Archive | November, 2011

पंजाब में काले झंडे क्यों?

Posted on 19 November 2011 by admin

पंजाब के दौरे पर अडवानी को काले झंडे दिखाए गए जो किंचित अप्रत्याशित था, क्योंकि वहां अकाली दल व भाजपा की मिली-जुली सरकार है। काले झंडे का प्रमुख कारण यह था कि अडवानी ने अपनी किताब में ‘आपरेशन ब्लू स्टार’ का समर्थन किया था। इसी बात से नाराज होकर अमृतसर स्वर्ण मंदिर में उन्हें सरोपा भी भेंट नहीं किया गया। अडवानी को लेकर भाजपा व अकालियों के रिश्तों में भी थोड़ी खटास आई है, पर अकालियों ने साफ कर दिया है कि पंजाब के लोगों को नाराज कर वह अडवानी का समर्थन करने की हद तक नहीं जा सकते।

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अडवानी की फ्लॉप यात्रा

Posted on 19 November 2011 by admin

अडवानी की बहुप्रचारित जन चेतना यात्रा बस समाप्त होने वाली है। यूपी के बिजनौर के धामपुर में अडवानी की सभा में 5 हजार कुर्सियां लगाई गईं थीं। पर इसमें से दस फीसदी कुर्सियां ही बस भर पाईं। अडवानी नाराज हुए अनंत कुमार की ओर मुड़े और बेहद तल्खी से कहा-‘सिंपली रिडिकुलस।’ उत्तराखंड में भाजपा की सरकार है सो वहां भीड़ जुटाने के पुख्ता इंतजाम हुए। सरकारी बसों में लोग भरकर लाए गए, प्रदेश सरकार ने भीड़ जुटाने के लिए अपनी सारी मशीनरी दांव पर लगा दी तब कहीं जाकर लोग जुटे।

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क्या करें येदुरप्पा

Posted on 19 November 2011 by admin

येदुरप्पा जेल से बाहर आ चुके हैं और अब वे पार्टी में अपना पुनर्वास चाहते हैं। येदुरप्पा चाहते हैं कि अब वक्त आ गया है कि उन्हें कर्नाटक प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनाया जाए। इस मुहिम को परवान चढ़ाने के लिए येदुरप्पा ने अपने प्यारे सदानंद गौड़ा को अडवानी के पास भेजा, पर वहां येदुरप्पा के प्रखर विरोधी अनंत कुमार की महत्वाकांक्षाएं आड़े आ गईं। अडवानी ने टाल-मटोल करते हुए कह दिया कि संसद के शीतकालीन सत्र के बाद इस मामले पर पार्टी हाईकमान विचार कर सकता है। इस पर येदुरप्पा ने अपनी फरियाद पार्टी अध्यक्ष गडकरी तक पहुंचा दी। गडकरी खुलकर येदुरप्पा के समर्थन में उतर आए हैं। गडकरी का साफ मानना है कि प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति से भला संसद सत्र का क्या लेना-देना?

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भाजपा की जड़ में मट्ठा

Posted on 19 November 2011 by admin

कर्नाटक में भाजपा की जड़ों में मट्ठा डालने के कार्य में कांग्रेस अभी से जुट गई है। बेल्लारी सांसद जे. शांता और रायचूर से भगवा सांसद एस. पकिरप्पा से कांग्रेसी मैनेजरों ने लगातार संपर्क बनाया हुआ है। ये दोनों सांसद वाल्मीकि नायक समाज से आते हैं। समझा जाता है कि इन दोनों सांसदों पर सबसे पहले कांग्रेसी नेता देशपांडे (प्रफुल्ल पटेल के समधी) ने डोरे डाले। फिर इन दोनों सांसदों से प्रणब दा की बात कराई और एक तरह से प्रणब दा ने इन्हें आश्वस्त किया है कि अगर ये सांसद चाहें तो वे अगला चुनाव कांग्रेस की टिकट पर लड़ सकते हैं, क्योंकि कांग्रेस का हाथ अब उनके साथ है।

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संसद सत्र में भाजपा

Posted on 19 November 2011 by admin

इस बार के संसद सत्र में भाजपा का रूख अपेक्षाकृत सख्त रहने वाला है। लोकपाल बिल पर बोलने का बीड़ा खुद सुषमा स्वराज उठाएंगी। ब्लैक मनी पर अगर अडवानी नहीं बोले तो वरूण गांधी पार्टी के पहले वक्ता के तौर पर बोल सकते हैं। महंगाई पर यशवंत सिन्हा बोलेंगे। एफडीआई स्कैम का मुद्दा भी भाजपा उठा सकती है। लैंड बिल पर भी भाजपा का रूख कड़ा रह सकता है। इसके अलावा पार्टी के युवा सांसद वरूण आरटीआई एक्टिविस्ट की लगातार हो रही हत्याओं पर भी बोल सकते हैं।

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आओ मनमुटाव दूर करें

Posted on 19 November 2011 by admin

संसद के मानसून सत्र में कई ऐसे वाकये घटित हुए जिससे लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार व नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज के बीच रिश्तों में दरार साफ देखी गई। तेलांगना मुद्दे पर सुषमा की स्पीच में क्या खूब टोका-टाकी हुई, जवाब में सुषमा ने अन्ना मुद्दे पर राहुल गांधी के भाषण की धाियां उड़ायी और राहुल को समय देने के मामले पर स्पीकर के निर्णय पर सवाल उठाए। फिर लोकसभा सचिवालय में महासचिव की नियुक्ति का मुद्दा भी सुषमा ने प्रमुखता से उठाया। पर अब लगता है कि मीरा कुमार मैडम स्वराज की नाराजगी दूर करने की कोशिश कर रही हैं। पहले तो दीपावली के मौके पर उन्होंने भाजपा नेत्री को एक सुंदर सी साड़ी भेंट की, अब ऐन शीतकालीन सत्र शुरू होने से ठीक पहले सुषमा के हाथों को गर्मजोशी से थाम दैनिक अखबारों में बड़े फोटो छपने के मौके दिए। यह सब इसलिए कि कम से कम संसद का शाीतकालीन सत्र तो ठीक-ठाक से निपटे।

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अजीत की जीत

Posted on 19 November 2011 by admin

अजीत सिंह लगभग 40 सीटों पर मान गए हैं। गुरूवार को उनकी दिग्विजय सिंह के साथ एक अहम बैठक हुई। समझा जाता है कि दिग्गी राजा ने उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने का प्रस्ताव दिया है। अजीत को पहले जल संसाधन मंत्रालय ऑफर किया गया था जिसे अजीत ने मना कर दिया। अब प्रस्ताव दो-तीन मंत्रालयों के इर्द-गिर्द भटक रहा है।मसलन, नागरिक उड्डययन, कॉमर्स में से इंडस्ट्री को अलग किया जा सकता है, कृषि में से खाद एवं र्आपूत्ति को अलग किया जा सकता है, अब निर्णय तो अजीत को ही करना है।

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गडकरी के फैसले की घड़ी

Posted on 19 November 2011 by admin

12 दिसंबर को नागपुर हाई कोर्ट का एक अहम फैसला आने वाला है जो भाजपाध्यक्ष नितिन गडकरी के राजनैतिक भविष्य का फैसला कर सकता है। और यह भी फैसला कर सकता है कि गडकरी को दूसरा अध्यक्षीय टर्म मिलेगा कि नहीं। योगिता ठाकरे का परिवार हर संभव लड़ाई लड़ने के मूड में है। पर कांग्रेस है कि इस मामले को ज्यादा तूल नहीं देना चाहती, क्योंकि बतौर भाजपाध्यक्ष गडकरी कांग्रेस को सूट करते हैं। वैसे 12 दिसंबर महाराष्ट्र भाजपा के एक महत्वपूर्ण नेता गोपीनाथ मुंडे का जन्मदिन भी है। पर यह महज इत्तफाक है कि इससे गडकरी व मुंडे के वर्चस्व की लड़ाई का कोई लेना-देना नहीं।

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प्रणब दा को गुस्सा क्यों आता है?

Posted on 19 November 2011 by admin

प्रणब दा को इन दिनों जल्दी गुस्सा आ जाता है। संसद की लाइब्रेरी में मीरा कुमार की अध्यक्षता में जब सर्वदलीय बैठक चल रही थी तो कम्यूनिस्ट पार्टी के वासुदेब आचार्य ने ‘पेंशन रेग्यूलेशन’ को लेकर कुछ सवाल उठाए इस पर प्रणब दा उखड़ गए और बोले, ‘अगर आप इस बिल के मेरिट पर कुछ सवाल उठाना चाह रहे हैं तो इसके लिए यह मीटिंग नहीं बल्कि पार्लियामेंट है।’ लालू भी ब्लैक मनी वाली लिस्ट को सार्वजनिक करने की बात कर रहे थे, इस पर प्रणब दा ने तल्खी से कहा कि ‘स्विस सरकार से जो हमारा समझौता हुआ है उसके मुताबिक हम खाताधारियों को भारत में टैक्स जमा करवाने के लिए बाध्य कर सकते हैं पर हम उन पर मुकदमा नहीं चला सकते।’ पर जब लालू प्रणब दा जवाब से संतुष्ट नहीं हुए तो प्रणब दा ने चिढ़कर कहा, ‘हमसे पहले जो सरकारें थीं उन्होंने काले धन मसले पर अब तक क्या किया?’

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…और अंत में

Posted on 13 November 2011 by admin

पेट्रो पदार्थो के बढ़ी कीमतों पर समर्थन वापसी का डर दिखाने वाली ममता बनर्जी ने यूपीए सरकार के समक्ष हथियार डाल दिए हैं। समझा जाता है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल को 19 हजार करोड़ के केंद्रीय पैकेज का ऐलान हो सकता है, यह पैकेज ममता के मंसूबों से भी कहीं ज्यादा बडे हैं।

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