Posted on 26 July 2011 by admin
पल्स पोलियो की ‘एक बूंद जिंदगी’ अल कायदा के दुर्दांत सरगना लादेन के लिए मौत की आखिरी बूंद साबित हुई, एक ब्रिटिश अखबार में इस बात का हालिया खुलासा हुआ है। सीआईए को भनक भर थी कि अल कायदा का कोई ‘बड़ा’ एबटाबाद इलाके में रहता है, पर कौन? नहीं पता। पाक-अफगानिस्तान बॉर्डर स्थित खैबर पास इलाके के एक नामचीन डॉक्टर शकील अफरीदी को अमरीकी एजेंसियों ने मोटा फंड मुहैया कराया, डॉक्टर अपनी नर्सों की टीम लेकर वहां पहुंच गया, पहले फोन से पल्स-पोलियो अभियान चला, कोई सुराग नहीं मिला। डॉक्टर की नसर्ें घर-घर जाने लगीं, अब बहाना हेपिटाइटिस-बी अभियान का था, लादेन का सबसे विश्वासी अंगरक्षक कुरियर वाला निशाने पर आ गया, लादेन उस मकान के ऊपरी फ्लोर पर रहता था, कुरियर वाला अपनी बीबी-बच्चों के साथ ग्राउंड फ्लोर पर। कुरियर वाला अपनी बीबी व बच्चों के साथ डॉक्टर के मेडिकल केंद्र तक आ गया, डॉक्टर की नसर्ें सुई लगाने के बहाने कुरियर वाले के ठिकाने तक पहुंच गई, वहां उसे लादेन तो नहीं दिखा, पर महंगी एसयूवी गाड़ियां दिख गईं, सुरक्षा के चाक-चौबंद प्रबंध दिख गए और ऑपरेशन लादेन को बस हरी झंडी मिल गई।
Posted on 26 July 2011 by admin
राहुल से जुड़े सूत्र इस बात की तस्दीक करते हैं कि केंद्र में नेतृत्व परिवर्तन तो लगभग पक्का है, राहुल बाबा बस अपने मिशन यूपी के रिजल्ट के इंतजार में हैं, अगर यूपी 2012 के चुनाव में कांग्रेस सौ के आंकड़े के आसपास आ गई तो फिर राहुल के हाथों में होगी देश की बागडोर, अगर कांग्रेस 50 का आंकड़ा भी नहीं छू पाई तो फिर राहुल की जगह राहुल का कोई वफादार होगा गद्दीनशीं, चाहे वह जिस सदन का भी सदस्य हो यानी 2012 में मनमोहन की रुखसती की पूरी तैयारी है।
Posted on 26 July 2011 by admin
‘कैश फॉर वोट’ का मामला यूं अचानक जिंदा नहीं हो गया है, इसकी धौंकनी-सी चलती सांसों में किसी ने हवा फूंकी है, इसीलिए तो प्रधानमंत्री जी के चेहरे पर हवाईयां उड़ रही हैं। यूपीए-2 के शासनकाल में जब से उन्होंने अपने पर फड़फड़ाने शुरू किए हैं, उनकी उड़ने की इन अतृप्त आकांक्षाओं पर ठठाकर हंस पड़ा है आसमान, सब जानते हैं कांग्रेसी महारानी अपने कठपुतली शासक से नाराज हैं, इंतजार है तो सिर्फ यूपी चुनाव का। निजाम बदला जाएगा, राहुल बाबा के ताजपोशी की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, आने वाले दिनों में ईमानदार प्रधानमंत्री पर कई तोहमत लग सकते हैं, उन्हें बे आबरू होकर कूचे से बाहर भी निकलना पड़ सकता है। और तब तो वे बावफा का वास्ता भी नहीं दे सकते।
Posted on 18 July 2011 by admin
संसद का मानसून सत्र अपने तय समय यानी 1 अगस्त से ही शुरू होगा, प्रणबदा इसे 25 जुलाई से शुरू करवाना चाहते थे, पर इसके लिए विपक्ष सहमत नहीं हुआ।
Posted on 18 July 2011 by admin
यूपी की बाबत गडकरी ने 3 अलग-अलग एजेंसियों से सर्वेक्षण करवाए, वहां लोकप्रियता के ग्राफ में राजनाथ सिंह अव्वल आए, फिर वरुण गांधी और उमा भारती का नंबर आया। तब राजनाथ पर दबाव बनाया गया कि उन्हें यूपी में बतौर अगला सीएम प्रोजेक्ट कर चुनाव लड़ा जाए पर इसके लिए राजनाथ तैयार नहीं हुए। उनका ध्यान अब भी 2014 के चुनाव पर केंद्रित है। वे यूपी का प्रभारी बनने को भी राजी नहीं हुए (उनके चेले नरेंद्र सिंह तोमर पहले से ही यूपी के प्रभारी हैं) राजनाथ का तर्क था कि एक बार पार्टी अध्यक्ष बन जाने के बाद प्रभारी होने का कोई औचित्य नहीं रह जाता, कुशाभाऊ ठाकरे व जना कृष्णामूर्ति भी अपने अध्यक्षीय कार्यकाल के बाद कभी प्रभारी नहीं बने (हां वेंकैया नायडू जरूर इसके एकमात्र अपवाद हैं), सो केंद्रीय नेतृत्व ने राजनाथ को यूपी और उत्तराखंड पर विशेष ध्यान देने की जिम्मेदारी सौंपी है, शायद इसीलिए कलराज मिश्र खम्म ठोंककर पत्रकारों को बता रहे हैं कि राजनाथ यूपी के प्रभारी नहीं हैं।
Posted on 18 July 2011 by admin
कुछ बात है कि नितिन गडकरी पर से संघ का विश्वास डिगता ही नहीं है, संघ अब गडकरी को दूसरा टर्म दिए जाने की बजाए पार्टी अध्यक्ष का कार्यकाल ही 5 साल किए जाने की वकालत कर रहा है। जाहिर है इसके लिए पार्टी संविधान में संशोधन करना होगा, सनद रहे कि गडकरी का अध्यक्षीय कार्यकाल दिसंबर 2012 में पूरा हो रहा है।
Posted on 18 July 2011 by admin
केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल के बाद अब राज्यपालों के फेरबदल की बारी है, कर्नाटक के भारद्वाज, बिहार के देवानंद कुंवर और तमिलनाडु के बरनाला बदले जा सकते हैं। शिवराज पाटिल को दस जनपथ राज्यसभा में लेकर आना चाहता था पर उन्होंने मना कर दिया है, वे महाराष्ट्र के किसी पड़ोसी राज्य में अपना ट्रांसफर चाहते हैं।
Posted on 18 July 2011 by admin
सलमान खुर्शीद को काजल की कोठरी से बाहर आने की कला मालूम है, सो उनके कानून मंत्री बनने से कई कॉरपोरेट घराने बेतरह खुश हैं, जैसे अनिल अंबानी की एडीजे। प्रकारांतर में जब सलमान कंपनी मामलों के मंत्री थे तो उन्होंने 2जी मामले में अनिल की कंपनी को क्लीनचिट दे दी थी। अब अनिल को भरोसा है कि सलमान उन्हें कई कानूनी पचड़ों से त्राण दिलवाएंगे।
Posted on 18 July 2011 by admin
जाट नेता अजीत सिंह कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से बेतरह नाराज हैं और वे अब हर तरफ यह कहते घूम रहे हैं कि वे दो कांग्रेसी दिग्गज अहमद पटेल व दिग्विजय सिंह के आपसी शीतयुध्द की बलि चढ़ गए हैं। चूंकि अजीत का मंत्रिमंडल में आना पक्का था और यह संधि द्वार राहुल द्वारपाल दिग्विजय के मार्फत खुला था। सो, अजीत की माने तो पटेल ने एक सुविचारित नीति के तहत उनके इस मंसूबों के रेत महल को ढा दिया। कांग्रेस अजीत को एक कैबिनेट व एक राज्य मंत्री का बर्थ दिए जाने को तैयार भी थी, क्योंकि राहुल ने हालिया दिनों में जिस प्रकार जाट बहुल्य क्षेत्रों में किसानों की राजनीति की है उसे वोट के रूप में पल्लवित-पुष्पित होने में अजीत जैसे माली का साथ चाहिए था, अब तो आलम यह है कि राहुल अजीत को मिलने का भी वक्त नहीं दे रहे। अजीत दो बार कांग्रेसी युवराज से मिलने का वक्त मांग चुके हैं, राहुल ने अजीत पुत्र जयंत को जरूर मिलने का वक्त दिया पर इससे बात बनी नहीं।
Posted on 18 July 2011 by admin
सोहराबुद्दीन और इशरत जहां मुद्दे के बाद क्या जरूरी इंटेलीजेंस का टोटा पड़ गया है? क्या कारण है कि हमारे खुफिया तंत्र को ससमय अहम जानकारियां नहीं मिल पातीं? कभी भूले-भटके कोई जानकारी (कभी अमरीका के सहयोग से तो कभी पुलिसिया पूछताछ में) अकस्मात हासिल हो भी जाती है तो उस पर जरूरी कार्यवाही नहीं होती। इस बारे में खुफिया एजेंसी से जुड़े एक अहम सूत्र ने खुलासा किया ‘हम क्या करें, पिछले कुछ समय से ऐसा चल रहा है कि हमारे पुलिस वालों पर दनादन मुकदमे चल रहे हैं, वे जेलों में डाले जा रहे हैं, और आतंकवादी छुट्टे घूम रहे हैं, उन्हें सियासतदांओं की सरपरस्ती भी हासिल है। केवल पंजाब की जेलों में आज भी 438 पुलिस वाले बंद हैं, गुजरात की जेलों में भी यह गिनती बड़ी है। सो आतंकवाद से लड़ने के लिए जब तक जरूरी राजनैतिक इच्छाशक्ति का अभाव रहेगा, देश ऐसे ही चलता रहेगा।’