कैराना में माया का मास्टर स्ट्रोक

May 14 2018


मायावती ने नए सियासी सबक कंठस्थ कर लिए हैं, अब उनकी राजनीति और उनका दिल पहले की तरह तंगेहाल नहीं, खुलेपन का यह दस्तूर भले नया हो, पर इस दफे इसकी आहट कर्नाटक चुनाव में भी देखने को मिली और जेडीएस के संग गठबंधन में भी माया ने अपनी फराखदिली का परिचय दिया है। इस दफे भी जब कैराना और नूरपुर में सपा और लोकदल के बीच बातचीत पटरी से उतर रही थी और पहले अखिलेश इस बात पर अड़े रहे कि कैराना से सपा अपना उम्मीदवार उतारेगा तो नूरपुर से लोकदल अपना उम्मीदवार उतार ले, पर जब जयंत चौधरी इस बात के लिए नहीं माने तो अखिलेश ने एक नया खटराग अलापना शुरू कर दिया कि अगर वाकई लोकदल को कैराना सीट चाहिए तो वह अपना विलय सपा में कर दें। जब इस खटराग की खबर बहिनजी को लगी तो उन्होंने सीधे अखिलेश को फोन लगाया और कहा कि ’आप कैराना लोकदल को दे दो, चुनाव चिन्ह उनका रहेगा पर उम्मीदवार सपा का। नहीं तो कैराना में अगर सपा अपने चुनाव चिन्ह पर उम्मीदवार उतारती है और किसी वजह से वह चुनाव हार जाती है तो गोरखपुर और फूलपुर का मोमेंटम हम खो देंगे, क्योंकि कैराना में इस दफे पूरी सरकारी मशीनरी चुनाव लड़ेगी। ऐसे में लोकदल को लड़ने दो, जीते तो 2019 में हमारे गठबंधन के वे साथी होंगे और हार गए तो फिर उनका नसीब। 19 में वे हम से ज्यादा मांग नहीं पाएंगे।’ बात अखिलेश की समझ में आ गई, वे ये भी समझ पाए कि बहिनजी अब ’कम बैक’ करने को आतुर हैं।

 
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