Posted on 20 February 2012 by admin
स्टिकर बम तकनीक का इस्तेमाल भले ही भारतीय महाद्वीप में पहली बार हुआ हो, पर आतंकियों की यह तकनीक कुछ भी नई नहीं है। म्युनिख ओलंपिक के दौरान दो लोगों को इसी तकनीक से मारा गया था। ये आतंकी मिडल ईस्ट के रहने वाले थे और इजराइल से स्पीड बोट के सहारे आए थे। वे भागकर खेल गांव स्थित अपार्टमेंट में पहुंचे और उन दोनों लोगों की शिनाख्त कर उनके फ्लैट्स पर स्टिकर बम चिपका कर रफु चक्कर हो गए, इस बम से हुए विस्फोट में दो लोग मारे गए थे।
Posted on 20 February 2012 by admin
मोसाद ने 8 संदिग्धों की सूची भारत सरकार को सौंप दी है, ये सभी ईरानी नागरिक बताए जाते हैं, इजराइल लगातार भारत पर यह दबाव बना रहा है कि भारत इस मामले में त्वरित कार्यवाई करे अन्यथा ये संदिग्ध भारत छोड़कर भाग जाएंगे। भारत इस मामले में इजराइल को बस यही रूटीन जवाब दे रहा है कि ‘हम मामले पर नजर रखे हुए हैं।’ दरअसल इस मामले में भारत संशय में है, यूपी में विधानसभा के चुनाव हो रहे हैं, आज हो रहे चौथे चरण के मतदान में तो मुस्लिम बहुल इलाकों की भरमार है, अगर कांग्रेसनीत यूपीए नेतृत्व वाली सरकार की अगुवाई में ईरानी नागरिकों की धर-पकड़ होती है तो इसका प्रतिकूल असर मुस्लिम मतदाताओं में देखा जा सकता है। और इस दफे का यूपी चुनाव कांग्रेसी युवराज राहुल गांधी के लिए उनकी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है, सो इस मामले में कांग्रेस और कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। भारत की दूसरी बड़ी चिंता ईरान से होने वाले कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर भी है, अगर भारत ईरान से ज्यादा पंगा लेता है और इससे आजिज होकर ईरान ने अगर तेल देना बंद कर दिया तो भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार से कहीं महंगा तेल खरीदना पड़ेगा, क्योंकि तेल उत्पादक देशों में ईरान ही भारत का सबसे समीपवर्ती राष्ट्र है।
Posted on 20 February 2012 by admin
नई दिल्ली बम बलास्ट की चेतावनी इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने भारत को कहीं पहले दे दी थी। इजराइल को कहीं न कहीं ऐसा लग रहा था कि ईरान में न्यूक्लियर वैज्ञानिक की मौत और वहां के न्यूक्लियर रिएक्टर में तोड़ फोड़ के लिए ईरान उसे ही दोषी ठहरा रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए इजराइल ने आनन-फानन में अपने सभी दूतावासों और दूसरों देशों में रहने वाले अपने नागरिकों को चेतावनी दे दी थी कि वे पर्याप्त सर्तकता बरतें। पर लगता है भारत सरकार ने इजराइल द्वारा दी गई इस चेतावनी को यथोचित गंभीरता से नहीं लिया।
Posted on 20 February 2012 by admin
बाबू सिंह कुशवाहा से भाजपा का एक अटूट रिश्ता स्थापित हो गया है, भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी से कुशवाहा निरंतर संपर्क में रहते हैं और भाजपा में अब भी उनकी तूती बोलती है। माना जाता है कि कुशवाहा ने अपने दम पर अपने कई चहेतों की सियासी महत्वाकांक्षाओं के कमल खिला दिए हैं, अभी आगरा संसदीय क्षेत्र की एक विधानसभा सीट पर बाबू सिंह को अंडर ग्राउंड रहकर एक भाजपाई उम्मीदवार का प्रचार करते देखा गया। कुशवाहा ने बकायदा अपने समर्थकों का एक मंच बना रखा है, जिसमें 5 हजार से ज्यादा लोग सम्मिलित हैं। कुशवाहा जहां जाते हैं मंच के सदस्यगण साथ जाते हैं और खुलकर उनके पक्ष में नारे लगते हैं, ‘बाबू सिंह नहीं आंधी है, बुंदेलखंड का गांधी है’।
Posted on 20 February 2012 by admin
चर्चित उद्योगपति व शराब व्यावसायी पोंटी चङ्ढा के जब पिछले पखवाड़े उनके 19 स्थानों पर एक साथ आयकर विभाग के छापे पड़े तो इन छापों की गूंज में सत्ता की मिलीभगत की अनुगूंज भी शामिल हो गई। और सत्ता के गलियारों में ये सवाल भी बारंबार पूछे गए कि छापा पड़ने से ऐन पहले पोंटी प्रणब मुखर्जी व अमिता पॉल से मिलने क्यों पहुंचे थे? हालांकि इस मुलाकात की कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं हो पायी है फिर भी सूत्र बताते हैं कि पोंटी वित्त मंत्री से मिलने में कामयाब रहे थे। और पोंटी के ऊपर पड़े छापों में खूब शोर उमड़ा कि ढाई सौ करोड़ की नकद बरामदगी हुई है पर बड़े फिल्मानी तरीके से खोदा पहाड़ निकली चुहिया के तर्ज पर नोएडा के सेंटर स्टेज मॉल स्थित पोंटी के लॉकर से महज 100 रुपए की बरामदगी दिखाई गई, यानी सरकारी रिकार्ड में वहां 50-50 के सिर्फ दो नोट ही मिले। यह पूरा वाक्या हैरान कर देने वाला है और अपने आप में कई सवाल खड़े करने वाला भी। सीबीडीटी के जिस अधिकारी एस.एस.राणा के नेतृत्व में इस पूरे मुहिम को अंजाम दिया गया था, आनन-फानन में उनका तबादला कर दिया गया है। केंद्र सरकार को उम्मीद है कि ऐसा करने भर से यह मामला शांत हो सकता है, पर लगता है कि केंद्र सरकार अब भी इस बात से अनजान है कि उन्हें जनता के कई अनुत्तरित सवालों के जवाब देने ही होंगे।
Posted on 20 February 2012 by admin
आतंकवाद से निपटना केंद्र सरकार की परिधि में आता है और इससे निबटने के लिए कानून बनाना भी केंद्र सरकार का ही अधिकार है। अभी एनसीटीसी यानी ‘नेशनल काउंटर टेरेरिम सेंटर’ का गठन एनआइए की तर्ज पर किया गया है। यह आइबी के अधीन रहकर काम करेगा और इसे भी ‘अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट’ के तहत तमाम तरह के अधिकार दे दिए गए हैं, इस कानून के अमल में आने से राज्य सरकारों का यह कर्तव्य बन जाता है कि वह एनसीटीसी द्वारा मांगी गई हर जानकारी इसे देने को बाध्य हैं। राज्य का कोई भी बड़ा पुलिस अधिकारी चाहे वह डीआईजी या आईजी रैंक का ही क्यों न हो, उसे एनसीटीसी के अधीन रहकर कार्य करना होगा। इस एजेंसी को किसी वांछित के फोन टेपिंग करने या उसे गिरफ्तार करने के लिए राज्य सरकार की अनुमति नहीं लेनी होगी, जबकि मौजूदा कानून में तो किसी की जांच के लिए सीबीआई को भी राज्य सरकार की अनुमति लेनी पड़ती है, जिससे आम तौर पर ऐसी खबरें लीक हो जाती हैं। एनसीटीसी के गठन व इससे जुड़े कानून को लेकर गैर कांग्रेसी खासकर भाजपायी सरकारों ने हाय-तौबा मचा दिया है, इन राज्य सरकारों का कहना है कि केंद्र ने ऐसा कोई कानून बनाने से पहले उनसे इस बारे में राय-विचार करना भी जरूरी नहीं समझा और सीधे इस कानून के बाबत नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। अधिकतर गैर कांग्रेसी राज्य सरकारों को दरअसल केंद्र की मंशा पर ही शक है।
Posted on 20 February 2012 by admin
एनआइए ने संघ के कुछ प्रमुख लोगों की गिरफ्तारी का अनुमोदन गृह मंत्रालय को भेज दिया है, अब सिर्फ कांग्रेस की हामी का इंतजार है, कमल चौहान की गिरफ्तारी का भी लंबे समय से इंतजार था जो समझौता एक्सप्रेस बम कांड के मुख्य आरोपी हैं, एनआइए को लगता है कि इनकी गिरफ्तारी में बहुत देर हो गई। वहीं जब एम.के.नारायणन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे तो उन्होंने संघ के कुछ प्रमुख लोगों के खिलाफ कई सबूत इकट्ठे किए थे, बाद में उन्होंने अडवानी से मिलकर ये तमाम दस्तावेज उन्हें दिखा दिए थे, तब अडवानी से कोई जवाब देते नहीं बना था। अब केंद्र सरकार पशोपेश में है कि यूपी में इतना महत्वपूर्ण चुनाव चल रहा है और इसके दरम्यान अगर संघ नेताओं की गिरफ्तारी हो गई तो उमा भारती की अगुवाई में भगवा पार्टी जरूर इस मसले को वोटरों में भुना लेगी। वहीं कांग्रेस में एक वर्ग का मानना है कि संघ नेताओं की गिरफ्तारी के बाद अगड़े हिंदू वोटों का रुख चाहे जो भी हो, कम से कम मुस्लिम वोटरों का रुझान तो यकीनन कांग्रेस की ओर बढ़ेगा। कांग्रेस हाईकमान को इस बारे में अपना अंतिम निर्णय लेना है।
Posted on 07 February 2012 by admin
Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.
Posted on 07 February 2012 by admin
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