डोवल के बजने लगे ढोल

July 26 2020


‘सुनते थे जिनका बहुत शोर पहलू में, जब वे फुस्सी बम निकल गए’, तो ऐन भारत-चीन विवाद को सुलझाने में अजीत डोवल मोदी सरकार के बड़े संकटमोचक बन कर उभरे, जब चीन के साथ निरंतर ढाई महीने से चली आ रही बातचीत किसी भी लेवल पर अपना ठौर नहीं ढूंढ पाई यानी जो काम रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री नहीं कर पाए, यहां तक कि जनरल लेवल की बातचीत भी बेनतीजा रही तो ऐसे में सदैव लो-प्रोफाइल रहने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोवल ने चीनी पक्ष से जो कुछ कहा उससे बात बन गई। डोवल ने चीनी पक्ष से दो टूक अंदाज में बात की, माना जाता है कि उन्होंने चीनी पक्ष से कहा ’ विकास आपको भी करना है और हम भी इसके
लिए कृतसंकल्प हैं, हमें उन चीजों को लेकर आगे बढ़ना है जहां किसी विवाद की गुंजाइश ही नहीं है। आपका मुकाबला अमेरिका से है और जब हम बाजार नहीं देंगे तो आप अमेरिका से मुकाबला कैसे कर पाएंगे, युद्ध दोनों देशों के लिए ठीक नहीं है।’ चीनियों को बात समझ में आ गई और वह अपनी सेना पीछे हटाने को तैयार हो गया। भले ही चीन की नीति रही हो दो कदम आगे बढ़ाने के लिए एक कदम पीछे हटना ठीक है। इससे पहले भी जब-जब मोदी सरकार ऊहापोह के दौर से गुजर रही थी चाहे कश्मीर से धारा 370 हटाने का मामला हो या दिल्ली दंगे की बढ़ती तपिश का काल हो, डोवल ने हमेशा एक संकटमोचक की भूमिका निभाई है।

 
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