धूमल ने ऐसे चटाई धूल

November 07 2017


हिमाचल प्रदेश में भगवा आकांक्षाएं कुलांचे भर रही है, पार्टी इस चुनाव में अपनी जीत के प्रति आश्वस्त जान पड़ती हैं, पर यहां कुछ तो है जो पार्टी सिरमौर अमित शाह को लगातार परेशान कर रही है। वह है भाजपा के अंदर भीतरघात और गुटबाजी की बढ़ती प्रवृत्ति। अब से पहले तक भाजपा यहां तीन खेमों में स्पष्ट तौर पर बंटी नज़र आ रही थी। धूमल, नड्ढा और शांता कुमार के खेमों में। शांता कुमार पार्टी नेतृत्व की उपेक्षाओं से खासे आहत हैं, उनके करीबियों के थोकभाव में टिकट कट गए हैं। जेपी नड्ढा को पूरी उम्मीद थी कि हिमाचल के अगले सीएम वही होंगे, पर ऐन वक्त भाजपा के सीएम कैंडिडेट के तौर पर प्रेम कुमार धूमल का नाम अनाऊंस होने से वे सकते में हैं। पर सूत्र बताते हैं कि उन्हें मना लिया गया है। धूमल पुत्र अनुराग ठाकुर किंचित इस बात को लेकर बेहद नाराज़ थे कि तमाम उम्मीदों के बाद भी उन्हें केंद्र में मंत्री नहीं बनाया गया। सो, लगे हाथ धूमल गुट इन कयासों को हवा दे रहा था कि भाजपा की ओर से एक राजपूत सीएम (धूमल) प्रोजेक्ट नहीं किए जाने से प्रदेश के 37 फीसदी राजपूत मतदाता कमल पार्टी से नाराज़ हैं और वे वीरभद्र सिंह यानी कांग्रेस की ओर जा सकते हैं। चुनांचे जो भाजपा हाईकमान हिमाचल में अपना कोई सीएम उम्मीदवार घोषित करने के पक्ष में नहीं था, उसे अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर होना पड़ा।

 
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