Posted on 19 February 2022 by admin
’चीख कर तब मेरा भी नाम लिया था दिल से निकली तेरी हर आह ने
तख्तो-ताज़ की चाह में मैं भी शामिल था तेरे हर गुनाह में’
सियासत भी क्या खूब नए चेहरे ओढ़ती है, कभी इन्हीं बसपा सुप्रीमो मायावती के एक वोट से केंद्र की अटल बिहारी सरकार गिर गई थी, आज इस नए दौर की नई भाजपा में बहिनजी के लिए संभावनाओं के असीम द्वार खुल गए हैं। सूत्रों की मानें तो मायावती देश की पहली महिला दलित राष्ट्रपति हो सकती हैं। कहा जाता है कि भाजपा शीर्ष बेहद गंभीरता से देश की अगली राष्ट्रपति के तौर पर मायावती के नाम पर विचार कर रहा है, अब सवाल उठता है कि ’बदले में भाजपा को क्या मिलेगा?’ तो सूत्र बताते हैं कि ’ऐसी सूरत में बहिन जी अपनी बहुजन समाज पार्टी का विलय भाजपा में कर सकती हैं।’ वहीं उप राष्ट्रपति पद के लिए यूपी की गवर्नर आनंदी बेन पटेल के नाम पर विचार हो रहा है। यानी देश के दो शीर्ष पदों पर महिलाओं को बिठा कर 2024 के चुनाव के आलोक में भाजपा यह साबित करना चाहती है कि वह कितनी बड़ी महिला हितैषी पार्टी है। यूपी में प्रियंका गांधी के चर्चित नारे का मज़ाक उड़ाते हुए जब यूपी के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रियंका को ’लड़की नहीं, आंटी’ कह कर उनका मज़ाक उड़ाया था तो कहते हैं भगवा हाईकमान ने इस बात का संज्ञान लेते हुए मौर्य की क्लास लगा दी और उन्हें डपटते हुए कहा-’आपके नाम में ही केशव है, प्लीज आप औरतों का ऐसे मज़ाक न बनाएं।’ वैसे भी मोदी को दुबारा गद्दी पर बिठाने में युवा और महिला वोटरों की एक निर्णायक भूमिका रही है, भाजपा नेतृत्व इस बात की गंभीरता को बखूबी समझता है।
Posted on 19 February 2022 by admin
क्या कवि कुमार विश्वास भाजपा के हाथों में खेल गए, जब पंजाब में चुनाव प्रचार अपने पूरे शबाब पर था तो ऐसे में कवि विश्वास न्यूज़ एजेंसी एएनआई को एक इंटरव्यू देते हैं और उसमें केजरीवाल से जुड़े गड़े मुर्दे उखाड़ते हैं। क्योंकि इस दफे के पंजाब विधानसभा चुनाव में आप अपने पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ रही है और पंजाब के लोग भी आप के ’दिल्ली माॅडल’ को अंगीकार करने के लिए तत्पर दिख रहे थे, ऐसे में विश्वास ने आप निरपेक्ष दलों को केजरीवाल पर हमला बोलने का एक नायाब अस्त्र मुहैया करा दिया है। सो चन्नी, मोदी, अकाली दल से लेकर राहुल व प्रियंका इस मुद्दे को लेकर केजरीवाल पर निशाना साध रहे हैं और केजरीवाल को बचाव की मुद्रा अख्तियार करनी पड़ रही है। दरअसल, इस बार के चुनाव में आप का मालवा और दोआबा क्षेत्र में व्यापक असर देखा जा सकता है। मालवा तो पंजाब की राजनीति का हमेशा से एक केंद्र रहा है, अगर सिर्फ प्रकाश सिंह बादल, कैप्टन अमरिंदर सिंह और मौजूदा सीएम चन्नी का नाम इस लिस्ट से बाहर निकाल दें तो 1966 के बाद से अब तक पंजाब के 17 मुख्यमंत्री मालवा से ही आते हैं। पंजाब की 117 में से सबसे ज्यादा सीटें यानी 69 सीटें मालवा में आती है। इस बार मालवा में आप की झाड़ू असरदार दिख रही है, बात करें दोआबा की तो यह अप्रवासी भारतीयों यानी एनआरआई के प्रभाव वाला क्षेत्र है, जो काफी पहले से केजरीवाल को अपना समर्थन देता आया है। यहां 23 सीटें आती हैं। माना जाता है कि मालवा क्षेत्र में कभी जट सिख कोर वोट बैंक अकाली-भाजपा के हिस्से के थे जो किसान आंदोलन के बाद खिसक कर आप और कांग्रेस की ओर चले गए हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में आप ने पंजाब में जो 20 सीटें जीती थी उसमें से 18 सीटें तो मालवा की थी। कांग्रेस का भी बहुत कुछ यहां दांव पर लगा है। आप के सीएम फेस भगवंत मान जो संगरूर से सांसद है,उनका निर्वाचन क्षेत्र भी मालवा में ही आता है। किसान आंदोलन में शहीद होने वाले अधिकतर किसान भी मालवा इलाके के ही थे। सो, कवि विश्वास का यह एक सुविचारित हथकंडा ही लगता है, जो चल गया तो तीर, नहीं तो फिर तुक्का!
Posted on 19 February 2022 by admin
एक ऐसे वक्त में जब राहुल और प्रियंका पांच राज्यों के चुनाव में व्यस्त थे, सोनिया गांधी का आशीर्वाद पाकर दिवंगत अहमद पटेल के आशीर्वाद से कांग्रेसी राजनीति में आगे बढ़े मधुसूदन मिस्त्री ने कांग्रेस की सदस्यता अभियान को धार देने के क्रम में राज्यवर पीआरओ यानी प्रदेश रिटर्निंग अफसर और एपीआरओ की धड़ाधड़ नियुक्तियां शुरू कर दीं। इसके साथ ही एआईसीसी स्थित भक्तचरण दास के कमरे से बूथ कमेटी के गठन का काम भी शुरू हो चुका है। इस कार्य में अहमद पटेल के एक पूर्व सहयोगी यतींद्र शर्मा की भी एक महती भूमिका है, इस मुहिम को मनीष चतरथ, मोहन प्रकाश जैसे नेताओं का भी सक्रिय सहयोग हासिल है। अब यह सुनने में आ रहा है कि 10 मार्च के बाद राहुल और प्रियंका दोनों मिल कर मिस्त्री की इस लिस्ट की समीक्षा कर सकते हैं और उसकी मरम्मत भी। लिस्ट में से कई पीआरओ-एपीआरओ के नाम हटाए जा सकते हैं और उनकी जगह कई नए नाम जोड़े जा सकते हैं। क्योंकि इस अगस्त-सितंबर माह में कांग्रेस के अध्यक्ष का चुनाव होना है और राहुल अपने लिए पार्टी के अंदर से कोई चुनौती नहीं चाहते।
Posted on 19 February 2022 by admin
अपने गिरते स्वास्थ्य के मद्देनज़र सोनिया गांधी लोकसभा का अगला चुनाव लड़ने से मना कर रही हैं, 10 जनपथ से जुड़े सूत्र खुलासा करते हैं कि इस बात पर गांधी परिवार में लगभग सहमति बन चुकी है कि इस बार के आम चुनाव में यानी 2024 में रायबरेली से सोनिया की जगह प्रियंका गांधी चुनाव लड़ सकती है। एक संभावना यह भी बन रही है कि 24 में प्रियंका राहुल की अमेठी सीट से स्मृति इरानी के खिलाफ चुनाव लड जाएं और राहुल अपनी मां की सीट रायबरेली शिफ्ट हो जाएं। वहीं भाजपा की कोशिश है कि रायबरेली का हाल भी अमेठी वाला कर दिया जाए, जब 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अमेठी की 5 में से महज़ 2 सीटों पर ही जीत दर्ज करा पाई थी और बाद में कांग्रेस के ये दोनों ही विधायक भाजपा में षामिल हो गए।
Posted on 19 February 2022 by admin
उत्तराखंड भाजपा में इन दिनों सब ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। यहां तक कि ऐन चुनाव की बेला में भी भाजपा नेताओं की आपसी सिर फुटौव्वल थम नहीं पाई। मजबूर होकर भाजपा हाईकमान को पुष्कर सिंह धामी और मदन कौशिक को दिल्ली तलब करना पड़ा। इसके पीछे कौशिक के उस ट्वीट को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है जिसमें उन्होंने खुल कर कह दिया था कि ’उत्तराखंड में भाजपा हार रही है।’ वैसे भी कौशिक के अड़ियल रवैये से उत्तराखंड के अधिकारी पिछले पांच सालों से परेशान रहे हैं। वे चुनाव के दौरान भी नहीं रूके। कहते हैं कौशिक ने अपने चुनाव में पानी की तरह पैसे बहाए। इस कड़ी में उन्होंने इतनी भारी मात्रा में चुनाव प्रचार सामग्री छपवा ली कि वे सीधे चुनाव आयोग की नज़रों में आ गए। कहते हैं चुनाव आयोग द्वारा खर्च की तय सीमा और अधिकारियों की सख्ती को देखते हुए उन्हें रातों-रात ढेर सारी अपनी चुनाव प्रचार सामग्री जलवानी पड़ गई, जिससे केसी तरह वे आयोग के हत्थे चढ़ने से बच गए।
Posted on 19 February 2022 by admin
’तेरी हर दलील मंजूर है मुझे, तेरी हर बात कुबूल है मुझे
फिर भी आइने में मेरा मुझे क्यों अक्स नज़र नहीं आता’
यूपी चुनावी महासंग्राम का आगाज़ पहले फेज के 58 सीटों पर मतदान से हो चुका है। वोट प्रतिशत, मतदाताओं की प्रतिक्रियाएं और अंदरूनी सर्वेक्षणों के नतीजों के बाद इस निष्कर्ष पर तो पहुंचा ही जा सकता है कि जहां शहरी क्षेत्रों में सत्तारूढ़ भाजपा को कम नुकसान उठाना पड़ा है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भगवा किला ढहता नज़र आया। पहले चरण के मतदान में किसान आंदोलन का भी व्यापक असर दिखा और योगी के उन बयानों से मसलन ’चर्बी निकाल देंगे, गर्मी उतार देंगे’ आदि-आदि पर मतदाताओं का रोश जाहिर तौर पर दिखा। सूत्रों की मानें तो भाजपा का अपना आकलन है कि उसे इस फेज में 18-21 सीटें मिल सकती है जबकि 2017 के चुनाव में भाजपा ने इन 58 में से 53 सीटों पर जीत दर्ज करायी थी। यानी पहले ही फेज़ में भाजपा को 32-33 सीटों का नुकसान दिख रहा है। आइए अब आगे बढ़ते हैं 14 फरवरी को आहूत होने वाले दूसरे दौर के चुनाव की ओर, जहां 52 सीटों पर औसतन हर सीट पर 35 से 50 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं, जो इन चुनाव में एकतरफा वोटिंग कर रहे हैं। यानी दूसरे या तीसरे चरण में भी भाजपा की हालत कोई बहुत अच्छी नहीं रहने वाली, पर चौथे और पांचवें चरण में जब बुंदेलखंड से लेकर अवध का नंबर आएगा तो भाजपा वहां अच्छा कर सकती है। पर जैसे-जैसे मतदान का चरण पूर्वांचल की ओर बढ़ेगा वहां सपा गठबंधन की बांछें खिलती दिख रही हैं। किसानों पर लखीमपुर में गाड़ी चढ़ाने वाले मंत्री पुत्र को जमानत मिल चुकी है, भाजपा को लगा था इससे ब्राह्मण खुश होंगे पर कई इलाकों में इसकी जबर्दस्त प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। भाजपा के लिए एक चिंता की बात और है कि ग्रामीण इलाकों के लोग वोट देने के लिए भारी संख्या में बाहर निकल रहे हैं, इसीलिए शहरी इलाकों के मुकाबले उनके मतदान का प्रतिशत दस से पंद्रह ज्यादा है, ये व्यवस्था विरोधी वोट हो सकते हैं, भाजपा की चिंता की असली वजह भी यही है। वैसे भी तीसरे चरण के मतदान को लेकर अखिलेश आश्वस्त हैं, क्योंकि ये इलाके मुलायम सिंह के गढ़ माने जाते हैं।
Posted on 19 February 2022 by admin
पिछले दिनों चर्चित सुब्रह्मण्यम स्वामी संघ प्रमुख मोहन भागवत से मिलने नागपुर जा पहुंचे, सूत्रों की मानें तो संघ प्रमुख के समक्ष अपना दर्द बयां करते हुए स्वामी ने कहा-’मैं हिंदुत्व की रक्षा के लिए, इसे आगे बढ़ाने के लिए इतना कुछ कर रहा हूं, पर मेरे साथ क्या हो रहा है? एक राज्यसभा तक नहीं मिल रही है?’ स्वामी ने भागवत से गुजारिश की-’बस आप ही मुझे न्याय दिलवा सकते हैं।’ संघ प्रमुख ने स्वामी को आश्वासन देते हुए कहा-’आप चिंता न करें, मैं बात करूंगा।’ सूत्रों की मानें तो इसके कुछ दिन बाद किसी कार्यवश भाजपा के नंबर दो अमित शाह ने संघ प्रमुख को फोन लगाया तो उनसे भागवत ने स्वामी का जिक्र छेड़ दिया और कहा-’उनके (स्वामी) लिए आप लोगों को कुछ करना चाहिए।’ कहते हैं इस पर शाह ने छूटते ही भागवत से कहा-’इन्होंने कोई सीमा नहीं छोड़ी हमारे लिए कि हम इनके लिए कुछ कर सकें।’ कुछ पल ठहर कर फिर भागवत ने कहा-’हिंदुत्व के लिए फिर कौन लड़ेगा जब हमारे पास अपने योद्धा को देने के लिए ही कुछ नहीं है। आप एक काम तो कर सकते हैं कि इनका पंडारा पार्क वाला सरकारी घर और इनकी सुरक्षा पहले की तरह ही बहाल रहने दीजिए।’ इस पर शाह ने कहा कि ’वे इस मुद्दे पर पीएम से बात करेंगे।’ सूत्रों की मानें तो इसके बाद संघ सुप्रीमो ने स्वामी को फोन लगा कर कहा कि ’वे 2024 के लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहें, अपनी पसंद की सीट चुन लें और वहां अभी से तैयारी शुरू कर दें।’
Posted on 19 February 2022 by admin
पंजाब चुनाव में भाजपा की असली चिंता कांग्रेस नहीं बल्कि आम आदमी पार्टी के नए अभ्युदय से है। आप ’दिल्ली माॅडल’ पंजाब और गोवा जैसे छोटे राज्यों में बेचना चाहती है, इन राज्यों में ’फ्री बिजली-फ्री पानी’ माॅडल मुफीद भी है। वैसे भी आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल भी हिंदुत्व के नए पुरोधा बन कर उभर रहे हैं, वे बजरंग बली के अनन्य भक्त हैं, मंदिर-मंदिर सिर नवाने में विश्वास रखते हैं और एक तरह से वे भाजपा की स्पेस में ही राजनीति करते हैं। भाजपा के लिए हमेशा से क्षेत्रीय दलों को हरा पाना मुश्किल रहा है, वहीं वह कांग्रेस को आसानी से हराने का दम रखती है। यही वजह है कि दो दिन पहले ’इंडियन एक्सप्रेस’ को दिए एक इंटरव्यू में पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हुंकार भरी कि ’पंजाब के हित का अगर ध्यान रखना है तो वहां एक राष्ट्रीय पार्टी की ही सरकार बननी चाहिए।’ यानी कि अमरिंदर का इशारा साफ है कि ’अगर भाजपा को वोट नहीं दे सकते तो फिर कांग्रेस को ही दे दो, पर आप को मत देना।’ कालांतर में भी जदयू, झामुमो, शिवसेना, टीएमसी से लेकर राकांपा जैसे क्षेत्रीय दलों ने भाजपा की नाक में दम कर रखा है। इस कड़ी में आप समाजवादी पार्टी का नाम भी जोड़ सकते हैं, जो इस बार के यूपी चुनाव में भाजपा को खूब पानी पिला रही है।
Posted on 19 February 2022 by admin
अनुप्रिया पटेल की बागी बहन पल्लवी पटेल प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ सिराथु से चुनाव लड़ रही हैं। सिराथु में कुर्मी वोटों की इतनी बड़ी तादाद को देखते हुए कहा जाने लगा कि मौर्य अपने गढ़ में ही घिर गए हैं। फिर खबर आई कि मौर्या और पल्लवी में एक गुप्त मुलाकात हुई है, इसके बाद पल्लवी सिराथु से अपना नामांकन वापिस लेने को तैयार हो गईं थीं। कहते हैं जैसे ही पल्लवी के मैदान छोड़ने की खबर योगी को लगी उन्होंने फौरन पल्लवी से संपर्क साधा और उन्हें वहां से चुनाव लड़ने के लिए मजबूर कर दिया हर तरह से उनकी मदद करके। अब सिराथु में पल्लवी केशव के पसीने छुड़ा रही हैं।
Posted on 19 February 2022 by admin
‘धूप कभी तो लौटेगी, कभी तो छंटेगा अंधियारा,
लौट आएगा सूरज, दुम दबा कर भागेगा अंधेरा’
तृणमूल कांग्रेस की फायर ब्रांड नेता महुआ मोइत्रा ने भाजपा के बाद अब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से भी रार ठान ली है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने के लिए महुआ को 13 मिनट का वक्त ‘अलाॅट’ किया गया था। गुरुवार को सदन में बोलते हुए उन्हें कोई पांच मिनट भी नहीं बीते थे कि चेयर पर आसीन रमा देवी ने महुआ को टोक दिया-’आप इतने गुस्से में क्यों बोल रही हैं?’ महुआ की तंद्रा भंग हुई, अभी उनके बोलते हुए 10 मिनट भी नहीं हुए थे कि उनका माईक बंद हो गया। हालांकि सभापति रमा देवी को जवाब देने से भी वह नहीं चूकी थीं, उन्होंने चेयर से मुखातिब होकर कहा-’गुस्सा हूं तो बोल रही हूं।’ इसके बाद महुआ ने अपनी शिकायत लोकसभा स्पीकर के पास दर्ज कराई, पर जब उन्हें वहां से कोई माकूल जवाब नहीं मिला तो महुआ ने इस घटना का बकायदा ट्वीट कर दिया-’मेरे कीमती समय में बाधा डालने वाला चेयर कौन होता है? मैं गुस्से में बोलूं या प्यार से, मेरा टोन तय करना आपका काम नहीं।’ महुआ के इस ट्वीट से स्पीकर इतने आहत हुए कि उन्होंने बिना किसी का नाम लिए नाराज़गी जताते हुए कहा कि ’अध्यक्ष पीठ के बारे में किसी को भी चाहे सदन के अंदर या बाहर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।’ उन्होंने सदन के सम्मानित सदस्यों को हिदायत दी-’कोई भी सदस्य चाहे सदन में, सदन के बाहर, सोशल मीडिया में या फिर मीडिया में आसन को लेकर कोई टिप्पणी न करें, यही उचित होगा।’ अब महुआ को लेकर तृणमूल में भी दोफाड़ है क्योंकि उन्होंने अदानी-अंबानी के खिलाफ बोल कर अपनी पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को पहले ही नाराज़ कर दिया था और ममता इस बात के लिए महुआ को सार्वजनिक रूप से डपट भी चुकी हैं। सो, ले-देकर टीएमसी की ओर से महुआ के बचाव में सुदीप बंधोपाध्याय ही बाहर निकल कर सामने आ पाए, उन्होंने महुआ के बचाव में इतना तो अवश्य ही कहा-’स्पीकर पार्टी से ऊपर होता है।’