हड़बड़ी में गडकरी

November 02 2016


नए मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के आने के बाद पत्रकारों को खबरों का टोटा पड़ गया है, वजह जावड़ेकर अक्सर अपना मुंह बंद रखना ही पसंद करते हैं। पत्रकारों से खबरों पर चर्चा करने से अक्सर वे बचते रहते हैं, वहीं स्मृति के जमाने में पत्रकारों के हाथ कुछ ऐसी खबरें भी लग जाती थीं जो कैबिनेट में अभी चर्चा के लिए भी नहीं गई होती थीं। मोदी सरकार के सीनियर मंत्री नितिन गडकरी का भी पत्रकारों के साथ बेहद दोस्ताना रवैया रहता है, योजनाएं प्रकाश में बाद में आती हैं, मीडिया को इसका इल्म कहीं पहले हो जाता है। दिल्ली के धौलाकुंआ से गुरूग्राम के मनेसर तक ’रोपवे मेट्रीनोज़’ की योजना से गडकरी ने पत्रकारों को वाकिफ कराई, जब पत्रकारगण इस योजना का डिटेल जानना चाहते थे तो गडकरी ने गेंद अपने पीएस वैभव डांगे के पाले में डाल दी। पत्रकार भूखे भेडि़ए से डांगे की और लपके, पर डांगे को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। फिर डांगे ने राष्ट्रीय राज मार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों को फोन लगाया और उनसे इस योजना की फाइल ले आने को कहा ताकि पत्रकारों को इस बारे में विस्तार से जानकारी दी जा सके। सूत्र बताते हैं कि उस अधिकारी ने छूटते ही कहा-’सर, मैं आकर क्या करूंगा, इसकी तो अब तक कोई फाइल ही नहीं बनी है।’

 
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