| रूस या फ्रांस, कौन होगा जैतापुर का विजेता? |
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March 12 2018 |
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फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रान भारत दौरे पर हैं, उनके साथ 40 बड़े फ्रेंच उद्योगपतियों का एक दल भी भारत आया है जो अलग-अलग क्षेत्रों मसलन रेल, स्मार्टसिटीज, सोलर एनर्जी, सिविल न्यूक्लीयर कॉरपोरेशन में बड़े निवेश का इरादा रखता है। सूत्र बताते हैं कि फ्रेंच राष्ट्रपति मैक्रान के एजेंडे में महाराष्ट्र में स्थित जैतापुर न्यूक्लीयर प्लांट भी प्रमुखता से जगह बनाए हुए हैं, इस बारे में वे पीएम मोदी से वन-टू-वन वार्ता के इच्छुक हैं। सनद रहे कि यूपीए-II के शासनकाल में 2009 में भारत सरकार में एक फ्रेंच कंपनी अरेवा एसए ने 6 ग्रिड प्लांट के लिए निविदा दी थी, 2010 में भारत सरकार के साथ इस फ्रेंच कंपनी का एग्रीमेंट भी हो गया जिसके तहत अरेवा एसए को जैतापुर में दो न्यूक्लियर प्लांट लगाने थे। वक्त गुज़रा और भारत और फ्रांस दोनों जगह सरकारें बदल गईं और 2011 में जापान के फुकोसीमा न्यूक्लीयर प्लांट में रिसाव की वजह से सुनामी आने और भारी तबाही मचने से वैश्विक स्तर पर ऐसे न्यूक्लीयर प्लांट लगाने की सर्वत्र आलोचना होनी शुरू हो गई, कई स्वयंसेवी संगठनों ने इन प्लांट के विरूद्ध मोर्चा खोल दिया, इतने घोर उथल-पुथल के बीच एरेना एसए कंपनी भी भयानक आर्थिक मुसीबतों से घिर गई और इस कंपनी को एक अन्य फ्रांसीसी कंपनी ’इलेक्ट्रिीसाइट डी फ्रांस’ ने खरीद लिया और जैतापुर न्यूक्लीयर पॉवर प्लांट के ऊपर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे। कई स्वयंसेवी संस्थाओं ने प्रस्तावित जैतापुर प्लांट के खिलाफ अभियान की शुरूआत कर दी। पर अब फ्रेंच राष्ट्रपति मैक्रान इस प्लांट को शुरू करवाने में खासी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। |
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