| यह पूजा सिंघल क्या बला है |
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May 17 2022 |
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झारखंड की आईएएस अफसर पूजा सिंघल सियासत और नौकरशाही के मनचाहे घालमेल की ही एक तस्वीर है, जो यह बताने की कोशिश करती है कि नेताओं को भ्रष्टाचार की राह दिखाने वाली नौकरशाही खुद इसके अंदर किस हद तक लिप्त है। झारखंड में जब भाजपा के तथाकथित एक ईमानदार मुख्यमंत्री का दौर था पूजा सिंघल की उसमें तूती बोलती थी। वैसे तो पूजा अनगिनत घोटालों की सूत्रधार रही हैं, पर जब खूंटी में बड़े पैमाने पर मनरेगा घोटाला हुआ तो उसमें मैडम आईएएस की लिप्तता को लेकर एक जांच कमेटी बिठा दी गई, पर उस कमेटी की अगुआ रही झारखंड की तत्कालीन मुख्य सचिव राजबाला वर्मा और प्रिंसिपल सेक्रेटरी एपी सिंह ने पूजा सिंघल को इस मामले में क्लीन चिट दे दी। जबकि सरकार में सचिव रही निधि खरे ने पूजा को क्लीन चिट देने का खुल कर विरोध किया था। आज निधि खरे दिल्ली में पोस्टेड हैं और निधि के पति अमित खरे जो खुद भी एक आईएएस अफसर हैं, पीएमओ में एक बेहद ताकतवर अफसर हैं। सनद रहे कि उस दौर में राजबाला वर्मा और एपी सिंह पर भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे और तब पीएमओ ने रघुबर दास से कहा था कि वे वर्मा और सिंह दोनों की जांच कराएं। पर कंबल ओढ़ घी पीने में सिद्दहस्त रघुबर दास ने किंचित चतुराई से यह मामला दबा दिया। हेमंत सोरेन शुरू से भाजपा के निशाने पर रहे हैं और पूजा सिंघल हेमंत की किचेन कैबिनेट की एक अहम सदस्य हो गई थीं, सो सिंघल के बहाने सोरेन को भी नापने की तैयारी है। रही बात रघुबर दास की तो वे राज्यसभा में आने के लिए ताबड़तोड़ हाथ-पैर मार रहे थे, उनकी नज़र सीएम की कुर्सी पर भी थी। कहते हैं ईडी ने अपनी कड़ी पूछताछ में पूजा सिंघल से कई अहम राज उगलवा लिए हैं, इससे यह भी पता चला है कि सिंघल ने रघुबर दास के संग अपना ’बनिया कनेक्शन’ भिड़ा कर अपने रिश्ते किंचित बहुत मधुर कर लिए थे। |
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