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Posted on 17 October 2012 by admin
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Posted on 08 October 2012 by admin
देश के एक प्रमुख उद्योगपति जो दस जनपथ के भी उतने ही दुलारे हैं, और उनके लालकृष्ण अडवानी से भी बहुत पुराने रिश्ते हैं पिछले दिनों जब वे अडवानी से मिलने उनके घर गए तो उन्होंने अडवानी के समक्ष यह चिंता जाहिर की और कहा, ‘जिस तरह नरेंद्र मोदी के नाम को संघ द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा है, वह बेहद चिंताजनक है, हमारा तो भाजपा से बस इतना भर रिश्ता है कि हमारे आपसे रिश्ते हैं।’ अडवानी ने कहा, ‘आप चिंता न करें, जब भी एनडीए सत्ता में आएगा तो देश को एक धर्मनिरपेक्ष प्रधानमंत्री मिलेगा। ऐसे में मेरा ही नाम सबसे आगे होगा।’ इसके बाद ही एनडीए के संयोजक शरद यादव का अडवानी को लेकर वह चर्चित बयान सामने आया।
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Posted on 25 September 2012 by admin
ममता की दीदीगिरी चाहे इस बार यूपीए सरकार को केंद्र से नहीं उखाड़ पाई हो पर दीदी ने सरकार के खिलाफ खतरे का बिगुल ारूर बजा दिया है। यह तो गनीमत मनाइए कि यूपी के दो जातिवादी नेताओं में केंद्र सरकार को बचाने की एक घोर प्रतिद्वंद्विता छिड़ गई है। सरकार बचाने के दोनों के बढ़-चढ़ कर दावे हैं। कुछ बदले से इरादे हैं। मायावती अभी तुरंत मध्यावधि चुनाव नहीं चाहती हैं। वह यूपी में और बदनाम होने के लिए अखिलेश सरकार को कम से कम 6 महीने का वक्त देना चाहती हैं। वहीं मुलायम तीन मुख्य एजेंडों पर काम कर रहे हैं। एक तो उनकी नार प्रधानमंत्री की कुर्सी पर है इसके लिए वो तीसरे या चौथे मोर्चे के गठन की संभावनाओं को तलाश रहे हैं। वहीं उनका शॉर्ट टर्म गोल अपने सारे परिवार के सदस्यों को सीबीआई के शिकंजे और कानूनी पचड़ों से मुक्त कराना भी है। चुनांचे इसके लिए केंद्र में सत्तारूढ़ दल से अच्छे संबंध बनाए रखना उनकी मजबूरी भी है। इसके अलावा केंद्र सरकार को समर्थन की एवा में मुलायम अपने गृह राज्य यूपी के लिए केंद्र से कुछ बड़े पैकेज की आस लगाए बैठे हैं।
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Posted on 25 September 2012 by admin
एनसीपी के एक प्रमुख नेता और पार्टी महासचिव तारिक अनवर को लगता है मनमोहन सरकार के अगले फेरबदल में महा राज्यमंत्री पद पर संतोष करना पड़ सकता है। हालांकि पवार इस बात के लिए जोरदार लॉबिंग कर रहे थे कि तारिक को कम से कम राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार तो मिल ही जाए। पर कांग्रेस ने पवार के समक्ष स्पष्ट कर दिया है कि उनका कोटा सिर्फ राज्यमंत्री का ही बनता है, वह भी अगाथा संगमा की खाली की हुई कुर्सी की वाह से। अभी दो राो पहले पवार ने पीएम से मिलकर एक बीच का रास्ता निकाला। अब यह तय हुआ है कि तारिक राज्यमंत्री के तौर पर पवार के अधीनस्थ कृषि मंत्रालय में ही काम करेंगे जिससे कि पवार उन्हें स्वतंत्र रूप से मंत्रालय की कई सारी जिम्मेदारियां सौंप सकें।
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Posted on 10 September 2012 by admin
प्रणब दा ने भले ही सक्रिय राजनीति को अलविदा कह रायसिना हिल्स की चढ़ाई पूरी कर ली हो, पर सियासत की लत ही कुछ ऐसी है जो एक बार लगे तो फिर ना छूटे। उनके इस्तीफे से रिक्त हुई जंगीपुर सीट से वे अपने विधायक बेटे अभिजीत को लड़ाना चाहते हैं। गोया कि अभिजीत भी पश्चिम बंग से ही विधायक हैं, लिहाजा उनके द्वारा रिक्त की जाने वाली विधानसभा सीट पर उनकी बहन का दावा सबसे मजबूत है। दादा के कुशल मार्गदर्शन में अभिजीत ने नई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित अपने आवास पर बारी-बारी से टीएमसी और कांग्रेस सांसदों के लिए डिनर रखा। इस डिनर डिप्लोमेसी से पूर्व प्रणब दा ने ममता से भी बतिया लिया था, ताकि तृणमूल के सांसद बगैर किसी बाधा उस डिनर कार्यक्रम में पहुंच पाएं। टीएमसी तो ठीक पर स्वयं कांग्रेस के सांसदों में एकजुटता नहीं दिखी। बंगाल के 6 कांग्रेसी सांसदों में से मात्र 4 सांसद ही दादा के डिनर में शामिल हुए, यानी दादा के लिए अभी कांग्रेस की लड़ाई जीतनी शेष है।
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Posted on 10 September 2012 by admin
कोलगेट को लेकर सीएजी की रिपोर्ट पर तमाम विपक्षी हंगामों के बीच अब मौजूदा केंद्र सरकार के शासन और कामकाज का आकलन करने वाली सीएजी की दूसरी रिपोर्ट भी आने वाली है। इस दूसरी रिपोर्ट को लेकर भाजपा अभी से ही खासे उत्साह में है। अभी सीएजी विनोद राय का दो साल का टर्म बाकी है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा नेताओं ने उन्हें आश्वस्त कर रखा है कि उनकी रिटायरमेंट के तुरंत बाद पार्टी उन्हें राज्यसभा से उपकृत कर देगी। ऐसा कालांतर में भी हो चुका है। जब बोफोर्स का शोर बरपाने वाली रिपोर्ट लाने वाले तत्कालीन सीएजी टी.एन.चतुर्वेदी को भी उनकी रिटायरमेंट के बाद भाजपा ने पहले उनको राज्यसभा, फिर गर्वनरी से नवााा। अब क्या विनोद राय की बारी है?
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Posted on 10 September 2012 by admin
प्रियंका गांधी अपने सियासी आगाा के लिए एकदम तैयार बैठी हैं। यबसे खास बात तो यह कि स्वयं मां यानी सोनिया का रूझान भी बेटी की ओर बढ़ा है। वैसे भी कांग्रेस के अंदर राहुल को लेकर यह आम धारणा बन गई है कि वे किसी की सुनते नहीं। कांग्रेस के अंदर दबे-छुपे तौर पर उनके इस जुमले का मााक भी उड़ने लगा है जिसमें वे अक्सर यह कहते पाए गए हैं-‘आई नो एवरीथिंग, आई कैन सेट थिंग्स राइट इन ए मिनट।’ यानी मुझे हर बात मालूम है, मैं सब एक मिनट में ठीक कर दूंगा। प्रियंका के बारे में कांग्रेसियों की प्रचलित धारणा है कि कम से कम वह लोगों की बात सुनती तो हैं। प्रियंका इन दिनों न सिर्फ राजीव गांधी फांउडेशन का सारा काम देख रही हैं अपितु रायबरेली और अमेठी संसदीय क्षेत्र के कामों में भी उन्होंने ध्यान देना शुरू कर दिया है। सो, उनके इस दावे को भी हल्के से नहीं लिया जाना चाहिए जब विगत दिनों में उन्होंने कहा था कि वे अगले चुनाव में रायबरेली व अमेठी की दसों सीटें कांग्रेस के लिए जिता कर लाएंगी।
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Posted on 04 September 2012 by admin
यूपी में अखिलेश राज में उद्योगपतियों के लिए सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। अधिकांश फैक्ट्री मालिकों की आम शिकायत है कि उन्हें बिलावजह ‘पॉल्यूशन विभाग’ वाले तंग करते हैं और आकर कहते हैं कि ‘आपकी फैक्ट्री बंद कर दी जाएगी, यह ऊपर से ऑर्डर है।’ सूत्रों के मुताबिक ऊपर से यानी अखिलेश के परम सखा अभिषेक मिश्र का। अब फैक्ट्री वाले भागे-भागे लखनऊ पहुंचते हैं और अभिषेक मिश्र के हाथ-पांव पड़ते हैं तो उन्हें फिर सलाह दी जाती है कि वे एक बार संजय डालमिया से दिल्ली में मिल लें और वहां पूजा-अर्चना के बाद ही वे बेखौफ होकर नोएडा या अन्य औद्योगिक नगरों को लौट पा रहे हैं ये थैलीशाह।
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Posted on 04 September 2012 by admin
भाजपा में एक नई सोच बनी है कि पार्टी के दिग्गज नेताओं को 2014 के लोकसभा चुनावों में दिल्ली से मैदान में उतरना चाहिए। सुषमा स्वराज को नई दिल्ली संसदीय सीट से चुनाव लड़ाने का विचार चल रहा है तो अरूण जेटली कपिल सिब्बल को चुनौती पेश करते दिख सकते हैं। नवजोत सिंह सिद्दू को महाबल मिश्रा के खिलाफ उतारा जा सकता है और पुरबिया वोटरों के मद्देनजरर् कीत्ति आजाद को संदीप दीक्षित के खिलाफ पूर्वी दिल्ली से उतारा जा सकता है।
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Posted on 04 September 2012 by admin
प्रणब दा के रायसिना हिल्स में शिफ्ट हो जाने के बाद अब कांग्रेस को नई दादी मिल गई है सोनिया के रूप में। सोनिया कभी संसद में कांग्रेसी सांसदों से मूक भाषा में यानी इशारों-इशारों में बात करती थीं। ताजा कोलगेट मामले ने उन्हें अब खासा वाचाल बना दिया है। अब वो सदन में बोल भी रही हैं, विपक्षियों को तौल भी रही हैं और सदन के फ्लोर मैनेजमेंट को सुचारू रूप देने के लिए इसकी तमाम गतिविधियों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं। यहां तक कि अब कांग्रेसी दादी को सेंट्रल हॉल में भी बैठे देखा जा सकता है।
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