तब की बात और थी, तब मेरे पास जिम्मेदारी थी

August 06 2022


पिछले दिनों जब पूर्व एचआरडी मिनिस्टर निशंक पोखरियाल सदन से निकल कर बाहर खड़े होकर अपनी गाड़ी का इंतजार कर रहे थे तब वे निपट अकेले एक ओर खड़े थे, मंत्री रहते जब वे बाहर निकलते तो पत्रकारों व छायाकारों के हुजूम में घिरे रहते थे, एक सीनियर फोटो जर्नलिस्ट उनके पास गया और हौले से पूछा-’सर वे दिन याद हैं आपको जब आपके आसपास इतनी धक्का-मुक्की होती थी कि चलने का रास्ता भी नहीं मिलता था?’ निशंक हौले से मुस्कुराए और बोले-’तब की बात और थी, तब मेरे पास जिम्मेदारी थी।’ वहीं पास रवि शंकर प्रसाद भी खड़े थे, यूं ही बेहद तन्हा, आसपास उनके भी कोई नहीं था, उस फोटो जर्नलिस्ट ने उनसे भी ‘हलो’ कहा, पर सवाल नहीं पूछा, उन्हें मालूम था कि दर्द तो इन सबका एक ही होगा।

 
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