नकवी को क्यों हटना पड़ा

June 19 2022


भाजपा की चाहतों के सफर को सुर्ख ख्वाब देने और मुकम्मल शब्दावलियों को रोशन करने में मुख्तार अब्बास नकवी की महती भूमिका से कोई इंकार नहीं कर सकता। उनकी मीडिया फ्रेंडली शख्सियत कई-कई दफे भाजपा के काम आई है, सो जब इस दफे उन्हें राज्यसभा नहीं दी गई तो हैरतों ने जैसे आसमां सिर पर उठा लिया, 22 सीटें खाली थीं, कई ऐसे नामों की भी लॉटरी लग गई जिन्होंने ऊपरी सदन की कल्पना नहीं की थी, पर नकवी का नंबर नहीं लगा। जबकि उन्होंने अल्पसंख्यक मंत्रालय को भी इस अंदाज में चलाया कि मंत्रालय के हौसले चमक उठे। नकवी के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ’हुनर हाट’ ने सरकार की लोकप्रियता में चार चांद लगा दिए। जब से ज्ञानवापी विवाद ने तूल पकड़ा है संघ और भाजपा ने एक नया ‘हिंदू नैरेटिव’ तैयार करने की कोशिश की है यानी मुस्लिम मुक्त पार्टी, संसद और सरकार। पर पार्टी में एक वर्ग ऐसा भी है जो नकवी को रामपुर उप चुनाव में उतारना चाहता था। रामपुर में 47 फीसदी हिंदू, 4 फीसदी सिख और 49 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। ओवैसी भी यहां से अपनी पार्टी का उम्मीदवार उतारने की सोच रहे हैं। अगर आजम खान की पत्नी या बेटे में से कोई मैदान में नहीं उतरता है तो वे भी जाने-अनजाने यहां भाजपा की मदद करेंगे। और यह मोदी सरकार की नाक का सवाल भी होगा सो सीएम योगी समेत पूरा प्रशासन भी यहां मुस्तैद रहेगा। पर इतने पर भी नकवी को रामपुर से मैदान में नहीं उतारा गया, भाजपा ने उनकी जगह घनश्याम लोधी को मैदान में उतारा है। क्या यह शालीन और मीडिया फ्रेंडली नकवी के लिए विदाई काल है?

 
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