Posted on 08 July 2013 by admin
सीबीआई अपनी पूछताछ में आईबी के स्पेशल डायरेक्टर राजेंद्र कुमार से लगातार यह सवाल पूछती रही कि इशरत के आतंकवादी संगठन से जुड़े होने की ंखबर उन्हें कहां से मिली? तो पता चला कि यह ंखबर तो आतंकवादी संगठन लश्करे-ए-तोइबा से ही निकलकर सामने आई थी। इस संगठन में आईबी ने अपने प्रयासों से मुखबिरों का जाल फैला लिया है। जब आईबी ने उन लोगों की सूची तैयार तैयार की थी कि हिंदुस्तान में लश्कर के कौन-कौन ‘आपरेटिव’ हैं तो उसमें इशरत जहां का भी नाम शामिल था, इसके बाद से ही लगातार आईबी इशरत पर नार रख रही थी। इसी कड़ी में इशरत जब जावेद शेंख के साथ फौाबाद यानी अयोध्या और लखनऊ गई थी तो ये वहां जिस होटल में ठहरे थे वहां अपने को मियां-बीबी के तौर पर र्दा कराया था, बाद के घटना क्रमों में इशरत के ऊपर खुंफिया एजेंसियों का शक बढ़ता चला गया।
Posted on 29 June 2013 by admin
भाजपा के भीष्म पितामह अडवानी जो इन दिनों एक तरह से निर्वासित जीवन बिताने पर मजबूर हैं उनका भोपाल से चुनाव लड़ना खटाई में पड़ गया है, क्योंकि पार्टी के वरिष्ठ नेता और भोपाल से सांसद कैलाश जोशी ने एक तरह से बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है। जोशी ने पार्टी से साफ कर दिया है कि अगर उन्हें भोपाल से टिकट नहीं मिला तो वे निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर इस संसदीय सीट से मैदान में उतर जाएंगे। अडवानी कैंप को लगता है कि बुजुर्ग जोशी को उकसाने व भड़काने में भाजपा व संघ के ही कुछ नेताओं का हाथ है जो अडवानी को जमीन दिखाना चाहते हैं।
Posted on 29 June 2013 by admin
चौधरी वीरेंद्र सिंह का एक तरह से केंद्र में मंत्री बनना तय हो गया था, उन्हें कैबिनेट के हालिया फेरबदल में इस बाबत इतला भी भेज दी गई थी। सूत्र बताते हैं कि पीएमओ ने भी इस बाबत उन्हें आश्वस्त कर दिया था। सो बिचारे नया सूट-बूट पहनकर अशोक हॉल जाने को एकदम तैयार थे कि रविवार की उस सुबह ठीक पौने ग्यारह उन्हें अहमद पटेल का फोन आ गया क्षमा याचना के साथ कि ‘सॉरी इस बार आपको एडजस्ट नहीं कर पा रहे हैं’, 10 बजकर 50 मिनट पर पीएम का माफीनामा वाला फोन आ गया। पर ग्यारह बजे भुपिंदर सिंह हुड्डा का बधाई वाला फोन था। चौधरी साहब समझ नहीं पाए कि हुड्डा साहब को वाकई उनके मंत्री बनने की खबर अब तक नहीं मिली है या वे जले पर नमक छिड़क रहे हैं। वैसे भी उत्तराखंड से चौधरी साहब की रुखसती बेआबरू करने वाली थी। 22 कांग्रेसी विधायकों ने बकायदा आलाकमान को लिखकर दे दिया था कि वीरेंद्र सिंह उन्हें बतौर राज्य प्रभारी बर्दाश्त नहीं, जाने चौधरी साहब अब क्या-क्या बर्दाश्त कर रहे हैं।
Posted on 29 June 2013 by admin
अमर सिंह बम-बम हैं, दस जनपथ से उनका सीधा कनेक्शन जुड़ गया है। अमर को एक सजातीय नेता दिग्विजय सिंह का क्या खूब साथ मिला है। सूत्र बताते हैं कि दिग्गी राजा ने अमर को सोनिया, राहुल से मिलवाने में एक महती भूमिका निभाई। अमर ने सोनिया, राहुल, प्रियंका से मिलकर पुराने गिले-शिकवे दूर किए। इसकी परिणति यूपीए-2 के डिनर में देखने को मिली थी जब अमर उस डिनर में रक्षा मंत्री एंटोनी की निर्धारित सीट पर जाकर बैठ गए थे और जया प्रदा के बगलगीर होकर पीएम, सोनिया से क्या खूब बतिया रहे थे। अमर का जलवा देखकर एंटोनी अपनी कुर्सी भूलकर डिनर में पीछे की सीट पर जा बैठे थे और अमर थे कि पूरा सियासी मैन्यू कंठस्थ कर आए थे।
Posted on 18 June 2013 by admin
प्रणब दा के पुत्र अभिजीत मुखर्जी अपने लिए किसी नई संसदीय सीट की तलाश में जुटे हैं। इस बार के उपचुनाव में वे बमुकिश्ल जंगीपुर की जंग जीत पाएं, तब ममता भी साथ थीं। चूंकि नए परिसीमन में जंगीपुर के साथ बड़े मुस्लिम इलाकों को जोड़ा गया है। सो, इस सीट का मिााज पहले से कहीं ज्यादा बदल गया है। क्रिकेटर टर्न सांसद अजहरूद्दीन इस दफे मुरादाबाद को अलविदा कह जंगीपुर से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं। इस बाबत वे राहुल गांधी से मिलकर उनके समक्ष अपनी बात भी रख चुके हैं।
Posted on 18 June 2013 by admin
उत्तराखंड के कांग्रेसी मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के खिलाफ असंतुष्ट कांग्रेसी विधायकों की लामबंदी बढ़ती जा रही है। सूत्रों की मानें तो कोई 17 कांग्रेसी विधायकों (जिनमें विधानसभा अध्यक्ष भी शामिल हैं) ने अपनी बात कांग्रेसी हाईकमान तक पहुंचा दी है। ये विधायक बहुगुणा के नेतृत्व से खुश नहीं हैं। शायद यही वजह है कि अब तक उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नहीं चुना जा सका है। हरीश रावत खेमा व मुख्यमंत्री खेमे की आम सहमति तो सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी को लेकर है, पर नेगी हैं कि वे अपना मंत्री पद नहीं छोड़ना चाहते हैं। सो, फिलहाल यह मामला राहुल गांधी के सुपुर्द कर दिया गया है, वे जिस पर हाथ रख दें, प्रदेश कांग्रेस की कमान उसी नेता के पास होगी।
Posted on 18 June 2013 by admin
इन दिनों शरद पवार के ग्रह-नक्षत्र अच्छे नहीं चल रहे हैंण। न तो क्रिकेट और ना ही सियासत का खेल उनके मुफीद बैठ रहा है। श्रीनिवासन मुद्दे पर हिट विकेट होने वाले पवार के लिए उनके भतीजे अजीत पवार आए दिन नई मुसीबत खड़ी कर रहे हैं। पवार अपने सियासी अवसान के इस काल में अपनी बची-खुची राजनैतिक जमीन अपनी पुत्री सुप्रिया सूले के लिए तैयार करना चाहते हैं, पर सुप्रिया की मुश्किल यह है कि वह महाराष्ट्र की राजनीति की बजाए दिल्ली पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहती हैं। पवार ने अपने भतीजे की ताकत को कम करने के मकसद से ही महाराष्ट्र सरकार के सभी राकांपा मंत्रियों के इस्तीफे लिए थे, क्योंकि इसमें से अधिकांश अजीत समर्थक थे, पवार ने उनकी जगह सुप्रिया समर्थक मंत्रियों को चव्हाण की कैबिनेट में जगह दिलवायी है। पर मराठों में अजीत ने अपना अच्छा असर बना लिया है, पार्टी संगठन में भी अजीत के लोग काबिज हैं। अजीत बड़बोले हैं, मुंहफट हैं पर मेहनती हैं, लेकिन उनमें असुरक्षा का भाव भी प्रबल है यहां तक कि उन्हें कभी-कभी अपने जूनियर से भी असुरक्षा हो जाती है।
Posted on 10 June 2013 by admin
सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह इन दिनों भारी पारिवारिक दबाव में बताए जाते हैं। यही वजह है कि इन दिनों मीडिया में कुछ बहके -बहके से बयान दे रहे हैं। लिहाजा पिछले दिनों लखनऊ में अखिलेश से मुलाकात के तुरंत बाद उन्होंने बयान दे दिया कि वे 15 दिनों से अखिलेश से मिले भी नहीं हैं। सूत्र बताते हैं कि नेताजी पर उनकी दूसरी पत्नी यानी प्रतीक यादव की मां का भारी दबाव है कि वे उनके पुत्र प्रतीक को लोकसभा का अगला चुनाव लड़वाएं। हालांकि प्रतीक की राजनीति में कम दिलचस्पी है, उनका रीयल इस्टेट का कारोबार है और बचे वक्त में वे बॉडी बिल्डिंग पर सारा घ्यान लगाते हैं। अब नेताजी की मुश्किल यह है कि उन्होंने यूपी से लोकसभा की सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। प्रतीक को किसी यादव बहुल सीट से लड़ाने का अर्थ होगा किसी भारी भरकम यादव नेता का टिकट काटना, पर पुत्र प्रेम में नेताजी को इतना तो करना ही होगा।
Posted on 10 June 2013 by admin
अडवानी कैंप के जो लोग अलग-अलग बहानों की आड़ में गोवा नहीं पहुंचे, मोदी इस बात से असहज नहीं। दरअसल मोदी की असली चिंता यूपी को लेकर है, जहां का प्रभार उन्होंने सबसे लड़-झगड़ कर अपने खास सिपहसालार अमित शाह को दिलवाया है। मोदी जानते हैं कि यूपी के परिप्रेक्ष्य में कौन-कौन सा नेता कितना महत्त्वपूर्ण है। वे यह भी जानते हैं कि नई पीढ़ी का एक नौजवान नेता वरूण गांधी न सिर्फ यूपी की नब समझता है, बल्कि वहां की सियासी हवा बदलने की कूवत भी रखता है। सो, वरूण गांधी के विदेश रवाना होने के चार दिन पहले मोदी ने वरूण से बात की और उन्हें गांधीनगर आने का न्यौता दिया। यह मुलाकात शायद वरूण के विदेश से वापिस लौटने के बाद हो। वरूण सपत्नीक चार जून को स्विट्जरलैंड गए हैं, एक सप्ताह बाद वे वहां से लंदन पहुंचेंगे, तब तक उनकी मां मेनका गांधी भी लंदन पहुंच चुकी होंगी और यह परिवार अगला एक सप्ताह साथ लंदन में छुट्टियां बिताकर 18 जून को भारत लौट आएगा।
Posted on 04 June 2013 by admin
प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज पचौरी को लेकर सीनियर पत्रकारों खासकर भाषायी पत्रकारों का रोष बढ़ता जा रहा है। प्रधानमंत्री के साथ उनके विदेश दौरे में साथ जाने वाले पत्रकारों को पचैरी का निरंकुश व्यवहार रास नहीं आ रहा है। इनकी मानें तो पचौरी का आचरण ‘शासक मनोवृत्ति’ से ग्रस्त है। जहां पीएम के पूर्र्ववत्ती मीडिया सलाहकार हरीश खरे पत्रकारों के साथ उन्हीं के होटल में ठहरते थे, वहीं पचौरी पीएम के साथ उन्हीं के होटल में ठहरते हैं। खरे पीएम के विदेश दौरों में कम से कम चार दफे साथ गए पत्रकारों से संवाद स्थापित करते थे फ्लाइट में आते-जाते, साथ ही पत्रकारों के साथ उनके होटल में ठहरकर। वहीं पचौरी अपने चंद खास मुंहलगे अंग्रेजी के पत्रकारों को ही तरजीह देते हैं। भाषायी खासकर हिंदी के पत्रकारों को लेकर उनका रवैया दोयम दर्जे का है। इससे पहले भी पचौरी ने एक प्रमुख समाचार एजेंसी एएनआई को उनकी एक छोटी सी गलती के लिए बैन कर दिया था। बाद में प्रधानमंत्री के निजी दंखल के बाद यह मामला निपटा। हालांकि पचौरी को प्रधानमंत्री कार्यालय के सबसे प्रभावशाली नौकरशाह पुलक चटर्जी व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन का आशीर्वाद प्राप्त है। फिर भी पचौरी की निरंकुश कार्यशैली की वजह से पीएम का प्रचार कम उनका दुष्प्रचार कहीं ज्यादा हो रहा है।