जासूसी कांड के खुलासे के पीछे क्या है?

February 23 2015


पेट्रोलियम मंत्री के जासूसी कांड की आग भभकने लगी है और इसकी जद में जो कॉरपोरेट घराने आए हैं, उनके लिए भले ही यह एक सदमे की स्थिति हो, पर मोदी सरकार और इसके कुशल रणनीतिकार अजीत डोवल इस मामले को कहीं पहले से जानते थे, इस मामले की भनक डोवल को तब लग गई थी जब वे यूपीए सरकार में आईबी प्रमुख थे। पर कॉरपोरेट व सत्ता के शीर्ष के लिए एक-दूसरे की पीठ खुजलाने की परंपरा काफी पुरानी है, चुनांचे कई अहम मंत्रालयों में सरकार की नाक के नीचे यह खेल बदस्तूर चलता रहा और सरकार अनजान बनी रही। पर छोटी सी दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल की बड़ी जीत ने मोदी खेमे की नींद उड़ा दी और खुफिया एजेंसियों ने दिल्ली की हार पर जो केंद्र को ‘फीडबैक’ दिया उसमें बड़े उद्योगपतियों और दिल्ली के निजाम की दोस्ती को आम जनता पचा नहीं पाई। सो, आने वाले बिहार विधानसभा के आलोक में मोदी का जनता को संदेश है कि उनसे दोस्ती की आड़ में कोई कॉरपोरेट अपनी मनमानी नहीं कर सकता। और न ही मोदी सरकार उद्योगपतियों की सरकार है। और अपनी पीठ पर सार्वजनिक रूप से हाथ रखने वाले थैलीशाहों के हाथ मरोड़ने में अब मोदी पीछे नहीं हटेंगे क्योंकि यह उनकी राजनीतिक अस्मिता का सवाल है। अभी तो जासूसी कांड इस मामले का आगाज भर है, आने वाले दिनों में कॉरपोरेट बिंग व सत्ता की दलाली करने वाली कई और बड़ी मछलियों पर मोदी सरकार की गाज गिरने वाली है।

 
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