| मन है ठंडा, पर दिल में जल रही है आग |
|
October 03 2016 |
|
केरल के कोझीकोड में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में नरेंद्र मोदी ने बेहद सुविचारित तरीके से दो मौकों पर पार्टी जनों को संबोधित किया। कहना न होगा कि ’उरी अटैक’ को लेकर तब भी उनके मन में घोर उथल-पुथल के दौर जारी थे। उनके भाशणों में भी इसकी प्रतिध्वनि देखी-सुनी जा सकती थी। शब्द उनके मन की तल्खियों से लैस थे, मोदी ने अपने बारे में अपने पार्टी जनों से दो टूक कहा कि वे एक पंथ निरपेक्ष व्यक्ति हैं, पर उनकी ही पार्टी के कुछ नेता अनाप-शनाप बयान देकर उनकी धर्मनिरपेक्षता को कटघरे में ला खड़ा करते आए हैं। इसकी मिसाल देते हुए उन्होंने कहा कि जब पिछली वर्ष नवरात्रि के मौके पर वे अमरीका गए तो उनके खान-पान की बात को लेकर पार्टी के कुछ नेताओं ने मीडिया में अलग तरह से बात रखी, जबकि इसमें किंचित मात्र सच्चाई नहीं है। वे तन-मन की शुद्धि के लिए ही नवरात्रि का व्रत रखते हैं, जब एक जगह उनके लिए शीशे के ग्लास में पानी आ गया, तो उन्होंने वह जल ग्रहण न कर एक नए ग्लास के आने का इंतज़ार भर किया। मोदी ने साफ किया कि उनका इरादा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था। एक अन्य उदाहरण में मोदी ने अपनी कोझीकोड यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि जब भी वे किसी नई जगह पर जाते हैं तो सबसे पहले वहां वे किसी स्थानीय मंदिर का दर्शन करना पसंद करते हैं, कोझीकोड में भी उन्होंने ऐसा ही किया, इससे किसी पंथ की धार्मिक भावनाएं आहत नहीं होनी चाहिए। पाकिस्तान के बारे में भी उन्होंने पहेलियां बुझाने के अंदाज में कहा-जब तक स्थितियां हमारे अनुकूल नहीं हो जाती है, तब तक हमारे सिर पर बर्फ (ठंडे मन), पर ह्यदय में आग जलती रहनी चाहिए। इस आग की चिंगारियों का स्वाद अब पाकिस्तान ने तो कम से कम चख ही लिया है। |
| Feedback |