Archive | विशेष

राम को भगवा सलाम

Posted on 26 May 2010 by admin

राम जेठमलानी की राज्यसभा की प्रस्तावित सीट को लेकर भाजपा को पल-पल में अपनी नीतियां बदलनी पड़ रही है,पहले यह योजना बनी थी कि जेठमलानी को यूपी से राज्यसभा में लाने के लिए भाजपा अपने 20 विधायकों का समर्थन दिलवा देगी, तथा बाकी के विधायकों का इंतजाम अनिल अंबानी मुलायम सिंह से अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर दिलवा देंगे। यानी भाजपा और सपा के मिले जुले प्रयासों से जेठमलानी की राज्यसभा का सफर तय हो जाएगा। पर हालिया दिनों में जेठमलानी की राज्यसभा ने अपनी भंगिमाएं और पैंतरे दोनों ही बदल लिए हैं और अब वे चाहते हैं कि उन्हें वोटों के जुगाड़ के लिए इधर-उधर नहीं फिरना पड़े, चुनांचे भाजपा अब इस संभावना पर विचार कर रही है कि क्यों नहीं राम को कर्नाटक से राज्यसभा में ले आया जाए।

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मान हानि का सानी नहीं

Posted on 26 May 2010 by admin

2जी स्पैक्ट्रम मामले में संसद और संसद के बाहर अपार सुर्खियां बटोरने वाली नीरा राडिया अब अपने पूरे तेवर में है, सनद रहे कि राडिया अंबानी-टाटा जैसे बड़े घरानों का पीआर देखती हैं, इस घोटाले से जुड़ी खबर छापने और उसमें अपना नाम घसीटे जाने पर मुहतरमा ने दिल्ली के एक अंग्रेजी अखबार (जो भाजपा के एक राज्यसभा सांसद का है) पर 500 करोड़ के मान-हानि का मुकदमा मुंबई में ठोंक दिया है। राडिया ने अंग्रेजी के उस न्यूज चैनल (जिसमें अनिल अंबानी की एक बड़ी हिस्सेदारी है)पर भी लंदन में 500 मिलियन पौंड का मुकदमा ठोंक दिया है जो कथित तौर पर उनकी और राजा के बीच की बातचीत का टेप बजा रहे थे।

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चल खुसरो घर आपणै

Posted on 18 May 2010 by admin

भाजपा के कई बागी नेताओं की घर वापसी के लिए संघ खासा सक्रिय है, भगवा पार्टी के सिरमौर नितिन गडकरी इन दिनों इसी योजना को अमलीजामा पहनाने की योजनाओं में जुटे हैं। सो बहुत मुमकिन है कि पहली खेप में भाजपा से निकाले गए उमा भारती और जसवंत सिंह की घर वापसी हो जाए, कल्याण सिंह से भी लगातार संपर्क में है भाजपा आलाकमान। बस पेंच इतना सा है कि कल्याण भाजपा वापसी के लिए अपनी ओर से कुछ शतर्ें रखना चाहते हैं और भगवा आलाकमान इस वक्त कोई शर्त नहीं मानना चाहता।

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शिबू के संग संघ

Posted on 07 May 2010 by admin

भाजपा और शिबू सोरेन में अगर एकबारगी फिर से कुछ पकने लगा है तो इसे संघ के सौजन्य से मानिए। यूं तो संघ नेतृत्व सोरेन का बड़ा पक्षधर भी नहीं, पर मजबूरी में ही सही उन्हें सोरेन की उपयोगिता समझ में आती है। हिंदी भाषी इलाके में झारखंड एक ऐसा प्रांत है जहां ईसाई मिशनरियां खूब फल-फूल रही है और धर्मांतरण की धारा यहां काफी सशक्त है, पर विद्रोही स्वभाव वाले गुरू जी यानी सोरेन को ईसाई मिशनरियों को यह धंधा कभी रास नहीं आया और वे सदा से इस धर्मांतरण के विरोध में खड़े हुए हैं, यही एक बात है जो सोरेन व संघ को साथ लाती है। सो, जब संघ का डंडा चला तो भगवा पार्टी को यू-टर्न लेने पर मजबूर होना पड़ा, भाजपा संघ नेतृत्व से बस इतना कह पाई कि कम से कम ‘क्रॉस वोटिंग’ पर तो रोक लगनी चाहिए।

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जागेगा आरुषि कांड

Posted on 05 May 2010 by admin

चर्चित आरुषि कांड फिर से सुर्खियां बटोर सकता है, सुना जा रहा है कि तलवार दंपत्ति के नार्को टेस्ट की रिपोर्ट गांधीनगर लैब से सीबीआई के पास आ गई है। विडंबना देखिए यह नार्को टेस्ट रिपोर्ट तलवार दंपत्ति के खिलाफ नए तथ्य मुहैया कराती है और नौकरों की भूमिका पर से पर्दे हटाती हुई उन्हें संदेह का लाभ दे रही है।

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सुषमा के सूरमा

Posted on 05 May 2010 by admin

जब से सुषमा स्वराज ने संसद में नेता, प्रतिपक्ष का जिम्मा संभाला है, वे दो युवा सांसदों को संसद में प्रखरता से बोलने की खासी तालीम दे रही हैं। इनमें से एक पीलीभीत के युवा सांसद वरुण गांधी हैं जिन्हाेंने दंतेवाड़ा कांड पर संसद में अपनी मेडन स्पीच दी तो एकबारगी सारा सदन भौंचक रह गया था। अडवानी तो वरुण का भाषण सुनकर रो ही पड़े थे, सदन में मौजूद सोनिया गांधी भी वरुण की इतनी भाव-प्रवण स्पीच सुनकर भावुक हो गई थीं और जब अगले कुछ रोज बाद वरुण सेंट्रल हॉल में आए तो उन्हें बधाई देने वाले सांसदों में कांग्रेस और सीपीएम के सांसद भी शामिल थे। गोड्डा के सांसद निशिकांत दूबे को भी सुषमा ने कई अहम मौकों पर बोलने का अवसर दिया है और लगभग हर बार दूबे ने अपनी उपयोगिता और अपरिहार्यता साबित की है।

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सूले को न भूलें

Posted on 05 May 2010 by admin

बीसीसीआई का मौजूदा कार्यकाल जून में समाप्त हो रहा है, और इस बीच आईसीसीआई का मुख्य कार्यालय भी दुबई में शिफ्ट हो रहा है, सो शरद पवार ने अपनी नजरें और मंशा फिलवक्त दुबई पर लगा रखी हैं, जहां बीते दिनों के उनके कई साथियों का सिक्का चलता है। सो, अगर पवार ने आईसीसीआई में महतर जिम्मेदारियां संभाल लीं तो उनकी जगह और उनकी कुर्सी की असली वारिस सुप्रिया सूले के अलावा और कौन हो सकता है? सो, पवार की डिमांड है कि सुप्रिया को कैबिनेट में लिया जाए। सुप्रिया पार्टी पर अपनी पकड़ मजबूत बनाने की लिहाज से नए लोगों को आगे लाना चाहती है, प्रफुल्ल के बारे में उनकी निजी राय है कि वे उनके पिता के शागिर्द भर हैं। वहीं प्रफुल्ल पवार की शार्गिदी व उनके साए से बाहर निकल अहमद पटेल की मदद से सोनिया के करीब आ गए हैं और अब उनके दिल का रास्ता भी सीधा कांग्रेस में खुलता है। पवार के भतीजे अजीत पवार भी सुप्रिया से नाराज हैं अैर वे प्रफुल्ल के साथ हैं यानी प्रफुल्ल व अजीत मिलकर राजनीति में नौसिखिया सुप्रिया सूले की नाक में दम तो कर ही सकते हैं।

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रैली में खुली थैली

Posted on 26 April 2010 by admin

दिल्ली के रामलीला मैदान में 21 अप्रैल को महंगाई के विरूध्द भाजपा की एक बड़ी रैली होने जा रही है, इस रैली को सफल बनाने के लिए भगवा पार्टी ने अपनी थैली का मुंह खोल दिया है। भाजपा शासित तमाम राज्यों के मुख्यमंत्रियों को ताकीद कर दी गई है कि इस रैली को सफल बनाने के लिए वे अपना धन, बल व शासन सब झोंक दें। पार्टी के शीर्ष नेताओं की योजना इस रैली में एक से डेढ़ लाख तक की भीड़ जुटाने की है। पार्टी ने इसके लिए कोई 4,000 बसें किराए पर ली है, 140 विशेष ट्रेन बुक कराई गई है, कारों की संख्या तो बेहिसाब हो सकती है। पड़ोसी राज्यों हरियाणा, राजस्थान, यूपी व उत्तराखंड पर विशेष जोर लगाया जा रहा है, अगर रैली में सचमुच भीड़ जुट गई तो कांग्रेस से लड़ने के लिए थोड़ा बहुत हौंसला तो जुटा ही लेगी भगवा पार्टी।

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प्रतिभा संपन्न प्रतिभा

Posted on 22 April 2010 by admin

अडवानी जी की लाडली पुत्री को इन दिनों एक बड़ी टै्वल कंपनी के मालिक के साथ अंतरंगता बढ़ाते देखा जा सकता है, ये महाशय पहले एक बड़ी कॉरपोरेट कंपनी के शीर्ष अधिकारी की पत्नी के संग-संग डोलते नजर आते थे, उस शीर्ष अधिकारी की पत्नी का आईपीएल प्रेम जग जाहिर है, वे लगभग हर मैच में नजर आ जाती है, अब यह तो नहीं मालूम कि प्रतिभा को क्रिकेट का खेल कितना पसंद है, पर कई खेल खेलने में उनका कोई सानी नहीं।

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गोयल के कायल

Posted on 22 April 2010 by admin

विजय गोयल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद की रेस में कहीं आगे निकल आए हैं, गडकरी की कृपा से लगता है उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वियों विजय जौली और विजेंद्र गुप्ता को कहीं पीछे छोड़ दिया है। गडकरी का कहना साफ है कि उन्हें करप्शन या इमेज से अलहदा एक ‘डाइनामिक लीडर’ चाहिए जो मौजूदा सियासी कश्मकश से बाहर निकल कर पार्टी को कहीं आगे तक ले जाए, गडकरी पश्चिम बंगाल के भाजपा अध्यक्ष का हवाला देते हैं कि उनके नाम का भी कितना विरोध था, पर उन्होंने बंगाल में जोरदार हस्ताक्षर अभियान चलाकर वहां पार्टी की मौजूदगी व कैडर को साबित किया है और आज की तारीख में भाजपा के बंद आह्वान का भी बंगाल में खासा असर होता है। पर अडवानी हैं कि अब भी जौली और मेहरा का नाम चला रहे हैं, वही गडकरी विजय गोयल की जय चाहते हैं।

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