Posted on 18 September 2011 by admin
भाजपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य पीयूष गोयल भले ही पेशे से चार्टर्ड एकाऊंटेंट हो पर प्रवृत्ति उनकी एक अर्थशास्त्री की है, अभी हाल में ही जब एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल जिसमें जद(यू) के एन.के.सिंह (जो रिवन्यू सचिव भी रह चुके हैं) सहित अन्य 4 और सांसद शामिल थे, इंडो-जापान पार्टनरशिप में अगर किसी भारतीय के भाषण की सबसे ज्यादा तारीफ हुई तो वह पीयूष गोयल का भाषण था, उन्होंने जापान की हाईकॉस्ट इकोनॉमी को लानतें-मलानतें भेजते उन्हें सलाह दे डाली कि अगर जापान को सचमुच वैश्विक बाजार में टिके रहना है उसे प्रतिद्वंद्विता करनी है तो उन्हें भारत से सस्ती लेबर आयात करनी होगी। कांफ्रेंस में मौजूद क्योटो के सांसद पीयूष के भाषण से इतने अभिभूत हुए कि वे इस समारोह की समाप्ति के बाद उन्हें अपने साथ लेकर क्योटो चले गए, भारतीय प्रतिनिधिमंडल की स्वदेश वापसी के दो दिनों के उपरांत पीयूष वापिस मुंबई पहुंचे।
Posted on 18 September 2011 by admin
बदलते वक्त ने राहुल को भी बदल दिया है, उनकी सियासी सोच भी बदली है और सियासी भाव-भंगिमाएं भी। पिछले दिनों सेंट्रल हॉल में राहुल यूपी के बांसगांव के युवा भाजपा सांसद कमलेश पासवान से चलते-चलते बतिया रहे थे, कि पीछे से राज्य मंत्री आर.पी.एन.सिंह ने राहुल को आवाज लगाई-‘सर वह यूपी वाला पेपर आपने देख लिया…।’ राहुल यह बात अनसुनी कर आगे बढ़ते रहे कि मंत्री जी भाग-भाग कर राहुल के एकदम सामने आ गए और अपना वही सवाल उनसे दुहरा दिया, राहुल ने चुभती नजरों से अपने कांग्रेसमैन की तरफ देखा और बेहद तल्खी से कहा-‘पढ़ लूंगा तो बता दूंगा।’ और आगे बढ़ गए, जबकि कल तक यही राहुल अपनी मंडली के लोगों से चहक कर बतियाते देखे जाते थे। कुछ तो ऐसा हुआ है जिसने राहुल को अपने पैंतरे बदलने पर मजबूर कर दिया है।
Posted on 18 September 2011 by admin
गंगावरम पोर्ट का मामला फिर से गर्माने वाला है, समझा जाता है कि इसी मसले पर पूर्व स्टील मंत्री वीरभद्र सिंह की कुर्सी चली गई थी। क्योंकि गंगावरम पोर्ट को परमानेंट करने की मुहिम उनके वक्त ही शुरू हुई थी और बोर्ड ने भी बकायदा इसके 15 साल का एग्रीमेंट स्वीकृत कर दिया था। पर लगता है निवर्तमान मंत्री अपने पूर्ववर्ती मंत्री की रुखसती से कोई सबक नहीं सीखा है, वे भी उपकृत होने को तैयार हैं यानी गंगावरम को उनकी स्वीकृति किसी भी पल मिल सकती है। आखिर गंगावरम से कांग्रेस आलाकमान की इतनी नाखुशी का राज क्या है? जबकि इसका उद्धाटन राजशेखर रेड्डी के मुख्यमंत्रित्व काल में स्वयं सोनिया गांधी के करकमलों से हुआ था। सूत्र बताते हैं कि इस पोर्ट में जगन मोहन रेड्डी का एक बड़ा शेयर है, जिसकी रखवाली उनके फ्रंटमैन डी.वी.एस.राजू करते हैं। वैसे भी विशाखापत्तनम में ही एक और बंदरगाह है काकीनाडा, पर यहां 50 हजार टन से कम वजन के मालवाहक जहाज आ सकते हैं, जबकि गंगावरम पोर्ट केप साइज (50 हजार टन से डेढ़ लाख टन) जहाज के ज्यादा उपयुक्त है। गंगावरम को स्थायी करने की योजना लंबे समय से चल रही है पर अब तक कोई केंद्रीय मंत्री इस पर अपनी स्वीकृति की मुहर नहीं लगा पाया है अब मंत्री जी यह घृष्टता करने को तत्पर हैं तो कोई क्या करे?
Posted on 18 September 2011 by admin
अमर सिंह जब तक तिहाड़ में थे परेशान-हाल थे, उनका बड़बोलापन यूं तो जेल में भी बदस्तूर जारी था, पर उनका स्वास्थ्य वहां सचमुच बिगड़ने लगा था, उनके शरीर में इंफेक्शन फैलने लगा था, शायद इसी वजह से जेल में कभी-कभी वे अपना आपा खो बैठते थे, यूं ही चिल्लाकर कहते थे-‘या तो मैं मर जाऊंगा या तो मरने से पहले अपना मुंह खोलूंगा, तो बड़े-बड़े लपेटे में आएंगे।’ जाहिर है अमर के सीने में कुछ राज दफन हैं जिनका सिरा ‘कैश फॉर वोट’ और न्यूक्लीयर डील से जुड़ता है। सबसे हैरानी तो सर्वशक्तिमान अमरीका की अमर में दिलचस्पी को लेकर है, भारत स्थित अमरीकी दूतावास अमर की खैर-मकदम व कुशलक्षेम जानने को सदैव तत्पर रहता है, अमरीका की अमर में इतनी दिलचस्पी सचमुच हैरत पैदा करने वाली है।
Posted on 18 September 2011 by admin
दिल्ली हाई कोर्ट बम ब्लास्ट का केस देख रही एनआइए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) के अब तक के प्रदर्शन पर सरकार नाराज है। सरकार नाराज है कि 2611 के बाद जिन उद्देश्यों के लिए एनआइए का गठन हुआ था एजेंसी उसमें सफल नहीं हो पाई है। अब तक एक भी केस कायदे से निपटा नहीं है। पर एनआइए क्या करे, उसे लगता है कि सरकार ने उन्हें कोई कायदे की कानूनी सुरक्षा भी नहीं दी है। अब इसकी डयूटी में आतंकवाद की जांच (इंवेस्टिगेट) करनी है, उसे रोकना (प्रीवेंट)है, और दोषियों को सजा (प्रोसिक्यूट)दिलानी है। पर सवाल उठता है कि जब एनआइए के पास अपना कोई खुफिया (इंटेलीजेंस) सेटअप ही नहीं तो वह सूचना कहां से बटोरेगी? यही कारण है कि 2611 के बाद से लेकर इसने किसी भी केस को उसके मुकाम तक नहीं पहुंचाया है। एनआइए के पास न तो अपना एक्टिव इंटेलीजेंस है और न ही उसे अन्य सरकारी खुफिया एजेंसियों से ससमय सूचनाएं मिल पाती हैं। होना तो यह चाहिए था कि इसके अंदर देशभर के सबसे उम्दा आइपीएस अफसरों की बहाली हो, इन्हें अलग-अलग राज्यों से चुना जाना चाहिए था। पर हो क्या रहा है? इसमें वैसे अफसरों की कालापानी पोस्टिंग हो रही है जिनसे राज्य के सीएम नाराज हैं, इनमें से ज्यादातर अफसर ऐसे हैं जिनकी उनके सर्विस काल में कभी आतंक प्रभावित इलाकों में पोस्टिंग ही नहीं हुई है, साथ के अन्य अफसरों की न तो प्रोफेशनल ट्रेनिंग हुई है और न ही कानूनी। इनके पास इंटेलीजेंस गैदरिंग की कोई मशीन नहीं है, सुपर कॉप जैसी कोई टीम नहीं है, न ही रिबोरो या गिल जैसा इनके पास कोई सक्षम नेतृत्व है, तो अकेले एनआइए को इसके लिए क्यों दोषी ठहराया जाए?
Posted on 13 September 2011 by admin
राजनीतिज्ञों ने ज्यादातर न्यूज चैनलों के एंकर के बारे में अब कहना शुरू कर दिया है कि वे न्यूजमैन कम, न्वॉयजमैन ज्यादा हो गए हैं।
Posted on 13 September 2011 by admin
कांग्रेसी हलकों में यह सवाल बारंबार पूछा जा रहा है कि अन्ना प्रकरण पर संसद में राहुल के लिखित भाषण को किस जीनियस ने तैयार किया था जिसकी वजह से मनमोहन की निकल पड़ी और राहुल का शो फ्लॉप साबित हुआ तो तमाम इशारे कपिल सिब्बल की ओर हो रहे हैं।
Posted on 13 September 2011 by admin
प्रधानमंत्री के पूर्व मीडिया सलाहकार संजय बारू जो फिलहाल जिनेवा और न्यूयॉर्क की यात्रा पर हैं, 19 तारीख को स्वदेश लौट आएंगे और अपने बिजनेस स्टैंडर्ड अखबार की नौकरी से 1 नवंबर को त्याग पत्र देकर लंदन अवस्थित ‘इंस्टीटयूट ऑफ स्ट्रेटिजक स्टडीज’ ज्वॉइन कर लेंगे, पर उनकी पोस्टिंग दिल्ली में रहेगी ताकि वे और मुक्त भाव से प्रधानमंत्री को अपनी सलाहों से नवाज सके।
Posted on 13 September 2011 by admin
यह पहली दफा नहीं है कि केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा की कोई शिकायत प्रधानमंत्री के पास पहुंची हो, ताजा मामला वर्मा के मंत्रालय के अधीनस्थ आने वाले एनएमडीसी (नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) के सीएमडी की नियुक्ति से जुड़ा है। पीएसबी यानी पब्लिक इंटरप्राइजिंग सेलेक्शन बोर्ड ने सीएमडी पद के लिए जिस ईमानदार अफसर एम.एस.राणा का चयन किया है, माइनिंग लॉबी के दबाव में आकर कथित तौर पर मंत्री जी राणा की जगह एनएमडीसी में डायरेक्टर टेक्निकल एन.के.नंदा की वकालत कर रहे हैं, नंदा वही हैं जो पहले बेल्लारी से माइनिंग के इंचार्ज थे, और आज बेल्लारी का इतिहास किसी से छुपा नहीं रह गया है। स्वयं पीएमओ राणा के पक्ष में बताया जाता है, क्योंकि मिंट के प्रभारी रहते हुए राणा ने जिस तरह के युगांतकारी कदम उठाए हैं पीएमओ चाहता है कि राणा यही करिश्मा एनएमडीसी में भी दिखाएं, पर स्वयं मंत्री जी पीएमओ की इस राय से इत्तफाक नहीं रखते।
Posted on 13 September 2011 by admin
अडवानी को सियासत के नेपथ्य में धकेलने वालों (संघ) के लिए इस बूढ़े शेर की नई हुंकार एक नई चुनौती के समदृश है, अडवानी ने जैसे यह साबित करने को ठान लिया है कि न तो वे टायर्ड (थके) हैं न रिटायर्ड हैं। अडवानी कहते हैं कि उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ रथ यात्रा निकालने के लिए बकायदा गडकरी से विचार विमर्श किया है, पर गडकरी खेमे का कहना है कि अडवानी ने बस इसकी सूचना भर दी थी। यानी कौन कहता है कि प्रधानमंत्री की दौड़ में अडवानी शामिल नहीं है। पर सबसे बड़ा आश्चर्य तो यह कि अडवानी की इस प्रस्तावित रथ यात्रा के सारथी बने हैं, श्रीकथा अंनते के प्रमुख सूत्रधार अनंत कुमार। अनंत कुमार अब भ्रष्टाचार के खिलाफ अलख जगाने की मुहिम के अगुआ बने यह बात सहज गले से उतरती नहीं क्योंकि उनके बारे में सबसे ज्यादा यही बात मशहूर है कि वे जहां खड़े हो जाते हैं, भ्रष्टाचार वहीं से शुरू होता है।