Archive | मुख्य

सोनिया की पहल, एक होते विपक्षी दल

Posted on 28 August 2021 by admin

अगर कुछ विपक्षी दलों के क्षत्रपों को राहुल के नाम पर ऐतराज है तो मामले की गंभीरता को समझते हुए अब विपक्षी एका की अलख जगाने की कमान सोनिया ने अपने हाथों में ले ली है। अभी-अभी आहूत सोनिया की वर्चुअल मीटिंग में बसपा और आप को बुलाया ही नहीं गया था, 19 विपक्षी दल जो इस वर्चुअल बैठक में षामिल हुए थे उसमें अखिलेश की गैर मौजूदगी साथी दलों को जरूरी खली। पर सोनिया ने कांग्रेस के इकबाल को मजबूत करते हुए इतना तो साबित कर दिया है कि फिलवक्त कांग्रेस ही वह ‘अंब्रेला बॉडी’ है जो विपक्षी स्वरों को एक जगह इकट्ठा रख सकती है। सोनिया ने विपक्षी दलों से आह्वान किया कि वे अपने सभी मतभेद भुला कर 2024 में भाजपा के खिलाफ एकजुटता दिखाते हुए साथ आएं। वहीं माकपा के सीताराम येचुरी का कहना था कि उनकी पार्टी तृणमूल से भी तालमेल को तैयार है, पर बंगाल और त्रिपुरा जैसे राज्यों को छोड़ कर, वहीं सोनिया को लगता है कि मित्रता का हाथ इतने ‘सेलेक्टिव’ नजरिए के साथ नहीं मिलाया जा सकता।

Comments Off on सोनिया की पहल, एक होते विपक्षी दल

मां का लाडला ट्वीटर पर बेतरह बिगड़ा हुआ है

Posted on 28 August 2021 by admin

मां का लाडला ट्वीटर पर बेतरह बिगड़ा हुआ है, उनकी नाराज़गी का आलम यह है कि 14 अगस्त को जब ट्वीटर ने उनके अकाऊंट को आनलॉक भी कर दिया फिर भी राहुल गांधी ने अपने हेंडिल से अब तलक एक भी ट्वीट नहीं किया, उनके एक करोड़ 90 लाख फॉलोअर को अब भी इंतजार है कि राहुल अपने हेंडिल से कुछ तो कहें। उन्होंने 15 अगस्त को आजादी की 75वीं सालगिरह पर देश को मुबारकबाद इंस्टाग्राम पर दिया। कहते हैं राहुल का अकाऊंट यूं अचानक सस्पेंड करने के जुर्म में ट्वीटर ने अपने इंडिया हेड मनीष महेश्वरी को सजा के तौर पर आनन-फानन में अमरीका तलब कर लिया, पर लगता है राहुल के जख्म पर मरहम लगाने के लिए यह भी काफी न था।

Comments Off on मां का लाडला ट्वीटर पर बेतरह बिगड़ा हुआ है

पार्टी के हिंदुत्ववादी नेताओं के निशाने पर बोम्मई

Posted on 28 August 2021 by admin

कर्नाटक के ताजातरीन मुख्यमंत्री बी बोम्मई से उनकी पार्टी के नेताओं का ही एक बड़ा वर्ग नाराज़ चल रहा है। ये नेता भाजपा के हिंदुत्ववादी विचारधारा के गांडीव वाहक हैं, सनद रहे कि ये वही बोम्मई हैं जो भाजपा में 2008 में आने से पहले धुर समाजवादी थे, उनका समाजवाद 2008 से पहले इस कदर हिलौरे मारता था कि उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में शामिल होने से भी तब साफ मना कर दिया था, क्योंकि वे राम मंदिर और धारा 370 जैसे मुद्दों पर भाजपा की राय से इत्तफाक नहीं रखते थे। जनता दल में टूट के बाद वे दो सदस्यों के साथ भी जदयू में बने रहे। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एस आर बोम्मई के पुत्र बी बोम्मई ने भले ही 13 साल पहले भाजपा ज्वॉइन कर ली हो, पर अपनी ढपली अपना राग की तान वे हमेशा से अलापते रहे हैं। अभी उन्होंने मुख्यमंत्री बनते ही एक ताबड़तोड़ फैसला लिया है, वह भी इतना बड़ा फैसला कैबिनेट की एक सदस्यीय कमेटी में, बोम्मई के इस फैसले में राज्य के गरीब किसानों के बच्चों को एक हजार करोड़ रूपए की सरकारी स्कॉलरशिप दिए जाने का ऐलान हुआ है। जबकि राज्य के ज्यादातर हिंदुवादी नेता चाहते थे कि लिंगायत समुदाय के लिए किसी बड़े सहायता पैकेज का ऐलान हो, पर होइए वही जो बोम्मई रचि राखा।

Comments Off on पार्टी के हिंदुत्ववादी नेताओं के निशाने पर बोम्मई

बंगले को आग लगी, घर के चिराग से

Posted on 28 August 2021 by admin

जिन लोगों ने कभी नई दिल्ली के 12 जनपथ स्थित दलितों के नेता दिवंगत राम विलास पासवान के भव्य बंगले के दर्शन किए होंगे वे जानते हैं कि पासवान जी को अपना यह बंगला किस कदर प्यारा था, उन्होंने इस बंगले की साज-सज्जा और इसके नवीनीकरण पर पानी की तरह पैसा बहाया था। उनके नहीं रहने पर अब इस बंगले में चिराग अपनी मां के साथ रहते हैं, चिराग बिहार के जमुई से लोकसभा सांसद भी हैं। चिराग को पूरी उम्मीद थी कि पिता के नहीं रहने पर उन्हें मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी और फिर यह सरकारी बंगला उनके नाम से आबंटित हो जाएगा, पर नीतीश के दबाव में ऐसा कुछ हुआ नहीं, उल्टे सरकार ने उनसे बंगला वापिस लेने की राजनीति पर काम करना शुरू कर दिया। जब चिराग के चाचा विद्रोह करके मोदी सरकार में ‘फूड प्रोसेसिंग’ मंत्री बने तो पहले 12 जनपथ उन्हें आबंटित करने की कोशिश हुई, पर उन्हें डर था कि इससे उनके सजातीय वोटर नाराज़ हो जाएंगे तो उन्होंने यह ऑफर ठुकरा दिया, फिर यह बंगला नीतीश के जदयू कोटे से मंत्री बने आरसीपी सिंह को ऑफर हुआ, कहते हैं उन्होने भी इसके लिए मना कर दिया। अब माना जा रहा है कि यह बंगला मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की पसंद के मुताबिक तैयार करवाया जा रहा है ताकि अगली जुलाई में अपनी रिटायरमेंट के बाद रहने के लिए वे यहां आ सकें। मोदी सरकार षायद यह संकेत देना चाहती है कि वे दलित सम्मान में कोई कमी नहीं आने देगी।

Comments Off on बंगले को आग लगी, घर के चिराग से

त्रिआयामी विपक्षी एका

Posted on 28 August 2021 by admin

संसद के मानसून सत्र में संयुक्त विपक्ष न केवल अपनी एकजुटता दिखाने में कामयाब रहा बल्कि दोनों सदनों में उसने अपनी हिम्मत और ताकत का भी प्रदर्शन किया। रही बात विपक्षी एका के गांडीव संभालने की तो यहां एक नहीं तीन-तीन धुरंधर मैदान में नज़र आए। एक धारा का नेतृत्व जहां ममता बनर्जी के पास दिख रहा था, वहीं विपक्षी एका को नेतृत्व की नई धार पर मांजने के लिए राहुल और सोनिया भी उतने ही बेताब नज़र आए, रही सही कसर कांग्रेस के अंदर से ही पैदा हुए जी-23 के नेताओं के समूह ने पूरा कर दिया। क्या जी-23 के नेता 1967 का वह इतिहास दुहराना चाहते हैं जब कांग्रेस में दोफाड़ होकर वह चर्चित सिंडिकेट बना था। जी-23 के नेता यह पोज करने में जुटे हैं कि असली कांग्रेस तो बस वही हैं। इस बात का अंदाजा जी-23 के इसी उपक्रम से लग जाता है कि राहुल गांधी द्वारा आयोजित ब्रेकफास्ट में उतने विपक्षी नेता नहीं जुट पाए, जितना बड़ा जमावड़ा जी-23 के कपिल सिब्बल द्वारा दिए डिनर में दिखा। इसी को चैलेंज करती हुई सोनिया गांधी अब विपक्षी नेताओं के साथ अपनी वर्चुअल मीटिंग करने जा रही हैं।

Comments Off on त्रिआयामी विपक्षी एका

हंगामे की भेंट चढ़ती संसद

Posted on 28 August 2021 by admin

संसद का यह मानसून सत्र बेहद हंगामाखेज रहा, जिसे अपनी नियत तारीख से एक दिन पहले ही अपना बोरिया-बिस्तर समेटना पड़ा। विपक्षी दलों का आरोप है कि उन्होंने जब भी वैसे ज्वलंत मुद्दे उठाने चाहें जिस पर बहस होनी चाहिए थी तो कैमरों के फोकस स्पीकर महोदय पर ठहरा दिए गए, माइक बंद कर दिए गए जिससे कि वे ये मुद्दे उठा ही न पाएं। विपक्षी नेता बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में लगी आग के ऊपर ‘एडजर्नमेंट मोशन’ लाना चाहते थे जिन्हें ठुकरा दिया गया। किसी बिल या मुद्दे पर (ओबीसी बिल को छोड़ कर) सदन में चर्चा तक नहीं हुई, बिना चर्चा के ही ये तमाम बिल पास हो गए। अब विपक्ष सवाल उठा रहा है तो फिर सदन में विपक्ष की जरूरत ही क्या बची है?

Comments Off on हंगामे की भेंट चढ़ती संसद

…और अंत में

Posted on 28 August 2021 by admin

दुनिया के दिग्गज निवेशक वॉरेन बफेट के इंडीकेटर के मुताबिक आने वाला वक्त भारत के शेयर बाजार के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है। क्योंकि भारत में मार्केट केप टू जीडीपी रेशियो 100 के लेवल के ऊपर जाना खतरे को आमंत्रण देना है। वहीं भारत में शेयर बाजार का मार्केट कैप टू जीडीपी रेशियो 200 के लेवल को छूने को है। वहीं अमेरिकी शेयर बाजार में आधे से ज्यादा शेयर ओवर प्राइस्ड हैं, लगभग पचास फीसदी तक। अक्टूबर-नवंबर में इसमें करेक्शन आ सकता है, जिससे अमेरिकी शेयर बाजार धड़ाम से नीचे गिर सकता है, जाहिर है इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है।

Comments Off on …और अंत में

जीत का श्रेय लेने की होड़, पर खेल बजट नो मोर!

Posted on 28 August 2021 by admin

’गिले-शिकवे सब भुला कर खेले हम जी-जान से
पर हर हुनर में हम पीछे ही रहे बादशाहे हिंदुस्तान से’

हिंदुस्तान में तो मौसम भी अलग-अलग वेष धर कर आते हैं, जिंदगी और मौत का बेरहम खेल खेल कर कोरोना का मौसम अभी-अभी गुज़रा ही था कि खेलों के मौसम ने दस्तक दे दी, तमाम सियासी खेलों को पीछे छोड़ता ओलंपिक आ गया, गाजे-बाजे के शोर में रजत-कांस्यों की खनक ने आकार लेने शुरू कर दिए, ’मोमेंट मार्केटिंग’ के उस्तादों ने भी बदली भंगिमाएं ओढ़ लीं, हर खेल में माहिर इन्होंने भी हमें अपने स्पीकर फोन पर सुनाया-बताया कि इनको हॉकी जैसी ग्लैमर विहीन और गरीब खेल की उतनी ही चिंता है जितनी देश के गरीबों की, कभी वे विराट मुस्कान वाले, सबसे ज्यादा ‘इंडोर्समेंट’ हासिल करने वाले गेंद व बल्ले के माहिर खिलाड़ी की तारीफ में कसीदे पढ़ते नहीं थकते थे, आज उनकी नज़रें इनायत कुश्ती, मुक्केबाजी, भारत्तोलन, हॉकी जैसे खेलों पर हैं। खिलाड़ी अपने बादशाहे ’हुकूमत से बस इतना ही जानना चाहते थे जब सरकार का भरोसा खिलाड़ियों के लिए बाग-बाग हो रहा था तो 2021-22 के खेल बजट में 230.78 करोड़ रूपयों की कटौती क्यों कर दी गई? जब ओलंपिक खेलों के मद्देनजर कोरोना की कलोत छांव से खिलाड़ियों को बचाने के लिए विदेशों में उन्हें पर्सनल ट्रेनर और उनके घरों तक ट्रेनिंग की सुविधाएं पहुंचाई जा रही थीं वैसे में खेल मंत्रालय ने अपने फ्लैगशिप प्रोग्राम ’खेलो इंडिया’ के पिछले वर्ष (2020-21) के बजट 890.42 करोड़ रूपयों को कुतर कर 660.14 करोड़ रूपए क्यों कर दिए, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 230 करोड़ कम थे। राष्ट्रीय खेल महासंघों को सहायता के रूप में दी जाने वाली राशि को भले ही पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 35 करोड़ की बढ़ोत्तरी के साथ 280 करोड़ रूपए कर दिया गया हो, लेकिन एथलीटों के प्रोत्साहन पर खर्च होने वाली राशि को 17 करोड़ रूपए घटा कर मात्र 53 करोड़ रूपए कर दिया गया। फिर भी ओलंपिक खेलों से उपजी आंशिक आशा की ताबड़तोड़ ‘मोमेंट मार्केटिंग’ की होड़ लगी है, देश के कर्णधारों के श्रेयमयी ढोंग तो देखिए।

Comments Off on जीत का श्रेय लेने की होड़, पर खेल बजट नो मोर!

क्या है पीके के ब्लू प्रिंट में

Posted on 28 August 2021 by admin

प्रशांत किशोर भारत के बदलते सियासी मौसम के एक पारखी ज्योतिष हैं, जो वोटर की निराकार आकांक्षाओं को भी शब्दों के गहने पहनाने का हुनर जानते हैं। उन्होंने पिछले दिनों कांग्रेस के भविष्य और उसकी संभावित रणनीतियों को लेकर अपना एक डॉसियर गांधी परिवार को सौंपा है, मुमकिन है कि आने वाले दिनों में पीके के इसी ब्लू प्रिंट के मुताबिक गांधी परिवार आचरण करे, जब पार्टी के नाराज़ 23 वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी थी तो उसमें मजबूती से मांग की गई थी कि पार्टी के 9 सदस्यीय संसदीय बोर्ड को तत्काल प्रभाव से बहाल किया जाए, पीके भी इसी तर्ज पर एक छोटी कोर कमेटी गठित करने की बात रखते हैं। वे इस कमेटी में सोनिया, राहुल, प्रियंका के अलावा खुद को भी देखते हैं और पार्टी के संगठन महासचिव को भी इसमें रखना चाहते हैं। पीके चाहते हैं यह छोटी कोर कमेटी ही तमाम त्वरित और अहम फैसले ले और कांग्रेस की सामांतर कमेटियों को सशक्त करे। राहुल-प्रियंका की जोड़ी पीके की रणनैतिक कौशल और चुनावी सूझबूझ की कायल हैं, पर एके एंटोनी, कमलनाथ, अशोक गहलोत, पी.चिदंबरम जैसे नेताओं की पेशानियों पर पीके की आगमन से बल पड़ गए हैं। इन्हीं नेताओं ने सोनिया से कहा है कि पीके की अति महत्वाकांक्षा कांग्रेस को डुबो सकती है। इन नेताओं ने सोनिया को सुझाव दिया है कि अगर पीके में सचमुच इतनी कूवत है तो इन्हें बिहार का प्रदेश प्रभारी बना कर वहां भेजा जाए, वे कांग्रेस को वहां पुनर्जीवित करें और बन जाएं राज्य के मुख्यमंत्री, पर पुराने कांग्रेसियों को भी पीके को इतने हल्के में नहीं लेना चाहिए।

Comments Off on क्या है पीके के ब्लू प्रिंट में

रूठों को मनाने में जुटे राहुल

Posted on 28 August 2021 by admin

राहुल गांधी पुराने वफादार साथियों की कांग्रेस में पुनर्वापसी के प्रयासों में जुट गए हैं। झारखंड के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार इसकी ताजा मिसाल है। पूर्व आईपीएस अफसर कुमार 15वीं लोकसभा में जमशेदपुर से सांसद थे, पर पिछले झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान अगस्त 2019 में उन्होंने नाराज़ होकर कांग्रेस छोड़ दी थी, राहुल इन्हें मना कर पार्टी में ले आए हैं। हरियाणा के युवा दलित फेस अशोक तंवर ने एक लंबे समय तक यानी कोई छह वर्ष तक प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व निभाया है, भूपेंद्र सिंह हुड्डा से भारी खटपट के बाद इन्हें भी पार्टी छोड़नी पड़ी, राहुल इस यंग दलित लीडर की ब्रांडिंग को व्यर्थ गंवाना नहीं चाहते सो वे हुड्डा की नाराज़गी की परवाह किए बगैर तंवर को फिर से पार्टी में लाना चाहते हैं। तंवर ने अक्टूबर 2019 में हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट वितरण में भ्रश्टाचार के आरोप लगा कर पार्टी छोड़ी थी और ’अपना भारत मोर्चा’ बना लिया था, पर इसके बाद वे सियासी हाशिए पर चले गए थे। सूत्र बताते हैं कि राहुल ने बीजेपी में जाने को तैयार बैठे नवीन जिंदल और मिलिंद देवड़ा से भी बात की है और दोनों को वे पार्टी में कोई सक्रिय जिम्मेदारी देना चाहते हैं। ये दोनों भी राहुल की पुरानी टीम के अहम चेहरों में शुमार होते थे। महाराष्ट्र में संजय निरूपम को भी ठंडे बस्ते से बाहर निकालने की तैयारी है। राजस्थान में सचिन पायलट को आने वाले महीनों में राज्य चलाने की जिम्मेदारी मिल सकती है, अशोक गहलोत को केंद्रीय राजनीति में लाया जा सकता है। देखना यह है कि राहुल की यह नई रणनीति ’प्लाॅन पीके’ का ही कोई सुविचारित हिस्सा है क्या?

Comments Off on रूठों को मनाने में जुटे राहुल

Download
GossipGuru App
Now!!