Posted on 14 November 2009 by admin
दिवंगत राजशेखर रेड्डी के पुत्र सांसद जगनमोहन रेड्डी पर कांग्रेस कुछ खास कृपा दिखा रही है, अभी कांग्रेस हाईकमान की ओर से जगन को एक प्रस्ताव मिला है कि वे मनमोहन मंत्रिमंडल में बतौर राज्य मंत्री शामिल हो जाएं, उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री बनाने की बात है और वह भी तेलांगना के विशेष प्रभार के साथ। पर जगन अपना गृह राज्य आंध्र छोड़ दिल्ली की सियासी आबोहवा में नहीं बहना चाहते, वे जानते हैं कि अगर उन्होंने अपनी घरेलू पिच पर सियासी बैटिंग से तौबा कर ली तो फिर उन्हें अपनी राजनैतिक विकेट बचानी मुश्किल हो जाएगी। सो, वे फिलवक्त आंध्र की राजनीति में ही अपने को केंद्रित रखना चाहते हैं, अभी पिछले दिनों उनके समर्थन में रौसैया मंत्रिमंडल के एक मंत्री ने इस्तीफा दे दिया है, चूंकि जगन के पास पिता की राजनैतिक विरासत है, पैसे हैं, जवां इरादे हैं सो आने वाले दिनों में कई और मंत्री भी जगन के पक्ष में इस्तीफे का दांव चल सकते हैं, कांग्रेसी हाईकमान को इस बात की भनक है सो वे अभी से जगन की खनक को नाथने में जुट गए हैं।
Posted on 14 November 2009 by admin
लगता है नवीन पटनायक अब भी भुवनेश्वर राजधानी के अपहरण के सदमे से उबर नहीं पाए हैं। अभी हालिया दिनों में नवीन अपने एक मित्र पत्रकार के घर डिनर पर दिल्ली पधारे थे तो लगभग पूरे समय वह इस अपहरण ड्रामे की चर्चा करते ही नजर आए। जैसे ही यह खबर आई कि राजधानी एक्सप्रेस को नक्सलियों ने अगवा कर लिया है। नवीन ने फौरन रेल मंत्री ममता बनर्जी को फोन लगाया, ममता ने छूटते ही सीपीएम को भला-बुरा कहना शुरू कर दिया, हैरान-परेशान नवीन ने ममता से गुजारिश की इस वारदात को किसने अंजाम दिया है हमें इस पचड़े में न पड़कर रेलयात्रियों की रिहाई सुनिश्चित करानी चाहिए, नवीन की असली चिंता अपने प्रदेश के उन 1200 ओड़िया रेल यात्रियों को लेकर थी, जब ममता से बात नहीं बनी तो नवीन ने केंद्रीय गृह मंत्री चिदंबरम को फोन लगाया, तो चिदंबरम ने छूटते ही कहा-‘माओइस्ट पीपुल हैज डन इट'(यह माओवादियों की करतूत है) तब थक हार कर नवीन ने सीधे प्रधानमंत्री को फोन लगा दिया, डा.साहब ने कहा कि ‘हमें समझ नहीं आ रहा कि क्या सचमुच स्थिति इतनी गंभीर है, गॉड ब्लैस यू…’ और ऐसे में सचमुच नवीन के लिए भगवान का ही सहारा रह गया था।
Posted on 14 November 2009 by admin
भाजपा के अवसान गीत गाने का दौर लगता है जारी रहने वाला है, अभी कर्नाटक के सदमे से भाजपा उबर भी नहीं पाई है कि पंजाब में भगवा के रंग लाल-पीले होने लगे हैं, बागियों ने मुद्राएं भी अख्तियार कर ली है…बस उन्हें इंतजार एक सही वक्त का है। और पंजाब के साथ-साथ बिहार में भी कमल पर कीचड़ के छींटे पड़ने लगे हैं…वहां भाजपा के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के खिलाफ विरोधी खेमा एक बार फिर से एकजुट होने लगा है…और विद्रोह का बिगुल कभी भी फूंका जा सकता है।
Posted on 14 November 2009 by admin
पर लगता है राहुल गांधी की सलाहकार मंडल इस पूरी मीटिंग को ठीक से हेंडिल नहीं कर पाईं, पहले से तयशुदा कार्यक्रम के मुताबिक इन मालिक-संपादकों को पहले राहुल गांधी के सरकारी आवास तुगलक लेन में लंच पर न्यौता गया था, पर जब ये तुगलक लेन पहुंचने वाले थे तो इन्हें सूचित किया गया कि अब लंच का स्थान बदलकर 10 जनपथ कर दिया गया है, हर संपादक को ऐसा लग रहा था कि सिर्फ उन्हें ही कांग्रेसी युवराज से ‘वन टू वन’ संवाद स्थापित करना है क्योंकि राहुल के आवास से उन्हें लंच का न्यौता कुछ इसी अंदाज में प्राप्त हुआ था, सो जब ये संपादक दस जनपथ पहुंचे तो एक दूसरे को वहां मौजूद पाकर एकबारगी हैरत में पड़ गए। अवीक सरकार और एन.राम ने सीधे तौर पर अपनी नाराजगी से राहुल को अवगत करा दिया। इस पूरे लंच काल में अवीक सरकार ने एक शब्द भी नहीं बोला, युवराज को सलाह देना तो दूर की बात। एन.राम अफगानिस्तान से अमरीकी फौजों की बेदखली पर धाराप्रवाह बोलते रहे, शेखर गुप्ता ने भी एक से ज्यादा मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए। और राहुल एक जिज्ञासु छात्र की मानिंद इन मालिक-संपादकों के विचार सुनते रहे।
Posted on 20 October 2009 by admin
यूं तो डॉक्टर मनमोहन सिंह अपने को सिर्फ सरकार चलाने तक सीमित रखते हैं, पार्टी के संगठनात्मक कार्यों में आमतौर पर उनकी अभिरुचि किंचित कम ही रहती है, पर महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों की पूर्व वेला में डॉ. सिंह का एक अप्रत्याशित सुझाव पार्टी जनों के समक्ष आया कि क्यों नहीं केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे का चेहरा सामने रखकर पार्टी महाराष्ट्र का पूरा चुनाव लड़े, डॉ. सिंह का मानना है कि शिंदे की छवि इतनी साफ-सुथरी है कि अगर उन्हें पार्टी बतौर अगला मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट कर चुनाव लड़ती है तो दलित व पिछड़ी जातियों के वोट भी थोकभाव में कांग्रेस को मिल सकते हैं, तथा शिंदे को प्रोजेक्ट कर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के छगन भुजबल की उम्मीदवारी को भी एक बेहतर जवाब दिया जा सकता है। वैसे भी शिंदे महाराष्ट्र चुनाव की प्रचार कमेटी के सिरमौर हैं। पर पर्यवेक्षक डा. सिंह की इस चाह में एक नए सियासी आह की आगाज मान रहे हैं सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री अपने इस काबीना मंत्री के काम-काज से खुश नहीं हैं, उन्हें लगता है कि उनके आर्थिक सुधारों की गाड़ी ऊर्जा मंत्रालय पहुंचते-पहुंचते पटरी से उतर जाती है और सुधार कार्यक्रमों को जारी रखने की कई हिदायत पहले भी डा. सिंह अपने काबीना मंत्री को दे चुके हैं पर लगता नहीं है कि शिंदे के कानों पर कोई जूं रेंगी है, सो अपनी अभिशप्त सियासी सोच से डा. सिंह अपने बीमार मंत्री के लिए नया नुस्खा लिखना चाहते हैं।
Posted on 20 October 2009 by admin
कांग्रेसी आलाकमान का यथास्थितिवाद में कुछ ज्यादा भरोसा है, चुनांचे यही कारण है कि कांग्रेस शासित राज्यों में मुख्यमंत्री बदलने की ज्यादा परंपरा नहीं है। पर जिस तरह से इस बार तमाम जनमत सर्वेक्षणों में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की बढ़त बताई जा रही है उसे देखते हुए महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के समर्थकों ने मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली दरबार पर भी लगातार दबाव बनाया जा रहा है, वहीं अशोक चव्हाण खेमा निश्चिंत है कि जिस मुख्यमंत्री की अगुवाई में चुनाव जीतने की बात हो रही हो उसे बदला कैसे जा सकता है। पर जो भी है कम से कम चव्हाण खेमा तो उतना निश्चिंत कतई नहीं है जितना हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके समर्थक हैं। बीरेंद्र सिंह और किरण चौधरी सरीखे हुड्डा विरोधी भी अब तलक कोई चूं-चपड़ नहीं कर रहे हैं।
Posted on 20 October 2009 by admin
अमर सिंह सिंगापुर से लौट आए हैं, और फिर से अपने पुराने रंग में है। न्यूज चैनलों के लिए अच्छी खबर है। पर जहां तक मुलायम सिंह का सवाल है उनके मन का संशय निरंतर गहरा रहा है कि अमर जब से किडनी बदलवा कर सिंगापुर से लौटे हैं उनका मन भी बदल गया है। और तो और जबसे अमर ने अपने एक अंतरंग इंटरव्यू में खुलासा किया है कि उनके तो बस दो ही मित्र हैं अमिताभ बच्चन और अनिल अंबानी, तब से नेताजी की तबियत जरा नासाज है। और अमर की अनुपस्थिति में वे जिस तरह से पार्टी मामलों में राम गोपाल यादव को भाव दे रहे थे अब उन्होंने अपने रवैए में किंचित बदलाव कर लिया है। जब अमर सिंगापुर में स्वास्थ्य लाभ कर रहे थे तब मुलायम ने उनके पास अपने पुत्र अखिलेश को एक खास संदेशे के साथ भेजा था, पर रही बात अमर की, तो न चिट्ठी न संदेश, जाने तुम इन दिनों हो किस देस।
Posted on 20 October 2009 by admin
जाने क्या बात हुई कि अब अडवानी की उनकी पार्टी भाजपा में ही कोई सुनता नहीं, महाराष्ट्र चुनाव की पूर्व संध्या तक अडवानी की बस यही इच्छा रही कि चाहे जैसे भी हो उध्दव ठाकरे और राज ठाकरे में दोस्ती हो जाए, इसके लिए अडवानी ने अपनी ओर से एक फार्मूला भी सुझाया कि उध्दव ठाकरे भाजपा-शिवसेना गठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर प्रोजेक्ट हों और राज ठाकरे को शिवसेना संगठन की तमाम जिम्मेदारी सौंप दी जाए ताकि वे अपनी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का विलय शिवसेना में करने को राजी हो जाएं। अडवानी ने तो एक कदम आगे बढक़र यह भी पेशकश कर दी थी कि वे इसके लिए बाल ठाकरे से भी बात करने को तैयार हैं। पर अडवानी के इस प्रस्ताव पर न तो राज और न ही उध्दव ने कोई कान धरा। पिछले दिनों भाजपा की संसदीय दल की बैठक में अडवानी ने एक बिन मांगी सलाह दे डाली कि वसुंधरा को अभी बने रहने दिया जाए, पर राजनाथ समेत पार्टी के अन्य सीनियर नेताओं ने अडवानी की इस सलाह को कतई भी तवज्जो नहीं दी। क्या नक्करखाने में तूती की आवाज हो गए हैं अडवानी?
Posted on 05 October 2009 by admin
हर छोटी-बड़ी बात पर यूं अचानक लाल-पीली हो जाने वाली ममता दीदी को लाल रंग से खासी एलर्जी है। और हो भी क्यों नहीं वामपंथियों के लालगढ़ को ध्वस्त करने की उनकी मंशा रोज-ब-रोज और प्रखर हुई जाती है। पिछले दिनों जब दीदी को कोलकाता से अपनी महत्वाकांक्षी रेलगाड़ी ‘दुरंतो’ को हरी झंडी दिखानी थी तो उस मौके पर रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अतिशय उत्साह में आकर कह दिया कि यह रेलवे के लिए ‘रेड लेटर्स डे’ यानी अति महत्व का दिन है, पर तुरंत ही उस अधिकारी को अपनी भूल का अहसास हो गया और अपनी गलती सुधारते हुए उस अधिकारी ने फौरन कहा यह तो ‘ग्रीन लेटर्स डे’ के माफिक है। हरा रंग जैसाकि सबको मालूम है कि यह दीदी के राजनीतिक दल का अधिकारिक रंग है। यहां तक कि नई रेलगाड़ी ‘दुरंतो’ का शृंगार भी हरे रंग से किया गया था और ममता के मंत्रालय के जो बड़े विज्ञापन अखबार-पत्रिकाओं को रिलीज होते हैं उसमें भी हरे रंग का प्रचुरता से इस्तेमाल होता है। सो, दीदी अगर कायदे से पश्चिम बंगाल में सत्ता में आ गई तो न सिर्फ राज्य के एजेंडे और मंशा में अपेक्षित बदलाव आएगा अपितु बंगाल में लाल के लिए हरा काल बनकर आएगा यानी खूब पुताई होगी सड़कों, खंभों और इरादों की और शायद बदले वक्त और बदली मंशाओं के तहत कैलेंडर में छुट्टी को चिन्हित करने वाले लाल रंग में डूबे शनिवार और रविवार पर भी सुर्ख हरे रंग की पुताई हो जाए, सचमुच दीदी के जख्म अब भी उतने हरे हैं।
Posted on 05 October 2009 by admin
माननीय गृह मंत्री नार्थ ब्लॉक में वक्त की पाबंदी चाहते हैं कि इस पर सख्ती से अमल हो। सो चिदंबरम की पहल पर उनके नार्थ ब्लॉक ऑफिस में एक ‘बॉयोमेटिक कंट्रोल सिस्टम’ लगाया गया है, यहां तक कि खुद मंत्री जी इस हाजिरी सिस्टम का खुद भी कड़ाई से पालन करते हैं जब भी चिदंबरम अपने ऑफिस के अंदर या बाहर होते हैं तो इस मशीन में अपना कार्ड पंच करना नहीं भूलते हैं। चिदंबरम का मत है कि इस प्रणाली के पालन से कर्मचारियों के काम के घंटों का सचमुच इस्तेमाल होगा, अगर नार्थ ब्लॉक का कोई कर्मचारी दिल्ली के टै्रफिक में फंस गया हो और इस कारण देर से ऑफिस पहुंच रहा हो तो ऑफिस में उन्हें जितनी देर हुई है उतना ही अतिरिक्त वक्त उन्हें शाम को अपने ऑफिस में लगाना पड़ेगा। चिदंबरम की नजर अपने मंत्रालय के वैसे भी कर्मचारियों पर है जो ऑफिस में कहने को होते हैं पर ज्यादातर समय अपने निजी कार्य के निपटारे में जुटे रहते हैं।