What’s next for Akhilesh ?

January 02 2017


यादव परिवार में घमासान मचा है, इस सियासी घमासान के कई देखे-अनदेखे पहलुओं पर मंथन जारी है। कुछ पर्यवेक्षक इसे अमर सिंह बनाम प्रोफेसर रामगोपाल यादव के बीच चल रही जंग की परिणति मानते हैं तो कुछ अब भी इसे बाप (मुलायम) बेटे (अखिलेश) की मिलीभगत करार देते हैं। इनका कहना है कि अखिलेश-मुलायम में इतने के बावजूद भी संवाद बना हुआ है, अखिलेश एक ओर जहां हावर्ड में पालिटिकल साइंस और पब्लिक पॉलिसी के सीनियर प्रोफेसर स्टीव जार्डिंग की राय को अहमियत दे रहे हैं, वहीं वे अहम राजनैतिक मसलों पर अपने पिता की राय को भी महत्व देते आए हैं। सूत्र बताते हैं कि यादव परिवार के इस सियासी महासंग्राम को हवा देने में प्रोफेसर रामगोपाल की उद्दात राजनैतिक महत्वांक्षाओं का भी हाथ है। कहते हैं अमर सिंह प्रोफेसर साहब को इस बात के लिए माफ नहीं कर पाए कि इन्होंने किसी भी कद्दावर ’बाहरी’ को सपा में टिकने नहीं दिया, चाहे वे खुद अमर सिंह हों, सतपाल मलिक हों, राज बब्बर हों या फिर रघु ठाकुर हों। कहते हैं पिछले कई महीनों से मुलायम और रामगोपाल के बीच बातचीत भी बंद थी। मुलायम को लगता है रामगोपाल उनके खिलाफ अखिलेश का इस्तेमाल कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि यह पूरा सियासी ड्रामा प्रधानमंत्री को फायदा पहुंचाने की नियत से हुआ है, क्योंकि 30 दिसंबर को नोटबंदी के 50 दिन पूरे हो जाने के बाद विपक्षी दल भयंकर शोर गुल मचाने वाले थे, यादव परिवार की सियासी नौटंकी के बाद सुर्खियों में अन्य खबरों के लिए कोई जगह नहीं बच गई थी। ताजा घटनाक्रमों में अगर अखिलेश के पक्ष में ज्यादा सपा विधायक गोलबंद हो जाते हैं तो पिता मुलायम को पत्र के समक्ष झुकना पड़ सकता है और इस बात के आसार अब से दिखने लग गए हैं।

 
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