Posted on 01 April 2012 by admin
यूपी चुनाव में इतनी बड़ी-बड़ी बातें करने वाले नेता गण आखिर किस सियासी नेपथ्य के हमराह हो गए हैं। कहां है भाजपा की साध्वी उमा भारती? क्या अपने गुरु पेजावर स्वामी की शरण में? उमा तो अब दबी-छुपी जुबान से यह कहती भी सुनी जा रही है कि उन्होंने पहले ही नितिन गडकरी को समझाया था कि उन्हें यूपी के पचड़े में न डाल कर राज्यसभा से ले आया जाए, सवाल अहम है कि क्या वह एक मामूली सी विधायक बनकर रह जाएंगी? बड़बोले अमर सिंह का और उनकी पार्टी का यूपी चुनाव में क्या हश्र हुआ यह सबके सामने है, वे दिल्ली में ही लगातार बने हुए हैं, पर उनके पास बोलने के लिए बहुत कुछ नहीं बचा है। कल्याण सिंह का तो इन चुनावों ने कल्याण ही कर दिया, वे तो अपने बेटे व बहू तक को नहीं जिता पाए। कांग्रेस के यंग एंग्री मैन राहुल गांधी ने नतीजे घोषित होते ही अगले दो रोज में विदेश की ठौर पकड़ ली। वे स्कूवाडाइविंग के लिए फिलिपींस चले गए। और वहां से कोई एक सप्ताह की छुट्टियों के बाद वापिस भारत लौटे।
Posted on 25 March 2012 by admin
श्रीलंका को लेकर विदेश मंत्रालय चिंतित है, मंत्रालय के अधिकारियों की स्पष्ट तौर पर मान्यता है कि संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्ताव में श्रीलंका में ‘वार क्राईम’ पर निंदा प्रस्ताव पास होना एक गलत फैसला है। सनद रहे कि चीन ने इस रेजुलेशन के खिलाफ वोट दिया था, जबकि भारत ने अमरीका के पक्ष में वोट दिया, जिससे श्रीलंका भारत से सख्त नाराज है। श्रीलंका का तर्क है कि वार क्राईम तमिलों पर नहीं महज लिट्टे पर हुए थे। वहीं केंद्र सरकार में सहयोगी डीएमके ने कांग्रेसी नेतृत्व को धमकी दे दी थी कि यदि भारत ने यूएन प्रस्ताव के पक्ष में वोट नहीं किया तो डीएमके केंद्र सरकार से समर्थन वापिस ले लेगी तथा वह अपने मंत्रियों को भी वापिस बुला लेगी। कांग्रेस के लिए यह सांप-छछुंदर वाली स्थिति हो गई थी, वह न तो अमरीका को नाराज करना चाहती थी, न ही अपनी सहयोगी पार्टी डीएमके को, राष्ट्रपति चुनाव आने वाले हैं, सो ऐसे में कांग्रेस अपने किसी भी गठबंधन साथी से पंगा नहीं लेना चाहती।
Posted on 18 March 2012 by admin
भाजपा में इस दफे राज्यसभा को लेकर भयंकर धमाचौकड़ी मची, कई अप्रत्याशित टिकट बंटे। कई मंझे खिलाड़ियों के टिकट कट गए। इस दफे राज्यसभा का राज पाने के लिए श्याम जाजू, किरीट सौमेया, विनय सहस्त्रबुद्दे, निर्मला सीतारमण, महेश शर्मा, हेमा मालिनी जैसे नेताओं की एक लंबी फौज कतारबद्द थी। राज्यसभा में भाजपा के उपनेता एस.एस.अहलूवालिया के भाग्य का सितारा थोड़ा मद्दिम पड़ गया। पार्टी उन्हें झारखंड से टिकट देना चाहती थी, पर अहलूवालिया अपने लिए राजस्थान जैसी कोई सुरक्षित सीट चाहते थे। भाजपा के कद्दावर नेता अरुण जेतली ने अहलूवालिया की जगह संघ से जुड़े वकील भूपेंद्र यादव को लाना ज्यादा मुफीद समझा। यादव मालेगांव, साध्वी प्रज्ञा ठाकुर व अयोध्या से जुड़े मामलों पर संघ को जरूरी कानूनी राय मुहैया करा रहे हैं। संघ से अपने बिगड़े तार जोड़ने के लिए वसुंधरा ने भी राजस्थान के लिए एक बाहरी भूपेंद्र यादव के नाम का विरोध नहीं किया।
Posted on 07 February 2012 by admin
Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.
Posted on 07 February 2012 by admin
Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.
Posted on 24 January 2012 by admin
उत्तर प्रदेश चुनाव 2012 में मुलायम सिंह एंड कुनबा को सत्ता की पदचापें साफ सुनाई दे रही हैं। भले ही मुलायम ने अखिलेश को यूपी चुनाव की पूरी बागडोर सौंप रखी हो, मुलायम परिवार की तीसरी पीढ़ी भी चुनाव प्रचार में अपना दम आजमा रही है। मुलायम के दिवंगत भतीजे रामवीर सिंह के पुत्र व नेताजी के पोते तेज प्रताप जो कि विदेश से एमबीए की पढ़ाई पूरी करके आए हैं, बीटेक करने वाले आदित्य जो मुलायम भ्राता शिवपाल सिंह यादव के बेटे हैं। मुलायम के छोटे भाई राजपाल सिंह यादव का बेटा अंशुल, प्रोफेसर राम गोपाल यादव का पुत्र अक्षय, ये सभी जोर-शोर से सपा के चुनाव प्रचार में जुटे हैं। वहीं मुलायम के एक अन्य पुत्र प्रतीक अपने मौसा प्रमोद गुप्ता जो कि सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, उनका प्रचार अभियान संभाल रहे हैं। मुलायम परिवार की पूरी यंग जेनरेशन भरथना, इटावा व लखनऊ में पार्टी के साइकिल पर पैडल मार रही है।
Posted on 11 January 2012 by admin
आखिरकार वयोवृध्द कांग्रेसी नेता नारायण दत्त तिवारी की धमकी रंग लाई, कांग्रेस हाईकमान को उन्हें किंचित गंभीरता से लेना पड़ा और कई तिवारी करीबियों को पार्टी टिकट से नवाजा गया है। अपनी उपेक्षा से नाराज होकर तिवारी जी ने आह्वान कर दिया था कि वे उत्तराखंड की तमाम 70 विधानसभा सीटों पर अपने गैर राजनीतिक मंच की ओर से उम्मीदवार खड़े कर देंगे। जाहिर है अगर तिवारी जी ऐसा कर देते तो भाजपा इसकी लाभार्थी रहने वाली थी, सो तिवारी जी को मनाने के लिए आनन-फानन में उनके भतीजे मनीष तिवारी को नैनीताल से, हरेंद्र शर्मा को सहसपुर से, तिवारी जी के दामाद नवप्रभात को विकास नगर से पार्टी टिकट दे दिया गया। नवप्रभात पिछले चुनाव में भी कांग्रेस की टिकट पर ही देहरादून के विकास नगर से चुनाव लड़े थे और उन्होंने वहां भाजपा उम्मीदवार को कड़ी टक्कर दी थी।
Posted on 27 December 2011 by admin
गृहमंत्री चिदंबरम के ग्रह अच्छे नहीं चल रहे। शुक्रवार को जिस कदर संसद में घमासान मचा और विपक्ष उनके इस्तीफे पर अड़ा रहा, उससे एक बात साफ हो गई है कि अब पीसी कांग्रेस में भी अलग-थलग पड़ गए हैं। दिल्ली के जिस होटल व्यवसायी एस.पी.गुप्ता और उनसे जुड़े धोखाधड़ी मामलो को लेकर बावेला मचा दरअसल वह होटेलियर चिदंबरम के पुराने जानकारों में बताए जाते हैं। जिन्होंने दिवंगत राजीव गांधी के नाम पर मंच बना रखा है, उन पर यह आरोप है कि उन्होंने कई सांसदों के फर्जी लेटरहैड का इस्तेमाल अपने हक में किया है। कहा जाता है इसमें सोनिया गांधी की फर्जी चिट्ठी का मामला भी शामिल है। इसीलिए इस पूरे मामले में दस जनपथ और उसे निष्ठावान सांसद-मंत्री-नेता चिदंबरम के बचाव में सामने नहीं आए। माना जा रहा है कि इन दिनों प्रणब मुखर्जी दस जनपथ की आंखों के तारे बने हुए हैं। प्रणब-चिदंबरम में छतीस का आंकड़ा जगजाहिर है। ऐसे में सोनिया भी एक नए सियासी गणित के आगाज को सिरे चढ़ने देखना चाहती हैं। ऐसे वक्त में जबकि वह जानती हैं कि कथित तौर इस होटल व्यवसायी की 2जी मामलों में संलिप्तता हो सकती है, क्योंकि गुप्ता और राजा में एक वक्त गहरी छनती थी।
Posted on 11 December 2011 by admin
जब लगातार 7 दिनों तक संसद नहीं चली तो प्रणब मुखर्जी ने मान लिया कि अब टूटकर कोई नहीं आएगा। विपक्ष तो वोटिंग के बगैर मानेगा नहीं। ऐसे में रही-सही कसर ‘बंद’ ने पूरी कर दी। कांग्रेस के अंदर ही विद्रोह सुलगने लगा था। 5 राज्यों में अभी विधानसभा चुनाव होने हैं और हर राज्य में 15 फीसदी वोट व्यापारियों के हैं जो खुदरा क्षेत्र में एफडीआई के विरोध में राग अलाप रहे थे। सो, सरकार ने तय किया कि तब तक एफडीआई के मुद्दे को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए जब तक कि इस मुद्दे पर स्टेक होल्डर्स में सहमति नहीं बन जाती है। स्टेक होल्डर्स यानी ट्रेड यूनियनें, राज्य सरकारें और राजनीतिक पार्टियां।
Posted on 11 December 2011 by admin
कर्नाटक के भगवा मुख्यमंत्री सदानंद गौड़ा की यह अब तक की सबसे बड़ी अग्नि परीक्षा है। गौड़ा भाजपा के एक कमजोर मोहरे हैं। इसीलिए भाजपा उन्हें विधानसभा का चुनाव लड़वाने की बजाए विधान परिषद के पिछले द्वार से सदन में लेकर आई। मौजूदा विधानसभा में श्रीरामलू को 7 विधायकों का समर्थन हासिल है जो किसी भी कीमत पर भाजपा के साथ जाने को तैयार नहीं। येदुरप्पा के साथ तो भाजपा के आधे से ज्यादा विधायक हैं। अब गौड़ा के समक्ष सर्वप्रमुख चुनौती येदुरप्पा और श्रीरामलू को पटाने की है। इस बार वैसे भी गुप्त मतदान होना है, वैसे गौड़ा देवेगौड़ा के संपर्क में भी हैं। येदुरप्पा के समक्ष सबसे महती चुनौती यह है कि अगर इस दफे सदानंद यह बाधा पार कर गए तो फिर वे पूरे टर्म तक सीएम बने रह सकते हैं जो येदु को नागवार गुजर रहा है।