Posted on 09 July 2012 by admin
अब तो यह राज राज भी न रहा कि देश के अगले उपराष्ट्रपति के लिए दस जनपथ की च्वॉइस सुशील कुमार शिंदे हैं न कि हामिद अंसारी। आदर्श घोटाले में जिस प्रकार शिंदे को क्लीनचिट मिल गई है उससे एक बात साफ हो गई है कि उनके सियासी सफर का एक नया आगाज होने वाला है। खुदा-ना-खास्ते अगर शिंदे उपराष्ट्रपति पद की दौड़ में पिछड़ भी जाते हैं तो बहुत मुमकिन है कि वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद पर काबिज हो जाएं। राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के कामकाज से दस जनपथ इतना खुश नहीं है। जो उनसे खुश हैं मसलन स्वयं प्रधानमंत्री, तो डा. मनमोहन सिंह की आज भी दिली इच्छा पृथ्वीराज को अपनी कैबिनेट में रखने की है।
Posted on 02 July 2012 by admin
सिर्फ कांग्रेसी ही क्यों? प्रणब दा के शुभचिंतकों में शुमार होने वाले कुछ गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री भी संगमा को समझाने-बुझाने का यत्न कर रहे हैं कि मुमकिन हो तो वे अपनी उम्मीदवारी वापिस ले लें। इस कड़ी में पिछले दिनों हुई जयललिता के साथ संगमा की बातचीत को अहम माना जा रहा है।
Posted on 25 June 2012 by admin
Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.
Posted on 25 June 2012 by admin
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Posted on 18 June 2012 by admin
राष्ट्रपति चुनाव में अपनी दावेदारी से बेपरवाह डा. ए.पी.जे.अब्दुल कलाम इन दिनों कर क्या रहे हैं। अपनी कुछ जरूरी यात्राओं से अलहदा वे अपनी आत्मकथा को इन दिनों अंतिम रूप देने में लगे हैं। समझा जाता है कि आने वाले 2-3 महीनों में उनकी यह ऑटोबॉयोग्राफी छपकर मार्किट में आ सकती है।
Posted on 18 June 2012 by admin
देश में एक नव समाजवाद की अलख जगाने वाले खांटी समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव का असली चेहरा सामने आ गया है। ममता से दोस्ती की कीमत पर उन्होंने कांग्रेस से क्या खूब सियासी सौदा किया है। कांग्रेस उन्हें केंद्र में रक्षा मंत्री का पद देने को तैयार हो गई है। पर नेताजी समर्थन के एवज में कुछ और मंत्री पद चाहते हैं। यहां तक कि अपने भाई प्रोफेसर रामगोपाल यादव के लिए उपराष्ट्रपति पद की भी आस लगाए बैठे हैं।
Posted on 18 June 2012 by admin
सवाल लाख टके का है कि अगर प्रणब राष्ट्रपति बनते हैं तो देश के वित्त मंत्री का पद किसे जाएगा। ऐसे में दो संभावनाएं मुखर होकर सामने आई हैं कि पहले तो प्रधानमंत्री वित्त मंत्रालय अपने पास ही रखेंगे बाद में इसे सी.रंगराजन या मोंटेक सिंह आहलूवालिया को सौंपा जा सकता है। मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए लालू यादव और रामविलास पासवान भी जोर लगाए हुए हैं। वहीं डीएमके अपने लिए रेल मंत्रालय की मांग कर रहा है।
Posted on 04 June 2012 by admin
आईपीएल की मौजूदा सीरीज तमाम हंगामों के बाद भले ही समाप्त हो चुकी हो, पर सियासत है जो क्रिकेट का पीछा नहीं छोड़ रही है, भाजपा सांसद और आईपीएल की सबसे ज्यादा बैंड बजाने वाले कीर्ति आजाद और भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेतली की डीडीसीए की लड़ाई पुरानी है, इसीलिए अपने अनशन से ऐन पूर्व कीत आईपीएल कमिश्नर राजीव शुक्ला से मिलने गए थे और उनसे मांग की थी कि जेतली को आईपीएल की गवर्निंग बॉडी और बीसीसीआई के उपाध्यक्ष पद से हटाया जाए, शुक्ला ने कहा कि चूंकि जेतली एक चुने हुए पदाधिकारी हैं इसीलिए उन्हें उनके पद से हटाना संभव नहीं होगा। यशवंत सिन्हा की जेतली से पुरानी नाराजगी है। चूंकि धूमल के पुत्र अनुराग ठाकुर क्रिकेट की राजनीति से जुड़े हैं, इसीलिए शांता कुमार भी आईपीएल से नाराज हैं। सबसे ज्यादा नाराजगी तो लालू प्रसाद की है, उनके पुत्र तेजस्वी को जीएमआर वालों ने दिल्ली की डेयरडेविल टीम के 33 खिलाड़ियों में शामिल तो रखा है पर आईपीएल के किसी भी मैच में उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला और तो और जीएमआर वाले तेजस्वी की जगह अब किसी और खिलाड़ी को टीम में लेना चाहते हैं ऐसे में लालू की नाराजगी तो स्वाभाविक ही है।
Posted on 04 June 2012 by admin
कोयला मामले पर पलटवार के लिए कांग्रेस खुद को तैयार कर रही है, चूंकि इस मामले में प्रधानमंत्री की कथित ईमानदार छवि की खूब ऐसी-तेसी हो चुकी है। सो सबसे पहले कांग्रेस को बलि के बकरों की तलाश है, ऐसे में दो नाम सामने आ रहे हैं, टी.के.ए.नायर और संतोष बागड़ोदिया। इसके अलावा कांग्रेस इस बात का डॉसियर तैयार करने में जुट गई है कि कोयला खुदाई के निजीकरण की पहल पहले कब हुई, यानी इस पूरे मामले को एनडीए के जमाने से जोड़कर देखा जा रहा है जब उमा भारती व शाहनवाज हुसैन कोयला मंत्री थे, कांग्रेसी मैनेजर कहते हैं कि पहला कोल फील्ड तो एनडीए के जमाने में एक औद्योगिक घराने को स्वीकृत किया गया था। इसके अलावा कांग्रेस इस कोयला घोटाला के लाभार्थियों की सूची भी तैयार कर रही है, इस सूची में दो नाम बड़ी प्रमुखता से उभर कर सामने आए हैं, मोनेट इस्पात के जजोरिया व झारखंड पॉवर कॉरपोरेशन जैसे उपक्रम चलाने वाले अनिल अंबानी। सनद रहे कि अनिल ने अपने तमाम बिजली उत्पादक यूनिटों के नाम ऐसे रखे हैं जो सरकारी कंपनी होने का भ्रम पैदा करती हैं।
Posted on 28 May 2012 by admin
अडवानी अपनी ही पार्टी व संघ के चंद नेताओं से बेतरह नाराज हैं। उनका यूं नाराज होना भी लाजिमी ही है। संघ ने साफ कर दिया है कि पार्टी का कोई भी नेता जो 75 बरस की दहलीज पार कर गया हो वह चुनाव नहीं लड़ेगा, बल्कि पार्टी में संरक्षक की भूमिका में अवतरित होगा। यानी अडवानी, यशवंत सिन्हा, जसवंत सिंह, मुरली मनोहर जोशी अगले आम चुनाव 2014 में इन सबका पत्ता कट सकता है। संघ नेताओं के समक्ष अडवानी का यह तर्क भी काम नहीं आया जब उन्होंने केरल के वामपंथी पूर्व मुख्यमंत्री अच्चुतानंद का हवाला दिया जो 80 पार के हैं, संघ का कहना साफ है कि वह भाजपा के युवा नेतृत्व को सामने लाने का पक्षधर है। सो,अब अडवानी युग के अवसान गीत गाने का वक्त आ गया है।