जाते-जाते बची खट्टर सरकार

July 01 2020


मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार जाने से व्यथित कांग्रेस ने इसका बदला हरियाणा में लेने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया था, इसकी बागडोर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सौंपी गई थी। एक बार पार्टी हाईकमान से हरी झंडी मिल जाने के बाद हुड्डा खट्टर और उनके मंत्रियों से नाराज़ विधायकों को एकजुट करने में जुट गए। विधायकों में सबसे ज्यादा नाराज़गी प्रदेश के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की कार्यशैली को लेकर थी, दुष्यंत के बारे में यह माना जाता है कि जो भी फाइल एक बार इनके पास पहुंच जाती है वे इस पर कुंडली मार कर बैठ जाते हैं। उनकी अक्खड़ कार्यशैली का यह आलम है कि वे मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की भी एक नहीं सुनते हैं। चूंकि कई महत्वपूर्ण विभाग दुष्यंत के पास हैं सो, सरकार की कई योजनाएं भी वहां अटकी पड़ी हैं। सूत्रों की मानें तो हुड्डा तेजी से नाराज़ विधायकों से संपर्क साधने में जुटे थे और एक वक्त ऐसा आया कि उन्हें प्रदेश के 90 में से 40 विधायकों का समर्थन हासिल हो गया। इससे पहले कि हुड्डा अपनी मंशाओं को परवान चढ़ा पाते कि खट्टर सरकार के एक मंत्री चौधरी रणजीत सिंह को इसकी भनक लग गई, जो इस वक्त एक निर्दलीय विधायक की हैसियत से खट्टर सरकार में मंत्री हैं और उनके पास पॉवर और जेल जैसे दो अहम मंत्रालय भी हैं। रणजीत सिंह ने फौरन इस योजना की जानकारी खट्टर को दे दी। जैसे ही भाजपा को हुड्डा की इस योजना की भनक लगी, भाजपा ने 5 कांग्रेसी विधायकों पर डोरे डाल दिए, उधर अभय चौटाला ने भी हुड्डा को कोई खास भाव नहीं दिया, सो, खट्टर सरकार जाते-जाते रह गई।

 
Feedback
 
Download
GossipGuru App
Now!!