Posted on 24 January 2022 by admin
कैप्टन अपने करीबी लोगों से अब सीधे भाजपा का दामन थामने का आग्रह कर रहे हैं, अपने करीबियों की एक बैठक में कैप्टन ने साफ कर दिया है कि उन्हें नहीं मालूम कि पंजाब चुनावों के बाद उनकी गवगठित पार्टी का भविष्य क्या रहने वाला है, उनकी पार्टी रहेगी भी या वे इसका विलय भाजपा में कर देंगे इसीलिए बेहतर होगा कि वे भाजपा ज्वॉइन करने की सोचें। इस चुनाव में कैप्टन अपनी बेटी को चुनाव लड़वाना चाहते हैं जबकि उनकी पत्नी परणीत कौर बेटे को चुनाव मैदान में उतारना चाहती हैं। दोनों यानी पति-पत्नी के बीच अब यह सहमति बनी है कि क्यों नहीं बेटे और बेटी दोनों को ही टिकट दे दिया जाए, पर कैप्टन साहब को यह डर सता रहा है कि अगर उनके पुत्र और पुत्री दोनों ही चुनाव हार गए तो फिर उनकी राजनैतिक विरासत को आगे कौन ले जाएगा?
Posted on 24 January 2022 by admin
क्या कमल पार्टी के ऊपर चढ़ते ग्राफ को विरोधियों की नज़र लग गई है? सूत्रों की मानें तो पिछले दिनों केंद्र सरकार के नंबर दो अमित शाह ने कम से कम तीन विरोधी मुख्यमंत्रियों से मिलने का समय मांगा और जुलाई में संभावित राष्ट्रपति चुनाव को लेकर उनसे मंत्रणा की इच्छा जाहिर की। ये मुख्यमंत्री हैं आंध्र के जगन मोहन रेड्डी, तेलांगना के के.चंद्रशेखर राव और ओडिशा के नवीन पटनायक। शाह को तब इस बात पर बेहद हैरानी का सामना करना पड़ा, पर जब संभावित मुलाकात को लेकर तीनों मुख्यमंत्रियों ने कमोबेश एक जैसी बात कही कि ’पहले यूपी का नतीजा आ जाने दीजिए, फिर देख लेंगे कि जरूरी नंबर का क्या करना है।’ यह महज़ इत्तफाक है या भविष्य की राजनीति के संकेत?
Posted on 24 January 2022 by admin
सियासी स्वांग भरने में माहिर अखिलेश यादव ने सियासत में पगे-मंझे अपने धुरंधर चाचा शिवपाल को ही धोबिया पाट दे दी है। कहां तो पहले चाचा अपने भतीजे से अपनी पार्टी के अपने लोगों के लिए 10 सीटों की डिमांड कर रहे थे। भतीजा का मार्केट में भाव चढ़ा तो चाचा की डिमांड 6 सीटों पर आ गई, पर अब एक बदले राजनीतिक परिदृश्य में अखिलेश ने अपने चाचा से साफ कर दिया है कि वे सिर्फ उन्हीं को पार्टी टिकट दे सकते हैं, इस बार सरकार बनी तो उन्हें उनका पुराना मंत्रालय भी मिल जाएगा, जो 2012 की सरकार में उनके पास था। 2024 में वे शिवपाल के पुत्र को लोकसभा का चुनाव भी लड़वाएंगे और उसे केंद्र की राजनीति में एडजस्ट भी करेंगे। क्या अब शिवपाल के लिए ’ना’ कहने का कोई मौका बचा है?
Posted on 24 January 2022 by admin
अखिलेश यादव इस बार किंचित परिपक्व राजनीति का उद्घोष कर रहे हैं, वे भाजपा की 80 बनाम 20 (यानी हिंदू बनाम मुसलमान) राजनीति का जवाब 85 बनाम 15 (पिछड़े बनाम अगड़े) से देने की कोशिश कर रहे हैं। वे पिछड़ों की राजनीति के नए पुरोधा के तौर पर उभरना चाहते हैं। इनके पिता मुलायम सिंह यादव भी पिछड़ों की राजनीति के ही चैंपियन थे। जो मंत्रिगण कमल का साथ छोड़ साइकिल के पाले में चले गए हैं,उनमें से एक पिछड़ी जाति से ताल्लुक रखने वाले मंत्री ने योगी के व्यवहार को लेकर शिकायत की है, उनका कहना है कि योगी का अपने मंत्रियों से व्यवहार का तरीका एकदम गलत था, वे अफसरों की मौजूदगी में भी अपने पिछड़े मंत्रियों को कस कर डपट दिया करते थे। सूत्रों की मानें तो भाजपा हाईकमान ने इस बात का संज्ञान लेते हुए टिकट वितरण की कवायद में फिलहाल योगी को गोरखपुर और बस्ती तक ही सीमित कर दिया है।
Posted on 24 January 2022 by admin
उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और 10 जनपथ के बेहद करीबियों में शुमार होने वाले किशोर उपाध्याय को क्या इस बात की कीमत चुकानी पड़ी कि उन्होंने राहुल गांधी से अपनी मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल करवा दी? या इस बात के लिए कि पिछले काफी समय से उनके भाजपा या फिर सपा में जाने की अटकलें परवान पर थीं? कांग्रेस हाईकमान ने बेहद आनन-फानन में उपाध्याय को उत्तराखंड में मिली तमाम जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है, सनद रहे कि ये वही उपाध्याय हैं जो गांधी परिवार की अमेठी सीट की लंबे समय तक जिम्मेदारी उठाते रहे हैं। किशोर उपाध्याय की कभी हरीश रावत से गहरी छनती थी, वे रावत ही थे जिनके प्रयासों के बदौलत उपाध्याय पहली बार नारायण दत्त तिवारी के मंत्रिमंडल में बतौर राज्य मंत्री शामिल हो गए थे। इसके बाद जब हरीश रावत के पास सीएम की गद्दी आई तो इन्होंने किशोर उपाध्याय को एक ब्राह्मण चेहरे के तौर पर प्रदेश अध्यक्ष बनवाने में अपनी महती भूमिका निभाई। इन दोनों नेताओं के बीच मतभेद की खबरें सबसे पहले तब सामने आई जब राज्यसभा की एकमात्र सीट की दावेदारी के लिए हरीश रावत ने उपाध्याय की जगह प्रदीप टमटा के नाम का समर्थन कर दिया और इस रेस में टमटा बाजी मार गए।
Posted on 24 January 2022 by admin
सिप्रा दास दिल्ली के फोटो जर्नलिस्टों की जमात का एक जाना-पहचाना चेहरा है। इन्हें देश की पहली फोटो जर्नलिस्ट में भी शुमार किया जाता है, नेत्रहीन व्यक्तियों पर केंद्रित उनकी कॉफी टेबुल बुक भी काफी चर्चा में रही है। पिछले दिनों सिप्रा ने दिल्ली के लक्ष्मी नगर से नोएडा स्थित अपने घर आने के लिए एक शेयर ऑटो लिया, साथ में उनका कैमरा बैग भी था। जब घर पहुंच कर सिप्रा ने अपना बैग खोला तो देखा तो उनके होश फाख्ता हो गए, उनके बैग से तमाम कैमरे और महंगे लेंस गायब थे और उसकी जगह बैग में ईंट पत्थर भरे हुए थे। सिप्रा के कैमरे की कीमत कम से कम 7-8 लाख रूपए तो जरूर रही होगी। इस महिला फोटो जर्नलिस्ट ने आनन-फानन में पुलिस थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराई, गृह मंत्रालय को अपनी लिखित शिकायत भेजी, पुलिस थाने के खूब चक्कर काटे, पर कुछ हुआ नहीं। एक दिन वह संसद भवन स्थित गृह मंत्री अमित शाह के दफ्तर जा पहुंची, शाह जब अपने दफ्तर से सदन जाने के लिए बाहर निकले तो सिप्रा ने झट से उन्हें अपना प्रतिवेदन पकड़ा दिया, यह कहते हुए-’फोटोग्राफी ही मेरी लाइफ है, जब कैमरा ही चोरी चला गया तो 7-8 लाख के कैमरे मैं दुबारा से कैसे खरीद पाऊंगी।’ अमित शाह ने बगैर कुछ बोले सिप्रा के हाथों से कागज लिया और वे आगे बढ़ गए। पर जब इसके बाद भी कोई जबाव नहीं आया तो निराश शिप्रा अपने गृह शहर कोलकाता लौट गई। एक सप्ताह के अंदर सिप्रा को दिल्ली के क्राइम ब्रांच से फोन आता है कि उनका कैमरा शाहदरा के एक घर से बरामद हो गया है, वह फौरन दिल्ली आ जाएं और कोर्ट से अपना कैमरा ले लें।’ सिप्रा समझ चुकी थीं कि देश के गृह मंत्री ने बिना कुछ बोले उनका इतना बड़ा काम कर दिया है।
Posted on 24 January 2022 by admin
यूपी के चुनावी महासमर में आनने-सामने की जंग लड़ने वाले भाजपा और सपा ने तय किया है कि इस बार के चुनाव में वे अपराधियों और बाहुबलियों को टिकट नहीं देंगे। अब आपराधिक छवि वाले नेता राजभर और निषाद की पार्टियों से चुनाव लड़ने की जुगत भिड़ा रहे हैं। प्रदेश के दुर्दांत मुख्तार अंसारी या तो संजय निषाद की पार्टी से या फिर निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं। ओवैसी ने मुख्तार और अतीक अहमद दोनों को खुला ऑफर दे रखा है कि वे चाहें तो ओवैसी की पार्टी से चुनाव लड़ सकते हैं। 1994 में मुख्तार सीपीआई के उम्मीदवार थे, फिर मायावती के साथ चले गए। पिछले चुनाव में मुख्तार को सपा में शामिल करने को लेकर चाचा-भतीजा यानी शिवपाल-अखिलेश में ठन गई थी। इस बार भी मुख्तार को अखिलेश की ना है।
Posted on 04 January 2022 by admin
’हर शै रौशनी पर हौसलों की दास्तां बयां है
नए साल में उम्मीदों का यह सूरज नया है’
पंजाब का चुनावी घमासान दिलचस्प मुहाने पर आ पहुंचा है। एक ओर तो पहले ही पंजाब का चुनावी घमासान बहुकोणीय लड़ाई के आसार जता रहा था, अब किसान आंदोलन में शामिल रहे 32 संगठनों में से 22 ने साथ आकर एक नई राजनैतिक पार्टी ’संयुक्त किसान मोर्चा’ बना ली है, यह पंजाब विधानसभा चुनावों में अपने उम्मीदवार मैदान में उतारेगी। दिलचस्प तो यह कि इनमें से कई संगठन साफ तौर पर वामपंथी रुझान वाले हैं जिनके साथ बड़े पैमाने पर पंजाब के दलित जुड़े हुए हैं, कुछ संगठन एकदम से दक्षिणपंथी रुझानों वाले हैं, जिन्हें वहां के जटसिख ’लैंड लॉर्ड’ का साथ है। इस मोर्चा के आकार लेने से पहले इसके नेता बलबीर सिंह राजेवाल आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल से कई दौर की बातचीत कर चुके थे, केजरीवाल राजेवाल को आप का ’सीएम फेस’ बनाने को भी राजी थे पर बात बनी नहीं, सूत्रों की मानें तो राजेवाल अपने साथी संगठनों के नेताओं के लिए 45 सीटें मांग रहे थे, जिसके लिए केजरीवाल तैयार नहीं हुए। जब दोनों में सहमति बनी नहीं तो राजेवाल ने एक राजनैतिक मोर्चा का गठन कर चुनावी समर में उतरने का ऐलान कर दिया। इस नए राजनैतिक मोर्चे के मैदान में उतरने से पंजाब का चुनावी समर और भी दिलचस्प हो गया है।
Posted on 04 January 2022 by admin
भले ही प्रियंका गांधी ने यूपी चुनाव में अपना सब कुछ झोंक रखा हो, पर इन दिनों यूपी कांग्रेस में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता ओंकार नाथ सिंह के साथ पार्टी के दो अन्य पदाधिकारी ’फ्री एंड फेयर पोल’ के चुनाव आयोग के आह्वान को शिरोधार्य करते आयोग के समक्ष पहुंचे, इसमें ओंकार नाथ सिंह ने चुनाव आयोग से निवेदन किया कि ’अगर चुनाव की घोषणा के बाद भी अवनीश अवस्थी यूं ही अपने पद पर बने रह कर कार्य करते रहेंगे तो प्रदेश में निष्पक्ष चुनाव की बात ही बेमानी हो जाएगी, क्योंकि अवस्थी भाजपा नेता की तरह आचरण करते हैं।’ अगले ही दिन कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय लल्लू ने चुनाव आयोग को पत्र लिख कर बकायदा इस बात की इत्तला कर दी कि उनसे कांग्रेस का जो डेलीगेशन मिलने आया था उसे पार्टी ने अधिकृत ही नहीं किया था, इसीलिए पार्टी द्वारा अधिकृत डेलीगेट्स यानी प्रमोद तिवारी, उन्हें यानी लल्लू को और सीएलपी लीडर अराधना मिश्र को आयोग से मिलने का वक्त दिया जाए। पर चुनाव आयोग ने कांग्रेस पार्टी के इस निवेदन पर अपने कान ही नहीं धरे। लल्लू के चुनाव आयोग को लिखे पत्र से कांग्रेस के मीडिया और संचार विभाग के सदस्य ओंकार नाथ सिंह इतने नाराज़ हुए कि उन्होंने प्रियंका गांधी को पत्र लिख कर पार्टी से इस्तीफा दे दिया। बाद में खुलासा हुआ कि सरकारी मशीनरी के दुरूपयोग को लेकर चुनाव आयोग द्वारा बुलाई गई इस सर्वदलीय बैठक में ओंकार सिंह पार्टी के वरिष्ठ नेता सतीश अजमानी के मौखिक निर्देश पर गए वहां थे।
Posted on 04 January 2022 by admin
जयंत चौधरी की पार्टी रालोद को भले ही अखिलेश यादव की पार्टी सपा से चुनावी तालमेल को हरी झंडी मिल गई हो पर इन दिनों दोनों नेताओं के रिश्तों में उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है। इससे पहले अखिलेश ने जयंत के लिए 35-38 सीटें छोड़ने के लिए हामी भर दी थी, पर लगता है अब बात 24-25 सीटों पर बनेगी। दरअसल, अखिलेश इस बात को लेकर छोटे चौधरी से कुपित हैं कि गठबंधन का मसौदा तय हो जाने के बाद भी पिछले कुछ दिनों में उनकी पीयूष गोयल से दो मुलाकातें क्यों हुई है?, जहां उन्हें लक्ष्मी दर्शन का भरोसा दिलाया गया है। सूत्रों की मानें तो जयंत की बहन के पति के एक कथित स्टिंग ऑपरेशन की खबर पिछले दिनों सामने आई थी जिसमें वे किसी प्रत्याशी से टिकट के एवज में कुछ लक्ष्मी दर्शन की आस रख रहे थे। कहते हैं यह स्टिंग ऑपरेशन एक बड़े औद्योगिक घराने द्वारा संचालित न्यूज चैनल के पास पहुंच गया। इस स्टिंग के प्रसारित होने से कुछ देर पहले ही जैसे ही अखिलेश को इस बात की भनक लगी तो उन्होंने आनन-फानन में चैनल के एडीटर-इन-चीफ से बात की और उनसे कहा कि चैनल ने जितने पैसे में यह स्टिंग ऑपरेशन खरीदा है वे उतना पैसा देने को राजी हैं। समझा जाता है कि चैनल प्रमुख ने इस बाबत मालिकों से बात की जिसमें तय हुआ कि इस स्टिंग को दिखाया नहीं जाएगा। तब जाकर अखिलेश की जान में जान आई, क्योंकि वे जानते थे कि भाजपा जयंत पर कम, इस स्टिंग को लेकर उन पर ज्यादा हमलावर रहेगी।