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ममता का मोदी प्रेम

Posted on 15 August 2022 by admin

अभी हालिया दिनों में प्रधानमंत्री से दिल्ली में मिल कर जब बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोलकाता लौटीं तो उन्होंने बांग्ला के एक दूसरे सबसे बड़े अखबार को एक ’ऑफ-बीट’ इंटरव्यू दिया है। सूत्रों की मानें तो इस इंटरव्यू में दीदी ने पीएम की तारीफों के पुल बांध दिए। दीदी ने बताया कि मोदी जी को ‘पिस्ता फ्लेवर्ड मिस्टी दोई’ बहुत पसंद है, ‘पीकॉक’ उनका पसंदीदा कलर है, सो इस बार वह पीएम के लिए मिस्टी दोई के अलावा दीघा का एक खास पीकॉक कलर का शॉल लेकर दिल्ली गई थीं। उनकी इस भेंट को पीएम ने दिल से स्वीकार किया। ममता ने इस इंटरव्यू में यह भी बताया कि वह नियम से हर गर्मियों में पीएम को बंगाल का स्पेशल माल्दा हिम सागर और लक्ष्मण भोग आम भेजती हैं। पर अगले रोज यह इंटरव्यू छपा ही नहीं, ममता को पता चला कि उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी ने यह इंटरव्यू रुकवा दिया था, ममता ने तब अभिषेक को तलब कर अपनी नाराज़गी जताई, इस पर अभिषेक का कहना था कि ’इस इंटरव्यू को पढ़ कर बिल्कुल ऐसा नहीं लग रहा था कि यह बंगाल की शेरनी का इंटरव्यू है, बल्कि कुछ ऐसा लग रहा था कि हम भाजपा के किसी प्रदेश अध्यक्ष का इंटरव्यू पढ़ रहे हैं।’ ममता चुप रह गईं।

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जब जायसवाल का दांव उलटा पड़ा

Posted on 15 August 2022 by admin

भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल की वह कथित ऑडियो क्लिप सुर्खियां बटोर रही है जिसमें वे राजद और जदयू के विधायकों को प्रलोभन परोसते सुने जा सकते हैं, इस कथित ऑडियो रिकार्डिंग में वे कई विरोधी विधायकों को तोड़ने के लिए उन्हें मंत्री बनाने का आश्वासन भी दे रहे हैं। एक दबंग राजद विधायक जो कई कॉलेज के मालिक भी हैं और इस मुस्लिम विधायक के बारे में चर्चा जोर पकड़ रही थी कि वे इन दिनों तेजस्वी से नाराज़ चल रहे हैं। कहते हैं जायसवाल का यह फोन इस मुस्लिम विधायक को भी चला गया और उन्होंने किंचित धमकाने वाले अंदाज में उस विधायक से कहा-’हमें पता है कि आप क्या काम करते हैं, बहुत जल्दी आप ईडी के शिकंजे में होंगे।’ इस पर उस मुस्लिम विधायक ने पलटवार करते हुए जायसवाल से कहा-’मेरे गांव में 350 लाइसेंसी बंदूकें हैं, अपने ईडी से कहिएगा कि तैयारी करके आएं।’

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नड्डा किससे पूछ कर काम करते हैं?

Posted on 15 August 2022 by admin

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा यूं तो पार्टी संविधान के मुताबिक संगठन के सबसे शक्तिशाली शख्स हैं, पर वे अपना कोई भी निर्णय पार्टी के नंबर दो से पूछे बगैर नहीं लेते। पिछले दिनों एक पत्रकार ने भाजपाध्यक्ष से इंटरव्यू के लिए समय मांगा, नड्डा ने पत्रकार से कहा, ‘बताता हूं।’ फिर नड्डा ने अपने सहायक से कहा-’जरा पूछ कर बताइए’ नड्डा के सहायक ने शाह के ऑफिस फोन लगाया और उनके सहायक से पूछा कि क्या फलां अखबार को अध्यक्ष जी का इंटरव्यू देना ठीक रहेगा। शाह के सहायक की उस अखबार को लेकर एक खास तरह की चिढ़ थी, सो बात शाह तक पहुंची भी नहीं और वहीं से ‘ना’ हो गया। अब अध्यक्ष जी के समक्ष भी ’ना’ कहने के सिवा और कोई चारा नहीं बचा था।

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गहलोत की हैरानी का सबब

Posted on 15 August 2022 by admin

गहलोत कैंप इस बात को लेकर हमेशा सकते में रहता है कि देश में कोई भी मीडिया संस्थान चाहे नेताओं की लोकप्रियता का कोई भी सर्वेक्षण पेश करें उसमें सचिन पायलट अपनी जगह बना ही लेते हैं। अभी हालिया दिनों में एक नेशनल न्यूज चैनल के जनमत सर्वेक्षण में सचिन पायलट ने अपने लिए लोकप्रियता के ग्राफ में 14 फीसदी अंक जुटा लिए। इस पर राजस्थान के कुछ पत्रकारों ने गहलोत की घेरेबंदी करते उनसे पूछा-’आप इतने वरिष्ठ हैं, लोकप्रिय हैं, पर किसी भी सर्वेक्षण में आपका नाम क्यों नहीं होता?’ गहलोत ने फौरन जवाब दिया-’वे पत्रकारों के लिए राजनीति नहीं करते, न ही इन दिनों चल रही ‘मॉडर्न पॉलिटिक्स’ में ही उनकी कोई दिलचस्पी है और न ही ऐसे सर्वे की कीमत चुकाने को वे सही मानते हैं, वे जमीन से जुड़े हैं और जमीन की ही राजनीति करते हैं।’

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पत्रकारों पर अघोषित सेंसरशिप

Posted on 15 August 2022 by admin

संसद कवर करने और आने-जाने में पत्रकारों पर पहले से ही अघोषित सेंसरशिप लगी है, ऐसे में पिछले दिनों समाप्त हुए संसद सत्र के दौरान जिन पांच पत्रकारों ने राहुल गांधी को संसद के कॉरिडोर में घेर कर महंगाई और बेरोजगारी पर अपने मोबाइल पर उनका बाइट ले लिया था, उन पांचों पत्रकारों को संसद कवर करने से सस्पेंड कर दिया गया है। इसमें एक चर्चित एजेंसी के भी पत्रकार शामिल हैं। दरअसल, इस बाइट में राहुल गांधी ने महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर पीएम को पानी पी-पी कर कोसा था। जब इस बात की भनक स्पीकर ऑफिस को लगी तो फौरन इन पत्रकारों को सस्पेंड कर दिया गया। काफी मिन्नतों के बाद सत्र के आखिरी दिन इन पत्रकारों के ऊपर से सस्पेंशन की तलवार हटी और इन्हें संसद में प्रवेश का मौका मिल पाया।

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क्या अपनों की आपसी लड़ाई के शिकार बन गए उद्धव?

Posted on 15 August 2022 by admin

’निकले हो जिस अनजान सफर पर मुमकिन है कि वहां बहुत हो अंधेरा
मेरी ये आंखें, ये चिराग रख लो और रख लो मेरे हिस्से का यह सवेरा’

उद्धव ठाकरे सियासत की उस अबूझ चाल से धोखा खा गए, उनके एक बहुत पुराने सहयोगी हैं मिलिंद नार्वेकर, जो कोई तीन दशकों से उद्धव के साथ बने हुए हैं, उनके निजी सहायक होने के बावजूद नार्वेकर उद्धव के राजनैतिक सलाहकारों में शुमार होते थे। जब महाराष्ट्र में नई-नई महाविकास अघाड़ी की सरकार बनी तो सब जानते हैं कि उसमें नार्वेकर की तूती बोलती थी। पर जब उद्धव बीमार पड़े और प्रशासनिक कार्यों में उनकी सक्रियता किंचित कम हो गई तो शिवसेना के सियासी फलक पर धूमकेतु सा उभरे संजय राउत, जिनकी उद्धव की पत्नी रश्मि ठाकरे से गहरी छनती है। फिर सीएम ऑफिस के महत्वपूर्ण फैसलों पर राउत और रश्मि की छाप दिखने लगी, ये दोनों बहुत पॉवरफुल हो गए, और कायदे से इस जोड़ी ने नार्वेकर को साइडलाइन कर दिया। नार्वेकर अपने परिवार के लिए जुहू इलाके में एक अपार्टमेंट बनाना चाहते थे, जिसके लिए उन्होंने उद्धव से मदद मांगी थी। और जब शिवसेना कोटे से राज्यसभा की दो सीट भरने का मौका आया तो नार्वेकर की इच्छा थी कि इसमें से एक सीट पर उन्हें ऊपरी सदन में जाने का मौका मिले, पर उद्धव ने अपने इस सबसे करीबी व्यक्ति की भावनाओं को अनसुना कर संजय राउत और प्रियंका चतुर्वेदी को राज्यसभा में भेज दिया। कहते हैं नार्वेकर की दोस्ती भाजपा के एक बिजनेसमैन नेता से थी जिन्हें देवेंद्र फड़णवीस का बेहद करीबी माना जाता है। सूत्रों की मानें तो भाजपा के उसी नेता के घर पर फड़णवीस और नार्वेकर की एक अहम मुलाकात हुई, कहते हैं कि इसके बाद इन मुलाकातों के सिलसिले बढ़े तो फड़णवीस के हाथ ठाकरे और राउत से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज हाथ लग गए। इसके बाद ही उद्धव और राउत को घेरने की भगवा व्यूह रचनाओं ने आकर लेना शुरू कर दिया और इसके सूत्रधार बने एकनाथ शिंदे। सूत्रों की मानें तो आज की तारीख में उद्धव ठाकरे चहुंओर से इतना घिर चुके हैं कि वे भाजपा की ओर फिर से दोस्ती का हाथ भी बढ़ा सकते हैं।

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ईडी का अगला निशाना कौन?

Posted on 15 August 2022 by admin

सूत्रों की मानें तो भाजपा रणनीतिकारों ने कांग्रेस के ऐसे महत्वपूर्ण नेताओं की एक लिस्ट बनाई है, जिन नेताओं का एक से ज्यादा लोकसभा सीटों पर असर है। ऐसे नेताओं पर पहले तो डोरे डाले जा रहे हैं कि वे आएं और भाजपा ज्वॉइन कर लें। जो ऐसा करते हैं उनके लिए पुरस्कार की भी यथोचित व्यवस्था है। जो नहीं मानेंगे उनके लिए ईडी है न? ऐसे नेताओ के अतीत व वर्तमान को खंगाल कर सारा कच्चा चिट्ठा तैयार किया जा रहा है ताकि उनकी चाकचौबंद घेरेबंदी हो सके। सूत्रों की मानें तो कर्नाटक कांग्रेस प्रमुख डी शिवकुमार और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण की बारी तो लगभग आ पहुंची है। बस अब ईडी को हरकत में आना है।

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तब कहां थे कांग्रेसी सांसद

Posted on 15 August 2022 by admin

पिछले दिनों जब केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने सांसद में सोनिया गांधी को घेरा तो वाकई उन पलों में वह बेहद असहाय दिख रही थीं, उस वक्त सदन में मौजूद कांग्रेसी सांसदों में कोई क्यों नहीं उनके बचाव में आगे आया, यह भी एक बड़ा सवाल है। कांग्रेस के एक प्रमुख नेता और गांधी परिवार के बेहद करीबियों में शुमार होने वाले केसी वेणुगोपाल ने उस वाकये वाले रोज की संसद की तमाम फुटेज जब खंगाली तो उन्हें पता चला कि उस वक्त कांग्रेस के 8 सांसद सदन में ही मौजूद थे। इन 8 में से केरल के 5, पंजाब के 2 और बंगाल के 1 कांग्रेस के लोकसभा सांसदों की मौजूदगी देखी जा सकती थी। वेणुगोपाल ने इन सांसदों को अलग-अलग बुला कर उनसे जवाब तलब किया। 8 में से 7 सांसदों के जबाव से वेणुगोपाल संतुष्ट नहीं बताए जाते हैं, सिवा बंगाल के कांग्रेसी सांसद अबु हसेन खान चौधरी के जिनका कहना था ’उनकी उम्र और उनके स्वास्थ्य ने उनका साथ नहीं दिया कि वे फौरन उठ कर जाते और सत्ता पक्ष से लोहा लेते।’ सनद रहे कि सोनिया के बचाव में सबसे पहले सदन के मार्शल आए और उनके पीछे-पीछे एनसीपी की सुप्रिया सुले।

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नीतीश के मन में क्या चल रहा है?

Posted on 15 August 2022 by admin

पिछले दिनों अमित शाह बिहार दौरे पर पटना गए थे, जहां बिहार भाजपा के तमाम मोर्चों की एक अहम बैठक भी आहूत थी। इसी मीटिंग के लिए भाजपाध्यक्ष जे पी नड्डा भी पटना गए थे जहां उन्होंने अपना वह चर्चित बयान दिया था कि ’भाजपा को छोड़ कर तमाम राजनैतिक पार्टियां खत्म हो जाएंगी’, इसके विरोध में वामपंथी दलों की कई छात्र ईकाइयों ने उनकी कार का भी घेराव किया था। इस मीटिंग में शामिल होने आए भाजपा के तमाम नेताओं से कहा गया था कि ’वे पटना के आसपास के किसी गांव में भाजपा कार्यकर्ता के घर प्रवास करें।’ पर सुरक्षा की दृष्टि से अमित शाह को पटना के एक पंचतारा होटल में ठहराया गया था। सूत्र बताते हैं कि इस दरम्यान अमित शाह के ऑफिस से नीतीश कुमार को दो बार फोन गया कि वे गृह मंत्री के साथ भोजन के लिए होटल पधारें। इस पर नीतीश ने कहा कि ’चूंकि अमित शाह जी हमारे राज्य में पधारे हैं, इस नाते वे हमारे अतिथि हैं सो वे हमारे घर भोजन के लिए आएं।’ पर किसी कारणवश शाह का सीएम आवास जाना नहीं हो पाया, बाद में यह खबर आई कि नीतीश कोरोना संक्रमित पाए गए हैं।

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क्षेत्रीय दलों पर भाजपा की नज़रें

Posted on 15 August 2022 by admin

भाजपा की नज़र उन क्षेत्रीय दलों पर मजबूती से जमी है जिनके क्षत्रपों की तबियत कुछ ठीक नहीं चल रही। जैसे कर्नाटक के एक प्रमुख क्षेत्रीय दल जेडीएस प्रमुख कुमारस्वामी का स्वास्थ्य कुछ ठीक नहीं बताया जा रहा है। उन्हें अपनी इलाज के लिए बार-बार सिंगापुर जाना पड़ रहा है। डीएमके प्रमुख स्टालिन की तबियत भी नासाज़ बताई जा रही है, यह भी सुनने में आ रहा है कि डीएमके में स्टालिन के उत्तराधिकार की तलाश भी शुरू हो चुकी है। बीजद के नवीन पटनायक और शिवसेना के उद्धव ठाकरे के स्वास्थ्य को लेकर भी अक्सर अटकलों का बाजार गर्म रहता है।

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