’न जाने कितनी आंखों में नश्तर सा चुभता है तू
सज़रे-बहारा में क्या ईंट-पत्थर सा रहता है तू’
कहते हैं नाम में क्या रखा है, आज हम जिस शख्स की कहानी यहां बयां करने वाले हैं, एक समृद्ध विरासत की दावेदारी के बावजूद भगवा सफर में इन्होंने उन रास्तों को चुना जो उन्हें सियासत के संक्रमण काल में लेकर गए। चंद दशक पहले साउथ दिल्ली की एक मामूली सी बरसाती से अपनी सियासी यात्रा शुरू करने वाला यह शख्स आज हजारों करोड़ का मालिक है। नोएडा में एक बड़ी कोठी है, एक बेनाम फॉर्म हाउस है और लंदन के पॉश इलाकों में बेटों के मालिकाना हक में फ्लैट्स हैं और भी बहुत कुछ है, पर सियासतदां अपने जुर्म और संपत्तियों को छुपाने में हमेशा सिद्दहस्त होते हैं। ऊंचाईयों को छूने का यह सिलसिला तब शुरू हुआ, जब वाजपेयी के शासनकाल में ये एक महत्वपूर्ण मंत्री के ऑफिस में लग गए। वहां से दुकान सजी तो यह एक बड़े हथियारों के सौदागर के संपर्क में आए, कई बड़ी डिफेंस डील में इनकी महती भूमिका मानी जाती है, उस डिफेंस डीलर ने इस शख्स को धन-धान्य से परिपूर्ण कर दिया। जब उस डिफेंस डीलर पर निजाम बदलने के बाद जांच एजेंसियों की सख्ती बढ़ी तो वह डीलर परिवार समेत लंदन शिफ्ट हो गया। पर इस भगवा राजनेता से उसके तार बदस्तूर जुड़े रहे। उस डीलर ने लंदन के एक पॉश इलाके में अपनी शानदार कोठी खरीद ली और इस भगवा शख्स के बेटे जब लंदन पढ़ने गए तो वह डिफेंस डीलर ही इनके बेटों के ‘लोकल गार्जियन’ की भूमिका निभाता रहा। इस भगवा शख्स ने इसके बाद नोएडा में अपनी एक आलीशान कोठी खरीदी और अपने एक मित्र के गारमेंट एक्सपोर्ट के धंधे में अपना ढेर सारा पैसा लगा दिया। अपनी अच्छी पढ़ाई और नफीस अंग्रेजी की बदौलत उन्होंने भगवा सियासत के एक चमकते नक्षत्र अरूण जेटली का दिल जीत लिया और धीरे-धीरे वे जेटली के बेहद करीबियों में शुमार होते चले गए। जब दिल्ली के निजाम पर मोदी जैसे शक्तिशाली सूर्य का उदय होने वाला था तो इस भगवा शख्स को एक महत्वपूर्ण पूर्वी राज्य का सहप्रभारी भी बनाया गया पर जैसे-जैसे मोदी दरबार में जेटली के आभामंडल में गिरावट आई, इस शख्स ने फौरन पाला बदल भाजपा के नंबर दो का दामन थाम लिया। और धीरे-धीरे सत्ता व सियासत की सीढ़ियां चढ़ते योगी के पहले शासनकाल में कैबिनेट मंत्री हो गए। उन्हें एक बेहद महत्वपूर्ण विभाग से नवाजा गया, पर जब इनके खिलाफ भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायतें लगातार दिल्ली पहुंचने लगीं तो इनका विभाग बदल कर इन्हें एक मामूली सा विभाग दे दिया गया। इस वर्ष मार्च में जब योगी दुबारा लखनऊ की सत्ता पर काबिज हुए तो उन्होंने इस शख्स को बाहर का दरवाजा दिखा दिया। आजकल यह शख्स दिल्ली में रह कर अपने लिए पार्टी संगठन में किसी बड़े पद के लिए लॉबिंग कर रहे हैं, महरौली में रहने वाले इनके एक मित्र कारोबारी जो इत्र के एक बड़े उत्पादक हैं, वे इनके लिए पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं ताकि इनके राजनैतिक प्रार्दुभाव को एक नई उड़ान मिल सके। फिलहाल यह शख्स देश के एक प्रमुख बिल्डर कंपनी के लिए हाउस कीपिंग कंपनी चला रहे हैं। पर सूत्र बताते हैं कि इन शख्स के करतूतों की दास्तां पीएम मोदी के संज्ञान में आ गई हैं, सो लगता नहीं है कि ‘नेटफिलिक्स’ के किसी स्पेनिश माफिया ड्रामा वाले इस प्रतिनायक के किरदार को भगवा राजनीति में फिर से नायक की हैसियत हासिल हो पाएगी।