Archive | May, 2011

बसपा को हुआ धोखा

Posted on 23 May 2011 by admin

बसपा को आशंका थी कि राहुल गांधी अपने जिस प्रतिनिधिमंडल के साथ भट्टा-परसौल मामले पर पीएम को ज्ञापन देने जा रहे हैं उस दल में एक कथित किसान नेता व 50 हजार का इनामी बदमाश मनवीर सिंह तेवतिया भी शामिल हो सकता है, लिहाजा यूपी पुलिस वाले सादे कपड़ों में दिल्ली में मुस्तैद थी, इस पूरे मामले की बागडोर बसपा सरकार में मंत्री लक्ष्मी नारायण ने संभाल रखी थी। बसपा को था कि अगर तेवतिया धरा गया तो राहुल के मंसूबों की हवा निकाली जा सकती है, पर जब राहुल पीएम से मिलने पहुंचे तो उस छोटे से प्रतिनिधिमंडल में दूर-दूर तक कहीं तेवतिया की सूंघ नहीं थी।

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कनि के बाद कौन?

Posted on 23 May 2011 by admin

बवंडर करीब आता जा रहा है, इतना करीब कि अब उसे देखने के लिए दूरबीन की जरूरत नहीं रह गई है…क्योंकि नंगी आंखें, नंगे ख्वाब के मानिंद ही बेहद सच्ची होती है। कनिमोझी की गिरफ्तारी के बाद 2जी की लपटें किस ओर भभक सकती हैं? माना जाता है कि अब इसकी तपिश शरद पवार परिवार को झेलनी पड़ सकती है। शाहिद बलवा कनेक्शन पवार के गले की हड्डी बन गया है। उनकी पुत्री सुप्रिया सुले व दामाद सदानंद सूले की अब बारी आ सकती है। बारी तो नीरा राडिया, अनिल अंबानी व टाटा की भी आ सकती है।

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जगन क्यों नाराज हैं भाजपा से?

Posted on 23 May 2011 by admin

इंसानी मौन को उन्होंने बस एक किताब समझ रखा है, पढ़ा है उसे अब तलक एक मर्सिया की तरह, पर यह तो केंचुल के भीतर छुपी एक नपुंसक आकांक्षा है, फन उठाने भर की देर है, फैल जाएगा जहर नस-नस में… यह जनाब भाजपा के एक शीर्ष पुरुष के लिए बड़ी-बड़ी डील फिक्स करते हैं, सान मुंबई के हैं, जलवा दिल्ली में हैं, जड़ें पूरे हिंदुस्तान में। जनाब संकटमोचक हैं, हर बड़े-बड़ों को उबारने में इनका सानी नहीं। एक दिन ये सीधे जगन मोहन रेड्डी के पास जा पहुंचे, उन्हें विश्वास दिलाया कि वे उन्हें (जगन को) तमाम तरह के केसों से निजात दिला सकते हैं, खासकर इंकम टैक्स के मामलों में। जगन ने कहा कि ‘मेरे केस के कुछ प्रूफ लेकर आओ’, जवाब में जनाब पूरी फाइल लेकर आ गए। जगन ने इस फाइल को अपने वकीलों को सौंप दिया, वकीलों ने बताया कि यह पूरी फाइल ही फर्जी है, यहां तक कि विभागों के लेटरहेड भी जाली हैं। लिहाजा कल तक जो जगन भाजपा के प्रति इतना सॉफ्ट दिखते थे, अब उसका नाम सुनते ही उखड़ जाते हैं।

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कौन है तुलसी प्रजापति?

Posted on 23 May 2011 by admin

अब सवाल उठता है कौन तुलसी प्रजापति? तुलसी प्रजापति और सोहराबुद्दीन दोनों ही राजस्थान के गैंगस्टर हामिद लाला की हत्या के आरोपी थे। तुलसी पर अहमदाबाद के एक प्रॉपटी डीलर की हत्या का भी आरोप था। तुलसी सोहराबुद्दीन व कौसर बी एनकाऊंटर मामले का गवाह भी था। तुलसी को जब राजस्थान से गिरफ्तार किया गया था तब उसने अदालत और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को लिखकर दिया था कि गुजरात पुलिस उसे फर्जी मुठभेड़ दिखाकर मार सकती है। इतने में गुजरात पुलिस ने उसे रिमांड पर ले लिया, कहते हैं कि मार्बल लॉबी से गुजरात पुलिस के कुछ बड़े अफसरों को इस काम के लिए मोटा पैसा मिल गया, और तुलसी का काम तमाम हो गया।

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शाह की जमानत रद्द हो सकती है

Posted on 23 May 2011 by admin

अपनी अतृप्त इच्छाओं को नहला-धुलाकर नए कपड़े पहना दो, सोते हुए जागने का भ्रम भी छोड़ दो…जो होना है वह होकर रहेगा, तुम चाहो, न चाहो…गुजरात के पूर्व गृह मंत्री अमित शाह की जमानत रद्द हो सकती है, तुलसी प्रजापति मामले का नया अध्याय खुलने वाला है। इस मामले में तब एक नया मोड़ सामने आ गया जब जेल में बंद, दाहोद के पूर्व एसपी विपुल अग्रवाल (औद्योगिक घराना परसरामपुरिया के दामाद भी हैं) ने इस केस में अप्रूवर बनने की दरख्वास्त दे दी है। समझा जाता है कि इस मामले में उन्होंने अमित शाह का नाम भी लिया है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहले से है जिसे कोर्ट ने सीबीआई के सुपुर्द किया हुआ है। मामला तुलसी प्रजापति के कथित फर्जी एनकाऊंटर से जुड़ा है।

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कैबिनेट सचिव की रेस में

Posted on 23 May 2011 by admin

कैबिनेट सचिव के.एम.चंद्रशेखर का कार्यकाल 13 जून को समाप्त हो रहा है, बहुत मुमकिन है कि उन्हें 6 महीनों का सेवा विस्तार मिल जाए, पर कैबिनेट सचिव बनने की रेस में कई हैवीवेटों की कंधों से कंधों की जंग है। सबसे आगे पुलक चटर्जी दिख रहे हैं, वे लाख मना करें पर संभावनाएं सबसे ज्यादा उनकी ही प्रबल है। पुलक सोनिया गांधी के निजी सचिव रह चुके हैं, राजीव गांधी प्रतिष्ठान की भी शोभा बढ़ा चुके हैं। 1974 बैच के आइएएस और बिहार के मुख्य सचिव अनूप मुखर्जी का भी दावा मजबूत है, यूपी कैडर के अजीत कुमार सेठ भी रेस में हैं। शिपिंग मंत्रालय में कार्यरत केरल का प्रतिनिधित्व करने वाले के.मोहनदास को मलयाली लॉबी का समर्थन प्राप्त है। मध्य प्रदेश कैडर की अलका सिरोही की महत्त्वाकांक्षाएं भी जोर मार रही हैं।

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अमरीका का नया खेल

Posted on 23 May 2011 by admin

…खेलते हैं खेल, सजाते हैं पांसे, शह-मात की बिसात पर…जीत भी उनकी है और हार भी। यह अमरीका है, देश से कहीं ज्यादा एक प्रवृत्ति, सो क्या मालूम विकीलिक्स को अमरीका विरोधी प्रतिपादित करने के पीछे उसकी कोई खास मंशा रही हो। सो अमरीका तैयार है…मुमकिन है आने वाले दिनों में भारतीय नेताओं के एक ऐसे समूह का केबल प्रकाश में आ जाए जिनके पास ब्लैकमनी की भरमार है और उनके एकाऊंट स्विस बैंक में खुले हों, अमरीका के पास हर ताले की चाबी है, चुनांचे भारतीय राजनेताओं के लिए सर्वशक्तिमान अमरीका का विरोध कतई इतना आसान नहीं होगा।

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द्रमुक में टूट का कांग्रेसी प्लॉन

Posted on 23 May 2011 by admin

…कभी नहीं बता पाएंगे वे कि इन टूटे हुए शीशों में उनके अक्स किस कदर बिखरे हैं, समेट लेंगे जिस दिन मुट्ठियों में…हर चेहरा लहूलुहान नजर आएगा। भरी आंखों से शुक्रवार को कनिमोझी जेल चली गई। जरा सोचिए तिहाड़ में उसे अपना सेल किसके साथ शेयर करना है, माधुरी गुप्ता व सोनू पंजाबन के साथ। और इतने पर भी करुणानिधि परिवार की मुश्किलों का अंत होते नहीं दिखता, कांग्रेस ने डीएमके में दोफाड़ करवाने की पूरी तैयारी कर ली है। दयानिधि मारन ने कांग्रेस के गेम-प्लॉन को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है, द्रमुक के आधे से ज्यादा सांसदों व विधायकों से सीधे संपर्क में हैं मारन, वैसे भी इन दिनों करुणानिधि परिवार का झगड़ा खुलकर सड़क पर आ गया है, सो बड़ा खेल हो सकता है तमिलनाडु में।

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चिदंबरम-भाजपा में क्या पक रहा है?

Posted on 23 May 2011 by admin

आज के सियासतदांओं के पैर कहां होते हैं, उनके पंख होते हैं, वे वक्त की हवा में उड़ते रहते हैं और जब कभी जमीन पर धम्म से आ गिरते हैं…तब उन्हें इल्म होता है कि उनकी दौड़ कब की खत्म हो चुकी है। पी.चिदंबरम बगैर पैरों के ही दौड़ रहे हैं बेतहाशा, आतंकियों की लिस्ट पाकिस्तान को सौंपने में इतनी बड़ी गलती, फिर भी उनका बाल बांका नहीं हो रहा। यहां तक कि प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा भी इस मामले को हल्के से ले रही है। भाजपा पर चिदंबरम के हालिया अहसान है, कर्नाटक की भाजपा सरकार बचाने में उनकी भी एक महती भूमिका है, इस हेतु भाजपा के एक बड़े नेता से उनकी सांठ-गांठ हुई और तय हुआ कि अब भाजपा राज्यपाल बदलने की रट नहीं लगाएगी (समझा जाता है कि भारद्वाज ने चिदंबरम के कहने पर ही राष्ट्रपति शासन लगाने की गुजारिश की थी), वहीं चिदंबरम चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अलोक में भाजपा कर्नाटक में अपना स्पीकर बदल ले, ताकि कांग्रेसी नाक बची रह सके। और चिदंबरम ने भाजपा के संग यह भी डील कर ली है कि 2जी मामले पर अब भगवा पार्टी ज्यादा हाय-तौबा नहीं मचाएगी।

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यादें राजीव गांधी की बकौल अशोक दुबे :

Posted on 20 May 2011 by admin

ऐसे मिला, ऐसा जुड़ा और ऐसे बिछड़ा राजीव जी से
हमारी पहली मुलाकात अजीब थी, पर वे पहली नजर में मुझे भा गए थे, शायद मैं भी उन्हें पसंद आया था

त्रिदीब रमण, नई दिल्ली, 20 मई 2011
मैं आकाशवाणी में संवाददाता था। तत्कालीन प्रधानमंत्री यानी इंदिरा गांधी जी के साथ एक सफदरजंग रोड पर सप्ताह में 2 दिन डयूटी लगती थी। आपातकाल के दौरान दूरदर्शन यानी टीवी में आ गया। हरीश अवस्थी दोस्त थे बोले न्यूजरीडर की जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ तुम रिपोर्टिंग भी करो और रिपोर्टिंग के लिए मुझे प्रधानमंत्री बीट दे दी गई। इंदिरा जी से सप्ताह में 2 बार मुलाकात तो होती ही थी। राजीव गांधी से आमना-सामना कम ही हो पाता था। इंदिरा जी को मैं ‘मैडम’ कहता था। संजय गांधी की मृत्यु के बाद राजीव गांधी का राजनीति में पदार्पण का यह पहला दिन था, अच्छी तरह याद है। सफदरजंग रोड का दरवाजा खुला। मैडम और राजीव जी साथ-साथ गेट से बाहर निकल रहे थे। लॉन में युवक कांग्रेस के कई कार्यकर्ता मौजूद थे। इतने में रामवीर सिंह विधुड़ी ने नारा लगाया ‘राजीव गांधी जिंदाबाद’। राजीव गांधी रामवीर सिंह के पास गए और बेतरह नाराज होते हुए बोले कि ‘मुझे यह पसंद नहीं।’ मेरे साथ साथ दूरदर्शन का कैमरामैन प्रकाश था। उन्होंने कैमरा ऑन कर दिया था। राजीव जी आगे बढ़े और प्रकाश के हाथों से कैमरा छीन लिया और उस एरिफ्लेक्स कैमरे की फिल्म निकाल कर जेब में रख ली और कहा-‘मुझे यह सब पसंद नहीं।’ राजीव जी पैंट-शर्ट पहने हुए थे। मैंने राजीव गांधी से कहा-‘भाई साहब,’ गलती मेरी है चूकि मैं रिपोर्टर हूं, यह तो कैमरामैन है यह तो वही करेगा जो मैं कहूंगा।’ इस पर राजीव जी बोले-‘वेन आई से नो,मीन्स नो।’ यह राजीव जी से पहली मुलाकात थी। पर मुझे काफी कुछ समझ में आ गया था। दो दिनों के बाद मेरे पास एक संदेश आया कि नौकरी छोड़ दो और राजीव जी को ज्वॉइन करो। मैंने वैसा ही किया नौकरी छोड़ दी और राजीव जी (जिन्हें मैं भाई साहब कहता था) से जुड़ गया। भाई साहब के दो बॉडीगार्ड थे रवि और महेंद्र। मैं कभी रवि के साथ तो कभी महेंद्र के साथ होता था। मेरा काम क्या था यह भाई साहब, मैडम और मेरे अलावा किसी को नहीं मालूम था। बहुत कम लोग जानते थे कि मैं कौन हूं। आर.के.धवन बस पत्रकार के नाते जानते थे। जॉर्ज थोड़ा-बहुत जानते थे क्योंकि मेरे कहीं भी आने-जाने का इंतजाम वे ही किया करते थे। सोनिया जी ज्यादा बात नहीं करती थीं, वह बस इतना जानती थीं कि मैं अमेठी देखता हूं। अक्सर अमेठी राजीव जी के जाने से पहले जाना होता था, चुनाव के दौरान तो ज्यादातर वहीं रहता था। राजीव जी ने एक दिन एक कैमरा लाकर मुझे दिया, मुझे कैमरा चलाना आता नहीं था। एक मीटिंग हो रही थी और मैं कैमरे का इस्तेमाल बिल्कुल अनाड़ी के जैसे कर रहा था। राजीव जी ने देखा तो मेरे पास आए, बोले ऐसे चलाया जाता है यह कैमरा, बिल्कुल नई तकनीक का है, फिर उन्होंने वह सोनी का कैमरा मुझे आपरेट करना सिखाया।
राजीव जी जहाज में हमेशा कॉकपिट में बैठते थे जब इंडियन एयरलाइंस या एयर इंडिया का विमान होता था तो सबसे आखिर में चढ़ते थे और बगल की सीट पर अपना हैंड बैग (जिसमें फाइलें होती थीं) रख देते थे। सीट के पीछे बॉडीगार्ड बैठता था यदि सोनिया गांधी या कोई वीआईपी साथ हो तो वह बगल की सीट पर बैठता था। बगल की सीट पर अमूमन उन्हें किसी को बिठाना पसंद नहीं था, क्योंकि कानाफूसी उन्हें सख्त नापसंद थी। सिंफनी म्यूजिक वॉकमैन लगाकर सुनते थे, हिंदी गाने उन्हें उतने पसंद नहीं थे। सोनिया गांधी के साथ अक्सर ताज होटल (मानसिंह रोड) में डिनर करने जाते थे, चाइनीज रेस्तरां उनका पसंदीदा था। स्पोर्ट्स शूज पहनना पसंद था। सोनिया गांधी के साथ शॉपिंग करने जाते थे। अरुण सिंह, कैप्टन सतीश शर्मा, तरुण गोगोई, के.पी.सिंहदेव, गुलाम नबी आजाद से ज्यादातर संपर्क में रहते थे। राजीव जी को मैंने कभी रिलेक्स करते नहीं देखा। कभी-कभी तो वह सोते ही नहीं थे। 3 बजे रात तक मीटिंग लेते और मुझे सुबह चार बजे आने को कह देते थे कि चलना है। चार बजे तैयार हो जाते थे। कभी उन्हें खांसी, जुकाम या बुखार होते नहीं देखा। किसी को नीचा दिखाना या किसी को अपमानित करना उनके स्वभाव में शामिल नहीं था, वे एक क्षमाशील व्यक्ति थे।
यूथ कांग्रेस में यंग टीम डेवलेपमेंट का काम सौंपा था डी.पी.राय को। जिसमें जिलेवार कॉर्डिनेटर बनाने थे। राजीव जी को जब भी कोई जानकारी चाहिए होती थी सीधे कॉर्डिनेटर से पूछते थे।
एक दिन वे शूटिंग के बारे में एक किताब पढ़ रहे थे। जब पूछा तो उन्होंने बताया राहुल को शूटिंग सिखाने के लिए पढ़ रहा हूं। चूंकि मैं अमेठी का इंचार्ज भी था सो हर दो साल बाद मुझे एक नई जीप मिल जाती थी, अपनी पुरानी जीप मैं अपने नीचे काम करने वाले को दे देता था, और नीचे वाला अपनी जीप अपने से नीचे वाले को। यह क्रम चलता रहता था। जमरूदपुर के एक गैरेज में गांधी परिवार की सारी गाड़ियां ठीक होने जाती थी, मैं एक दिन वहां अपनी जीप लेकर पहुंचा, मेकेनिक ने जीप का पुराना ऑयल फिल्टर निकाला और उसे वहीं जमीन पर फेंक दिया, बिल्कुल काला पड़ चुका था वह उसने पैकबंद एक नया फिल्टर निकाला और उसे लगाने लगा कहा फिल्टर सारे कूड़े कचरे गंदगी को अपने में सोख लेता है ताकी इंजन को साफ सांसें मिल सके, तब तक वहां सिध्दार्थ रेड्डी आ पहुंचा, आंखें गमगीन, चेहरा उतरा हुआ, आंध्र का एक उत्साही युवक, पढ़ा-लिखा मैडम का सबसे विश्वासी था, सिध्दार्थ ने मुझसे कहा कि हमारा काम भी फिल्टर का है, अपने नेता के रास्ते में आने वाली सारी गंदगी को अपने में समाने का ताकि वे स्वस्थ सांसे ले सके,जब हमारी मियाद पूरी हो जाती है तो हमें भी बदल लिया जाता है, बाद में हमें पता चला कि मैडम ने सिध्दार्थ को नौकरी से निकाल दिया है।
कोई बीस बरस पहले की बात है, अमेठी में चुनाव था। मैं और राजीव जी गौरी गंज में थे, गोधूलि बेला थी, किसी गांव की पंगडंडी पर हम बढ़े चले जा रहे थे। राजीव जी को ज्यादा लोगों को साथ रखना पसंद नहीं था। पास में एक बैल खड़ा था उसके तेवर कुछ ठीक नहीं लग रहे थे इससे पहले की वह हम पर हमला करता मैंने उसके सींग पकड़ लिए। राजीव जी ने देखा मुस्कुराए और आगे बढ़ गए। मैं तेजी से चलते हुए उनके पास पहुंचा और कहा-‘मैं आपके साथ चल रहा हूं।’ बोले, ‘यहां चुनाव चल रहा है तुम्हारा यहीं रहना ठीक है।’ मैं सोचने लगा पहली बार उन्होंने मुझे अपने साथ चलने से मना किया है। इससे पहले कभी मुझे किसी बात के लिए ‘ना’ नहीं कही। थोड़ी देर बाद वह दिल्ली चले गए। मेरी और उनकी वह आखिरी मुलाकात थी, अगले दिन उन्हें दक्षिण भारत के दौरे पर निकलना था। वह श्रीपेरंबदूर पहुंचे। उसके बाद जो हुआ वह सब इतिहास है।

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