योगी का जलवा बरकरार

July 26 2020


यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जलवे की पुनर्बहाली हो गई है जब से गैंगस्टर विकास दुबे पुलिसिया एनकाउंटर में मारा गया है। जब विकास दुबे और उनके गुर्गों ने 8 पुलिस वालों को मार गिराया था तब योगी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया था, इस घटना के तुरंत बाद जब यूपी पुलिस के डीजीपी एच सी अवस्थी ने मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा था तब मुख्यमंत्री ने उन्हें संदेश भिजवा दिया था कि ’अभी मिलने की क्या जरूरत है, खाली हाथ मेरे पास क्यों आए हैं, कुछ कर के दिखाओ।’ डीसीपी ने मैसेज के मर्म बखूबी भांप लिए थे, उसके बाद के घटनाक्रम तो सबके सामने है। विकास दुबे के राजनैतिक कनेक्शन खंगालने की कोशिश हो रही है, पर यह तो कटु सत्य है कि प्रदेश की भाजपा, सपा से लेकर बसपा तक की वह यात्रा कर आया था, इस बार वह भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ने की जुगत भिड़ा रहा था। सनद रहे कि 2001 में विकास दुबे ने भाजपा सरकार के राज्य मंत्री संतोष शुक्ला की सरेआम हत्या कर दी थी, इसके बाद प्रदेश में भाजपा के सहयोग से मायावती की सरकार बनी, पर दुबे का बाल-बांका नहीं हुआ। इसके बाद प्रदेश में मायावती की सरकार गिरा कर भाजपा ने मुलायम सिंह की सरकार बनवा दी पर फिर भी दुबे के राजनैतिक रसूख में कोई कमी नहीं आई, वह और मजबूत बन कर उभरा, यह बगैर किसी राजनैतिक संरक्षण के मुमकिन नहीं था। योगी राज में भी 3 वर्षों तक लगातार दुबे का सिक्का चलता रहा, कहा जाता है कि योगी सरकार के कई अफसरों और मंत्रियों से भी दुबे के नजदीकी रिश्ते थे। आरोप तो योगी सरकार के कानून मंत्री ब्रजेश पाठक पर भी लग रहे हैं, जो कभी गैंगस्टर हरिशंकर तिवारी के नजदीकी हुआ करते थे
और कभी पाठक पर ‘टाडा’ भी लगा था। पर जब सैंया भले कोतवाल तो डर काहे का।

 
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