आयोग में मेंबर सेके्रटरी के पद पर तैनात हैं। पर सुधा पिल्लै की उम्मीदवारी को चुनौती देने के लिए रेस में दो नाम और भी हैं-सुषमा नाथ और निरूपमा राव। निरूपमा के खिलाफ एक बात जाती है कि उन्हें ‘छपास और दिखास’ की भारी बीमारी है और यह बात सरकार को कभी रास नहीं आती।
Posted on 24 July 2010 by admin
कल से सांसद का मानसून सत्र शुरू होगा पर इससे पहले कांग्रेस के चतुर रणनीतिकारों ने भाजपा को घुटनों पर ला दिया है, अब से पहले भाजपा ने सारी तैयारी कर ली थी कि कैसे इस सत्र को हंगामाखेज बनाया जाए, यानी महंगाई, भोपाल, आतंकवाद और परमाणु उदारता बिल। पर अब कांग्रेस ने भी अमित शाह और हिंदू आतंकवाद को सदन में मुद्दा बनाने की ठान ली है, और महंगाई के खिलाफ विपक्षी एका दिखाने वाले दलों में भी सेंध लगा दी है, मुलायम अलग राग गा रहे हैं, हिंदू आतंकवाद पर वामपंथियों के सुर भी अलग हैं और भाजपा को यह भय सताने लगा है कि कहीं उन्हें उदारवादी हिंदुओं के समर्थन से हाथ धोना न पड़ जाए।
Posted on 21 July 2010 by admin
दिल्ली की चिलचिलाती गर्मी से निजात पाने के लिए आमतौर से भारतीय राजनेता लंदन की ठौर ही पकड़ते हैं, पिछले दिनों लंदन के सेंट जेम्स कोर्ट की लॉबी में आपस में छत्तीस का आंकड़ा रखने वाले आइपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी और भाजपा के प्रखर नेता अरुण जेतली टकरा गए, औपचारिक दुआ सलाम के बाद मोदी सीधे काम की बात पर उतर आए और उन्होंने जेतली से अपने केस में उनसे मदद मांगी। स्वदेश लौटने के बाद जेतली ने सबसे पहला काम किया कि बीसीसीआई की कमेटी में ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर आए, अब क्या यह कोई छुपी बात है कि वसुंधरा करीबियों के बारे में युवा सिंधिया की क्या राय है, कौन कहता है कि जेतली की सियासी पारी कमजोर है?
Posted on 11 July 2010 by admin
आज भी चंद यक्ष प्रश्न जस के तस मुंह बाए खड़े हैं कि पुरुलिया कांड के आरोपियों को छोड़ने की एवज में अडवानी ने देश को क्या दिलवाया? अभी हालिया दिनों में जब अमरीका ने दस रूसी नौसैनिक जहाज पकड़ें तो इसके एवज में रूस को चार अहम अमरीकी कैदियों को रिहा करना पड़ा था। पुरुलिया में हथियार किसने किसके लिए भेजे थे? आनंद मार्गी तो महज एक बहाना था, उन्हें तो माओवादियों को लुभाना था। क्या ये वही हथियार हैं जो आज लालगढ़ से लेकर दंतेवाड़ा तक में गरज रहे हैं? इस आरोपियों की रिहाई के पीछे रूसी कनेक्शन क्या है? कौन सा महत्वपूर्ण रूसी नेता इस नेट में शामिल है? किम डेवी से किन भारतीय राजनेताओं को पैसे मिले, जिन्होंने सदैव उसे संरक्षण दिया? मुंबई में पकड़ा गया वह रूसी विमान अंतत: कहां गया? किसी को इसकी खबर नहीं। जहाज रूसी था और हथियार रूसी और उस वक्त रूस टूट की कगार पर था, तो किसके इशारे पर इस सारे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया? भाजपा शासन काल की दो बड़ी घटनाओं यानी न कंदहार और न ही पुरुलिया की मंशा का पता राष्ट्र को चला, राष्ट्रभक्ति की दंभ भरने वाली भाजपा और उसके कर्णधार अडवानी से देश इन्हीं अनुत्तरित सवालों के जवाब आज भी चाहता है, जो किसी गडकरी के फोकट बयानी से नहीं निपटेगा, हिम्मत है तो अडवानी आगे आकर राष्ट्र को इन सवालों के जवाब दें।
Posted on 05 July 2010 by admin
कांग्रेसी महारानी सोनिया गांधी का दस जनपथ का द्वार अब अनेक नेताओं की पहुंच से बाहर होता जा रहा है,कभी जिस रामविलास पासवान के घर सोनिया गांधी खुद पैदल चल कर आई थीं आज हालात यह है कि पासवान जी को मांगने से भी मैडम का समय नहीं मिल पाता। लालू, मुलायम, शिबू सोरेन और जगन रेड्डी की भी बस यही कहानी है। कमोबेश अजीत सिंह की भी यही हालत है। जगन तो बस वीरप्पा मोइली से ही मिल पा रहे हैं, क्षेत्रीय नेताओं को मोइली और प्रणबदा ही निपटा देते हैं, छोटे-मोटे सुलह-समझौते और राजनैतिक गठबंधन भी यही दोनों नेताद्वय कर लिया करते हैं। यूपीए के गठबंधन साथियों में ममता दीदी व काले चश्मेवाले बाबा यानी करुणानिधि के लिए बस मैडम सोनिया का दरबार खुला होता है, जिनसे नहीं मिलतीं उनके लिए तो मैडम के कान भी खुले नहीं होते यानी ऐसे लोगों के टेलीफोन कॉल्स भी वह आमतौर पर नहीं लेती हैं।
Posted on 28 June 2010 by admin
पटना की भाजपा कार्यकारिणी के बाद से ही भाजपा के पूर्व अध्यक्ष व पार्टी के ‘किसान फेस’ राजनाथ सिंह अपने को थोड़ा अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। सनद रहे कि पटना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से लेकर रैली स्थल तक तमाम बैनर, होर्डिंग्स व परचम पर से राजनाथ सिंह नदारद थे, गडकरी के अलावा अडवानी, सुषमा, जेतली जैसे नेताओं का जलवा रहा, पर राजनाथ की किसी ने भी सुध नहीं ली, यही बात उन्हें भीतर ही भीतर खायी जा रही है।
Posted on 22 June 2010 by admin
विजय माल्या फिर से राज्यसभा की शोभा बढ़ाने को तैयार हैं, और इस दफे उनका काम तो बस आधे में निपट गया यानी मात्र फिटी पसर्ेंट में, बिचारे महान देवेगौड़ा बंधु, बात तो सान जिंदल से पक्की हुई थी, वह तो ऐन वक्त सान अपनी बेटी की शादी में इटली के फ्लोरेंस चले गए, सो माल्या ने वक्त की नजाकत को भांपते, मौका ताड़ते बस आधे में काम बना लिया।