…और अंत में

September 26 2016


अपने यूपी के दौरे से लौटने के बाद वरूण गांधी भी चिकनगुनिया की चपेट में आ गए। जब वे जोरबाग स्थित अपने घर में आराम फरमा रहे थे तो भाजपा संगठन के एक प्रमुख नेता का फोन उन्हें आया, नेताजी ने जानना चाहा कि वे पार्टी की राष्ट्रीय काउंसिल की बैठक में हिस्सा लेने कोझिकोड क्यों नहीं जा रहे हैं? वरूण ने बताया कि इन दिनों वे चिकनगुनिया से ग्रस्त हैं। संघ पृष्टभूमि के इस नेता ने आर्श्चय व्यक्त करते हुए कहा-’अरे आप तो शुद्ध शाकाहारी हैं, चिकनगुनिया तो चिकेन खाने वालों को होता है, इसीलिए देखिए न अपनी बीजेपी में किसी को चिकनगुनिया नहीं हुआ।’ वरूण ने समझाना चाहा कि चिकनगुनिया का चिकेन से कोई लेना देना नहीं, पर नेताजी नहीं माने, अज्ञानता के इस किस मच्छर ने संघ को डस रखा है?

 
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