महाठग संजय की कहानी |
May 06 2023 |
यूपी के गाजीपुर से ताल्लुक रखने वाले महाठग संजय राय उर्फ संजय शेरपुरिया उर्फ संजय प्रकाश बालेश्वर राय को पिछले दिनों यूपी एसटीएफ ने 16 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में धर लिया है। इस ठग की फोटो पीएम समेत भाजपा के बड़े नेताओं, संघ व विहिप के बड़े नेताओं के साथ सोशल मीडिया पर वायरल है, यह लंबे समय से अपने को पीएमओ का आदमी बता कर लोगों से ट्रांसफर-पोस्टिंग और ईडी-सीबीआई के मामले दफा-दफा कराने के नाम पर पैसे ऐंठता रहा है। इस व्यक्ति की कहानी निहायत फिल्मी है, गाजीपुर के शेरपुरा गांव से ताल्लुक रखने वाला संजय वहां के एक बेहद साधारण परिवार से आता है, कहते हैं पढ़ाई के नाम पर वह सिर्फ दसवीं पास है। नौकरी की तलाश में वह गुजरात चला गया और वहां एक सेठ की गाड़ी चलाने लगा, सेठ की बेटी इसके इश्क में पड़ गई और दोनों ने शादी कर ली। राय सेठ की बड़ी संपत्ति का मालिक बन बैठा। गाजीपुर भूमिहार कनेक्शन लेकर उसने एके शर्मा के मार्फत गुजरात के सीएम ऑफिस में एंट्री पा ली। उसने ‘वाइब्रेंट गुजरात’ में अपने लिए एक अवार्ड भी पा लिया। इसके बाद एक कैमिकल फर्टिलाइजर फैक्ट्री चलाने के नाम पर स्थानीय स्टेट बैंक से लगभग 400 करोड़ का लोन भी ले लिया। अब जाकर शेरपुरिया की गिरफ्तारी के बाद एसबीआई की अहमदाबाद शाखा ने शेरपुरिया की पत्नी व कंपनी के एक अन्य निदेशक के नाम 341 करोड़ से अधिक की वसूली के लिए नोटिस जारी किया है। इसने ‘यूथ रूरल एंटरपिन्योर फाऊंडेशन’ के नाम से एक संस्था बना रखी थी, इसने जानबूझ कर संस्था में कोई पद नहीं ले रखा था, पर ठगी के मोटे पैसे लोगों से संस्था के अकाऊंट में ही ट्रांसफर करा लेता था। एसटीएफ की पूछताछ में यह राज भी बेपर्दा हुआ है कि शेरपुरिया ने अलग-अलग नाम से 52 शेल कंपनियां बना रखी थी जिसका वह निदेशक था। उसके 225 से ज्यादा ई-मेल आईडी थे। वह मीडिया में भी अपने अच्छे रसूख के लिए जाना जाता था, शेरपुरिया इस बार के यूपी विधानसभा चुनाव में मोहम्मदाबाद सीट से टिकट के लिए प्रयासरत था पर कहते हैं संघ को ही इसके नाम पर आपत्ति थी। सो, यह भाजपा का टिकट पाने से वंचित रह गया। गाजीपुर में इसने अपने पैसों से अपने पिता के नाम एक सड़क बना रखी है। पर अब उसकी उद्दात महत्वाकांक्षाओं के सफर ने उसे एक अलग मंजिल पर ला खड़ा किया है। |
Feedback |