सिमट रहा ’कांग्रेस संदेश’

May 29 2017


मोदी सरकार भले ही वायदे के मुताबिक आम भारतीयों के लिए अच्छे दिन नहीं ला पाई हो, पर कांग्रेस के लिए बुरे दिन के आगाज जारी है। पहले तो पार्टी का ग्राफ सिमटता जा रहा है और अब कांग्रेस के मुखपत्र ’कांग्रेस संदेश’ के भी बुरे दिन षुरू हो गए हैं। हालिया दिनों में इस पत्रिका की क्वालिटी और इसके सुर्कलेशन में जबर्दस्त गिरावट दर्ज हुई है। 10 रुपए की कीमत और हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रकाशित होने वाले इस पत्रिका की प्रसार संख्या कभी तकरीबन एक लाख प्रति के आसपास हुआ करती थी। सूत्रों की मानें तो आज ’कांग्रेस संदेश’ का सर्कुलेशन मात्र 10 हजार प्रतियों पर सिमट आया है। इसमें काम करने वाले पत्रकारों की हालत भी अब अच्छी नहीं रह गई है। अब न तो उन्हें वक्त पर तनख्वाह मिल रही है और न ही अन्य भत्तों का लाभ। एक जमाने में इन पत्रकारों के पेट्रोल बिल पर कोई रोक टोक नहीं थी, कैंटीन में इनके मुफ्त खाने-पीने की भी व्यवस्था थी। पर जब से नोटबंदी का दौर आया है, पहले कई महीनों तक तो इन्हें तनख्वाह ही नहीं मिली और अब तनख्वाह मिल भी रही है तो वह वक्त पर नहीं है। कांग्रेस के कई सीनियर लीडर इसका ठीकरा पत्रिका की संपादक गिरिजा व्यास और इसके एडिटोरियल बोर्ड के सदस्यों जयराम रमेश और सलमान खुर्शीद पर फोड़ रहे हैं। वहीं इन बातों से तटस्थ पत्रिका के प्रकाशक व पार्टी के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा अब भी ’कांग्रेस संदेश’ को अपना पूरा वक्त दे रहे हैं। पत्रिका को छपने के लिए प्रेस भेजने से पहले वह इसे खुद आद्योपांत पढ़ते हैं, भाषा व तथ्यात्मक ऋुटियों को सुधारते हैं और कांग्रेस व ’कांग्रेस संदेश’ के अच्छे दिनों की कामना करते हैं।

 
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