रंग बदलते जीतन

August 17 2014


बिहार के आने वाले 21 अगस्त के उप चुनाव में लालू और नीतीश के साथ कांग्रेस के गठबंधन को पार्टी के कई बड़े नेता पचा नहीं पा रहे हैं, इनको लगता है कि लोकसभा की शर्मनाक हार से पार्टी हाईकमान खास कर राहुल गांधी कोई सबक नहीं ले पाए हैं। इन कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि अगर कांग्रेस को लालू यादव के साथ ही जाना था तो फिर राहुल गांधी ने ऑर्डिनेंस फाड़ने का इतना बड़ा ड्रामा क्यों किया, जिससे लालू चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित हो गए? वहीं नीतीश के लिए भी जीतन मांझी नित्य नई परेशानियां खड़ी कर रहे हैं, वे राबड़ी नंबर दो के तौर पर अवतरित हुए थे,पर जीतन ने भी अब नीतीश को आंखें दिखानी शुरू कर दी है। मांझी ने यह बयान देकर राज्य की राजनीति में तूफान ला दिया था कि विधायक रहते हुए अपने बढ़े हुए बिजली बिल को एडजस्ट कराने के लिए उन्हें 5 हजार रुपयों की रिश्वत देनी पड़ी थी। जब इस मामले ने बेहद तूल पकड़ा तो मांझी ने सफाई दी कि वे 1994 की बात कर रहे थे न कि नीतीश के शासनकाल की। मांझी ने नीतीश की इच्छा के विरूद्ध उन जदयू विधायकों को अभयदान दे दिया, जिन्होंने इस राज्यसभा चुनाव में पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ वोटिंग की थी। यहां तक कि अब मांझी अपने विधायकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग की सिफारिशें भी सुनने लगे हैं, बस यह दर्शाने के लिए कि वे नीतीश के रबर-स्टांप नहीं हैं।

 
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