सेवानिवृत्त जस्टिस मार्कण्डेय काटजू प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के नए चेयर पर्सन हो सकते हैं, हालांकि रेस में जस्टिस सिरपुदकेकर का नाम भी शामिल हैं।
Posted on 31 July 2011 by admin
सेवानिवृत्त जस्टिस मार्कण्डेय काटजू प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के नए चेयर पर्सन हो सकते हैं, हालांकि रेस में जस्टिस सिरपुदकेकर का नाम भी शामिल हैं।
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Posted on 31 July 2011 by admin
लोकायुक्त जस्टिस हेगड़े की रिपोर्ट आने के बाद दो प्रमुख उद्योगपतियों गौतम अदानी व सान जिंदल की फाइल भी सीबीआई ने आगे बढ़ा दी है। इस पूरे मामले को जहां खनन मंत्रालय देखेगा, वहीं केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंशाओं को बखूबी भांपते सीबीआई प्रीलिमेनरी इंक्वायरी के लिए तैयार है।
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Posted on 31 July 2011 by admin
कर्नाटक के गृह मंत्री बी.एस.आचार्य जो कभी येदुरप्पा के ‘यस मैन’ हुआ करते थे आज उनके खिलाफ हो गए हैं। एक समय था जब यह येदुरप्पा को बगावत के लिए उकसा रहे थे, उन्हें चाबी भर रहे थे, क्योंकि आचार्य का मानना था कि येदु गए तो उनका नंबर लग सकता है, पर येदु ने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर शोभा व सदानंद का नाम लिया है, इत्तफाक से दोनों ही वोकालिंगा हैं। परसो शाम आचार्य के कंधे पर हाथ रखकर येदु ने कहा था-‘आचार्य अगर हम तुम्हें बनाते हैं तो लिंगायत व वोकालिंगा दोनों नाराज हो जाएंगे, जिनके वोटों का संयुक्त प्रतिशत 35 है। तुम ब्राह्मण ठहरे और ब्राह्मण वोट तो यहां 5 फीसदी से भी कम है।’ तब आचार्य ने जानना चाहा कि रामकृष्ण हेगड़े भी तो ब्राह्मण थे, तो येदु ने बताया कि तब लिंगायत के पास अपना कोई नेता नहीं था और वे हेगड़े को ही अपना नेता मानते थे। दरअसल येदुरप्पा की योजना है कि अवैध खनन के इस पूरे मामले में 3 महीने के अंदर वे कोर्ट से स्टे ले आए और फिर से मुख्यमंत्री पद पर काबिज हो जाएं। वे अपनी पूरी रणनीति इसी के इर्द-गिर्द बुन रहे हैं।
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Posted on 31 July 2011 by admin
येदुरप्पा के बगावती तेवरों से भाजपा सहम गई है। येदु ने धमकी दे रखी है कि वे क्षेत्रीय पार्टी बना लेंगे, येदु का कहना है कि वे कर्नाटक में पार्टी की जीत के शिल्पकार हैं, उन्होंने 2 से पार्टी को 122 विधायकों तक पहुंचाया है। भाजपा का राज्य में कभी जहां 0.4 प्रतिशत वोट शेयर हुआ करता था, उसे उन्होंने 35 फीसदी तक पहुंचाया है। येदु का कहना है कि अगर पार्टी ने उन्हें अपमानित किया तो राज्य के लिंगायत सोचेंगे यह उनका अपमान है। क्योंकि अकेले उत्तरी कर्नाटक में 25 से 30 फीसदी लिंगायत वोटर हैं। पूरे राज्य में लिंगायतों का अनुपात कोई 20 फीसदी है, तो वोकालिंगा 14.5 प्रतिशत के आसपास हैं। येदु कैंप 78 भाजपा विधायकों को अपने घर का मान रहा है, जो येदुरप्पा की कृपा से जीतकर आए हैं, इनका दावा है 22 विधायक ऐसे हैं जो मैनेज हो सकते हैं क्योंकि उनके विधानसभा क्षेत्रों में 15 से 20 हजार लिंगायत वोट हैं। बेंगलुरु शहर और तटीय कर्नाटक के 22 विधायक ऐसे हैं जो अपने दम पर जीतकर आए हैं, और जो संघ व अनंत कुमार के प्रभाव में हैं।
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Posted on 31 July 2011 by admin
तेलांगना संकट से बाहर आने की कमान पार्टी ने अपने पुराने संकटमोचक गुलाम नबी आजाद को सौंपी है। आजाद आंध्र कांग्रेस के प्रभारी भी हैं। इन दिनों आजाद ‘बैक बोन डिस्क प्रोब्लम’ (चलिए रीढ़ की हड्डी है तो!) से ग्रसित हैं, सो वे लगातार कुर्सी पर बैठ नहीं सकते। लिहाजा जब एक रायलसीमा डेलीगेशन उनसे मिलने आया तो उस प्रतिनिधिमंडल में दो डॉक्टर भी थे-डा. गीता रेड्डी व डा. एम.जगन्नाथम, बातचीत अभी शुरू ही हुई थी कि गुलाम दर्द से कराह उठे, दोनों डॉक्टरों ने फौरन कुछ दवाईयां और स्प्रे मंगवाया, तेलांगना का मुद्दा अब भटक कर गुलाम के दर्द पर सिमट आया था, दोनों डॉक्टरों की मेहनत रंग लाई, उनकी दवाओं ने असर दिखाई, गुलाम का दर्द जाता रहा, पर तेलांगना की टीस यूं ही बनी रही।
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Posted on 31 July 2011 by admin
चिदंबरम के ढाका जाने से ऐन पहले उनकी व दिग्विजय सिंह की एक गुप्त मुलाकात हुई, बातचीत लंबे समय तक चली, समझा जाता है कि दिग्विजय सोनिया-राहुल के एक खास संदेशे के साथ चिदंबरम से मिले थे, कि पार्टी जनों के आपसी मतभेद सतह पर नहीं आने चाहिए, जनता में इसका गलत संदेश जा रहा है। सनद रहे कि यह दिग्विजय ही थे जिन्होंने खुले तौर पर गृह मंत्री चिदंबरम की नीतियों की सबसे ज्यादा आलोचना की है।
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Posted on 31 July 2011 by admin
पार्टी नाराज है कि पीएम यूपीए-2 में अपनी मनमानी पर उतर आए हैं, पार्टी की कान लगाकर सुनते नहीं। जब दस जनपथ दुलारे पुलक चटर्जी ने कैबिनेट सेक्रेटरी बनने की इच्छा जताई तो पीएम ने एक सिरे से इस प्रस्ताव को नकार दिया था, बोले-‘जो भी होगा, वरिष्ठता के आधार पर होगा।’ इस सीनियरटी के चक्कर में प्रणब दा मारे गए, वे अपनी पसंद के सुमित बोस को वित्त सचिव लाना चाहते थे पर वरिष्ठता के चक्कर में यह पद आर.एस. गुजराल को मिल गया। पार्टी सबसे ज्यादा नाराज टी.के.ए. नायर को लेकर थी, पीएम को समझाया गया कि यह नकारे हैं, 2जी पर आपका बचाव नहीं कर पाए, सो इसे ड्रॉप करो, पीएम ने हटाया मगर अपना एडवाइजर बना लिया, अब पीएम नायर को राजभवन भेजना चाहते हैं। पीएम मलयाली लॉबी को नाराज नहीं करना चाहते। लोग तो कहते हैं कि नायर मुकेश-अनिल की लड़ाई की भेंट चढ़ गए, चूंकि वे अनिल के ज्यादा करीबी थे। देखना अहम रहेगा कि पुलक चटर्जी के प्रिंसीपल सेक्रेटरी बनने के बाद क्या सात रेसकोर्स व दस जनपथ के रिश्ते बेहतर होंगे?
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Posted on 31 July 2011 by admin
पीएम बहुत नाराज हैं अपनी पार्टी से, सबको मालूम है कांग्रेस पार्टी आखिर चलती कहां से है। पीएम नाराज हैं कि जब राजा ने 2जी मामले में उनका और चिदंबरम का नाम लिया तो पार्टी खामोश क्यों रही? कोई उनके बचाव में सामने क्यों नहीं आया? तब पीएम ने सीधे पार्टी मुखिया से बात की, तब कहीं जाकर पार्टी ने उनके बचाव में बयान जारी किया।
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Posted on 31 July 2011 by admin
संसद के इस मानसून सत्र में कांग्रेस की एकमेव मंशा है कि संसद का काम-काज चले, क्योंकि पार्टी फूड सिक्यूरिटी बिल, लैंड रिफॉर्म बिल व कम्यूनल हारमनी बिल को लेकर गंभीर है। बैंकिंग, पेंशन व इंश्योरेंस सेक्टर में आर्थिक सुधारों की आंधी को यूपीए और रफ्तार देना चाहती है। डबल टेक्सेशन एडवोकेशन एक्ट को लेकर भी सरकार गंभीर है और इस बारे में एक कानून बनाना चाहती है जिससे अनिवासी भारतीयों को भी खुश किया जा सके। पर इन सबके लिए जरूरी है कि संसद सुचारू रूप से चले, इसीलिए जब शुक्रवार को संसदीय कार्य मंत्री पवन बंसल और उनके जूनियर राजीव शुक्ला लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज से मिलने उनके 8 सफदरजंग रोड स्थित निवास पर पहुंचे तो दोनों ही कांग्रेसी नेता उतने ही असहज लग रहे थे, पर सुषमा शांत थी, क्या यह तूफान से आने के पहले की शांति है?
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Posted on 31 July 2011 by admin
सोमवार से संसद के मानसून सत्र का आगाज होने वाला है। पर शासक दल की हठधर्मिता अराजकता की हद तक सिर चढ़कर बोल रही है। दस जनपथ का एक दुलारा मंत्री कोई हे राम राजस्थान की एक सभा में बापू की खादी के माले से अपना जूता पोंछता नजर आया, तो कोई कांग्रेसी प्रवक्ता ‘देख लेंगे’ के अंदाज में लोकपाल पर अन्ना हजारे को गरियाता नजर आया, हिना के पीछे कृष्णा मंत्रमुग्ध दिखे, तो रामदेव मसले पर सीबीआई को अदालत से लताड़ पड़ी। 2जी मामले में जस्टिस सैनी के समक्ष ए.राजा के बयान के निहितार्थ से प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा वाकिफ हो चुकी है, वह 10 जनपथ के मंसूबे भी समझ चुकी है और उसका गेम भी, चुनांचे पीएम के प्रति संसद में भाजपा का स्टैंड किंचित नरम रह सकता है, पर चिदंबरम के प्रति पार्टी का रुख हमलावार होगा, यानी अपरोक्ष तौर पर भाजपा के निशाने पर पीएम नहीं, सोनिया होंगी। और सोनिया के खास वफादार भी होंगे निशाने पर।
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