| कृष्ण गोपाल से लड्डू गोपाल की यात्रा |
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November 30 2015 |
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संघ के एक प्रमुख नेता कृष्ण गोपाल के खिलाफ संघ संगठन में ही आवाजें उठनी शुरू हो गई हैं। सूत्र बताते हैं कि पिछले कुछ समय में संघ के कई प्रांत प्रचारकों ने संघ प्रमुख मोहन भागवत और भैय्याजी जोशी से मिलकर इस बात की शिकायत लगाई कि शाह-मोदी-जेटली के समक्ष कृष्ण गोपाल की आवाज नक्कारखाने में तूती साबित हो रही है। संघ के प्रमुख नेताओं के वरदहस्त के बावजूद बतौर संगठन मंत्री कृष्ण गोपाल अपनी वह हैसियत नहीं बना पा रहे हैं जो वाजपेयी-युग में संघ के कद्दावर नेता मदनदास देवी की थी। यहां तक कि बाद के दिनों में संगठन मंत्री के पद का निर्वहन करते सरेश सोनी ने भी कई मौकों पर भाजपा नेतृत्व को झुकने पर मजबूर कर दिया, राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी के अध्यक्षीय काल में इस बात की मिसाल दिखाई पड़ जाती है। संघ के स्वयंसेवकों ने अब कृष्ण गोपाल को एक नया नाम दे डाला है.लड्डू गोपाल, जिनका सारा ध्यान इन दिनों मानव संसाधन विकास मंत्रालय पर ही फोकस है। सूत्र बताते हैं कि विभिन्न विश्वविद्यालयों में उप-कुलपतियों की नियुक्तियों के लिए कृष्ण गोपाल की ओर से जो अनुसंशाएं भेजी गई थीए इनमें से ज्यादातर नामों को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की हरी झंडी मिल गई है, जाहिरा तौर पर कृष्ण गोपाल इसे अपने लिए और संघ के लिए एक बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। समझा जाता है कि जब संघ के शीर्ष नेतृत्व ने इस बाबत कृष्ण गोपाल से बात करनी चाही तो उन्होंने इस बारे में अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके संगठन मंत्री का दायित्व संभालने के बाद भी अभी भी सरेश सोनी भाजपा में संघ के दृष्टिकोण को प्रतिपादित करने के लिए खासे सक्रिय हैं। सूत्र बताते हैं कि इस बात से रूठ कर कृष्ण गोपाल ने तो शीर्ष नेतृत्व के समक्ष अपने इस्तीफे की पेशकश भी कर दी थीए संघ नेतृत्व के समक्ष भी सांप-छूछंदर वाली स्थिति पैदा हो गई है, उनसे न निगलते बन रहा है, ना उगलते। |
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