| आईबी का व्याख्यान और जेटली का ज्ञान |
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December 27 2015 |
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पिछले बुधवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आईबी के सालाना ’एनयुल इंडॉमेंट लेक्चर’ का मौका था, और आईबी की ओर से यह लेक्चर देने के लिए केंद्रीय वित्त व सूचना प्रसारण मंत्री अरूण जेटली को आमंत्रित किया गया था, सवाल-जवाब के क्रम में आईबी के एडिशनल डायरेक्टर रहे राजेंद्र कुमार ने जेटली की ओर एक चुभता हुआ सवाल दागा, सनद रहे कि ये राजेंद्र कुमार वही हैं, जिन्हें गुजरात के चर्चित सोहराबुद्दीन एन्काउंटर मामले के इशरत जहां केस से सुर्खियों में आए थे। राजेंद्र कुमार का सवाल था कि-’हम जैसे लोग सिर्फ अपनी ड्यूटी का निर्वहन करते हुए, बगैर किसी राजनैतिक दुर्भावना के काम करते हैं, पर राजनैतिक शह-मात के खेल में हमें ही क्यों बलि का बकरा बना दिया जाता है?’ जेटली ने एक वाक्य में इसका जवाब देते हुए कहा-’राजनैतिक अहसान फरामोशी से बड़ा और कोई पाप नहीं।’ लोग चतुर सुजान जेटली का इशारा समझ चुके थे। सनद रहे कि इससे पूर्व पिछले वर्ष इसी लेक्चर सीरिज में अपना व्याख्यान देने के लिए आईबी ने डीआरडीओ के तत्कालीन चीफ अविनाश चंदर को आमंत्रित किया था, उस लेक्चर के कुछ दिनों बाद ही चीफ की गद्दी चली गई थी, जेटली लेक्चर देकर गए तो नई राजनैतिक मुसीबतों ने उन्हें चारो ओर से घेर लिया है। क्या यह उसी सुगबुगाहट की पटकथा है। |
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