Posted on 26 December 2012 by admin
‘गुजरात तो झांकी है, दिल्ली अभी बाकी है’ का नारा उनके पक्ष में बुलंद होता है तो वे मंद-मंद मुस्कराते हैं। उनका दिल गुजरात में है, पर आंखे दिल्ली पर टिकी हैं। मोदी 27 दिसंबर को दिल्ली आ रहे हैं, सिर्फ एक दिन के लिए, दिल्ली के भगवा नेताओं के दिल व मन टटोलने के लिए। ‘ब्रांड मोदी’ का इल्म व गुमान उन्हें कहीं पहले से है, सो मोदी के लोग अब इस ब्रांड को गुजरात से बाहर आजमाना व चलाना चाहते हैं। टीम मोदी ने देशभर के 250 लोकसभा क्षेत्रों को चिन्हित कर लिया है जहां आने वाले दिनों में मोदी का दौरा होगा। मोदी कहीं शिद्दत से विवेकानंद के विचारों से अभिभूत व अभिप्रेरित हैं, सो ‘विवेकानंद जन जागरण यात्रा’ सरीखी किसी यात्रा का प्रारूप व मसौदा तय हो चुका है। मोदी देशभर का दौरा करेंगे। कर्नाटक, दिल्ली, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ के आने वाले विधानसभा चुनावों में मोदी खुद को एक स्टार प्रचारक के तौर पर उभरने दे सकते हैं। यानी मोदी पार्टी व संघ पर इतना दबाव बनाने के लिए कृत संकल्प दिखते हैं कि उन्हें आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर प्रोजेक्ट किया जाए।
Posted on 28 November 2012 by admin
मनीष तिवारी यूपीए के नए संकटमोचक बन कर उभर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में मनमोहन सरकार और कांग्रेस की साख पर जिस तरह बट्टा लगा है और देश का मीडिया भी जिस कदर सरकार के प्रति आक्रामक व धारदार हुआ है, उसे मद्देनार रखते हुए मनीष सूचना प्रसारण मंत्री के नए अवतार में अपने रोल को पुनर्परिभाषित कर रहे हैं। अपनी अड़ियल शैली से दीगर वे अंखबार के संपादकों व चैनल हैड से संपर्क साध उनके साथ एक बेहतर रिश्ता बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इतना ही नहीं वे एक-एक कर के अंखबार व मीडिया समूहों के मालिकों से भी मिल रहे हैं। इस काम में उनके एक एनआरआई मित्र बढ़-चढ़ कर मदद कर रहे हैं, जिनका काम मीडिया फंड को डील करना है। सो, उम्मीद की जानी चाहिए कि आनेवाले दिनों में सरकार व पार्टी के प्रति मीडिया के रूख में किंचित बदलाव दिखेगा।
Posted on 28 November 2012 by admin
कर्नाटक में समझौता एक्सप्रेस चल चुकी है। भाजपा के एक सीनियर नेता अरूण जेटली बागी येदुरप्पा को मनाने-समझाने की हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं। जेटली ने येदुरप्पा को कर्नाटक का नया मुखिया बनाने की भी पेशकश की है। येदुरप्पा के सबसे खास व्यक्तियों में शुमार होने वाले वहां के एक एमएलसी लहर सिंह जो जेटली के करीबियों में शुमार होते हैं, नाराा येदुरप्पा को मनाने में और उन्हें अपनी नई पार्टी का ऐलान करने से रोकने में सबसे अहम भूमिका निभा रहे हैं।
Posted on 20 November 2012 by admin
Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.
Posted on 20 November 2012 by admin
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Posted on 20 November 2012 by admin
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Posted on 05 November 2012 by admin
अगले सीबीआइ चीफ की दौड़ में भले ही बिहार कैडर के रंजीत सिन्हा ने बाजी मार ली हो पर पर इस रेस में कई दिग्गज शामिल थे। मसलन दिल्ली के पुलिस आयुक्त नीरज कुमार, हरियाणा कैडर के शरद सिन्हा, यूपी कैडर के अतुल कुमार। पर हरियाणा के मुख्यमंत्री भुपिन्दर सिंह हुड्डा शरद सिन्हा को लेकर जबरदस्त लॉबिंग कर रहे थे। सूत्र बताते हैं कि वे शरद सिन्हा को लेकर कांग्रेसी सर्वशक्तिमान अहमद पटेल से भी मिलने गए थे। हुड्डा को पटेल का आशीर्वाद प्राप्त है। दिल्ली के पुलिस आयुक्त नीरज कुमार को लेकर हालिया दिनों में कांग्रेसी आलाकमान के मन में यह धारणा बलवती हुई है कि वे अरविंद केजरीवाल के प्रति किंचित नरम हैं। तभी तो इंडिया अगेंस्ट करप्शन के लोग बेझिझक कभी तो दस जनपथ या फिर 7 रेसकोर्स का घेराव कर लेते हैं। भुपिन्दर सिंह हुड्डा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास का घेराव कर देते हैं पर दिल्ली पुलिस मूकदर्शक बनी रहती है। इस बात को लेकर नीरज कुमार का नाम पहले ही रेस में से कट गया था। सो, ऐसे में हुड्डा शरद सिन्हा को लेकर खासे उत्साहित थे और वे अहमद पटेल को यह भरोसा दिलवाने में भी कामयाब हो गए थे कि शरद सिन्हा के आने से जहां वाड्रा मामले में भी आसानी रहेगी वहीं अपना सइबीआइ चीफ लाकर हुड्डा ना सिंर्फ अपना दामन पाक-साफ कर लेना चाहते थे वहीं चौटाला और उनके पुत्रों पर भी सीबीआइ का शिकंजा कसवाना चाहते थे। पर पीएमओ की वजह से उनकी मंशाएं परवान नहीं चढ़ सकीं।
Posted on 05 November 2012 by admin
गीतिका शर्मा हत्याकांड से कुचर्चा में आए गोपाल कांडा और मुसीबतों का जैसे चोल-दामन का साथ हो। अभी दिल्ली पुलिस के हाथ कुछ महत्वपूर्ण सुराग लगे हैं जो कांडा केस की पेचीदगियां और भी बढ़ा सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि गोपाल कांडा के भाई और उनके कानूनी सलाहकारों की बातचीत का टेप दिल्ली पुलिस के पास मौजूद है। जिसमें कांडा के कानूनी सलाहकार कथित तौर पर उनके भाई से कहते पाए गए हैं कि इस केस में अंतरिम जमानत के लिए उन्हें एक मोटी रकम खर्च करनी होगी। सबसे दिलचस्प तो यह कि इस दौरान कांडा के भाई ने कोई 20 दफे अपना मोबाइल नंबर बदला फिर भी वे दिल्ली पुलिस की नारों से नहीं बच पाए।
Posted on 30 October 2012 by admin
अगर खिलाफ हैं होने दो जान थोड़ी है, यह सब धुंआ है कोई आसमान थोड़ी है।
लगेगी आग तो आएंगे घर कई ाद में, यहां पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है॥
भ्रष्टाचार के तमाम गंभीर आरोपों से जूझते नितिन गडकरी को संघ ने फिलहाल अभयदान देने का फैसला किया है। सूत्र बताते हैं कि वे दिसंबर तक पार्टी अध्यक्ष बने रहेंगे और अपना अध्यक्षीय कार्यकाल पूरा करेंगे। जनवरी में पार्टी को एक नया अध्यक्ष मिल सकता है। गडकरी ने ऊपरी मन से ही सही संघ व पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से कह दिया है कि वे अपने दूसरे टर्म के लिए इच्छुक नहीं हैं। गडकरी के इस्तीफे को लेकर पार्टी में दो मत हैं। एक धड़ा शुचिता व नैतिकता की दुहाई देकर गडकरी का तुरंत इस्तीफा चाहता है। वहीं संघ समर्थित दूसरे धड़े की राय है कि मीडिया ट्रायल के आधार पर पार्टी अध्यक्ष का इस्तीफा नहीं हो सकता। नहीं तो सीएजी रिपोर्ट में नाम आने के बाद मनमोहन सिंह और बोफोर्स कांड में नाम आने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को भी इस्तीफा देना चाहिए था।
Posted on 17 October 2012 by admin
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