Posted on 21 February 2017 by admin
देश के एक जाने-माने भविष्यवक्ता संजय चौधरी, जिन्होंने अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की जीत के बारे में काफी पहले भविष्यवाणी कर दी थी, यूपी चुनाव के संदर्भ में उनका आकलन है कि इस दफा यूपी में सपा व कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनेगी। पंडित चौधरी का यह भी दावा है कि सपा-कांग्रेस की सरकार बनवाने में दो महिला नेत्रियों की अहम भूमिका रहने वाली है। अगर एक महिला नेत्री सोनिया गांधी है तो क्या चौधरी का इशारा दूसरी महिला नेत्री मायावती की ओर है? चौधरी का यह भी दावा है कि सपा व कांग्रेस के लिए पहले तीन चरणों का मतदान कोई खास उत्साहवर्द्धक नहीं रहेगा, लेकिन चौथे चरण के मतदान से साइकिल-हाथ के साथ को बंपर समर्थन हासिल होगा। चुनाव के बाद भाजपा व बसपा के जमीनी कार्यकर्ताओं में भगदड़ मच सकती है। पंजाब चुनाव की बाबत पंडित चौधरी जहां अकाली-भाजपा गठबंधन के सूपड़ा साफ होने की बात कर रहे हैं, वहीं वे दावा करते हैं कि राज्य में आम आदमी का वोट शेयर आश्चर्यजनक तरीके से उफान मारेगा, पर सरकार कांग्रेस की बन सकती है। गोवा के 40 विधानसभा सीटों पर 4 फरवरी को वोट डल चुके हैं। चौधरी के मुताबिक, गोवा में सत्तारूढ़ भाजपा या नवगठित एमजीपी के लिए सरकार बना पाना कठिन होगा, कांग्रेस या आप में से एक दल की वहां सरकार बन सकती है। उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों के लिए भी 15 फरवरी को मतदान हो चुके हैं। पंडित चौधरी का दावा है कि इस चुनाव में बागियों की एक महती भूमिका हो सकती है, वहां हंग असेंबली की भविष्यवाणी हुई है,पर कांग्रेस का पलड़ा किंचित भारी बताया गया है। मणिपुर की 60 सीटों पर 4 और 8 मार्च को दो चरणों में वोट पड़ने वाले हैं। चौधरी के मुताबिक, यहां भाजपा के वोट शेयर में जरूर वृद्धि होगी पर सरकार कांग्रेस की ही बनेगी। यह देखना दिलचस्प रहेगा कि संजय चौधरी की ये भविष्यवाणियां किस हद तक सही साबित होती हैं।
Posted on 20 February 2017 by admin
नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन की तबियत इन दिनों नासाज़ है, चुनांचे वे स्वदेश लौट कर कोलकाता में अपनी बेटी के घर स्वास्थ्य-लाभ कर रहे हैं। देश के एक अग्रणी समाचार समूह की तेज-तर्रार बंगाली रिपोर्टर ने अपना बंग-कनेक्शन निकाल कर अमर्त्य सेन को एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू देने के लिए राजी कर लिया। दरअसल, इस महिला रिपोर्टर के पति एक फिल्म मेकर हैं, जिनके अमर्त्य सेन की पुत्री से घरेलू ताल्लुकात हैं। सूत्र बताते हैं कि इस इंटरव्यू के लिए इस महिला रिपोर्टर ने कोलकाता के लिए उड़ान भरी और अपनी खराब तबियत के बावजूद डॉ. सेन इस रिपोर्टर से डेढ़ से दो घंटे बतियाते रहे। उन्होंने अपने इस इंटरव्यू में नोटबंदी से लेकर मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों के बारे में अपनी बेबाक राय दी। दरअसल, डॉ. सेन का मानना था कि जिस देश में सामाजिक व आर्थिक असमानता काफी बढ़ जाती है तो वहां के लोग हताशा में अपने लिए अतिवादी नेतृत्व का चुनाव करते हैं। भारत में नरेंद्र मोदी और अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप का चुना जाना, इसी बात की गवाही देता है। डॉ. सेन ने संभवतः इस रिपोर्टर से यह भी कहा कि मुमकिन है कि उनका यह इंटरव्यू किसी प्रिंट मीडिया को दिया जाने वाला उनका आखिरी इंटरव्यू साबित हो। एक दमदार शख्सियत से इतना वजनदार इंटरव्यू करने के बाद इस रिपोर्टर के हौसले बम-बम थे। उन्होंने दिल्ली पहुंचते ही अपनी रिपोर्ट फाइल कर दी पर अगले दिन के अखबार में यह इंटरव्यू छपा नहीं। एक-एक कर दिन गुजरते गए। चौथे रोज थक-हार कर इन्होंने अपने संपादक से संपर्क कर इंटरव्यू नहीं छप पाने की वजह जाननी चाही, क्योंकि तब तक डॉ. सेन भी अपनी बेटी के मार्फत दो-तीन बार इस इंटरव्यू के बारे में पूछ चुके थे कि ’यह कब छपेगा?’ संपादक ने महिला रिपोर्टर को बताया कि डॉ. सेन का इंटरव्यू देश के शीर्ष नेतृत्व पर एक सीधा हमला है। लिहाजा, अखबार मैनेजमेंट इसे छापने के पक्ष में नहीं। हां, रिपोर्टर के यात्रा खर्चे व भत्ते का कंपनी पूरा ध्यान रखेगी ’क्योंकि आवाजें हिरासत में हैं और एक चुप्पी ने हमारे नपुंसक इरादों का हरण कर लिया है?’
Posted on 12 February 2017 by admin
नीतीश कुमार के लिए बिहार विजय की परिकल्पना को साकार करने में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की महती भूमिका से सब वाकिफ हैं, ’बिहार-विजय’ की श्रेय की होड़ में वैसे भी पीके ने सबको पछाड़ दिया, सो उनके चाहने वालों की लाइन लग गई, प्रियंका गांधी ने उन्हें राहुल से मिलवा दिया, फिर वे राहुल के खास हो गए, राहुल ने पीके को कैप्टन से मिलवा दिया तो वे कैप्टन के खास हो गए, फिर राहुल ने उन्हें अखिलेश से मिलवा दिया और इन दिनों पीके अखिलेश के भी खास हो गए हैं। अब तो बकायदा वे अखिलेश के साथ उनके हेलिकॉप्टर में उड़ान भरते हैं और रास्ते भर अखिलेश को चुनावी टिप्स देते रहते हैं। लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पर एक बड़े अखबार की मालकिन गुलाम नबी आजाद और सलमान खुर्शीद से टकरा गईं, पीके ने ताज़ा-ताज़ा वहीं से उड़ान भरी थी। इस पर उस अखबार की मालकिन ने इन दोनों सीनियर नेताओं से चुटकी लेते हुए कहा-’तो आज कल आप लोग भी इसी ‘फॉरेन रिटर्न’ लड़के (पीके) से राजनीति का ककहरा सीख रहे हो?’ इस पर सलमान ने नहले पर दहला जड़ते हुए कहा-’पहले हमें पता तो चले कि ये जनाब किसके साथ हैं।’
Posted on 12 February 2017 by admin
प्रशांत किशोर कभी नीतीश कुमार की आंखों के तारे हुए करते थे। पर सूत्र बताते हैं कि इन दिनों नीतीश और पीके के बीच सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। पिछले दिनों नीतीश ने बकायदा अपने दिल का दर्द पीके के समक्ष बयां भी किया। सूत्रों की मानें तो नीतीश ने पीके से कहा कि-’जब से तुम्हें मैंने कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया है, आप तो दिल्ली में ही जाकर बस गए हो, कभी क्या इसके बाद पांच दिन भी आपने पटना में गुजारे हैं?’ नीतीश जानते हैं कि उनके मंत्रिपद का दर्जा देने के बाद ही पीके को दिल्ली में घर और गाड़ी मिली है। सूत्र यह भी साफ करते हैं कि दरअसल पीके ने नीतीश को भरोसा दिलाया था कि वे जनता दल (यू) का अखिलेश की समाजवादी पार्टी के साथ चुनावी गठबंधन करा देंगे, नीतीश अपनी पार्टी के लिए गठबंधन की मात्र 10 सीटें चाह रहे थे, पर ऐन वक्त लालू यादव ने उनका खेल बिगाड़ दिया। सूत्र बताते हैं कि जब नीतीश के इरादे की भनक लालू को लगी तो उन्होंने फौरन अखिलेश से बतिया लिया और उनसे कहा कि अगर उन्हें वाकई गठबंधन करना है तो राजद से करें, जिसके पास नीतीश से ज्यादा संख्या में विधायक और सांसद हैं। दरअसल, पहले अखिलेश नीतीश से यूपी के कुर्मी बहुल इलाकों में चुनाव प्रचार करवाना चाहते थे, पर लालू ने ऐसा होने नहीं दिया और अब नीतीश इसका ठीकरा पीके के सिर फोड़ रहे हैं।
Posted on 04 February 2017 by admin
10 बिलियन डॉलर के स्वामित्व वाला अदानी ग्रुप यूपी के महोबा के अपने पॉवर प्रोजेक्ट को लेकर किंचित मुश्किल में नज़र आता है, क्योंकि प्रदेश के वन विभाग ने अदानी की पॉवर कंपनियों पर वन व पर्यावरण कानून के तहत मुकदमा दर्ज कराया है। अदानी की कंपनियों पर आरोप है कि उसने बगैर वन विभाग की अनुमति के 640 बीघा कृषि भूमि पर अंधाधुंध पेड़ काटे हैं। दरअसल पिछले ही वर्ष यूपी की अखिलेश सरकार ने बुंदेलखंड के महोबा जिले के चरखारी में अदानी ग्रुप की पॉवर कंपनी प्रयत्न डेवलपर्स को एक मेगा सोलर प्रोजेक्ट आबंटित किया था। राज्य सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद अदानी ग्रुप की 15 अलग-अलग कंपनियों ने यहां के 60 किसानों से 640 बीघा कृषि भूमि का अधिग्रहण किया। इन जमीनों पर अनेक प्रकार के वृक्ष पहले से लगे हुए थे और यूपी वन विभाग का मानना है कि इसमें से कुछ वृक्ष तो दुर्लभ किस्म के थे। वन विभाग उत्तर प्रदेश ‘प्रोटेक्षन ऑफ ट्री एक्ट, 1979’ का हवाला देते हुए कह रहा है कि ऐसे पेड़ों को काटने या गिराने के लिए अनुमति हासिल करनी जरूरी है। सनद रहे कि ये वही क्षेत्र है जहां 1 वर्ष पूर्व ही अखिलेश सरकार ने अपने हरित प्रदेश मिशन के तहत यहां 1 करोड़ से भी ज्यादा तादाद में पेड़ लगाए थे और इस पर करोड़ों के सरकारी धन का वारा-न्यारा भी हुआ था। 2008-09 में भी मायावती सरकार ने बुंदेलखंड में पानी की कमी और सूखे के प्रकोप को देखते हुए वृक्षारोपण करने के लिए यहां 500 करोड़ से भी ज्यादा की रकम खर्च की थी। अब यहां की स्थानीय एनजीओ भी इस सोलर प्रोजेक्ट के खिलाफ आवाज़े उठाने लगी है और पूछ रही है कि इस विकास की कीमत आखिर क्या होनी चाहिए?
Posted on 04 February 2017 by admin
एक ओर जहां अमेरिका में ’हार्डलाइर्न्स’ की बल्ले-बल्ले है, वहीं यूपी में सांप्रदायिक उभार व उन्माद की जमीन तैयार करने वाले नेतागणों की इस चुनाव में जमीन खिसक रही है। जैसे मेरठ के सरधना से बीजेपी के प्रखर हिंदुत्व के ’पोस्टर ब्यॉय’ संगीत सोम चुनाव लड़ रहे हैं। बसपा ने उनके खिलाफ बूचड़खाना चलाने वाले हाजी याकूब के बेटे इमरान कुरैशी को मैदान में उतारा है। इमरान भी संगीत सोम की तरह आग उगलने में माहिर हैं। इन दोनों को बैलेंस करने की नीयत से सपा ने यहां से अपना एक गुर्जर उम्मीदवार अतुल प्रधान को मैदान में उतारा है, अतुल की पत्नी सीमा यहां जिला पंचायत अध्यक्ष है। 2012 के चुनाव में यहां से सोम भाजपा की टिकट पर खम्म ठोंककर जीत गए थे, चूंकि राजपूत जाति से ताल्लुक रखने वाले सोम के सजातीय 24 गांव यहां राजपूतों के हैं, तकरीबन 50 हजार वोट राजपूतों के अकेले इन गांवों में है, जो पिछली दफे थोकभाव में सोम को मिले थे, इसके अलावा जाटों के वोट भी एकमुश्त भाजपा उम्मीदवार को मिले थे। इस दफे जाट मतदाता भाजपा से नाराज़ जान पड़ते हैं। वहीं इलाके के लोगों की आम शिकायत है कि इन 5 सालों में सोम इलाके में क्या अपने गांव में भी कम नज़र आए। सो, महज भड़काऊ भाषण नहीं, इलाके के लोग अपने जन प्रतिनिधि से ‘डिलीवरी’ चाहते हैं, इस मानक पर अतुल प्रधान की तुलना में संगीत सोम का पलड़ा डगमग ही दिख रहा है।
Posted on 29 January 2017 by admin
समाजवादी पार्टी व कांग्रेस के बीच सीटों के तालमेल से ऐन पहले एक बड़ी सर्वेक्षण एजेंसी ने 91,122 सैंपल साइज के साथ यूपी में एक राजव्यापी जनमत सर्वेक्षण करवाया है, जिसके नतीजे वाकई चौंकाने वाले हैं। इस सर्वेक्षण नतीजों में सपा (अखिलेश) को 156, सपा (मुलायम) को 12, भाजपा को 124, बसपा को 67, कांग्रेस को 8 तो अन्य को 34 सीटें दी गई है। वहीं इस सर्वेक्षण में उत्तराखंड में भाजपा की सरकार बनती दिखाया गया है। उत्तराखंड में सैंपल साइज 14,244 रखा गया था, सर्वेक्षण नतीजों में यहां की कुल 70 सीटों में भाजपा अपनी झोली में 46 सीटें झटक कर सरकार बनाती नज़र आ रही है, वहीं हरीश रावत के नेतृत्व में कांग्रेस को मात्र 18 सीटों पर ही संतोष करना पड़ सकता है, अन्य के खाते में 6 सीटें जा सकती हैं। इस सर्वेक्षण में गोवा की 40 सीटों के बारे में भी भविष्यवाणी की गई है। गोवा में सैंपल साइज 8,922 का था, जिसमें भाजपा 14 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के तौर पर उभर सकती है, कांग्रेस को भाजपा से मात्र 2 सीटें कम यानी 12 सीट दिखाई गई हैं, आम आदमी पार्टी 9 सीटों के साथ यहां अपना खाता खोल सकती है, तो अन्य के खाते में 5 सीटें जा सकती है। हंग असेंबली की सूरत में आप और कांग्रेस मिल कर यहां सरकार बना सकती है।
Posted on 29 January 2017 by admin
देश की एक प्रमुख सर्वेक्षण एजेंसी का हालिया जनमत सर्वेक्षण चौंकाने वाला है। यह एजेंसी पंजाब में आम आदमी पार्टी को पूर्ण बहुमत दे रही है। पंजाब में सैंपल साइज 23,240 का है, जिसमें यह दावा हुआ है कि यहां कि कुल 117 सीटों में आप 62 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभर सकती है और वहां सरकार भी आप की ही बनेगी। कांग्रेस 38 सीटों के साथ दूसरे सबसे बड़े दल के तौर पर सामने आ सकती है, तो वहीं शिरोमणि अकाली दल व भाजपा गठबंधन को मात्र 15 सीटों पर ही संतोश करना पड़ सकता है, अन्य के खाते में 2 सीटें आ सकती हैं।
Posted on 22 January 2017 by admin
जो लोग यह समझ रहे हैं कि प्रधानमंत्री जी को नोटबंदी का नायाब आइडिया अर्थशास्त्री अनिल बोकिल समझा आए थे और इसको लागू करने की पूरी योजना का खाका भी बोकिल का
Posted on 22 January 2017 by admin
यूपी के हिंदू फायर ब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ अपनी ही पार्टी के कर्णधारों से बेतरह नाराज़ हैं, वे नाराज़ हैं कि पार्टी के टिकट वितरण प्रक्रिया में उनकी राय को कोई अहमियत ही नहीं दी जा रही है। यूपी की कम से कम 40 विधानसभा सीटों पर उनका अच्छा खासा असर है, सो उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी अपने केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में आमंत्रित करेगी और उनकी राय लेने की जहमत उठाएंगी, पर उन्हें इस बैठक में बुलाया ही नहीं गया, यहां तक कि फोन पर भी उनकी राय लेने की जरूरत नहीं समझी गई। सनद रहे कि इससे पूर्व राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया था, जिससे नाराज़ होकर पहले ही दिन वे बैठक से चले आए थे। अब योगी को लग रहा है कि पार्टी के अंदर उनके राजनैतिक कैरियर को खत्म करने की यह एक साजिश है। योगी की हिंदू युवा वाहिनी का पूर्वी और पष्चिमी उत्तर प्रदेश में अच्छा खासा असर है, पहले भी जब वे अपनी पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से नाराज़ होते थे तो हिंदू महासभा के टिकट पर अपने उम्मीदवार खड़े कर देते थे, जिसका खामियाजा भाजपा को ही उठाना पड़ता था, देखना दिलचस्प रहेगा कि क्या इस बार भी योगी यही करेंगे?