बिहार में नीतीश की राज्यपाल से ठनी

January 03 2022


बिहार के राज्यपाल फागू चौहान और प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दरम्यान तल्खी बढ़ती ही जा रही है। सूत्रों की मानें तो नीतीश अपने राज्यपाल से इस कदर नाराज़ हैं कि इस बात की शिकायत उन्होंने प्रधानमंत्री से भी कर दी है। पर भाजपा यूपी चुनाव तक फागू चौहान को छेड़ना नहीं चाहती, क्योंकि एक तो चौहान यूपी से आते हैं जहां उनकी सजातीय नोनिया जाति का एक बड़ा वोट बैंक है। यूपी में नोनिया जाति के एक प्रमुख नेता संजय चौहान ने अखिलेश यादव की सपा के साथ चुनावी गठबंधन कर लिया है, सो भाजपा व संघ नहीं चाहते कि ऐसी विकट परिस्थितियों में फागू चौहान को छेड़ा जाए। दरअसल, नीतीश इस बात को लेकर राज्यपाल से किंचित खफा थे कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर की नियुक्तियों में हो रही वित्तीय अनियमिताओं की खबरें लगातार उनके पास आ रही थीं। राजभवन ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. एसपी सिंह को ’बेस्ट वाइस चांसलर’ के अवार्ड से नवाज दिया, जबकि सिंह पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप थे। इस पर नीतीश ने कुलपति और राजभवन के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की मांग राज्यपाल से कर दी। वहीं माननीय राज्यपाल के परिवार यानी इनके 3 बेटों और 4 बेटियों पर प्रदेश के 17 विश्वविद्यालयों में मनमाने टेंडर देने और नियुक्तियों के आरोप भी लगते रहे हैं। राज्यपाल महोदय पर विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति और सेवा विस्तार को लेकर भी आरोप लग रहे हैं। उन पर यह भी आरोप है कि बिहार आने के बाद उन्होंने अपने गृह राज्य उत्तर प्रदेश के फैजाबाद से लाकर सुरेंद्र प्रताप सिंह को, तो गोरखपुर से लाकर राजेंद्र प्रसाद को अलग-अलग विश्वविद्यालयों के कुलपति नियुक्त कर दिए। राजभवन की ओर से कई ऐसे कुलपतियों को सेवा विस्तार दे दिया गया, जिन पर रिश्वत लेने के आरोप लगे थे। जब इस बात की जानकारी नीतीश को हुई तो उन्होंने तीन नए विश्वविद्यालयों के अधिकार क्षेत्र से राज्यपाल को बाहर रख दिया, राज्यपाल इस बात से इतने कुपित हुए कि उन्होंने इन तीनों विश्वविद्यालय का बिल ही अधर में लटका दिया है।

 
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