Posted on 26 September 2011 by admin
चिदंबरम और प्रणब दा के बीच तो जंग का ऐलान तब ही हो चुका था जब बतौर गृह मंत्री पीसी ने कथित तौर पर प्रणब के बेटे का डॉसियर बनवा लिया था कि एक बड़े कॉरपोरेट हाउस के लिए वे किस प्रकार की ‘लाइजनिंग’ करते हैं। इससे नाराज प्रणब दा ने अपने मंत्रालय के अधीनस्थ आने वाले ईडी से कहकर चिदंबरम पुत्र कार्तिक का पूरा काला चिट्ठा तैयार करवा लिया था और शेयर घोटालों की पूरी इबारत लिखवा ली थी। दरअसल, चिदंबरम की नजरें पीएम की कुर्सी पर हैं और वे जानते हैं कि उनकी राह में प्रणब ही सबसे बड़ी बाधा हैं, इसी बाधामुक्ति यक्ष की परिणति थी ‘बगिंग’ की कहानी जो अब सार्वजनिक हो चुकी है, सार्वजनिक तो प्रणब की चिट्ठी भी हो चुकी है।
Posted on 26 September 2011 by admin
विकीलिक्स के रोजबरोज खुलासे भारत स्थित अमरीकी दूतावास के लिए परेशानियों का सबब बन गए हैं, अमरीकी अधिकारियों को राजनैतिक सूचनाओं का टोटा पड़ गया है, खास राजनैतिक जानकारियों के लिए उन्हें दूसरे-तीसरे सोर्स पर निर्भर करना पड़ रहा है। अमरीकी अधिकारी जब भी किसी बड़े नेता से मिलने का टाइम मांग रहे हैं, नेताजी उनसे मिलने से भी कतरा रहे हैं। व्यस्तताओं का बहाना बनाकर मिलने का समय नहीं दे रहे। अगर किसी पार्टी या समारोह में नेताजी किसी अमरीकी अधिकारी से टकरा भी जाते हैं तो मात्र अभिवादन कर आगे बढ़ जाते हैं सो राजनैतिक जानकारियों के मामले में पिछड़ता ही जा रहा है अमरीका!
Posted on 26 September 2011 by admin
बेनी प्रसाद वर्मा अपने को यूपी में ‘फोकस’ कर रहे हैं, अपनी इमेज ‘मेकओवर’ अभियान को भी पूरी रफ्तार से दौड़ा रहे हैं, उनके इलाके गोंडा में बड़ी संख्या में हैंडपंप लगाए जा रहे हैं, (यह काम एक पीएसयू सरंजाम दे रही है),उनके बड़े-बड़े होर्डिंग्स, बैनर, पोस्टर, कटआउट्स लग रहे हैं। टीवी और न्यूज पेपर में भी धड़ल्ले से उनके मुंह-दिखाऊ विज्ञापन आ रहे हैं। बेनी का सारा सियासी कारोबार उनके दो बेहद करीबियों के सुपुर्द है आर.सी.पी.सिंह और शीतल सिंह। जब ये संचार मंत्री थे तो आर.सी.पी उनके पीएस हुआ करते थे, बेनी के मौजूदा पीएस रवीश कुमार को भी आर.सी.पी का ही करीबी माना जाता है, आर.सी.पी जातिगत समीकरणों की वजह से नीतीश के भी बेहद करीबी हैं। शीतल सिंह एक पार्टटाइम पत्रकार व दिल्ली के एक बड़े धंधेबाज हैं, जिनका ज्वॉइंट सेक्रेटरी यूपी सिंह के साथ भी गहरा रिश्ता है, शीतल व आर.सी.पी मिलकर एक तरह बेनी के मंत्रालय के तमाम बड़े फैसलों को प्रभावित व नियंत्रित करने का माद्दा रखते हैं।
Posted on 26 September 2011 by admin
विकीलिक्स में माया मेम साहब के बारे में कई दिलचस्प खुलासों के बाद मायावती ने खम्म ठोंककर ऐलान किया था कि वह सतीश मिश्रा और शशांक शेखर को पहले से कहीं बड़ी जिम्मेदारियां सौंपेगीं। पर हुआ इसका उल्टा, सीएम कार्यालय के पंचम तल पर माया के ठीक बगल के कमरे में उनके एडवाइजर सतीश मिश्रा बैठा करते थे, आनन-फानन में मिश्रा से यह कमरा खाली करवा लिया गया है। और अब मिश्रा अपना ज्यादातर वक्त दिल्ली में गुजार रहे हैं, उन्हें अक्सरां अपने औरंगजेब रोड स्थित निवास में देखा जा सकता है, जहां कभी नवीन पटनायक रहा करते थे।
Posted on 26 September 2011 by admin
दस जनपथ व सोनिया गांधी को यूपीए के शासनकाल में जाने-अनजाने ऐसा लगने लगा था कि एक ओर तो केंद्र सरकार पर राज-काज पर उनकी पकड़ ढीली पड़ गई है वहीं प्रधानमंत्री व उनकी सरकार की नाकामियों का खामियाजा भी सोनिया गांधी को ही भुगतना पड़ रहा है। तब ही नेपथ्य से यह व्यूह रचना रची गई कि दस जनपथ वफादार पुलक चटर्जी को टी.के.ए.नायर की जगह लाया जाए तो पिछले सात वर्षों से पीएमओ में डटे हुए हैं, पर पीएम नायर को छोड़ने को तैयार नहीं हैं, वे नायर को राज्य मंत्री का दर्जा देकर अपना ‘एडवाइजर’ बनाना चाहते हैं, वहीं दस जनपथ चाहता है कि नायर को राजस्थान का गवर्नर बना दिया जाए, तर्क है कि शिवराज पाटिल को इन दिनों पंजाब के साथ-साथ राजस्थान की भी दोहरी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना पड़ रहा है। दस जनपथ को मालूम है कि अगर नायर प्रधानमंत्री के इर्द-गिर्द रहेंगे तो दस जनपथ के बेहद भरोसेमंद व 1974 बैच के यूपी काडर के आइएएस पुलक चटर्जी के लिए पीएमओ में सोनिया की इच्छाओं को सिरे चढ़ाना इतना आसान नहीं होगा।
Posted on 26 September 2011 by admin
राजीव शुक्ला आइपीएल के नए चैयरमैन हैं, उनकी मंशा आइपीएल के ऊपर लगे दाग-धब्बों को धोने की है। वे सबसे पहले आइपीएल व इसके फ्रेंचाइजी के लिए एक नए दिशा-निर्देश को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। अव्वल तो यह कि अब आइपीएल में सिर्फ 9 टीमें ही भाग लेंगी। शुक्ला भले खुद ही पेज-थ्री पार्टियों के शौकीन हों, पर मैच की पूर्व रात्रि पर फ्रेंचाइजियों द्वारा दी गई पार्टियों में खिलाड़ियों के शामिल होने की अनिवार्यता के खिलाफ हैं, उनका मत है कि देर-रात की पार्टियों से खिलाड़ियों के परफॉरमेंस पर फर्क पड़ता है। सो फ्रेंचाइजी ऐसी पार्टियों में शामिल होने के लिए अपने प्लेयर्स को मजबूर नहीं कर सकते। आइपीएल के शुभारंभ को रंगारंग बनाने की तैयारियों में शुक्ला अभी से जुट गए हैं, यह आयोजन चैन्नई में होना है और शुक्ला चाहते हैं कि ओपनिंग सिरेमनी ओलंपिक या कॉमनवेल्थ के रंगारंग कार्यक्रम की टक्कर का हो। जिसके आयोजन के लिए वे शीघ्र ही देश-विदेश की बड़ी इवेंट-मेनेजमेंट कंपनियों से आवेदन मंगाने की तैयारियों में जुटे हैं, यानी शुक्ला जी यह साबित करने में जुटे हैं कि वे हर खेल के माहिर खिलाड़ी हैं।
Posted on 26 September 2011 by admin
सियासत अब से पहले इतनी खूंखार कभी न थी, अब तो इससे होकर गुजरने में भी डर लगता है, जाने गर्दन में उतर जाएंगे कितने दांत, सड़क पर सरेआम टप-टप बरसता सुर्ख लहू, आसमां सिंदूरी, चांद लाल होगा… हर पल तुम्हें इस जंगल से गुजरने का मलाल होगा… अब तो कांग्रेसी भी खुलेआम कहने लगे हैं कि प्रधानमंत्री के वकील सलाहकार अब पार्टी का बेड़ा गर्क कर रहे हैं, और पीएम राजनैतिक इच्छा शक्ति से नहीं अपितु आइपीसी (पी.चिदंबरम) और सीआरपीसी (कपिल सिब्बल) से सरकार व देश चला रहे हैं।
Posted on 26 September 2011 by admin
एक मैली सी गठरी लिए दबे पांव चुपचाप भाग रहा था वह, पर रहजनों की नजरों से बच पाना कब इतना आसान था, लिहाजा उसे दौड़ा-दौड़ा के मारा गया, लहूलुहान होता रहा उसका ईमान, जो उसने बड़ी जतन से अपनी गठरी में संभाल रखा था। कांग्रेसी उस घड़ी को कोस रहे हैं कि जब बेहद एक मामूली सी मांग को लेकर अरविंद केजरीवाल उनके दर पर आए थे, तो तत्कालीन केंद्रीय राज्य मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने केजरीवाल की एनजीओ को वह काम देने से क्यों मना कर दिया था, केजरीवाल आरटीआई को फोन और ऑनलाइन शुरू करने का प्रस्ताव लेकर चव्हाण के पास आए थे, पर चव्हाण ने अनजाने में ही इस प्रस्ताव को नकार दिया, जबकि वहीं नीतीश ने केजरीवाल को बुलाकर यही योजना बिहार में शुरू करने को कहा, आज बिहार में यह योजना फल-फूल रही है और उससे भी कहीं ज्यादा फल-फूल रही है नीतीश की उद्दात महत्त्वाकांक्षाएं क्योंकि वे जानते हैं कि टीम अन्ना का समर्थन उनके साथ है।
Posted on 26 September 2011 by admin
कभी जिस एनएसी (राष्ट्रीय सलाहकार परिषद) पर कांग्रेस इतना इतराती थी, आज उसे वह अपने गले का फांस मान रही हैं। कांग्रेसियों को लगता है कि एनएसी के दबाव की वजह से ही उन्हें आनन-फानन में आरटीआई एक्ट लागू करना पड़ा था, आज वही आरटीआई एक्टिविस्ट (मसलन अरविंद केजरीवाल) पार्टी की जान हलकान किए हुए हैं। अब कांग्रेस आरटीआई आंदोलन कर्मियों पर निशाना बनाने का उपक्रम साध रही है, कांग्रेस इन आंदोलनकर्मी व कॉरपोरेट सेक्टर की मिलीभगत का भी भंडाफोड़ करना चाहती है, सारे तथ्य जुटाए जा रहे हैं कि कितने आरटीआई आवेदन अब तक वापिस ले लिए गए हैं, कांग्रेस इन विड्रॉल आवेदनों में लेन-देन के मामले को सूंघ रही है।
Posted on 26 September 2011 by admin
हालांकि तमिलनाडु की राजनीति में राजनेताओं का देवी-देवताओं के अवतार व गेटअप में सामने आना कोई नई बात नहीं है। फरवरी 2006 में अपने 58वें जन्मदिन के मौके पर जे.जयललिता अन्न की देवी अन्नपूर्णा के अवतार में सामने आई थीं। पुष्प-कमल पर बैठी देवी अवतार में जयललिता के एक हाथ में अन्न से भरा कटोरा था तो दूसरे में कड़छी। कुछ हिंदू संगठनों ने तब इसका विरोध भी किया था। इससे पहले शहर भर में ‘वर्जिन मेरी’ के रूप में जब जयललिता के पोस्टर लगे थे तो क्रिश्चियन संगठनों के मुखर विरोध के बाद उसे हटा लिया गया था। करुणानिधि ने स्वयं को चुनावी युध्द में अर्जुन के रूप में दिखाया था और अपने पुत्र स्टालिन को अपने सारथी कृष्ण के रूप में। करुणानिधि के बड़े बेटे व केंद्र सरकार में मंत्री एम.के.अझागिरी का मन जब स्वयं को शिव व राम का अवतार दिखाने से नहीं भरा तो सन् 2008 में उन्होंने खुद को पोप बेंडिक्ट XVI के रूप में दिखा दिया, उनके इस पोप रूप की सर्वत्र भर्त्सना हुई, महज एक दो रोज के अंदर उनके सारे पोस्टर हटा लिए गए। पर चिदंबरम को कृष्ण के अवतार में दिखाने वाले पोस्टर के विरोध की न तो किसी को हिम्मत हुई और न ही इन पोस्टर-होर्डिंग्स को हटाया ही गया।