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धामी की हैरानी

Posted on 19 February 2022 by admin

पिछले दिनों उत्तराखंड राज्य के लिए भाजपा का थीम सांग लांच हुआ। पर सबसे हैरत की बात तो यह थी कि मंच पर अकेले मोदी दिख रहे थे, पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कहीं दूर-दूर तक नज़र नहीं आ रहे थे। इस मौके पर भाजपा की ओर से एक प्रेस कांफ्रेंस भी रखी गई थी। प्रेस कांफ्रेंस के मंच पर अनिल बलूनी और भाजपा के उत्तराखंड के प्रभारी प्रह्लाद जोशी की मौजूदगी देखी जा रही थी, पर वहां भी दूर-दूर तक कहीं मुख्यमंत्री के दर्शन नहीं हो रहे थे। एक पत्रकार ने इस प्रेस कांफ्रेंस में एक सीधा सवाल दागा कि ’भाजपा अपने पांच सालों की कोई पांच उपलब्धि गिना दें’, इस सवाल पर प्रह्लाद जोशी भड़क गए, बोले-’हम यहां एक्जाम देने नहीं आए हैं, कुछ और पूछो।’ कांफ्रेंस में मौजूद पत्रकार गण हक्का-बक्का रह गए। पत्रकार वार्ता समाप्त हो गई, बिना कोई उपलब्धि गिनाए। पर स्थिति की नज़ाकत को भांपते हुए भाजपा के लोग पत्रकारों के समक्ष सफाई देने लगे-’जोषी जी कर्नाटक से हैं न, सो हिंदी ठीक से समझ नहीं पाए।’ वैसे भी इस ‘थीम सांग’ में केवल मोदी सरकार का ही गुणगान था, राज्य सरकार को तो इसमें ठीक से तवोज्जो नहीं मिली थी। दरअसल धामी की दिक्कत यह है कि वे पार्टी में पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गए हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि इस थीम सांग को अप्रूवल अनिल बलूनी की तरफ से मिला था, बलूनी मोदी-शाह दोनों के दुलारे हैं और स्वयं रेस में है, ऐसे में उनका ऐसा सियासी स्वांग भरना सहज समझ आता है।

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डेरों की राजनीति में उलझा पंजाब चुनाव

Posted on 19 February 2022 by admin

विधानसभा चुनाव सिर पर हैं ऐसे में डेरों की पूछ, उनका इकबाल, और राजनेताओं की उनके इर्द-गिर्द परिक्रमा बेहद आम सी बात है। सबसे पहले बात करते हैं जालंधर के सचखंड बल्लां डेरा की। जब चन्नी कैप्टन की सरकार में मामूली मंत्री थे तो वे इस डेरा में अपने साथ नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर गए थे, अपने गुरू रंजन दास से सिद्धू को सीएम बनने का आशीर्वाद दिलवाने। गुरूजी ने चन्नी से कहा-’मेरा आशीर्वाद तो तेरे साथ है, फिर तू ही क्यों नहीं बन जाता सीएम?’ इत्तफाक देखिए इसके दो महीने बाद चन्नी प्रदेश के सीएम बन गए। सीएम बनते ही चन्नी भागे-भागे अपने गुरू की शरण में पहुंचे। सचखंड बल्लां डेरा रामदासी संप्रदाय का डेरा है, जिस संप्रदाय से खुद चरणजीत सिंह चन्नी ताल्लुक रखते हैं, इस डेरा का पंजाब की 8-10 विधानसभा सीटों पर खासा प्रभाव है। यह पंजाब की 32 फीसदी दलित आबादी को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण डेरा है। अकाली दल की हरसिमरत कौर, अरविंद केजरीवाल, भगवंत मान ये सभी नेता भी रोज-बरोज अलग-अलग डेरों के चक्कर काट रहे हैं। पंजाब में राधास्वामी ब्यास भी ऊंची जाति के लोगों के एक मान्य केंद्र के रूप में उभरा है। यहां चन्नी भी कई-कई बार मत्था टेक चुके हैं। चन्नी जब मुख्यमंत्री बने तो राधास्वामी ब्यास के प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों चन्नी को आशीर्वाद देने उनके घर पहुंचे थे। सच्चा सौदा या राम-रहीम के डेरा से भला कौन अपरिचित होगा। इस डेरा का भी पंजाब की 35-40 सीटों पर असर बताया जाता है। राम-रहीम अभी जेल में हैं, उन्होंने तीन सप्ताह के लिए पेरोल की अर्जी दी है, बाहर आए तो किसी खास राजनैतिक पार्टी को अपने समर्थन का ऐलान कर सकते हैं। पर अतीत में सच्चा सौदा ने हमेशा से अकाली-भाजपा गठबंधन को अपना समर्थन दिया है, सो उन्हें पेरोल मिल जाने की पूरी संभावना दिखती है।

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8 फरवरी से 18 मार्च तक संभल कर रहिए

Posted on 19 February 2022 by admin

इस 8 फरवरी से आने वाले 18 मार्च 2022 के बीच मंगल और शुक्र एक साथ यात्रा कर रहे हैं, इसीलिए वृष, मीन, कन्या और वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह किंचित कठिन समय हो सकता है। ऐसा कहना है देश के जाने-माने ज्योतिष राजेश हसीजा का, जो अतीत में भी कई सटीक भविष्यवाणियां कर चुके हैं। हसीजा जिन्होंने दो दशक से ज्यादा का समय आईबी के बड़े पदों पर रहते हुए नौकरी की है और सिर्फ इस विद्या को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने अपनी नौकरी से वीआरएस ले लिया। हसीजा का दावा है कि भारत की कुंडली में वृश राशि का उदय होना, मंगल और शुक्र दोनों पाप ग्रहों का स्वामी होना और गोचर में आठवें और नवें घर की यात्रा करना 5 राज्यों के चुनावों के लिए भी नए संकेत लेकर आया है। इसका प्रभाव 2024 के आम चुनावों पर भी पड़ सकता है। इस काल में धार्मिक व जातीय विभाजन ज्यादा मुखर होकर सामने आएगा, धार्मिक असहिष्णुता बढ़ सकती है, क्योंकि मंगल और शुक्र का यह संयोजन अधिक कठोरता को बढ़ावा दे सकता है, अलग-अलग दृष्टिकोणों में सामंजस्य बिठाने में भी मुश्किलें आ सकती हैं।

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एक बदले अवतार में प्रियंका

Posted on 19 February 2022 by admin

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में भी हाथरस जैसी घटना की पुनरावृत्ति हो गई। मीडिया पीड़िता की उम्र तमाम खबरों में 21 वर्षीया दिखा रहा था, जबकि सरकारी दस्तावेजों में पीड़िता की उम्र 17 वर्ष आ रही थी। इस बात को लेकर प्रियंका गांधी मीडियावालों पर जम कर बरसीं और सवाल उठाया कि आखिरकार मीडिया इन दिनों सच्चाई दिखाने से क्यों पीछे हट जाता है, चूंकि पीड़िता की उम्र 17 साल है सो यह मामला ‘पाॅस्को एक्ट’ के तहत आता है, एक पत्रकार ने धीरे से प्रियंका से कहा-’क्या आप हमें मुकदमों में फंसाना चाहती हैं?’ यानी ‘सच लिखेंगे तो मुश्किल में फंसोंगे’।

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आरपीएन राहुल के व्यवहार से नाराज़ थे

Posted on 19 February 2022 by admin

दरअसल, आरपीएन सिंह ने काफी पहले ही कांग्रेस छोड़ने का मन बना लिया था। वे लंबे समय से झारखंड में कांग्रेस के प्रभारी थे, कोई साल भर पहले ही उन्होंने राहुल से मिल कर अपने लिए झारखंड से राज्यसभा की मांग कर दी थी, तब राहुल उन पर प्रसन्न थे तो उन्होंने सहर्ष इस पर हामी भर दी। पर इस बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लगातार आरपीएन के बारे में राहुल से गुहार लगा रहे थे कि ‘आप उन पर नज़र रखें, वे झारखंड की गठबंधन सरकार को अस्थिर करना चाहते हैं और खुल कर भाजपा वालों के हाथ में खेल रहे हैं।’ राहुल ने भी अपने सूत्रों से पता करवाया तो उन्हें भी सोरेन के दावे में दम लगा। फिर राहुल ने धीरे-धीरे आरपीएन से दूरी बनानी शुरू कर दी, राहुल ने उनका फोन उठाना बंद कर दिया। जब आरपीएन राहुल के सचिव को फोन करते थे तो वहां से भी चार-पांच रोज बाद काॅल बैक आता था, इसके बाद आरपीएन ने राहुल से मिलने का समय मांगा। कई महीनों के बाद राहुल ने उन्हें मिलने के लिए बुलाया। मिलने की तय तारीख को जब आरपीएन राहुल के कमरे में दाखिल हुए तो वहां राहुल अपने चंद मुंहलगे लोगों से घिरे थे। आरपीएन को सामने पाकर राहुल उन पर बेतरह बरस पड़े-’आप को झारखंड भेजा था पार्टी का उद्धार करने, पर वहां तो आपने पार्टी को ही गर्त में पहुंचा दी है…’ राहुल भड़ास निकालते रहे और आरपीएन चुपचाप सब सुनते रहे। वहां से बाहर निकलने के बाद ही आरपीएन ने तय कर लिया था कि अब उन्हें कांग्रेस में नहीं रहना है, सो सबसे पहले उन्होंने भाजपा का द्वार खटखटाया, पर तब भाजपा को यूपी में उनकी उपयोगिता समझ में नहीं आई तो उन्हें ‘होल्ड’ पर रख दिया गया। वह तो जैसे ही स्वामी प्रसाद मौर्य ने भाजपा छोड़ी, आरपीएन के लिए भाजपा ने अपने दरवाजे खोल दिए।

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क्या योगी को अपनों से खतरा है?

Posted on 24 January 2022 by admin

’मेरे मन के कोने के ठहरे अंधेरों में जुगनुओं सा चमकता तू
तेरे हाथों में खंजर की है जुस्तजू और तिल-तिल मरता मैं’

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ क्या इस बार के चुनावी जंग में अपनी विरक्त भावनाओं का आस्वादन कर रहे हैं? योगी को उनके गढ़ में ही चाकचौबंद घेरने की बिसात बिछाई जा चुकी है। एक तो भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद ने योगी के खिलाफ गोरखपुर से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दलित वोटों में सेंधमारी कर दी है। वहीं निषादों को एक बड़े नेता संजय निषाद से भी योगी की कुट्टी चल रही है, क्योंकि जिस न्यूज चैनल ने निषाद का स्टिंग ऑपरेशन दिखाया था, उस चैनल को योगी का अत्यंत करीबी माना जाता है। अब मिसाल देखिए इस चैनल समूह के नवअवतरित हिंदी न्यूज चैनल के चुनावी रथ को चैनल हेड के द्वारा झंडी दिखायी जानी थी, पर यह काम अंततः योगी के करकमलों से संपन्न हुआ। निषाद तोहमत लगा रहे हैं कि ’तेरे रहते लुटा है चमन बागवां, कैसे मान लूं कि तेरा इशारा न था।’ सो, गोरखपुर में निषाद वोट भी पलट गए तो योगी की राहे-मंजिल दुर्गम हो सकती है। क्योंकि गोरखपुर में किसी उम्मीदवार की हार-जीत तय करने में निषाद वोटर निर्णायक होते हैं। यह भी कहा जाता है कि संजय निषाद और अनुप्रिया पटेल अभी पिछले दिनों भाजपा के एक बड़े नेता से मिले थे और उनसे जो कुछ करने को कहा गया है योगी इसे अपनी पीठ में खंजर भी मान सकते हैं। इस दफे गोरखपुर से योगी को चुनावी मैदान में उतारने के चक्कर में वहां के चार बार के भाजपा विधायक रहे राधा मोहन अग्रवाल का टिकट कट गया है, इससे अग्रवाल जी की नाराज़गी भी स्वाभाविक है। सनद रहे कि ये वही राधा मोहन अग्रवाल हैं जिन्होंने 2002 के यूपी विधानसभा चुनाव में योगी के कहने पर गोरखपुर से हिंदू महासभा के टिकट पर चुनाव लड़ा था और भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार शिव प्रताप शुक्ला को हराया था। आज राधा मोहन अग्रवाल भी योगी के खिलाफ हो गए हैं, योगी और शिव प्रताप शुक्ला के बीच 36 का आंकड़ा जगजाहिर है, पर अगर उन्हीं शुक्ला जी को जब इस बार गोरखपुर चुनाव का इंचार्ज बना दिया गया हो तो सियासी स्वांग की नई अदाएं बरअक्स गोरखपुर की सियासी फिज़ाओं में तो उतर ही आई हैं।

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क्यों बागी हो गए परिक्कर के पुत्र

Posted on 24 January 2022 by admin

भाजपा के एक ईमानदार और गोवा में बेहद पॉपुलर स्वर्गीय मनोहर परिक्कर के पुत्र उत्कल परिक्कर ने अपने पिता की पसंदीदा पार्टी के खिलाफ ही गोवा में मोर्चा खोल दिया है। अपने पिता की विरासत को आगे ले जाने के लिए उत्कल पिछले कई वर्षों से पणजी में राजनैतिक रूप से बेहद सक्रिय थे, भगवा पिच पर बैटिंग के लिए उन्होंने पैड-वैड भी लगा रखे थे कि ऐन वक्त दृश्य में आते हैं देवेंद्र फड़णवीस, जिनको पार्टी ने गोवा का इंचार्ज बना कर भेजा था। उत्कल भाजपा के स्थानीय नेताओं और पार्टी की स्थानीय यूनिट के निरंतर संपर्क में थे। गोवा के भाजपा नेताओं ने फड़णवीस तक यह बात पहुंचा दी कि उत्कल पणजी से टिकट चाहते हैं। फड़णवीस चाहते थे कि उत्कल उनसे आकर मिले और उनसे टिकट के लिए निवेदन करें। उत्कल भी अड़ गए कि जब तक पार्टी पणजी से उनके नाम का ऐलान नहीं करेगी, वे देवेंद्र फड़णवीस से मिलने नहीं जाएंगे। जब उत्कल फड़णवीस से मिलने नहीं पहुंचे तो उनका टिकट कट गया और पणजी की सीट से परिक्कर के एक धुर विरोधी भगवा नेता को टिकट दे दी गई। आज उत्कल के साथ विरोधी दल के लोग भी एकजुट खड़े हैं।

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अब सहयोगी भी आंख दिखा रहे हैं

Posted on 24 January 2022 by admin

पिछले दिनों भाजपा ने यूपी में अपने गठबंधन साथियों की एकता दिखाने के लिए लखनऊ में एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की थी। इस कांफ्रेंस में शिरकत करने के लिए जेपी नड्डा और धर्मेंद्र प्रधान भी लखनऊ पहुंच चुके थे। इस प्रेस कांफ्रेंस में अपना दल (सोनेवाल) की अनुप्रिया पटेल और निषाद पार्टी के संजय निषाद को भी नड्डा और प्रधान के साथ मंच पर रहना था। तीन बजे से यह प्रेस कांफ्रेंस आहूत थी, अनुप्रिया और निषाद दोनों ही भाजपा दफ्तर पहुंच चुके थे कि ऐन ढाई बजे अनुप्रिया ने मंच पर चढ़ने से इंकार कर दिया यह कहते हुए कि ’जब तक उनकी पार्टी के लिए टिकटों की संख्या फाइनल नहीं हो जाती वह भाजपा नेताओं के साथ मंच शेयर नहीं करेंगी।’ अफरा-तफरी मच गई, फौरन अमित शाह को लाइन पर लिया गया और उनकी अनुप्रिया से बात कराई गई। अनुप्रिया ने शाह के समक्ष अपने लिए 20 टिकटों की मांग दुहरा दी, शाह ने अनुप्रिया से कहा-’तुम मेरी छोटी बहन की तरह हो, तुम्हारे सम्मान की पूरी रक्षा की जाएगी’ सो अपना दल (सोनेवाल) के लिए 18 और संजय निषाद की पार्टी के लिए 10 टिकटों पर बात पक्की हो गई। जब कि पहले भाजपा अनुप्रिया को 15 और निषाद के लिए 4 सीटें ही भाजपा छोड़ना चाह रही थी। शाह की तरफ से पुख्ता आश्वासन मिलने के बाद ही अनुप्रिया इस प्रेस कांफ्रेंस में सम्मलित हुईं। अब भाजपा को अपनी जीती हुई सीट अनुप्रिया को देनी पड़ रही है, अनुप्रिया के लिए 2 बनारस और 1 रामपुर की सीट छोड़ी जा रही है। रामपुर से अपना दल (एस) एक मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतार रहा है। अनुप्रिया को एक सीट लखनऊ में भी मिल सकती है। संजय निषाद की भी लॉटरी लग गई है, उनके पास तो 10 सीटों पर लड़ाए जाने लायक काबिल उम्मीदवारों का भी टोटा है, सो 5 टिकट तो सीधे-सीधे धन पशुओं के कब्जे में आ गई है। यह ठीक वैसा ही एडजस्टमेंट है जैसा कि बिहार चुनाव में भाजपा ने मुकेश सहनी के वीआईपी पार्टी से गठबंधन के तहत किया था।

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जयंत से हिसाब चुकता किया सपा ने

Posted on 24 January 2022 by admin

छोटे चौधरी यानी रालोद प्रमुख जयंत चौधरी के भगवा होते मंसूबों की भनक जब से अखिलेश यादव को लगी है वे धीरे-धीरे छोटे चौधरी के पंख कुतर रहे हैं। अनूप शहर की सीट जो रालोद के लिए तय थी उसे एनसीपी को दे दिया गया, बिजनौर में भी सपा ने अपने उम्मीदवार उतार दिए, मेरठ की सिवालखास की सीट कहां तो रालोद के लिए तय थी, वहां से अखिलेश ने सपा की टिकट पर रालोद के गुलाम मुहम्मद को उतार दिया। मथुरा की मांठ सीट भी रालोद के हिस्से वाली थी, अखिलेश ने यह सीट संजय लाठर को दे दी है। यानी अखिलेश इस बात के पुख्ता इंतजाम में जुटे हैं कि चुनाव नतीजों के बाद छोटे चौधरी कोई ज्यादा मोल-भाव करने की स्थिति में न रहें।

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सोनिया की सिद्धू को नसीहत

Posted on 24 January 2022 by admin

पंजाब में टिकट वितरण को लेकर पंजाब के बड़े कांग्रेस नेताओं के साथ सोनिया गांधी को सीट वार चर्चा करनी थी, पर इस जूम मीटिंग में सिद्धू इतने अग्रेसिव हो गए कि सोनिया को महज़ 10 मिनट में ही यह मीटिंग स्थगित करनी पड़ी। सूत्र बताते हैं कि जैसे ही यह मीटिंग शुरू हुई और जैसे ही कोई नाम सिद्धू को पसंद नहीं आया तो उस दावेदार की वे बखिया उधेड़ने लग गए मसलन इन पर इतने केस दर्ज हैं, यह चोर है या फिर अय्याश है आदि-आदि। सोनिया सिद्धू के इन उपमा अलंकारों से इतना कुपित हुईं कि उन्होंने बैठक में मौजूद पार्टी के वरिष्ठ नेता सुनील जाखड़ को संबोधित करते हुए कहा कि ’जाखड़ साहब अपने सिद्धू जी को समझाइए कि ये चुनाव की बैठकें कैसे चलती हैं। आप लोग पहले आपस में बैठ कर हर सीट पर एक नाम फाइनल करिए फिर मैं मीटिंग ज्वॉइन करूंगी।’ यह कह कर सोनिया ने जूम मीटिंग डिस्कनेक्ट कर दी।

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