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नई भूमिका में प्रियंका

Posted on 04 January 2022 by admin

कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी इन दिनों एक नए अवतार में सामने आई हैं, अहमद पटेल के नहीं रहने पर पार्टी नेताओं से काॅआर्डिनेशन का जिम्मा भी उन्होंने ही उठा रखा है, वे बंद दरवाजे में पार्टी के नाराज़ नेताओं से गुप्त मीटिंग करती हैं और पार्टी से उनकी नाराज़गी दूर करने का प्रयास करती हैं, जैसा कि हरीश रावत के केस में हुआ था। अब सुना जा रहा है कि प्रियंका ने वैसे नेताओं की एक ऐसी सूची तैयार की है, जिनकी पांच राज्यों के चुनावों के बाद उनके पंख कुतरे जाएंगे। ये पार्टी के हवा-हवाई नेता हैं, जिनका कोई जनाधार नहीं है पर पार्टी में इन्हें अहम जिम्मेदारियां मिली हुई है। इस कड़ी में हरियाणा के कांग्रेस प्रभारी विवेक बंसल का नाम भी लिया जा रहा है। यूपी में एक नई स्क्रीनिंग कमेटी बनाने की तैयारी है, इसका ढांचा पुरानी स्क्रिीनिंग कमेटी को भंग कर तैयार किया जा सकता है। प्रियंका को लगता है कि जब तक यूपी में स्थानीय नेताओं को तरजीह नहीं दी जाएगी पार्टी वहां अपना खोया जनाधार फिर से हासिल नहीं कर पाएगी। यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय लल्लू से भी प्रियंका खुश नहीं बताई जा रही हैं।

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बिहार कांग्रेस का नया अध्यक्ष

Posted on 04 January 2022 by admin

बिहार कांग्रेस का नया अध्यक्ष चुनने की कवायद जारी है, वर्तमान अध्यक्ष मदन मोहन झा की जगह लेने के लिए कोई माकूल चेहरा उभर कर सामने नहीं आ पा रहा है। बिहार कांग्रेस के एक अहम चेहरे शकील अहमद इन दिनों अलग-अलग दरवाजों से अपने नाम की पैरवी करने में जुटे हैं। जैसे ही इस बात की खबर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर को लगी उन्होंने शकील अहमद के इरादों पर यह कहते हुए पानी फेर दिए कि ’अखिल भारतीय कांग्रेस संगठन में पहले ही 4 मुस्लिम सचिव अपने पदों पर काबिज हैं,’ तारिक के अलावा ये तीन नाम हैं डॉ. शकील अहमद, तौफीक आलम और जावेद। तारिक को लगता है कि बिहार में कांग्रेस को अल्पसंख्यक के बजाए ’बहुसंख्यक हिताय’ राजनीति करनी होगी, शायद इसीलिए वे बिहार में बतौर अध्यक्ष एक मजबूत चेहरा देने की मांग कर रहे हैं।

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पार्टी में अपने विरोधियों को कैसे चित्त किया हरीश रावत ने

Posted on 03 January 2022 by admin

’जब से तेरा ऐतबार किया है
एक ही जुर्म सौ बार किया है’

हरीश रावत की सियासी बाजीगरी ऐन वक्त काम आ गई, कभी दर्देदिल को जुबां देते उन्होंने अपने हाईकमान से शिकायत की थी कि ‘उनके हाथ-पैर बांध कर समुद्र में उनसे तैरने को कहा जा रहा है। जिस समुद्र में तैरना है, सत्ता ने वहां कई मगरमच्छ छोड़ रखे हैं, जिनके आदेश पर तैरना है।’ दरअसल, उनके निशाने पर पार्टी के ही अपने मित्र सखा थे जो उनकी राहों में कांटे बिछा रहे थे, मसलन यशपाल आर्य, देवेंद्र यादव आदि-आदि। उत्तराखंड के कांग्रेस प्रभारी देवेंद्र यादव उन्हें भरोसे में लिए बगैर बड़े फैसले ले रहे थे, जब पानी सिर से ऊपर गुजरने लगा तो वे नाराज़ होकर घर बैठ गए। तब जाकर हाईकमान की तंद्रा टूटी, उन्हें मनाने का जिम्मा प्रियंका गांधी ने उठाया, प्रियंका ने रावत से बात की, उन्हें दिल्ली तलब किया। यही वजह थी कि राहुल से मुलाकात के ऐन पहले रावत और प्रियंका की बंद दरवाजे में दो घंटे की मुलाकात हुई और बीच का रास्ता निकाला गया। पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी पहले से ही रावत की तरफदारी कर रही थीं। रावत से मुलाकात के बाद प्रियंका ने मां और भाई से बात की और इसके बाद ही आगे का ‘रोड मैप’ तय कर दिया गया। यह भी तय हो गया कि उत्तराखंड चुनाव की बागडोर हरीश रावत के हाथों में होगी और उनका नेतृत्व पार्टी में सबको मान्य होगा, अगर प्रदेश में कांग्रेस का बहुमत आया तो मुख्यमंत्री का फैसला निर्वाचित विधायक गण करेंगे। एक सीनियर नेता पूरे हालत पर नज़र रखेगा और वह प्रदेश में समन्वय का भी कार्य भी देखेगा। इस काम के लिए पार्टी के दो सीनियर नेताओं अंबिका सोनी और आनंद शर्मा के नाम की चर्चा है। प्रियंका राहुल से मिलने के बाद रावत स्वयं अंबिका से मिलने पहुंचे जो इन कयासों को बल देता है। सोनिया का मानना था कि उत्तर भारत के ज्यादातर बड़े चेहरे पार्टी के असंतुष्ट गुट जी-23 का हिस्सा हो गए हैं सो ऐसे में रावत की निष्ठा गांधी परिवार से जोड़े रखना जरूरी है। रावत के एक विरोधी आर्येंद्र शर्मा जो एक साथ दो पदों पर काबिज थे यानी उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष, तो उनसे एक पद छोड़ने को कहा गया है। देवेंद्र यादव से जुड़े हजारों करोड़ के जमीन घोटाले के कथित कागजात राहुल तक पहुंचा दिए गए हैं, चुनाव के बाद गांधी परिवार इस पर संज्ञान ले सकता है। रावत के पार्टी छोड़ने की अटकलों के बीच उनके प्रबल प्रतिद्वंदी हरक सिंह रावत भाजपा छोड़ कांग्रेस में आने को तैयार बैठे थे और अपनी बहु के लिए लैंसडाउन की सीट चाहते थे और उमेश शर्मा काऊ भी हरक सिंह की राह चलने को तैयार थे। भाजपा ने जैसे ही देखा कि उमेश काऊ और हरक सिंह पलटी मारने वाले हैं, आनन-फानन में कोटद्वार में मेडिकल कालेज खोलने की घोषणा कर दी गई। पर फिलहाल तो हरीश रावत की बल्ले-बल्ले है, उन्होंने अपने सियासी स्वांग से पार्टी में अपने विरोधियों को वाकई धूल चटा दी है।

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कौन सी है यह पार्टी?

Posted on 03 January 2022 by admin

यूपी की एक प्रमुख पार्टी जिसने भाजपा के समक्ष घुटने टेक दिए हैं, चुनावी सेंसेक्स में लगातार इसका ग्राफ गिरता जा रहा है। क्योंकि इस बात का अब यूपी में खासा प्रचार हो चुका है कि यह पार्टी 22 के चुनावों में भाजपा की ’बी टीम’ बन कर खेलेगी। यही वजह है कि पार्टी की जमीनी ताकत और इसके सियासी प्रभुत्व में भी लगातार गिरावट आई है। सूत्रों की मानें तो पार्टी ने शुरूआत के छह टिकट 4 करोड़ प्रति विधानसभा की दर से नीलाम किया था, फिर यह दर घट कर 100 सीटों पर 1.50 से 3 करोड़ रूपयों तक चली गई, समय आगे बढ़ा तो इस पार्टी की जीत की संभावनाएं और पीछे रह गई, अब एक टिकट के लिए 65 लाख रूपए मांगे जा रहे हैं। जिसमें से 50 लाख पार्टी फंड और 15 लाख रैली में देने को कहा जा रहा था। फिलहाल 150 सीटें शेष रह गई है, पर पार्टी टिकट के बोली लगाने वाले दावेदार भी नदारद हैं, पैसा देकर टिकट लेने वाले अब 35-40 लाख रूपए खर्च को भी फिजूलखर्ची मान रहे हैं।

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नए अवतार में राहुल

Posted on 03 January 2022 by admin

इन दिनों राहुल गांधी एक बदले अवतार में नज़र आ रहे हैं। अब पार्टी नेताओं से राहुल का आॅफिस नहीं, स्वयं राहुल संपर्क साध रहे हैं। अब पार्टी नेता और कार्यकर्ताओं को ’आॅफिस राहुल’ से दिशा-निर्देश आने बंद हो गए हैं। अलंकार सवाई हों या कौशल विद्यार्थी इन्हें फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। राहुल स्वयं फोन कर वांछित व्यक्तियों से बात कर रहे हैं। सिद्धू को डपटने से लेकर, उत्तराखंड में मची कलह पर पानी डालने में राहुल ने स्वयं पहल की। हां, मुकुल वासनिक जरूर इन दिनों राहुल के इर्द-गिर्द कदमताल करते नज़र आ रहे हैं और राहुल उनकी सलाहों पर कान भी धर रहे हैं।

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अखिलेश करीबियों पर केंद्र का शिकंजा

Posted on 03 January 2022 by admin

यूपी में जैसे ही चुनावों ने दस्तक दी है सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के करीबियों पर इंकम टैक्स के छापे जारी हैं। पिछले दिनों अखिलेश के पूर्व ओएसडी जैनेंद्र यादव ऊर्फ नीटू, मनोज यादव, पार्टी प्रवक्ता राजीव राय और बिजनेस मैन राहुल भसीन पर दनादन इंकम टैक्स की रेड पड़ी। पर सबसे खास बात तो यह कि इस रेड की भनक पूर्व में ही मीडिया को लग गई थी, एक स्थानीय अखबार ने तो बकायदा जैनेंद्र यादव यानी नीटू के घर पड़ने वाली इंकम टैक्स रेड की खबर दो-तीन दिन पूर्व ही छाप दी थी। जब इंकम टैक्स वाले नीटू के घर पहुंचे तो उन्हें ज्यादा कुछ छापे में नहीं मिल पाया तो उन्होंने नीटू के घर की फाॅल्स सीलिंग और एसी की डक्टिंग तक तोड़ दी, इस पर नीटू ने खूब हाय-तौबा मचाई, वे चाहते थे कि इस तोड़-फोड़ की वीडियोग्राफी हो जिसे मीडिया में जारी किया जा सके पर जांच एजेंसियों ने ऐसा होने नहीं दिया। नीटू करीबियों का दावा है कि इस रेड में उन्हें मात्र एक लाख चार हजार कैश और 400 ग्राम सोना मिला, इस आभूषणों के खरीद के बिल भी नीटू के परिवार वालों ने इंकम टैक्स वालों को सौंप दिए। पर जांच एजेंसियों को तब बड़ी कामयाबी मिली जब एक गुटखा कारोबारी से मिले सूत्र पर अखिलेश करीबी और इत्र कारोबारी पीयूष जैन के यहां छापे पड़े। जहां बड़ी मात्रा में नकदी और सोना बरामद हुआ। नकदी 150 करोड़ के ऊपर थी, जब नोट गिनने वाली चार मशीनों से काम नहीं चला तो इंकम टैक्स वालों को एक बैंक से नोट गिनने के लिए कर्मचारियों को बुलाना पड़ा। अब भाजपा का दावा है कि ये पैसे सपा के चुनावी फंड का ही एक हिस्सा थे।

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क्या ऐसे खिलेगा कमल?

Posted on 03 January 2022 by admin

किसान बिल वापसी के बाद भी पश्चिमी यूपी में भगवा ग्राफ ऊपर नहीं चढ़ पा रहा। खुद पार्टी के अंदरूनी जनमत सर्वेक्षण के परिणाम इस बात की चुगली खा रहे हैं। रालोद नेता जयंत चौधरी की चुनावी रैलियों में झमाझम भीड़ को देखते हुए भाजपा अब उन पर डोरे डालना चाहती है जिससे कि चुनाव के उपरांत अखिलेश को एक हाई वोल्टेज का झटका दिया जा सके। जयंत को साधने के लिए पार्टी ने अपने युवा चेहरे और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को लगा दिया है। अनुराग और जयंत में पुरानी व प्रगाढ़ मित्रता है। वहीं ब्रिटिश राज्य की सिद्ध नीति ’फूट डालो व शासन करो’ की नीति को आत्मसात करते भाजपा ने यादव परिवार में भी सेंध लगाने के भी प्रयास किए हैं। इस नीति के तहत चाचा-भतीजा यानी शिवपाल और अखिलेश पर निशाना साधा गया है। इस बात के घोषित परिणाम यादवों के गढ़ मैनपुरी में देखने को मिला, जब विजय यात्रा के होर्डिंग्स-पोस्टर-बैनर में तो अखिलेश-शिवपाल साथ-साथ चस्पां थे, पर विजय यात्रा के रथ पर अकेले अखिलेश नज़र आए, शिवपाल ने इससे दूरी बना ली। यात्रा में शिवपाल के शामिल नहीं रहने पर अखिलेश की सफाई किसी के पल्ले नहीं पड़ी, जब उन्होंने कहा-’पार्टी का गठबंधन जरूर हुआ है, पर कार्यक्रम अभी तय नहीं हुए हैं।’

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कोरोना की तीसरी लहर की आशंका

Posted on 03 January 2022 by admin

कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी चुनाव को फिलहाल टालने का सुझाव दिया है। सूत्रों की मानें तो अगर अभी चुनाव टलते हैं तो फिर जुलाई माह में ही यह संभव है। वैसे भी फिलहाल यूपी में भाजपा को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है, उनके अंदरूनी जनमत सर्वेक्षण के नतीजे भी कमल के हौसले पस्त करने वाले हैं। सो, भाजपा का एक वर्ग फिलहाल चुनाव टाल देने में ही समझदारी मानता है, वहीं पार्टी का एक वर्ग ऐसा भी है जिसका कहीं शिद्दत से मानना है कि ‘भाजपा चुनावजीवी पार्टी है, सो चाहे जैसी भी परिस्थिति हो, चुनाव तो तय समय पर होने ही चाहिए।’

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प्रियंका बनाम राहुल की टंकार

Posted on 03 January 2022 by admin

पिछले तीन-चार महीनों से लगातार राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका के बीच अनबन की खबरें बाहर आती रही है। सूत्रों की मानें तो राहुल की नाराज़गी प्रियंका के निजी सचिव संदीप सिंह को लेकर ज्यादा है। सनद रहे कि ‘जेएनयू फेम’ वाले ये संदीप सिंह वही हैं जो 2019 के लोकसभा चुनावों में राहुल गांधी के ‘स्पीच राइटर’ हुआ करते थे, ये भी कहा जाता है कि ’चौकीदार चोर है’ का नारा भी इन्होंने ही गढ़ा था जो 19 के चुनावों में बुरी तरह से ’बैक फायर’ कर गया। कहते हैं भाई-बहन में इस मनमुटाव की शुरूआत भी यूपी चुनाव से हुई जब यूपी की स्क्रीनिंग कमेटी के दो अहम सदस्य भंवर जितेंद्र सिंह और वर्शा गायकवाड ने राहुल से शिकायत दर्ज कराई कि यूपी में टिकट बंटवारे में काफी झोल हो रहा है, टिकटों के बेचे जाने की भी अफवाहें हैं, सो इन्होंने एआईसीसी से आब्जर्वर भेजने की मांग की। इसके बाद ही राहुल ने 195 पर्यवेक्षकों की भारी-भरकम टीम यूपी भेज दी। गढ़चिरौली रैली को लेकर भी राहुल के पास लगातार यह शिकायत आ रही थी कि प्रियंका की रैली के नाम पर चंद्रपुर इंडस्ट्रियल टाउन से काफी पैसों की काफी वसूली हुई है, इसके बाद ही राहुल के कहने पर प्रियंका की गढ़चिरौली रैली रद्द कर दी गई। सूत्रों की मानें तो राहुल संदीप सिंह को हटाना चाहते हैं पर अलंकार सवाई के कहने पर उन्होंने यूपी चुनाव तक अपने इरादों पर विराम लगा दिया है। कहा जाता है कि राहुल के दरबार में अलंकार की उतनी ही चलती है जितना महत्व सोनिया के लिए अहमद पटेल का था। पर इन दिनों राहुल अलंकार से किंचित खफा-खफा रहते हैं, क्योंकि उनके पास पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की आम शिकायत पहुंच रही है कि अलंकार उन्हें राहुल से मिलने का समय नहीं देते। अलंकार पर हालिया दिनों में ये भी आरोप लगे हैं कि महाराष्ट्र में जंबो कार्यसमिति बनवाने का आइडिया भी उन्हीं का है। सो, इन पांच राज्यों के चुनाव के बाद राहुल और प्रियंका की किचेन कैबिनेट में व्यापक फेरबदल देखने को मिल सकता है।

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चिंटू, मिंटू, पिंटू चला रहे हैं झारखंड सरकार

Posted on 03 January 2022 by admin

सत्ता के गलियारों में ये खबर काफी समय से अंगड़ाई ले रही है कि झारखंड के हेमंत सोरेन सरकार पर चंद चिंटू, मिंटू और पिंटू का कब्जा है। सूत्रों की मानें तो सरकार में सबसे ज्यादा ज़लवा सीएम के मीडिया एडवाइजर अभिषेक कुमार पिंटू का है जो चौबीसो घंटे साये की तरह सीएम के साथ रहते हैं और इनका सीएम के साथ बेहद घरेलू ताल्लुकात बताया जाता है। सीएम के सचिव विनय चौबे का ज़लवा भी देखते बनता है, इनके ही देखरेख में झारखंड में शराब की नई पाॅलिसी को आकार मिला है, कहते हैं इससे जुड़े तमाम मामलात प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव और योगेंद्र तिवारी देख रहे हैं। पहले सीएम दरबार में सुनील श्रीवास्तव भी ताकतवर थे पर उनका रुतबा अब कुछ कम हुआ है। एक पंकज मिश्रा भी हैं जिन्हें राज्य का ‘डिफेक्टो’ सीएम भी कहा जाता है, मिश्रा जी सीएम की विधानसभा के विधायक प्रतिनिधि हैं,सनद रहे कि अभी हाल ही में झारखंड की एक आदिवासी महिला एसआई ने आत्महत्या कर ली थी, एसआई के पिता ने पंकज मिश्रा पर अपनी बेटी को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। हेमंत की इस किचेन कैबिनेट के एक खास सदस्य कोलकाता के एक व्यवसायी अमित अग्रवाल भी हैं, जो ‘मिहिजाम वनस्पति’ नाम से एक कंपनी चलाते थे, बाद में यह कंपनी भारी घाटे की वजह से बंद हो गई, पर अमित हेमंत के लिए चुनावी चंदों की उगाही में लगे रहे और आज आलम यह है कि जिस बिजनेस हाउस को झारखंड में कोई बड़ा टेंडर या सरकारी ठेका चाहिए होता है वह अमित की शरण में ही जाता है।

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