Posted on 21 August 2011 by admin
राहुल गांधी 22 तारीख को फिर से अमरीका जा रहे हैं अपनी बीमार मां के पास, पर 23 तारीख को प्रियंका गांधी की स्वदेश वापसी हो रही है, यानी गांधी परिवार का कोई न कोई नुमांइदा अब दिल्ली में बना रहेगा। उम्मीद जताई जा रही है कि चूंकि सोनिया के स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार हो रहा है, सो वे 30 अगस्त तक दिल्ली वापिस लौट सकती हैं।
Posted on 21 August 2011 by admin
टोटू बोस कोलकाता के बड़े बिजनेस मैन हैं जो ममता दीदी के बेहद करीबियों में शुमार होते हैं, ममता ही उन्हें राज्यसभा में लेकर आई थीं। इस दफे ममता ने टोटू की जगह उनके बेटे को उपकृत किया है। जो 20 तारीख से राज्यसभा में आएंगे। सत्र के पिछले दिनों टोटू सभापति के पास पहुंचे और उनसे कहा कि उनका बेटा उनसे भी दोगुना मोटा है,चुनांचे उन्हें सदन में एक बड़ी सीट एलॉट की जाए। हैरान-परेशान सभापति ने उन्हें समझाना चाहा कि सदन की सारी सीटें एक जैसी हैं, और वे चाहकर भी उनके बेटे को दो सीटें एक साथ एलॉट नहीं कर सकते। बीच का रास्ता निकाला संसदीय राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने, उन्होंने पिता बोस को तसल्ली दी कि उनके पुत्र के साथ वाली सीट किसी दुबले-पतले सांसद को आबंटित कर दी जाएगी, तब कहीं जाकर यह मामला सुलटा।
Posted on 21 August 2011 by admin
पार्टी लाइन से दीगर भाजपा के भगवा गांधी वरुण अण्णा पर जो स्टैंड ले रहे हैं इससे युवाओं में उनकी लोकप्रियता बढ़ी है, टि्वटर पर भी उनके ट्वीट को जहां जबर्दस्त रिस्पांस मिल रहा है, वहीं पार्टी भी अब कमोबेश उनके स्टैंड को मजबूती देने के लिए लामबंद हो रही है। सनद रहे कि पहले वरुण ने अण्णा को अनशन के लिए अपना घर देने की पेशकश की थी, बाद में वे जन लोकपाल बिल को बतौर प्राइवेट मेंबर बिल लाने के लिए प्रत्यनशील हुए। यहां तक कि वे अण्णा आंदोलन को समर्थन देने राजघाट भी गए। सियासी हलकों में अटकलें तेज हैं कि बतौर प्रधानमंत्री राहुल की ताजपोशी का वक्त आ गया है, ऐसे में वरुण की सियासी सक्रियता के निहितार्थ को सहज समझा जा सकता है।
Posted on 21 August 2011 by admin
अरुण जेतली के सितारे इन दिनों बुलंदियों पर हैं, राज्यसभा में उनका भाषण सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर गया, लगता है उनकी एक पुरानी मांग अब बस परवान चढ़ने वाली है, जेतली का हमेशा से मानना रहा है कि जजों की नियुक्ति के लिए भारत को एक ‘नेशनल ज्यूडिशियल कमीशन’ चाहिए, अभी यह काम ‘कॉलेजियम ऑफ जजेज’ के मार्फत होता है। सो सरकार ने भी ‘ज्यूडिशियल कमीशन’ के लिए पूरा मन बना लिया है।
Posted on 21 August 2011 by admin
मनीष तिवारी के बाद क्या अब संजय निरूपम व राशिद अल्वी की बारी है? ये दोनों भी जोश-जोश में कुछ ज्यादा बोल जाते हैं। इनकी अंग्रेजी भी माशा अल्ला है! सो, जब संजय निरूपम एक अंग्रेजी चैनल में बेसाख्ता कह बैठे-‘अन्ना वॉज ए हीरो, अन्ना इज ए हीरो’ तो एंकर ने झटपट से पूछ लिया कि क्या यह अण्णा के बारे में कांग्रेस की यह आधिकारिक राय है तो वे बगले झांकते दिखे।
Posted on 21 August 2011 by admin
एक तरह से अहमद पटेल इन दिनों कांग्रेस के ‘डिफेक्टो अध्यक्ष’ बनकर पार्टी व सरकार को आवश्यक निर्देश दे रहे हैं, पर चूंकि इन दिनों रोजे चल रहे हैं और पटेल पांचों वक्त के नमाजी हैं,सो उनका ज्यादातर वक्त खुदा की इबादत में लग रहा है, बचा वक्त ही वे सरकार व पार्टी को दे पा रहे हैं, सो ज्यादातर वक्त उनका मोबाइल ‘स्विच ऑफ’ रहता है यहां तक कि आने वाले एसएमएस के जवाब भी वे नहीं दे पा रहे हैं।
Posted on 21 August 2011 by admin
मनीष तिवारी को जनार्दन द्विवेदी और दिग्विजय सिंह ने ब्रीफ किया था कि उन्हें जस्टिस सावंत की रिपोर्ट का हवाला देते हुए अण्णा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करने हैं, पर जोश ही जोश में तिवारी अण्णा को सिर से पांव तक भ्रष्टाचार में डूबा बता गया, बस यहीं से डूबनी शुरू हो गई कांग्रेस की नैया।
Posted on 21 August 2011 by admin
अब यह वकील तिकड़ी (सिब्बल, चिदंबरम, खुर्शीद) सारा दोष दिल्ली के पुलिस कमिश्नर पर मढ़ रही हैं, इनका मानना है कि कमिश्नर वी.के.गुप्ता अपने भोलेपन में अरविंद केजरीवाल की बातों में आ गए। सनद रहे कि केजरीवाल के कहने पर ही कमिश्नर जेपी पार्क के लिए तैयार हो गए थे, पर 15 अगस्त से ही जिस प्रकार की भीड़ जुटनी शुरू हुई दिल्ली पुलिस ने इसकी कल्पना नहीं की थी।
Posted on 21 August 2011 by admin
अण्णा मामले पर कांग्रेस के अंदर दरार पड़ चुकी है, चंद वकील कांग्रेसियों की बात जाने दीजिए, नहीं तो ज्यादातर कांग्रेसी इस राय के हैं ‘अण्णा मामले’ में सरकारी तंत्र से नादानी हुई है। सीसीपीए (5 सदस्यीय इस कमेटी में प्रधानमंत्री, प्रणब मुखर्जी, चिदंबरम, कपिल सिब्बल व सलमान खुर्शीद शामिल हैं) कांग्रेसियों की इस आम राय पर हावी हो गया और अण्णा को तिहाड़ में डाल दिया गया, जिसके बाद से लगातार जनभावनाएं सुलगती रहीं। नहीं तो अन्य कांग्रेसियों की राय थी कि अण्णा को या तो किसी गेस्ट हाउस में रखा जाए या फिर हवाई मार्ग से उन्हें उनके गांव रालेगण छोड़ दिया जाए, पर सिब्बल, चिदंबरम व सलमान कड़ी कार्यवाही के पक्ष में थे, प्रधानमंत्री व प्रणब की चुप्पी से उन्हें अपना मनचाहा करने का मौका मिल गया, यानी पार्टी में वकील तंत्र विजयी हुआ और कांग्रेस हार गई।
Posted on 21 August 2011 by admin
मुख्तसर 74 साल के एक बूढ़े आदमी के अनोखे संकल्प व बला की नैतिक ताकत ने बापू की याद दिला दी है, सोते हिंदुस्तानियों को जगाने के लिए हमारे सिरहाने में दशकों से पसरी उस स्याह रात के चेहरे पर आसमान के कंगूरे से उतार कर दहकते सूरज को रख दिया है, जिससे कि नई फिजां में नया उजाला तमाम बस्ती सजा रहा है…कि फरिश्ता निकला है रोशनी का हरेक रास्ता चमक रहा है, ये वक्त वो है जमीं का हर जर्रां मां के दिल सा धड़क रहा है…अण्णामय होते इस नए भारत के जज्बे को सलाम! सत्ता पक्ष की घिग्गी बंध गई है, मूक हिंदुस्तान को अभिव्यक्ति का नया हथियार मिल गया है! ऐसे में जब दिल्ली के एक बड़े अखबार समूह का संपादक जब यह बताता है कि ‘वह अन्ना क्यों नहीं है,’ इस संपादक का मानना है कि ‘यह विरोध आंदोलन है, कोई क्रांति नहीं, इसकी भावनाओं में मध्य वर्ग का पाखंड है’ तो मालिकों की ठकुरसुहाती भावनाएं ही प्रत्यंचा चढ़ती नजर आती है, मालिकों पर सरकार व कांग्रेस की कई अनुकंपाएं रही है, मालिकों का राज्यसभा में आना-जाना लगा रहा है। अखबार मालिकों के इतर कई और बिजनेस हैं, मसलन रसायन की एक बड़ी फैक्ट्री है, जहां एक खास तरह का रसायन तैयार होता है जो अफीम साफ करने के काम आता है। इस रसायन पर सरकार का नियंत्रण है। सो, फैक्ट्री से निकलते ही रसायन लदे ट्रकों का फाइलों में यदा-कदा एक्सीडेंट होता ही रहता है, रसायन खुले बाजार में बिक सकते हैं, पर जनभावनाएं नहीं। किसी के बहकावे में मत आइए, हर हिंदुस्तानी के अंदर एक अण्णा पहले से मौजूद है, उसे सांस लेने दीजिए, अगर आप चाहते हैं कि हमारा लोकतंत्र जिंदा रहे।