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पूर्णिया में पप्पू यादव का दबदबा

Posted on 07 April 2024 by admin

पूर्णिया लोकसभा चुनाव में भले ही लालू यादव के स्वांगों के आगे कांग्रेस चित हो गई हो पर पप्पू यादव ने वहां घुटने नहीं टेके हैं। उन्होंने निर्दलीय मैदान में उतर कर राजद की अधिकृत उम्मीदवार बीमा भारती और जदयू के निवर्तमान सांसद संतोष कुशवाहा के लिए मैदान मुश्किल बना दिया है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस में भी बड़ी मुश्किल से पप्पू यादव की एंट्री हुई थी क्योंकि न तो लालू यादव न ही उनके अनुचर अखिलेश सिंह चाहते थे कि पप्पू कांग्रेस ज्वॉइन करें पर प्रियंका गांधी के आश्वासन के बाद पप्पू यादव ने अपनी ’जन अधिकार पार्टी’ का विलय कांग्रेस में कर दिया और पूर्णिया से कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में उतर गए। पर ऐन वक्त एक बड़ा सियासी दांव चलते हुए लालू ने कभी नीतीश के बेहद करीबी रहीं और जदयू से आई बीमा भारती को पूर्णिया से टिकट दे दिया और कांग्रेस हाईकमान से कहा कि ’यह सीट तो कभी कांग्रेस के कोटे में थी ही नहीं।’ दरअसल, लालू नहीं चाहते थे कि सीमांचल से कोई और बड़ा यादव नेता उभरे। लालू की बैचेनी की बानगी तब दिखी जब उनके पुत्र तेजस्वी यादव बीमा भारती के नामांकन के लिए हेलीकॉप्टर से उड़ कर सीधे पूर्णिया पहुंचे।

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कांग्रेस का खेल बिगाड़ने में क्यों लगे हैं लालू यादव

Posted on 07 April 2024 by admin

तेरे कांधों पर रहते हैं जिनके हाथ अक्सर

उन्हीं हाथों में होते हैं एक अदृश्य खंजर

यूं तो लालू यादव राहुल गांधी की तारीफों में अक्सर कसीदे पढ़ते नज़र आ जाते हैं पर भीतरखाने से वे कांग्रेस का खेल बिगाड़ने की जुगत भिड़ा रहे हैं। दरअसल, लालू नहीं चाहते कि कांग्रेस से कोई यादव या मुसलमान नेता उभर कर सामने आए जो कल को उनके पुत्र तेजस्वी यादव के समक्ष कोई चुनौती पेश कर सके। सो, उन्होंने बड़ी तिकड़म भिड़ा कर कांग्रेस से उनकी जिताऊ सीटें लेकर उसकी जगह भागलपुर, पटना साहिब, पश्चिम चंपारण और महाराजगंज जैसी कमजोर सीटें पार्टी के समक्ष परोस दीं। सूत्रों की मानें तो लालू को उनके इस कार्य में उनके पक्के हनुमान अखिलेश सिंह का भी पूरा साथ मिल रहा है जो इत्तफाक से बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं और उन्हें अध्यक्ष बनाने में लालू यादव की एक महती भूमिका मानी जाती है। पप्पू यादव को पूर्णिया सीट पर झटका देने के बाद लालू ने इसके साथ लगी कटिहार सीट पर भी अपनी नज़रें जमा रखीं थीं। वे नहीं चाहते थे कि इस दफे यहां से कांग्रेस के तारिक अनवर चुनाव में उतरें। तारिक की जगह लालू अपने बेहद भरोसेमंद अहमद अशफाक करीम को चुनावी मैदान में उतारना चाहते थे जिनका यहां मेडिकल कॉलेज भी है। करीम राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं। दुबारा जब करीम राज्यसभा जाने में कामयाब नहीं हो पाए तो लालू ने उन्हें भरोसा दिया था कि ’वे उन्हें लोकसभा का चुनाव लड़वाएंगे।’ पर कांग्रेस तारिक अनवर के नाम पर अड़ गई। कांग्रेस ने कहा कि ’पिछले चुनाव में तारिक 5 लाख से ज्यादा वोट लाए थे। सो उन्हें दुबारा मौका नहीं दिया जाना उनके साथ बड़ी नाइंसाफी होगी।’ इस मामले में सीधे सोनिया गांधी को हस्तक्षेप करना पड़ा तब कहीं जाकर लालू मानें।

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आर या पार क्या करेंगे नीतीश कुमार

Posted on 06 January 2024 by admin

तेरी सोहबतों में ही खराब हुआ हूं मैं

एक धधकती चिंगारी से ही राख हुआ हूं मैं

आप नीतीश कुमार को चाहे लाख ‘पलटीमार’ कह गरिया लें, पर सियासी बैरोमीटर पर उनकी अचूक पकड़ की आप अनदेखी नहीं कर सकते। सियासी स्वांग भरने में उनकी दक्षता का हर कोई उतना ही कायल है। नीतीश के करीबियों का मानना है कि ’इस 22 जनवरी को यानी अयोध्या में श्रीराम के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दिन नीतीश कोई नया धमाका कर सकते हैं।’ वैसे तो तेजस्वी यादव के भी सब्र का बांध टूटता जा रहा है, नीतीश लंबे समय से बिहार में मंत्रिमंडल का विस्तार टाले जा रहे हैं, अभी पिछले दिनों जब तेजस्वी ने नीतीश से इस बाबत ताजा अपडेट लेना चाहा तो चाचा ने सहजता से भतीजे को यह कह कर टरका दिया-’अभी खरमास चल रहा है, 14 के बाद देखेंगे।’ स्थितियों की नज़ाकत को भांपते हुए तब लालू यादव सक्रिय हो गए, नीतीश को मनाने की गरज से लालू ने आनन-फानन में ‘इंडिया गठबंधन‘ के सहयोगी दलों से बात कर नीतीश को गठबंधन का संयोजक बनाने की बात चलाई। शरद पवार से लेकर उद्धव ठाकरे तक मान गए, एक समय तो अरविंद केजरीवाल भी तैयार थे, पर इस प्रस्ताव पर ममता बनर्जी की सहमति हासिल नहीं हो पाई, और यह पेंच फंस गया। लालू चाहते थे कि ’नीतीश इंडिया गठबंधन के संयोजक बन कर घूम-घूम कर देश भर में भाजपा विरोध की अलख जगाएं और बिहार में अपना राज पाट तेजस्वी को सौंप दें यानी तेजस्वी सीएम तो लल्लन सिंह को राज्य का डिप्टी सीएम बना दिया जाए।’ पर नीतीश लल्लन को लेकर इन दिनों आष्वस्त नहीं है, उन्हें लल्लन की लालू यादव से नजदीकियां रास नहीं आ रही है। माना जाता है कि जदयू के कोई 15 विधायक व 6 सांसद सतत लल्लन के संपर्क में हैं। कांग्रेस के भी कोई 8 विधायक अशोक चौधरी के संपर्क में बताए जाते हैं। भाजपा व राजद दोनों ही दल इस तल्ख सच से वाकिफ हैं कि अगर बिहार में लोकसभा के साथ विधानसभा के चुनाव करा लिए जाते हैं तो इसके सबसे बड़े लाभार्थी नीतीश ही होंगे, जदयू की सीटें बढ़ जाएंगी। वैसे भी नीतीश इस दफे 125 सीटों पर विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहते हैं ताकि बिहार की राजनीति में उनकी पूछ बनी रहे। वहीं भाजपा की राज्य इकाई का मानना है कि ’अगर इस दफे भाजपा अकेले अपने दम पर चुनाव में जाती है तो पार्टी का आधार और वोट प्रतिशत दोनों ही बढ़ जाएगा,’ भाजपा हाईकमान भी इसी थ्योरी पर कान धर रहा है।

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क्या होगा झारखंड में?

Posted on 06 January 2024 by admin

झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार पर लगातार ईडी की तलवार लटक रही है, सवाल भी लगातार उठ रहे हैं कि हेमंत सोरेन अगर जेल चले गए तो राज्य सरकार की बागडोर क्या उनकी पत्नी कल्पना सोरेन संभालेंगी? लेकिन इन्हीं कयासों के बीच राज्य के गवर्नर सीपी राधाकृष्णन छुट्टियों पर अपने गृह राज्य तमिलनाडु चले गए हैं, सोमवार से पहले उनके रांची लौटने की संभावना बेहद क्षीण है। इसी 31 दिसंबर को हेमंत सोरेन के अतिविश्वासी विधायक सरफराज अहमद ने अपनी विधानसभा सीट से अचानक इस्तीफा दे दिया, कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्होंने यह सीट कल्पना सोरेन के चुनाव लड़ने के लिए रिक्त की है। पर यह एक सामान्य सीट है। वैसे भी झारखंड में चुनाव दिसंबर 2019 में संपन्न हुए थे और विधानसभा की पहली बैठक 6 जनवरी 20 को हुई थी। अब उप चुनाव भी उसी सूरत में हो सकते हैं जब विधानसभा का कार्यकाल एक साल से ज्यादा का बचा हो। 80 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में सोरेन को 47 विधायकों का बहुमत हासिल है। साथ ही यह संवैधानिक तौर पर कहीं उद्दृत भी नहीं कि अगर कोई सीएम किसी वजह से जेल चला जाता है तो जेल से अपना काम काज नहीं चला सकता है। कल्पना सोरेन एक गैर आदिवासी हैं, मूलतः ओडिशा की रहने वाली हैं, उन्हें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ दिलाना या नहीं दिलाना पूरी तरह से राज्यपाल के विवेक पर निर्भर करता है, सो हेमंत सोरेन ने क्या सोच कर सरफराज अहमद से इस्तीफा दिलवाया है यह तो बेहतर वही बता सकते हैं।

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मंडल-कमंडल दोनों को साधता कमल

Posted on 16 December 2023 by admin

दीयों व हवाओं की दोस्ती भला कब किसके काम आई है

सिरफिरी आंधियों से गले लग कर आज लौ भी खूब रोई है

गिले-शिकवे दोनों को थे मगर

फितरतों के समंदर में दोनों ने साथ डुबकी लगाई हैइन पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों ने भगवा पेशानियों पर गुमान की वो चंद रेखाएं खींच दी हैं जिससे मिल कर 2024 का चुनावी चेहरा आकार पाने लगा है, भाजपा रणनीतिकारों ने अपने पराक्रम से ‘मंडल‘ व ‘कमंडल’ दोनों ही राजनीति को एक साथ साधने की बाजीगरी दिखाई है। तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्रियों के ऐलान में जहां जातीय संतुलन को साधने की बाजीगरी हुई है, वहीं आने वाले नए वर्ष को भक्ति रस में सराबोर करने की पुरजोर तैयारी है। इस 22 जनवरी को अयोध्या में पीएम के करकमलों से ऐतिहासिक राम मंदिर का उद्घाटन होना है, वहीं इसके अगले ही महीने यानी फरवरी में पीएम आबूधाबी में बन रहे भव्य हिंदू मंदिर का उद्घाटन करेंगे। संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी आबूधाबी से लगे इस भव्य मंदिर के निर्माण में ही 700 करोड़ रूपयों का खर्च आया है। इस मंदिर का निर्माण ’बोचासनवासी अक्षर पुरूषोतम स्वामिनारायण संस्था’ के द्वारा किया गया है। 10 फरवरी से यहां ’फेस्टिवल ऑफ हारमनी’ की शुरूआत होगी और फिर 14 फरवरी को पीएम मोदी द्वारा इस मंदिर का उद्घाटन किया जाएगा। इसके अलावा अयोध्या के राम मंदिर का प्रसाद घर-घर वितरित करने की भी बड़ी योजना है, भाजपा विरोधी दलों के समक्ष भक्ति की शक्ति का नज़ारा प्रस्तुत करने का इरादा रखती है।

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कांग्रेस में बड़ा फेरबदल

Posted on 16 December 2023 by admin

कांग्रेस में एक बड़े फेरबदल की आहट है। सुना जा रहा है कि राहुल गांधी राज्यों के बड़े क्षत्रपों  को दिल्ली लाना चाहते हैं और उनकी जगह अपेक्षाकृत युवा नेताओं को वहां की बागडोर सौंपना चाहते हैं। माना जाता है कि इस कड़ी में अशोक गहलोत व भूपेश बघेल जैसे स्थापित नेताओं को दिल्ली लाया जा सकता है और इन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया जा सकता है। आने वाले कुछ समय में अशोक गहलोत को पार्टी के राष्ट्रीय कोशाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी मिल सकती है। कमलनाथ फिलवक्त दिल्ली आने को तैयार नहीं है, पर राहुल मध्य प्रदेश में भी पार्टी की कमान अपेक्षाकृत किसी युवा नेता को सौंपना चाहते हैं। दिग्विजय सिंह खड़गे की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं, वे खड़गे को याद दिलाना चाहते हैं कि ’उन्होंने खड़गे की अध्यक्षीय उम्मीदवारी के खिलाफ अपना पर्चा नहीं भरा था, अब दिग्विजय इसका इनाम चाहते हैं।’

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तेरी मोहब्बत में हो गए फ़ना

Posted on 27 November 2023 by admin

सियासी बियावां में डाले जाने के बावजूद गांधी परिवार के एक और देदीप्यमान चिराग वरुण गांधी भी नेपथ्य के धूलकणों से अपने ललाट पर सुर्खियां लिखना और बटोरना जानते हैं, भाजपा के सांसद होने के बावजूद भी वह किसानों व नौजवानों के लिए खुल कर अपनी बात रखने के जाने जाते रहे हैं। अभी पिछले दिनों पीलीभीत की कई जनसभाओं में उनका एक शेर सुर्खियों की सवारी गांठता रहा, अर्ज किया है-

’तेरी मोहब्बत में हो गए फ़ना

मांगी थी नौकरी, मिला आटा, दाल चना’। सोशल मीडिया पर उनका यह शेर कुछ इस कदर वायरल हुआ कि आनन-फानन में इसे 19 करोड़ इम्प्रेशन मिल गए, तेलांगना से लेकर राजस्थान की चुनावी सभाओं में इस शेर का जम कर इस्तेमाल हुआ, तेलांगना में कांग्रेसी नेताओं ने इसे चंद्रशेखर राव के खिलाफ इस्तेमाल किया वहीं राजस्थान में इसे सीएम गहलोत के खिलाफ इस्तेमाल किया गया। विद्रोही स्वर की तान छेड़ने वाले वरुण का यह षेर क्या दिल्ली के निज़ाम की ओर भी इशारा कर रहा है? (एनटीआई-gossipguru.in)

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अगड़े नेताओं से मिले तेजस्वी

Posted on 27 November 2023 by admin


बिहार में राजद व जदयू दोनों ही दल इन दिनों ओबीसी जातियों के प्रेम में आकंठ डूबे हैं, इसे देखते हुए प्रदेश की अगड़ी जातियों में स्वतः ही एक नाराज़गी पनपने लगी थी, यह ग्राउंड रिपोर्ट जैसे ही बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को मिली उन्होंने आनन-फानन में पटना स्थित अपने आवास पर पार्टी के अगड़े नेताओं की एक अहम बैठक बुला ली और उन्होंने उनके उग्र तेवर को शांत करने के लिए अपनी ओर से कुछ अहम प्रस्ताव रखे। माना जाता है कि तेजस्वी ने इन अगड़े नेताओं से वादा किया है कि ’2024 के चुनाव में वे अगड़ी जातियों को पर्याप्त महत्व और टिकट देंगे।’ उन्होंने कहा कि ’यह पहली बार होगा जब राजद किसी भूमिहार नेता को जहानाबाद से मैदान में उतारेगा, दरभंगा से किसी ब्राह्मण नेता को टिकट मिलेगा और राज्य के कम से कम 4 लोकसभा सीटों पर राजपूत उम्मीदवार उतारे जाएंगे।’ तेजस्वी ने जोर देकर इन अगड़े नेताओं से कहा कि ’राजद व जदयू दोनों ही दल अगड़ी जातियों को साथ लेकर चलेंगे क्योंकि ये जातियां चाहे संख्या बल में कम ही क्यों न हो, ये अन्य जातियों के मतदाताओं को भी प्रभावित करने का माद्दा रखते हैं।’ वहीं लालू व नीतीश में बिहार की 40 लोकसभा सीटों के अनौपचारिक बंटवारे ने कांग्रेस का धर्मसंकट बढ़ा दिया है। सूत्रों की मानें तो लालू व नीतीश ने तय कर लिया है कि ’राजद व जदयू 17-17 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। चार सीट वे कांग्रेस के लिए छोड़ेंगे, एक सीट भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के लिए और एक सीट माले के लिए होगी।’ वहीं कांग्रेस के कम से कम 8-10 नेता टिकट के लिए प्रबल दावेदारी पेश कर रहे हैं।

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अब मत चूको चौहान

Posted on 27 November 2023 by admin

भाजपा के बड़े चाणक्य व चंद्रगुप्त को भी सियासी ककहरा कंठस्थ कराने वाले शिवराज सिंह चौहान की बातें ही अलहदा है। कहां तो उन्हें ’कट टू साइज’ करने की तैयारी थी, पर प्रदेश में जरा हवा क्या बदली शिवराज का हेलिकॉप्टर रुकने का नाम नहीं ले रहा। सुबह सवेरे ही शिवराज अपने हेलिकॉप्टर पर सवार होकर चुनाव प्रचार के लिए निकल जाते हैं जिस भाजपा प्रत्याशी के यहां उनकी सभा होनी होती है उसे वे अपने साथ बिठा लेते हैं, रास्ते भर क्षेत्र का गणित-भूगोल समझते हैं और अपने भाषण में उन्हीं स्थानीय मुद्दों का पुट दे देते हैं। सभा समाप्त होती है, अगली सभा जहां होनी है वहां का प्रत्याशी अब शिवराज के बगलगीर हो जाता है, फिर कहानी रिप्ले होती है। अपने प्रत्याशी को सीएम के हेलिकॉप्टर से उतरते देख आम जनता अभिभूत हो जाती है कि ’सीएम के कितना करीबी है हमारा नेता, हम जिताएंगे तो वह मंत्री जरूर बनेगा।’ और बार-बार इसी पटकथा की पुनरावृति होती है, इससे शिवराज की सभाओं में भीड़ भी जुट जाती है और लोगों में जोश भी बना रहता है।

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भुल्लकड़ हो गए हैं नीतीश

Posted on 27 November 2023 by admin

सेक्स एजुकेशन के नए टीचर बन कर अभ्युदित हुए नीतीश कुमार भले ही अभी 72 साल के ही हुए हों पर उन्हें भूलने की बीमारी खूब लग गई है। ऐसा ही एक वाक्या अभी पिछले  दिनों घटित हुआ। नीतीश कुमार के एक पुराने सहयोगी और उनके सरकार में मंत्री रहे एक नेता का हाल में निधन हो गया। भावुक हो गए नीतीश अपने प्रिय नेता की श्रद्धांजलि सभा में पहुंचे, जहां उस नेता की एक बड़ी सी तस्वीर रखी थी और नीतीश को तस्वीर पर फूल अर्पित करने थे। नीतीश ने हाथों में फूल उठाए और उन फूलों को तस्वीर पर अर्पित करने के बजाए तस्वीर के साथ खड़े नेता पुत्र पर अर्पित कर दिया।

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