Posted on 20 May 2020 by admin
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपनी मार्च की तनख्वाह ’पीएम केयर फंड’ में पहले ही दान कर दी है, फिर देश की आर्थिक हालात का जायजा लेते हुए उन्होंने अपनी साल भर की तनख्वाह में 30 फीसदी की कटौती कर ली है। इस वर्ष राष्ट्रपति भवन अपने लिए नई लिमोज़िन कार खरीदने जा रहा था, इसकी खरीद को रद्द कर दिया गया है। फूलों समेत अन्य साजो-सज्जा के खर्चों को भी आधा कर दिया गया है। मेहमानों की लिस्ट भी बहुत छोटी कर दी गई है और खान के मैन्यू में भी बहुत कटौती कर दी गई है। जहां पहले राष्ट्रपति भवन के किसी न किसी हिस्से में मरम्मत का कार्य लगा ही रहता था, इस वर्ष उस पर रोक लगा दी गई है। राष्ट्रपति की यात्राओं पर आने वाले खर्चों को भी आधा कर दिया गया है, अब राष्ट्रपति सीधे लोगों तक पहुंचने में, उनसे संवाद स्थापित करने में टेक्नोलॉजी का सहारा लेंगे, वे ऑन लाइन ऐप्प द्वारा सीधे लोगों से जुड़ेंगे। वाकई देश के महामहिम ने एक नज़ीर पेश करने की कोशिश की है।
Posted on 20 May 2020 by admin
प्रवासी बिहारी मजदूरों की कथित उपेक्षा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारी पड़ सकती है। भाजपा समर्थित एक ऑनलाइन सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है कि जब से लॉकडाउन की घोषणा हुई है उस काल में नीतीश की लोकप्रियता में भयंकर गिरावट दर्ज हुई है। इस सर्वे में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि अगर नीतीश आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा से अलग हट कर अकेले चुनाव लड़ते हैं तो उनके 20 विधायक भी बमुश्किल चुनाव जीत पाएंगे। अगर नीतीश-भाजपा के साथ मिल कर चुनाव में जाते हैं तो जदयू के उम्मीदवारों की जीत की संभावना जहां 40 से 50 फीसदी है, वहीं भाजपा उम्मीदवारों के जीत का प्रतिशत 70-72 प्रतिशत हो सकता है। अब भाजपा जदयू में सीटों के बंटवारे का पेंचोखम भी उलझ सकता है, जहां नीतीश भाजपा के मुकाबले अपने लिए बंटवारे में भगवा पार्टी से 15-20 सीटें ज्यादा चाहते हैं, वहीं भाजपा अब बराबर-बराबर सीटों के फार्मूले पर जोर लगा सकती है। अगर नीतीश अपने बड़े भाई के रूतबे पर अड़े रहे तो भाजपा उन्हें लड़ने के लिए सांकेतिक रूप से 2-5 सीटें ज्यादा दे सकती है, इस शर्त के साथ कि मुख्यमंत्री का फैसला तो निर्वाचित विधायकों द्वारा ही होगा।
Posted on 20 May 2020 by admin
केंद्रीय सड़क व परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का ड्रीम प्रोजेक्ट ‘दिल्ली-मुंबई ग्रीनफिल्ड एक्सप्रेस-वे’ इस लॉकडाउन में भी आकार ले रहा है। इस प्रोजेक्ट की कुल कीमत एक लाख करोड़ बताई जा रही है, इस प्रोजेक्ट के मूर्त्त रूप लेने से दिल्ली से मुंबई या फिर मुंबई से दिल्ली तक की सड़क मार्ग से यात्रा मात्र 14-15 घंटे में पूरी की जा सकेगी, सरकार यह प्रोजेक्ट पीपीपी मॉडल पर नहीं कर रही है। एक बार इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिल गई तो फिर हाईवे के निर्माण के लिए जमीन खरीदने की प्रक्रिया आरंभ की जा सकेगी। सरकार ने तो टोल के राइट्स देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, इसके लिए जल्द ही निविदाएं मंगवाई जा सकती हैं, सरकार का अनुमान है कि अकेले टोल राइट्स से उसके खजाने में 25 हजार करोड़ रूपए तक आ सकते हैं।
Posted on 20 May 2020 by admin
लॉकडाउन और स्वॉइन फ्लू के आसन्न आहटों के चक्कर में जब पोल्ट्री मालिक बड़े पैमाने पर अपनी मुर्गियों को मार रहे थे तो उनसे पूछा गया कि वे आखिर ऐसा क्यों कर रहे हैं तो जवाब मिला कि जब बाजार में चिकेन की कोई कीमत ही नहीं रही, जितना पैसा वे मुर्गियों को दाना खिलाने पर खर्च कर रहे हैं इसे बेच कर उन्हें इसका आधा भी रिकवर नहीं हो रहा। सो, यूपी में भी प्रवासी मजदूरों को जिन आइसोलेशन केंद्रों में रखा गया है, वहां राज्य सरकार उनके प्रति मील पर एनजीओ को 40 रूपए का भुगतान कर रही है यानी कि पूरे दिन के लिए कोई 120 रूपए, वहीं राजस्थान जैसे राज्य इसी मद में एनजीओ को 300 रूपयों का भुगतान कर रही हैं। जब यूपी में कार्यरत एनजीओ ने अधिकारियों से सवाल किए तो प्रति मील 40 रूपए से बढ़ा कर 70 रूपए कर दिया गया, पर यह फाइल अभी भी लाल फीताशाही के चपेट से बाहर नहीं निकल पाई है और वे एक टेबल से निकल कर दूसरे टेबल का चक्कर लगा रही है, जबकि वहीं मजदूर इन आइसोलेशन केंद्रों से बाहर निकल अपने घरों तक पहुंचने लगे हैं।
Posted on 20 May 2020 by admin
प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के लिए सबसे ज्यादा ट्रेनें यूपी के लिए चली हैं, कुल हजार में से अकेले 400 ट्रेन यूपी के लिए है। जब इस बात पर सवाल-जवाब हुए तो रेल मंत्री की ओर से स्पष्ट्रीकरण आया कि छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों की ओर से स्पेशल ट्रेन की डिमांड ही नहीं आई। इस पर तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने पहले से जारी हुए अपने वीडियो दिखा दिए जिसमें उन्होंने यह डिमांड की थी, उल्टे इन्होंने रेल मंत्री पर देश को गुमराह करने के आरोप जड़ दिए।
Posted on 20 May 2020 by admin
लॉकडाउन के कोई 50 दिनों बाद जब तक सरकार की तंद्रा टूटी तब तक बहुत सारे प्रवासी मजदूर पैदल ही हजारों किलोमीटर के सफर पर निकल चुके थे, भूख, धूप या गर्मी की परवाह किए बगैर। कुछ गतंव्य तक पहुंचे, कुछ कोरोना शिविर के आइसोलेशन में अटक गए, कुछ ऐसे भी थे जिन्हें मंजिल की चाह में रास्तों ने निगल लिया। एक अनुमान के मुताबिक देश में इस वक्त कोई 8 करोड़ ऐसे प्रवासी मजदूर हैं जो रोजी-रोटी की तलाश में दर-बदर होकर अपने घर से दूर निकले थे। रेलवे ने प्रति दिन 300 ट्रेन चलाने का फैसला लिया है, एक ट्रेन में सोशल डिस्टेंसिंग को मद्देनज़र रखते 1200 मजदूर आ रहे हैं। तो अगर हिसाब लगाएं तो 8 करोड़ मजदूरों की घर वापसी के लिए रेलवे को 66 हजार 666 रेल गाड़ियां चलानी होंगी। अगर एक दिन में 300 ट्रेनें चल रही है तो इस हिसाब से इस कार्य में 182 दिन लगेंगे। रेलवे का दावा है कि वह मजदूरों पर कुल खर्च का मात्र 15 फीसदी ही श्रमिक या राज्य सरकार से वसूल रही है। क्योंकि ये स्पेशल ट्रेन बस वन वे का ही सफर तय कर रही हैं, आना उसे खाली ही होता है। सोशल डिस्टेंसिंग को मद्देनजर रखते मिडिल बर्थ को हटा लिया गया है, श्रमिक यात्रियों को रास्ते में भोजन व पानी भी प्रदान किया जा रहा है। इस हिसाब से रेलवे को प्रति मजदूर 6-8 हजार रूपए का खर्च आ रहा है जिसका वे 15 फीसदी ही टिकट के मद में चार्ज कर रहे हैं। सनद रहे कि श्रमिकों को घर पहुंचाने के मद में सरकार ने रेलवे को कुल एक लाख करोड़ रूपयों का बजट आबंटित किया है, सूत्रों की मानें तो रेलवे का दावा है कि उसे एक ट्रेन चलाने में 50 लाख तक का खर्च आ रहा है।
Posted on 15 May 2020 by admin
ठहरे हुए कयासों की फिर से त्यौरियां चढ़ रही हैं, पीएमओ से जुड़े सूत्रों के हवाले से खबर मिल रही है कि संसद के आनेवाले मानसून सत्र से पहले पीएम मोदी अपने मंत्रिमंडल को नया चेहरा-मोहरा दे सकते हैं। अप्रैल माह के आखिरी सप्ताह में नौकरशाही में हुए एक बड़े फेरबदल से इन संभावनाओं को बल मिल रहे हैं। सूत्रों की मानें तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी केंद्र पर लगातार यह दबाव बना रहे हैं कि जितनी जल्दी हो सके जद-यू को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए। इस साल के अंत तक बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसे देखते हुए नीतीश जल्द से जल्द अपने मंत्री केंद्र सरकार में सुशोभित करना चाहते हैं। वैसे हालिया ब्यूरोक्रेटिक फेरबदल से उन मंत्रियों को भी साफ संदेश देने की कवायद हुई है जो ऊंची परवाज भरने की कोशिश कर रहे थे। उनकी उड़ान के लिए अब मोदी ने सियासी आसमान को थोड़ा और ऊंचा कर दिया है। जैसे कोराना संकट के इस दौर में स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्द्धन से कहीं ज्यादा तो मंत्रालय के प्रवक्ता लव अग्रवाल और मंत्रालय की सचिव प्रीति सूदन के चेहरे सामने दिख रहे हैं। प्रीति सूदन को तो 3 माह का एक्सटेंशन भी मिल गया है ताकि जब 3 माह बाद मंत्रालय का नया सचिव पदभार संभाले तो उसे एक क्लीन स्लेट मिल सके और कोरोना का पतनाला पूर्ववर्ती के सिर फोड़ा जा सके। संभावना व्यक्त की जा रही है कि प्रीति सूदन की जगह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में ओएसडी राजेश भूषण ले सकते हैं। अपनी विशिष्ट और अभिनव कार्यशैली के लिए ख्यात नितिन गडकरी की लोकप्रियता को बैलेंस करने के लिए पीएमओ में तैनात अरविंद कुमार शर्मा को एमएसएमइ का सेक्रेटरी तैनात किया गया है। वहीं आंध्र के आईएएस गिरिधर अरामाने, जिनके बारे में मशहूर है कि वे सिर्फ वही करते हैं जो उनको ठीक लगता है वे किसी की नहीं सुनते। गिरिधर को गडकरी के एक अन्य मंत्रालय सड़क परिवहन का सचिव नियुक्त किया गया है। मंत्री पद के दावेदार तो कहीं पहले से भगवा हाईकमान के समक्ष शीर्षासन कर रहे थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा ने राज्यसभा दे दी है उनके केंद्र में मंत्री बनने की प्रचुर संभावना है। सचिन पायलट और मिलिंद देवड़ा जैसे युवा कांग्रेसियों पर डोरे डाले जा रहे हैं। मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य और वकील विवेक तन्खा भी भाजपा से अच्छे रिष्ते रखने के लिए जाने जाते हैं। अभिषेक मनु सिंघवी ने भी माधव राव सिंधिया को अपना मेंटर घोषित कर भगवा आंगन में अपने घर की खिड़की खोल दी है। क्योंकि सिंघवी माधव राव के पुत्र ज्योतिरादित्य की तारीफों के पुल बांधने में वे कभी पीछे नहीं हटते। मसलन मोदी मंत्रिमंडल के अगले विस्तार में कुछ ऐसे चौंकाऊ चेहरों को जगह मिल सकती है जो कयासों के बाजार में कहीं दूर-दूर तक नहीं दिखते।
Posted on 15 May 2020 by admin
आर्थिक मंदी जो कहीं पहले से पांव पसार रही थी जब उसे लॉकडाउन का साथ मिला तो अब इसके बुरे नतीजे सामने आने लगे हैं। उड़ान कंपनियों की उड़ानों पर ग्रहण लग गया है। यक तरह से साफ हो गया है कि 30 अप्रैल तक कोई बोर्डिंग नहीं होगी, यानी लगभग डेढ़ महीने तक एयरलाइंस कंपनियों का कारोबार ठप्प है। इस संकट से निबटने के लिए ‘गो एयर’ ने अपने कर्मचारियों की तनख्खाह आधी कर दी है, ‘इंडिगो’ में तनख्खाह में 5 से 30 फीसदी तक कमी आई है। ‘एयर इंडिया’ में जितने भी पायलट अनुबंध के आधार पर काम कर रहे थे, उनके अनुबंधों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। ‘स्पाइसजेट’ ने भी कमोबेश ऐसे ही कदम उठाए हैं। यही हाल मीडिया सेक्टर का भी है। इंडियन एक्सप्रेस ने जहां अपने लोगों की तनख्खाह 30 फीसदी तक कम कर दी है, वहीं इंडिया टुडे ग्रुप और टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी साफ कर दिया है कि इस वर्ष किसी को इंक्रीमेंट नहीं मिलेगा। आधे से ज्यादा ‘र्स्टाट अप’ अब बंद होने की कगार पर हैं। ऑटो सेक्टर में भी कमोबेश उत्पादन ठप्प पड़ा है, क्योंकि बाज़ार में इनके उत्पादों की मांग ही नहीं है। एफएमसीजी सेक्टर पर भी संकट गहरा रहा है। एक के बाद एक सभी फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं। सेंसेक्स पहले ही 15 हजार तक नीचे लुढ़क चुका है। यानी आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है।
Posted on 15 May 2020 by admin
लगता है सरकार के मंत्रिगण भी लॉकडाउन की चपेट में आ गए हैं। अमित शाह भूले भटके कभी किसी मीटिंग में दिख भी जाते हैं। वहीं देश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्द्धन भिंडी काटते हुए अपना फोटो शेयर कर रहे हैं। मोदी सरकार के एक अन्य प्रभावशाली मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी बागवानी कर रहे हैं उनका अच्छा-खासा किचन गार्डन है। किरण रिजिजू ने गार्डन में झाड़ू लगाते हुए अपनी फोटो शेयर की है तो ‘गो कोरोना गो’ का सुर अलापने वाले रामदास अठावले घर पर बैठकर कैरम खेल रहे हैं। वहीं योगी सरकार के मंत्रियों की बात करें तो श्रीकांत शर्मा पूरियां तल रहे हैं, सिद्धार्थनाथ सिंह मटर छील रहे है। वहीं मोदी और योगी दोनों ही पूरे 18 घंटे काम पर लगे हैं। योगी की मीटिंग्स भी शाम 7 बजे से शुरू होकर रात्रि भोजन से गुजर कर बारह-एक बजे तक चलती है। वहीं मोदी ने पूरी मुस्तैदी से कोरोना संकट पर नज़र बनाए रखी है।
Posted on 15 May 2020 by admin
प्रधानमंत्री मोदी ने इस रविवार यानी 5 अप्रैल की रात 9 बजे 9 मिनट के लिए देशवासियों से मोमबती, दीया या टॉर्च जलाने की अपील की है। कांग्रेसी नेता शशि थरुर ने इसका संज्ञान लेते हुए एक ट्वीट किया कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में लोगों के दर्द और उनकी वितीय चिंताओं के बारे में कुछ नहीं कहा, यह पीएम का ‘फील गुड मोमेंट’ था। इस ट्वीट से कांग्रेस ने यह कहते हुए अपने को अलग कर लिया कि यह थरुर के निजी विचार हैं। पर छतीसगढ़ कांग्रेस ने एक चुभता हुआ ट्वीट उछाल दिया है-‘जली को आग कहते हैं, बुझी को राख कहते हैं, जो महामारी को महोत्सव में बदल दे उसे नरेंद्र दामोदरदास कहते हैं।’