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सपा अपने प्रत्याशी बदल सकती है

Posted on 29 July 2013 by admin

यूपी की लगभग सभी सीटों पर सपा ने अपने संसदीय उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं, सो पार्टी में अब समीक्षा बैठकों के दौर जारी हैं। नेताजी की अध्यक्षता में और उनके मुख्यमंत्री पुत्र अखिलेश की मौजूदगी में अब तक 6 समीक्षा बैठक हो चुकी हैं और इन बैठकों में यूपी की 57 लोकसभा सीटों को लेकर गंभीर विचार-विमर्श हो चुके हैं। प्रति समीक्षा बैठक में जिस संसदीय सीट के बारे में चिंतन होता है, वहां का सपा जिलाध्यक्ष, लोकसभा प्रत्याशी, उस सीट के अंतर्गत आने वाले तमाम निर्वाचित या हारे हुए पार्टी प्रत्याशी, जिला पंचायत स्तर तक के सपाइयों की भी इस बैठक में मौजूदगी देखी जा सकती है। इस समीक्षा बैठक में नेताजी अपने पार्टी पदाधिकारियों से संबंधित संसदीय सीट के घोषित प्रत्याशी के बारे में खुले विचार आमंत्रित करते हैं, घोषित प्रत्याशी को भी अपना पक्ष रखने का मौका देते हैं और उक्त संसदीय सीट के प्रत्याशी के बारे में अपनी राय ‘रिजर्व’ रख लेते हैं। कहना ना होगा कि ऐसी हर समीक्षा बैठकों के बाद सपा के घोषित प्रत्याशियों की धड़कन बढ़ जा रही है, क्योंकि उन्हें ऐन समय पर नेताजी अपने वीटो का इस्तेमाल कर उनकी जगह कोई और पार्टी प्रत्याशी भी ला सकते हैं।

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रूढ़ी के पांव जमीन पर कहां

Posted on 29 July 2013 by admin

भाजपा के उत्साही महासचिव राजीव प्रताप रूढ़ी को जब से महाराष्ट्र का प्रभार मिला है उनके पांव जमीन पर नहीं टिक रहे हैं। महाराष्ट्र भाजपा नेताओं की यह शिकायत आम हो गई है कि वे जब भी महाराष्ट्र खासकर मुंबई आते हैं तो पार्टी के नियमित कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के बाद यकबयक कहीं गायब हो जाते हैं। यहां तक कि वे किस होटल में ठहरते हैं, यह मालूमात भी पार्टी नेताओं को नहीं हो पाती ताकि वे रूढ़ी से अलग से मिलकर उनके समक्ष अपनी बात रख सकें। पर मुंबई के बड़े थैलीशाहों की रूढ़ी तक आसान पहुंच है। मिसाल के तौर पर पिछले दिनों रिलायंस सुप्रीमो मुकेश अंबानी के ममेरे भाई निखिल मेसवानी ने रूढ़ी के सम्मान में मुंबई के अपने घर पर एक शानदार दावत रखी थी, जिसमें वहां के चंद बड़े उद्योगपतियों की मौजूदगी देखी गई और उनसे घुल-मिल कर रूढ़ी को बतियाते भी।

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मथुरा से हेमा

Posted on 21 July 2013 by admin

नरेंद्र मोदी यूपी में अपना सब कुछ दांव पर लगाना चाहते हैं। वे एक ओर जहां स्वयं यूपी की किसी संसदीय सीट से चुनाव मैदान में उतरना चाहते हैं, वहीं यूपी के चुनावी मैदान में कई स्टार भाजपाइयों को भी आजमाना चाहते हैं। मसलन, उन्होंने ‘ड्रीम गर्ल’ हेमा मालिनी से विशेष तौर पर आग्रह किया है कि वे यूपी की मथुरा संसदीय सीट से भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरें। मथुरा ब्राह्मण और जाट बहुल सीट है। मोदी का मानना है कि चूंकि हेमा स्वयं ब्राह्मण हैं और उनके पति धमर्ेंद्र जट सिख, तो हेमा इन दोनों वोट बैंक को आसानी से अपनी ओर खींच सकती हैं। हेमा के मथुरा आने की आहट सुन कर चौधरी अजीत सिंह के पुत्र जयंत चौधरी जो वहां के निवर्तमान सांसद भी हैं अब वे मथुरा को अलविदा कह मुजफ्फरनगर का रुख करना चाहते हैं। मोदी का यह दांव असरदार रहा तो वे यूपी की कई अन्य सीटों पर भी यही फॉर्मूला आजमा सकते हैं।

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नमो का संत मैनेजमेंट

Posted on 21 July 2013 by admin

कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण नीति अपनाने का आरोप लगाने वाले नरेंद्र मोदी अपना ‘हिंदू कार्ड’ बहुत सोच-समझकर चल रहे हैं। हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण को लेकर अगले 6 महीने तक विश्व हिंदू परिषद के तत्त्वाधान में एक बड़ा संत समाज गोलबंद होकर मोदी के हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाएगा और अगले महीने उत्तर प्रदेश के अयोध्या से एक ‘संत समाज यात्रा’ निकाली जाएगी, इन संतों में अधिकांश ‘प्रवचनी संत’ हैं जो देश भर में घूम-घूम कर हिंदुत्व के पक्ष में अलख जगाएंगे और मोदी को हिंदुत्व के पुरोधा के तौर पर स्थापित करने की चेष्टा करेंगे। विहिप से जुड़े एक विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि इस पूरे आयोजन पर कोई 35 करोड़ रूपए का खर्च आ सकता है। सूत्र का ऐसा दावा है कि मोदी शुभचिंतकों ने इस राशि का एक बड़ा हिस्सा विहिप को एडवांस में दे दिया है ताकि ‘संत समाज यात्रा’ निकालने में धन कोई बाधा न बने। इस यात्रा के लिए 400 प्रवचनी संतों को चयनित किया गया है और उनके प्रशिक्षण का काम शुरू है।

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…और अंत में

Posted on 14 July 2013 by admin

इन दिनों राहुल गांधी ने अपनी खास कोर टीम में बदलाव किए हैं, मीनाक्षी नटराजन समेत कई राहुल करीबी माने जाने वाले नेताओं का पत्ता कट गया है, चुनांचे ऐसे नेताओं को ना तो हालिया मंत्रिमंडल फेरबदल में ही जगह मिली है और न ही उन्हें संगठन में ‘एडजस्ट’ किया गया है। राहुल के सलाहकारों की नई टीम में कनिष्क सिंह और भंवर जितेंद्र सिंह ने अपनी जगह बना रखी है, इसके अलावा सचिन राव, मधूसूदन मिस्त्री और हरीश चौधरी राहुल की कोर टीम के कुछ पसंदीदा चेहरे बन गए हैं।

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मोदीमय हुए नीतीश सखा

Posted on 14 July 2013 by admin

नीतीश कुमार के एक कॉलेज के दिनों के साथी और एक पूर्व आईपीएस अफसर किशोर कुणाल जिन्हें नीतीश के सात वर्ष पूर्व बिहार की सत्ता संभालते ही ‘बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद’ का पहला प्रशासक और बाद में अध्यक्ष बनाया, उन्हे राज्यमंत्री का दर्जा दिया। आज वे नीतीश से इस कदर नाराा हैं कि वे उनके कट्टर सियासी शत्रु नरेंद्र मोदी से मिलने गांधीनगर जा पहुंचे। ‘बोधगया मंदिर’ और कुणाल के नियंत्रण वाला पटना का ‘महावीर मंदिर’दोनों ही आतंकी निशाने पर हैं। बोधगया में आतंकी हमला होने के बावजूद नीतीश ने अब तलक महावीर मंदिर को कोई सुरक्षा नहीं दी है, कुणाल से मोदी ने कहा है कि वे जब भी बिहार आएंगे उनका पहला कदम पटना के महावीर मंदिर में ही पड़ेगा। इस बात से उत्साहित कुणाल नीतीश की नाराागी की परवाह न करते हुए अब हर सार्वजनिक मंच पर मोदी की भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहे हैं।

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एनआईए का अगला मुखिया कौन?

Posted on 14 July 2013 by admin

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के मुखिया एन.आर.वासन का आने वाले दिनों में कार्यकाल समाप्त होने वाला हैं। एनआईए के नए मुखिया को लेकर धकमपेल मची है। वासन 1980 बैच के आंध्र कैडर के आइपीएस हैं, उनकी जगह लेने के लिए फिलवक्त रेस में दो नाम सबसे आगे चल रहे हैं, वे हैं हरियाणा कैडर के 1979 बैच के आइपीएस शरद कुमार, जो हरियाणा के डीजीपी (क्राइम) रह चुके हैं, और वे फिलवक्त डीजी (जेल) के पद पर कार्यरत हैं, इनके नाम की पैरवी हरियाणा के मुख्यमंत्री हुड्डा कर रहे हैं। ये यूपी में बरेली के रहने वाले हैं। इस नाते उनकी कांग्रेस में अच्छी जान-पहचान है। शरद कुमार को सबसे बड़ी चुनौती 1978 बैच के मणिपुर-त्रिपुरा कैडर के आइपीएस के. सलीम अली की ओर से मिल रही है। सलीम अली पहले डीजीपी त्रिपुरा थे और फिलवक्त सीबीआई में एडिशनल डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। सलीम अली की गिनती देश के सक्षम अधिकारियों में होती है, इस नाते भी वे 10 जनपथ के बहुत प्यारे हैं। पर उनकी मुश्किल यह है कि आईबी के डायरेक्टर आसिफ इब्राहिम भी मुस्लिम हैं और ऐसे में अगर इन्हें एनआईए प्रमुख बना दिया जाता है तो भाजपा इसे एक बड़ा मुद्दा बना सकती है। रेस में तो ओडिसा पुलिस के प्रमुख प्रकाश मिश्रा भी शामिल हैं, जो 1977 बैच के आइपीएस हैं, और पूर्व में एनआईए में एडिशनल डीजी के तौर पर काम भी कर चुके हैं। समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट मामले की जांच भी इनके ही सुपुर्द थी। रही बात गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे की तो वे महाराष्ट्र कैडर के 1979 बैच के आइपीएस अरूप पटनायक को एनआईए प्रमुख पद पर देखना चाहते हैं, पर पटनायक की मुश्किल यह है कि पूर्व गृह सचिव आर.के.सिंह ने जाते-जाते उनकी फाइल में कुछ प्रतिकूल टिप्पणियां दर्ज करा दी हैं। सो, उन का नंबर लगना मुश्किल लग रहा है।

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मिस्त्री का मैनेजमेंट

Posted on 14 July 2013 by admin

यूपी के कांग्रेस प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री राहुल गांधी के पसंदीदा नेताओं में शुमार होते हैं। राहुल उनके ‘इलेक्शन मैनेजमेंट’ के कायल हैं, 2009 के लोकसभा चुनाव में मिस्त्री ने देश भर के कांग्रेसी प्रत्याशियों को चुनाव प्रबंधन के नए गुर सिखाए थे और उन्हें यह भी बताया था कि चुनाव कैसे जीता जाता है। पर, गुजरात से वे 2009 में अपना ही चुनाव हार गए। खैर, इससे राहुल को उनकी प्रबंधन क्षमता पर संदेह नहीं हुआ, वे कांग्रेस संगठन में निरंतर आगे बढ़ते गए। कर्नाटक विधानसभा में जब उन्होंने अपनी पार्टी को जीत दिला दी तो यूपी का प्रभार दिग्गी राजा से लेकर उन्हें दे दिया गया। पर यूपी की जातीय राजनीति को समझने में उन्हें खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। उन्हें ग्रामीण यूपी यूपी को समझने में खासी मुश्किल हो रही है, कांग्रेसी कार्र्यकत्ता उनकी अजीबोगरीब शक्ल-सूरत देख कर चौंक जाते हैं। ज्यादातर लोगों को उनकी शक्ल अल्बर्ट आइंस्टीन से मिलती -जुलती लगती है, कोई उन्हें आदिवासी नेता करार देता है। यूपी जहां हर दो कोस पर बोली बदल जाती है मिस्त्री को वहां के कार्र्यकत्ताओं से संवाद स्थापित करने में खासी दिक्कत आ रही है, यह बात वे राहुल गांधी को भी बता चुके हैं।

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निशाने पर मोदी

Posted on 08 July 2013 by admin

इस उम्र में भी इस किस्म का जुझारूपन देखना है तो भाजपा के वयोवृध्द नेता लालकृष्ण अडवानी को देखिए, रूठने-मनाने के सियासी खेल से उबर कर अब वे मोदी से सीधी रार ठान रहे हैं। गुरुवार को नई दिल्ली में आहुत भाजपा कोर कमेटी की बैठक में उन्होंने एक नहीं कई-कई बार मोदी पर सीधा हमला साधा। मसलन मोदी ने कहा कि इस चुनाव में जीत सकने वाले मजबूत उम्मीदवारों को टिकट दिया जाएगा, तो अडवानी ने कहा कि टिकट देते वक्त उम्मीदवार की अच्छी छवि जरूरी होगी, मोदी ने कहा कि आने वाले पांच राज्यों के चुनाव अभियान को केंद्रित किया जाएगा, तो अडवानी विकेंद्रीकरण की दुहाई देते दिखे। उन्होंने कहा हमारे भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की छवि अच्छी है, चुनाव में उनका चेहरा सामने रखा जाना चाहिए। अडवानी नागपुर गए तो मोदी के खिलाफ शिकायतों का एक मोटा पुलिंदा मोहन भागवत को पकड़ा आए। भागवत ने कहा, ‘राजनाथ यहां आने वाले हैं, इस बारे में वे उनसे बात करेंगे।’ पर अडवानी जानना चाहते थे कि भागवत मोदी से सीधी बात क्यों नहीं करते, तो भागवत ने कहा, ‘यह संघ की नीति नहीं, वे पार्टी के कार्यकलापों में सीधा हस्तक्षेप नहीं करते।’

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कैसे चढ़ा जंग का रंग

Posted on 08 July 2013 by admin

दिल्ली के उपराज्यपाल की दौड़ में कई हैवीवेट शामिल थे पर उन सबको कायदे से पछाड़ते हुए नजीब जंग इस पद पर काबिज हो गए। अपनी आइएएस की नौकरी के दौरान जंग ‘आयल एक्सपलोरेशन’ के सेक्रेटरी के पद से रिटायर हुए, उनकी अंबानी से पहले से छनती थी, सो उनकी रिटायरमेंट के फौरन बाद उन्हें रिलायंस ने अपनी तेल कंपनी में अपने लंदन मुख्यालय का वाइस प्रेसीडेंट बना दिया। सलमान खुर्शीद से इनकी गहरी दोस्ती रंग लाई और खुर्शीद के प्रयासों से ये जामिया मिलिया इस्लामिया के वाइस चांसलर बन गए। पर मुकेश अंबानी से इनकी निकटता यथावत बनी रही। सो, इन्हें रेस में आगे करने में बड़े अंबानी का बड़ा रसूख बहुत काम आया।

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