राग-गोविंद

December 01 2014


भाजपा के पूर्व थिंकटैंक और पार्टी के चाणक्य रहे गोविंदाचार्य के भाजपा में फिर से सक्रिय होने के अटकलों को फिलवक्त विराम लग गया लगता है, अपनी दिल की सुनने वाले और मन की करने वाले गोविंदाचार्य नेहरू और इंदिरा के बाद भले ही नरेंद्र मोदी को देश का सबसे ‘प्रो-एक्टिव’ और मेहनती प्रधानमंत्री मानते हों, लेकिन शिक्षा, श्रम, न्याय, स्वास्थ्य, उद्योग और चुनाव सुधार से संबंधित कई नीतियों को लेकर वे मोदी सरकार की तीखी आलोचना भी करते हैं। चुनांचे इन दिनों गोविंदाचार्य का सारा फोकस ‘गऊ और गंगा’ को लेकर है। वहीं इन दिनों वे भारत विकास संगम के भारतीय संस्कृति उत्सव की तैयारियों में भी जुटे हैं, जो नए वर्ष में 19-25 जनवरी 2015 को कोल्हापुर के कनेरी में आयोजित होना है। सात दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में कृषि, मातृ शक्ति, युवा शक्ति, स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी है। अनुमान है कि इस उत्सव में छोटे-बड़े कोई 1500 से ज्यादा ग्रुप शामिल हो सकते हैं। चुनांचे गोविंदाचार्य इन दिनों जोर-शोर से मोदी के महत्त्वाकांक्षी नदियों को जोड़ने के मुद्दे को उछाल रहे हैं और सरकार से पूछ रहे हैं कि अब तक सहायक नदियों की दिशा में क्या काम हुआ है?

 
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