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..और अंत में

Posted on 24 April 2022 by admin

ओडिशा के नगर पंचायत चुनावों में बंपर जीत के बाद बीजद मुखिया नवीन पटनायक के हौसले बम-बम हैं। बीबीसी के वीमेन स्पोर्ट्स अवार्ड में बतौर मुख्य अतिथि बन कर वे पिछले मंगलवार को दिल्ली आए थे, उनका पीएम मोदी से मिलने का भी कार्यक्रम था, पर किसी कारणवश यह मुलाकात नहीं हो पाई तो पटनायक से कहा गया कि वे पीएम के एक वरिष्ठ सहयोगी मंत्री से मिल कर उनके समक्ष अपनी बात रख दें। पर नवीन इसके लिए तैयार नहीं हुए, उन्होंने कहा-’वे फिर से दिल्ली आ जाएंगे, जब पीएम के पास दुबारा टाईम होगा।

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कांग्रेस की मंथन बैठक में हाथापाई

Posted on 24 April 2022 by admin

पंजाब में कांग्रेस की करारी हार को लेकर एक समीक्षा बैठक आहूत थी। जिसमें पंजाब कांग्रेस के इंचार्ज हरीश चौधरी भी उपस्थित थे। इस बैठक में जब प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता और खडूर साहिब से सांसद जसवीर सिंह गिल डिंपा जब बोलने को खड़े हुए तो बोलते-बोलते बेहद आवेश में आ गए और उन्होंने सीधे हरीश चौधरी पर ही अंगुली उठा दी और कहा ‘जब नोट के बदले टिकट बिकेंगे तो नतीजा और क्या आएगा।’ चौधरी ने उन्हें टोकते हुए कहा कि वे बोलने में भाषा की गरिमा का पालन करें। पर जब डिंपा अपनी रौ में बोलते चले गए तो नौबत हाथापाई की आ गई। शिकायत सोनिया गांधी तक पहुंची, सोनिया ने चौधरी और डिंपा दोनों को तलब कर समझाया कि ऐसी बातें ‘पब्लिक डोमेन’ में आने से पार्टी डैमेज होती है। पर दोनों फिर से सोनिया के सामने ही लड़ पड़े। सोनिया को भी कहीं न कहीं इस बात का इल्म हुआ कि अब पार्टी में गांधी परिवार का इकबाल पहले जैसा नहीं रहा।

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योगी की दर्देबयानी

Posted on 24 April 2022 by admin

मंत्रिमंडल के विभागीय बंटवारे के बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने कुछ मुंहलगे पत्रकारों से ‘ऑफ द् रिकार्ड’ बतिया रहे थे। जिसमें योगी ने खुलासा किया कि वे स्वतंत्र देव सिंह को डिप्टी सीएम, साथ ही महेंद्र सिंह और जयप्रताप सिंह को अपनी कैबिनेट में मंत्री बनाना चाहते थे, पर दिल्ली हाईकमान की एक लिस्ट पहले से तैयार थी। जब ये लिस्ट उन्हें देखने को दी गई तो उसमें श्रीकांत शर्मा और सिद्धार्थनाथ सिंह के नाम भी शामिल थे, फिर उन्होंने विरोध जताते हुए कहा कि ’जब भ्रष्टाचार मुक्त सरकार की छवि पेश करनी है तो फिर ये नाम क्यों?’ फिर ये दोनों नाम काट दिए गए। सूत्र बताते हैं कि भाजपा शीर्ष की ओर से श्रीकांत शर्मा को आश्वासन मिला है कि 2024 में उन्हें मथुरा से भाजपा अपना लोकसभा उम्मीदवार बनाएगी, इससे पहले उन्हें संगठन में लाकर किसी महत्वपूर्ण राज्य का प्रभारी बनाया जा सकता है। रही बात ब्रजेश पाठक के डिप्टी सीएम बनने की तो योगी ने स्पष्ट किया कि ब्राह्मण चेहरे के तौर पर डिप्टी सीएम के लिए उनकी पहली पसंद दिनेश शर्मा ही थे। पर ब्रजेश पाठक ने सतीश शर्मा के साथ मिल कर बसपा उम्मीदवारों के चयन में भाजपा की जीत सुनिश्चित कराने में अहम भूमिका निभाई, जिसका उन्हें ईनाम मिला। सनद रहे कि ब्रजेश पाठक बसपा से ही भाजपा में आए हैं।

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कांग्रेस में राहुल की ताजपोशी की तैयारियां

Posted on 24 April 2022 by admin

जंग का अंजाम चाहे जो रहा हो पर कांग्रेस की राजमाता सोनिया गांधी अपने पुत्र राहुल गांधी को एक वैसे सेनापति के तौर पर देख रही हैं जिन्होंने दुश्मनों के समक्ष अंत तक घुटने नहीं टेके। चुनांचे अब स्वयं सोनिया कांग्रेस के हर वैसे असंतुष्ट व नाराज़ नेताओं को फोन कर रही हैं और उनसे मनुहार भी कर रही है कि राहुल ही पार्टी का बेड़ा पार लगाएंगे। अगले कुछ महीनों में राज्यसभा की 57 सीटें खाली होने वाली जिसमें कांग्रेस के हाथ महज़ 10-11 सीटें ही आने वाली है। फिर भी सोनिया ने गुलाब नबी और मुकुल वासनिक जैसे जी-23 के बागी नेताओं से वादा कर दिया है कि उन्हें राज्यसभा मिलेगी। बदले में सोनिया सिर्फ इतना चाहती हैं कि राहुल के दुबारा ताजपोशी का कांग्रेस के किसी भी कोने से विरोध न हो। वहीं दिल्ली में दीपेंद्र हुड्डा के घर पर सचिन पायलट पधारे। पायलट की नाराज़गी है कि प्रियंका-राहुल ने अपने तमाम वादों के बावजूद सचिन के लिए कुछ नहीं किया। सचिन का कहना था कि उनसे कहा गया था कि अशोक गहलोत को या तो पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना कर या फिर कांग्रेस का राष्ट्रीय महासचिव बना कर और गुजरात का प्रभार देकर उन्हें राजस्थान से बाहर ले जाया जाएगा और तब प्रदेश सरकार की कमान उन्हें सौंप दी जाएगी, पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। और ना ही ऐसी कोई सुगबुगाहट ही दिख रही है। अब कांग्रेस के इन दोनों युवा नेताओं ने तय किया है कि यह मौजूदा सूरतेहाल बदलने की पहल भी इन्हें ही करनी होगी।

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क्या वसुंधरा पर डोरे डाल रही है आप?

Posted on 24 April 2022 by admin

’हम तो कड़ी धूप में तेरी ओर नंगे पांव चले
चले तुम भी पर संभल कर छांव-छांव चले’

राजस्थान की प्रखर भगवा नेत्री वसुंधरा राजे सिंधिया का विद्रोह पिछले काफी समय से आकार ले रहा है, इस बात की भनक विपक्षी पार्टियों को भी लग चुकी है। योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए वसुंधरा को लखनऊ जाना था, इसीलिए पिछले हफ्ते वह जयपुर से दिल्ली पधारीं और जब वह दिल्ली में प्रवास कर रही थीं तो कहा जाता है तभी उनकी एक गुप्त मुलाकात दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया के साथ हुई। भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि जब वसुंधरा से मिलने मनीष सिंधिया हाउस पहुंचे तो इन दोनों नेताओं के दरम्यान कई मुद्दों पर खुल कर चर्चा हुई, कहा यह भी जाता है कि मनीष केजरीवाल का एक खास संदेश लेकर इस भाजपा नेत्री के पास पहुंचे थे कि आप संयोजक वसुंधरा को राजस्थान में आप का सीएम फेस बनाना चाहते हैं। मनीष ने यह भी कहा कि स्वयं अरविंद केजरीवाल उनसे मिलने आना चाहते हैं। इस प्रस्ताव पर विचार करने के लिए वसुंधरा ने थोड़ा वक्त मांगा। पर सूत्र बताते हैं कि इस मुलाकात के तुरंत बाद ही वसुंधरा को पीएम मोदी से मिलने का बुलावा आ गया। पीएम ने वसुंधरा से कहा कि ’राजमाता सिंधिया के लिए उनके दिल में विशेष आदरभाव है, वह एक ऐसी व्यक्तित्व थीं जिन्होंने अपनी दम पर भाजपा को मध्य प्रदेश में खड़ा कर दिया था।’ पीएम ने आगे कहा ’मुझे मालूम है कि इन दिनों आप उलझन में हैं, आपकी नाराज़गी भी मैं समझ सकता हूं, पर आप हड़बड़ी में कोई गलत फैसला मत लीजिए। आप मेरे ऊपर ये छोड़ दो, आपके साथ सब अच्छा होगा।’ सूत्रों की मानें तो वसुंधरा के सांसद पुत्र दुष्यंत सिंह की कुछ फाइल केंद्र सरकार की नज़रों में है। इस दफे 8 मार्च को जब वसुंधरा राजे का जन्मदिन था तो भाजपा की प्रदेश इकाई ने अपने कैडर को साफ आगाह कर रखा था कि भाजपा नेता और कार्यकर्ता वसुंधरा के जन्मदिन समारोह से कुछ दूरी बना कर रखें, पर हाईकमान की तमाम चेतावनियों के बावजूद वसुंधरा के समारोह में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जुटी, इससे भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के कान खड़े हो गए, इसके बाद से ही लगातार वसुंधरा पर नज़र रखी जा रही है।

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क्या गांधी परिवार का रुतबा कम हुआ है?

Posted on 19 March 2022 by admin

’हमारे हौसले कम न थे, रगों में दौड़ते खून में भी रफ्तार थी
भले कितनी ही कुंद हमारे तलवारों की धार थी
दुश्मन था सामने और दिख रही हमारी हार थी
सेनापति, हम न छोड़ते रणभूमि, सुनाई देती जो तेरी हुंकार थी’

हार अपने साथ अक्सर अवरूद्ध आस्थाओं के बोझ सिर पर उठाए चलती है, इसका साफ नज़ारा नई दिल्ली में आहूत कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में देखने को मिला, जहां वक्ताओं के ऊपर बोलते सन्नाटे ज्यादा हावी रहे। बैठक कोई पांच घंटे चली पर गांधी परिवार के मुखर समर्थन में बमुश्किल पांच लोग ही सामने आए। जबकि मीटिंग में कांग्रेस के कोई 52 नेता शामिल थे। यह सोनिया गांधी का वही पुराना स्वांग था जब उन्होंने अपने इस्तीफे की पेशकश करते हुए ऐलान किया कि ‘गांधी परिवार कांग्रेस की रक्षा के लिए कोई भी त्याग कर सकता है, वह किसी भी हद तक जा सकता है।’ आमतौर पर सोनिया के कहे का अक्सर बैठक में व्यापक असर देखने को मिलता था, समवेत स्वरों में ‘नहीं-नहीं’, फिर ‘सोनिया गांधी जिंदाबाद’ के नारे लगते थे। पर इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ। सिर्फ पांच नेता सोनिया के समर्थन में खड़े हुए। इसके बाद राहुल गांधी की बारी थी, केसी वेणुगोपाल ने राहुल के पक्ष में समां बांधने के लिहाज से नारे लगाए-’राहुल लाओ, देश बचाओ।’ पर इस नारे को कोई समर्थन नहीं मिला, सिवा उन चुप सन्नाटों के जिसकी गूंज बहुत ऊंची थी। यही हाल प्रियंका गांधी का रहा, यूपी में उनके ’फ्लॉप शो’ की कीमत उन्हें चुकानी पड़ी, पिछली दफे जब वे सीडब्ल्यूसी की बैठक में बोली थीं तो तालियों की गड़गड़ाहट के बीच बोली थीं, इस दफे हर तरफ असहज सन्नाटा पसरा था। राहुल के बोलने के बाद जिन पांच लोगों ने उनके पक्ष में मोर्चा संभाला, वे थे भूपेश बघेल, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री जिन्होंने इस दफे प्रियंका के कहने पर यूपी में पानी की तरह पैसा बहाया, अपनी गद्दी की सलामती के लिए कृत संकल्प दिखे जिस पर टीएस सिंहदेव टकटकी लगाए देख रहे हैं। कमलनाथ, जिन्हें अगली बार मध्य प्रदेश का सीएम बनना है। अषोक गहलोत जिन्हें अपनी सीएम की कुर्सी बरकरार रखनी है। मल्लिकार्जुन खड़गे, जिनकी नज़र कर्नाटक के आने वाले चुनाव पर हैं और लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, जिनका अब पश्चिम बंगाल में भी कुछ नहीं बचा है। इस बैठक में कांग्रेस के अंसतुष्ट गुट जी-23 के सिर्फ तीन नेता शामिल हुए थे-गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा और मुकुल वासनिक। बैठक में आने से पहले कमलनाथ ने बकायदा गुलाब नबी से बात की और गुलाम नबी ने सोनिया से बात कर कहा कि ’मैंने कभी आपका इस्तीफा नहीं चाहा है।’ जब गुलाब नबी को बोलने का मौका मिला तो वे अपनी रौ में बोले। उन्होंने अपना बोलना खत्म किया तो कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता उनके पास आए, उनकी तारीफ की और कहा कि ’आप बहुत अच्छा बोले।’ जाहिर है इस पूरी बैठक में गांधी परिवार बेहद असहज महसूस कर रहा था।

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वाड्रा करीबी को केरल से राज्यसभा?

Posted on 19 March 2022 by admin

एक ओर तो कांग्रेस में अंदरूनी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा, वहीं गांधी परिवार है जो अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहा। जैसे कि केरल से आने वाली एकमात्र राज्यसभा सीट पर पार्टी के वरिष्ठ नेता एके एंटोनी ने पूरी उम्मीद लगा रखी थी। लेकिन इस सीट पर उनकी जगह जो नाम चल रहा है वह हैं कांग्रेस के तेलांगना प्रभारी कृष्णन श्रीनिवासन का, श्रीनिवासन राबर्ट वाड्रा के स्वामित्व वाली कई कंपनियों के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में भी शामिल हैं। जब से राज्यसभा की दावेदारी का मामला सामने आया है केरल की कांग्रेस इकाई में बवाल मचा हुआ है और एके एंटोनी अपने करीबियों के समक्ष राजनीति से संन्यास लेने की बात करने लगे हैं। कांग्रेस के जी-23 के एक प्रमुख नेता आनंद शर्मा की राज्यसभा की मियाद अब खत्म होने वाली है। आनंद शर्मा को लंबे समय से राज्यसभा में बने रहने की आदत सी हो गई है। सो, उन्होंने इस दफे गांधी परिवार की परिक्रमा से बेहतर समझा कि वे पंजाब से आम आदमी पार्टी के समर्थन से ऊपरी सदन में पहुंच जाए। इसके लिए बकायदा वे आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल से मिल कर गुफ्तगू भी कर पाए हैं। पर केजरीवाल के राजनैतिक शैली को देखते हुए इस बात की उम्मीद बेहद कम लगती है कि वे आनंद पर कृपा बरसाएंगे, क्योंकि उनकी पार्टी अभी तक किसी हैवीवेट को राज्यसभा में लेकर नहीं आई है। आनंद शर्मा की राज्यसभा की मियाद 2 अप्रैल को खत्म हो रही है, अब वे फिर से कहने लग गए हैं कि ’मैं कांग्रेस का वर्कर हूं।’

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क्या जयंत को राज्यसभा देंगे अखिलेश?

Posted on 19 March 2022 by admin

अखिलेश यादव से राज्यसभा चाहने वालों की कतार लंबी हुई जाती है। इस लिस्ट में जयंत चौधरी का नाम भी ताजा-ताजा जुड़ गया है। जयंत पर एक ओर अब भी जहां भाजपा लगातार डोरे डाल रही है, भाजपा चाहती है कि 2024 के चुनाव में जयंत भाजपा के पाले में आ जाए, जिससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा की राहें आसान हो सके। इस बार जयंत की पार्टी रालोद 8 सीटें जीत पाई है, अमूमन राज्यसभा की एक सीट के लिए 38 वोटों की दरकार होती है, यानी जयंत अब 30 वोटों के लिए अखिलेश का मुंह तक रहे हैं। पर अखिलेश का असमंजस यह है कि उनसे राज्यसभा मांगने वालों की एक लंबी कतार है। जैसे अपना दल कमेरावादी की कृष्णा पटेल भी उनसे राज्यसभा मांग रही हैं। अखिलेश ने भी अपना मन पक्का किया हुआ है कि ’वे सपा की ओर से किसी यादव या मुस्लिम को राज्यसभा नहीं देंगे।’ दरअसल, अखिलेश प्रदेश की पिछड़ी जातियों के मतदाताओं में 24 के चुनाव से पहले यह संदेश देना चाहते हैं कि सपा केवल यादव और मुस्लिमों की पार्टी नहीं है। वहीं जनवादी पार्टी सोशलिस्ट के संजय सिंह चैहान की नज़रें भी राज्यसभा पर टिकी हैं, एक अनार और सौ बीमार, बिचारे अखिलेश करें भी तो क्या?

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आइना मुझसे पहली सी सूरत मांगे

Posted on 19 March 2022 by admin

5 राज्यों में कांग्रेस की करारी हार की समीक्षा के लिए पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक कमेटी का गठन किया है, हार की पड़ताल का जिम्मा भी उन्हीं नेताओं को सौंप दिया गया है, पार्टी कैडर जिन पर पहले से अंगुली उठाता आया है। जैसे उत्तराखंड के अधिकांश कांग्रेसी नेता राज्य में कांग्रेस की करारी पराजय के लिए वहां के प्रभारी देवेंद्र यादव, अविनाश पांडे और सह प्रभारी दीपिका पांडे को दोशी करार दे रहे थे। अब मजे की बात देखिए हार की समीक्षा के लिए सोनिया गांधी ने जो कमेटी बनाई उसमें अजय माकन के साथ अविनाश पांडे को भी शामिल कर लिया गया है। पंजाब की हार के लिए जो समीक्षा बैठक हुई, पंजाब के कांग्रेसी सांसदों की यह समीक्षा बैठक सीडब्ल्यूसी की बैठक से ठीक पहले हुई थी जिसमें कांग्रेसी सांसदों ने खुल कर कहा था कि ’घर को आग लगी घर के चिराग से’ यानी पार्टी हाईकमान ने जिन नेताओं को यहां टिकट वितरण की जिम्मेदारी दी थी, स्क्रीनिंग कमेटी का जिम्मा सौंपा था, वहीं से टिकट बिक गए। मुकुल वासनिक जैसे नेताओं ने खुल कर चंदन यादव को आड़े हाथों लेते हुए कहा था-’स्क्रीनिंग कमेटी के नाम पर लूट मची है, कांग्रेस की टिकटें बेची गई हैं तो रिजल्ट कैसे आएगा?’ अब सवाल उठ रहे हैं कि राहुल की टीम में वह कौन है जो अविनाश पांडे और चंदन यादव जैसे नेताओं को आगे बढ़ाता है, तो शक की सुई घूम-घाम कर अलंकार सेवई पर टिक गईं हैं।

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मुश्किल में प्रियंका

Posted on 19 March 2022 by admin

यूपी के चुनावी नतीजे सामने आने के बाद प्रियंका गांधी ने राज्य के कांग्रेसी नेताओं के साथ एक समीक्षा बैठक की। बैठक से पहले ही प्रियंका को संकेत मिल गए कि इस बैठक में कई नेता यूपी में कांग्रेस की करारी हार को लेकर उन पर अंगुली उठा सकते हैं, ये सवाल भी उठा सकते हैं कि कि इस चुनाव में कांग्रेस के पैसों का दुरूपयोग हुआ है, ’लड़की हूं लड़ सकती हूं’ का नैरेटिव पब्लिक में गलत ढंग से पहुंचा है आदि-आदि। सो, स्थिति की नाजुकता को भांपते हुए प्रियंका के ऑफिस से प्रदेश के कई प्रमुख नेताओं को फोन गया और प्रियंका ने खुद उन नेताओं से बात कर अपनी ओर से सफाई पेश की। इसके बाद जब बैठक षुरू हुई तो यूपी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने प्रियंका की तारीफों के पुल बांधते अपने भाषण की शुरूआत करते हुए कहा-’आप बहुत अच्छा चुनाव लड़ीं, पूरे प्रदेश में कांग्रेस की आवाज़ बुलंद हुई है।’ पर पार्टी के अधिसंख्यक नेता तिवारी की राय से इतफाक नहीं रख रहे थे, उनका कहना था कि ’कांग्रेस की इससे बुरी और क्या गत हो सकती है? पार्टी का वोट शेयर यूपी में 6 से गिर कर 2.23 प्रतिशत पर पहुंच गया, सीटें घट कर 2 रह गई है।’ प्रियंका के लिए भी बैठक में स्थिति असहज हो रही थी, पर किसी तरह उन्होंने मामले को संभाले रखा।

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