Archive | मुख्य

क्या राहुल होंगे लोकसभा में नेता

Posted on 31 October 2022 by admin

हालांकि राहुल गांधी ने इन बात को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि ’नए पार्टी अध्यक्ष खड़गे उन्हें जो भी जिम्मेदारी सौंपेंगे वे उसे सहर्ष स्वीकार करेंगे।’ सो, कांग्रेस से जुड़े सूत्र खुलासा करते हैं कि लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी की बहुत जल्द छुट्टी होने वाली है, यदा-कदा उनकी जुबान लड़खड़ा जाती है और पार्टी को उनके बचाव में भी दिक्कतें आने लगती है। सो माना जा रहा है कि खड़गे अपना ’मास्टर स्ट्रोक’ चलते राहुल गांधी को लोकसभा में कांग्रेस के नए नेता के तौर पर पेश कर सकते हैं। हो सकता है कि राहुल इसके लिए मना न कर पाएं। वहीं राज्यसभा में पार्टी का नेता कौन होगा इसको लेकर कयासों के बाजार गर्म हैं। रेस में सबसे आगे दिग्विजय सिंह का नाम बताया जा रहा है, पर खड़गे की पहली पसंद के तौर पर प्रमोद तिवारी का नाम उभर रहा है। वे काफी पहले से खड़गे को जानते हैं, यूपी से ताल्लुक रखने वाले एक ब्राह्मण नेता है। अध्यक्षीय चुनाव में खड़गे को टक्कर देने वाले शशि थरूर भले ही मात्र 1072 वोट ही ले पाए हों, पर खड़गे लोकसभा में उन्हें नेता पद सौंपने के हिमायती नहीं बताए जाते हैं, खड़गे को लगता है थरूर कभी भी कुछ विवादास्पद बोल जाते हैं।

Comments Off on क्या राहुल होंगे लोकसभा में नेता

कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव दिलचस्प हुआ

Posted on 31 October 2022 by admin

’कोई शक्ल पा जाती है यह नर्म मिट्टी जब कुम्हार हाथ लगाते हैं
वरना अक्सर इसे जूते रौंद कर कहीं आगे निकल जाते हैं’
क्या गांधी परिवार के नॉमिनी समझे जाने वाले मल्लिकार्जुन खड़गे को मैदान में डटे षषि थरूर से कड़ी टक्कर मिल रही है? अपने चुनाव प्रचार के सिलसिले में जब इस मंगलवार को खड़गे पटना पहुंचे तो यह देख कर हैरान रह गए कि उनके तमाम प्रचार अभियानों के बावजूद उनसे मिलने 200 डेलीगेट ही बमुश्किल वहां जमा हो पाए, जबकि बिहार में 524 डेलीगेट बनाए गए हैं, जो कांग्रेस का नया अध्यक्ष चुनने के लिए वोट करेंगे। जबकि खड़गे के पटना कार्यक्रम को लेकर चार दिनों से कैंपेन चल रहा था, खड़गे के लिए प्रमोद तिवारी एक दिन पहले से पटना में डटे हुए थे। अब डेलीगेट्स की शिकायत है कि बिहार कांग्रेस कमेटी की ओर से अधिकांश डेलीगेट को कार्ड ही जारी नहीं हुए हैं, तो वे वोट कैसे करेंगे। कई डेलीगेट को तो यह भी नहीं पता कि वे डेलीगेट्स की आधिकारिक लिस्ट में शामिल भी हैं अथवा नहीं। पर इनकी पक्की सूची खड़गे और थरूर दोनों के पास हैं क्योंकि डेलीगेट्स के पास इन दोनों के ऑफिस से समर्थन के लिए फोन आ रहे हैं। शशि थरूर तो युवा डेलीगेट्स में काफी लोकप्रिय हो रहे हैं, क्योंकि वे व्यक्तिगत तौर पर हर डेलीगेट को फोन कर उनसे अपने लिए समर्थन मांग रहे हैं। पटना में बाजी पलटती देख खड़गे ने तुरंत गांधी परिवार का कार्ड चल दिया, उन्होंने कहा कि ’उन्हें नामांकन पत्र दाखिल करने के मात्र 18 घंटे पहले आदेश हुआ था कि उन्हें चुनाव लड़ना है, क्योंकि राहुल नहीं चाहते कि गांधी परिवार का कोई सदस्य पार्टी शीर्ष पर आसीन हो।’ यानी खड़गे ने एक तरह से साफ कर दिया कि वे गांधी परिवार के कहने पर ही मैदान में उतरे हैं।

Comments Off on कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव दिलचस्प हुआ

क्या राजद और जदयू विलय के लिए तैयार हैं

Posted on 31 October 2022 by admin

लोकसभा चुनाव 2024 के परिप्रेक्ष्य को मद्देनज़र रखते जदयू और राजद के विलय की पटकथा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो इस बारे में लालू यादव और नीतीश कुमार में निर्णायक दौर की बातचीत हो चुकी है। सूत्रों का दावा है कि जदयू और राजद के विलय के बाद एक नई पार्टी का गठन होगा जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार होंगे और बिहार के मुख्यमंत्री पद का जिम्मा तेजस्वी यादव संभालेंगे। पार्टी के सिंबल को लेकर पेंच फंसा हुआ है, नीतीश चाहते हैं कि इस नई पार्टी का सिंबल भी जदयू का ’तीर’ निशान हो जबकि लालू ’लालटेन’ के पक्षधर हैं। उनका कहना है कि ’उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल का एक व्यापक जनाधार है और उनका वोट शेयर भी सबसे ज्यादा है, बिहार के लोग ’लालटेन’ के चुनाव चिन्ह को ठीक से पहचानते भी हैं।’ लगता है नीतीश इस बात पर मान जाएंगे, क्योंकि अब उनकी भी पूरी इच्छा दिल्ली की राजनीति करने में हैं और वे स्वयं को मोदी के विकल्प के तौर पर पेश किए जाने को तैयार हैं।

Comments Off on क्या राजद और जदयू विलय के लिए तैयार हैं

कब होंगे जम्मू-कश्मीर में चुनाव?

Posted on 31 October 2022 by admin

जम्मू-कश्मीर में चुनाव कब करवाए जाएं इसको लेकर भाजपा में विभाजित राय है। सूत्रों की मानें तो जम्मू-कश्मीर के गवर्नर मनोज सिन्हा चाहते थे कि इसी साल नवंबर तक चुनाव हो जाए तो सबसे अच्छा रहेगा, गृह मंत्री अमित शाह की भी कमोबेश यही राय बताई जाती है, उन्हें भी लगता है कि ’इस वक्त जम्मू-कश्मीर का माहौल भाजपा के हक में है, सो आने वाले कुछ महीनों में यहां चुनाव करवाने से फैसला भाजपा के मनमाफिक आ सकता है। भाजपा यहां नंबर वन पार्टी बन कर उभर सकती है।’ पर पीएमओ की राय इससे दीगर है, पीएमओ अगले साल 2023 की गर्मियों में यहां कर्नाटक के साथ चुनाव करवाने का पक्षधर है ताकि तब तक घाटी में बर्फ भी पिछल सके और मतदाता सूची में नए वोटरों के नाम जोड़ने की प्रक्रिया भी पूरी हो सके। सनद रहे कि जम्मू-कश्मीर में 2018 से राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है और अगस्त 2019 में धारा 370 हटाए जाने के बाद पहली बार यहां विधानसभा चुनाव होने हैं।

Comments Off on कब होंगे जम्मू-कश्मीर में चुनाव?

गुजरात में चढ़ता आप का ग्राफ

Posted on 31 October 2022 by admin

चुनाव आयोग ने भले ही हिमाचल में विधानसभा चुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया है, पर गुजरात चुनाव की तारीखों को लेकर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है। यानी गुजरात के बारे में भाजपा को कोई ऐसी चिंता जरूर है जो उसे अंदर ही अंदर परेशान कर रही है। सूत्रों की मानें तो इस दफे के गुजरात चुनाव में जिस तरह आप का ग्राफ निरंतर ऊपर चढ़ रहा है यह भाजपा के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। आम आदमी पार्टी द्वारा कराए गए अगस्त के जनमत सर्वेक्षण में पार्टी को 12 फीसदी वोट शेयर मिलने की बात सामने आई थी, सितंबर के सर्वे में यह आंकड़ा बढ़ कर 14.5 फीसदी और अभी हालिया अक्टूबर में करवाए गए सर्वेक्षण में यह आंकड़ा 17.5 प्रतिशत पर आ गया बताया जाता है। आप की गुजरात इकाई का मानना है कि ’अगर पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल हर हफ्ते गुजरात का दौरा करें तो आप का वोट प्रतिशत 20 से 22 फीसदी तक पहुंच सकता है।’ आप ने इन दिनों हिमाचल की चिंता कम कर दी है, उसका सारा फोकस अब सिर्फ गुजरात पर सिमट आया है, पार्टी यहां पंजाब के पैटर्न पर ही चुनाव लड़ रही है। पहले चुनाव में उसे अपनी ताकत दिखानी है और उसका असली लक्ष्य 2027 का चुनाव है, जिसे जीत कर वह गुजरात में अपनी सरकार बनाना चाहेगी।

Comments Off on गुजरात में चढ़ता आप का ग्राफ

क्या लौट के उद्धव पुराने घर आएंगे?

Posted on 31 October 2022 by admin

’मैंने तो समझा था कि एक वही है जो मेरे अक्स के सबसे करीब है
पर बेवफा आइने ने मेरी हर गुफ्तगू की चर्चा दीवारों से कर दी है’

सियासत के बारे कम से कम यह तो यकीनी तौर पर कहा जा सकता है कि ना यहां दोस्त ही हमेशा के लिए बनते हैं और न ही दुश्मनी सदा के लिए निभाई जाती है। शायद यही वजह थी कि शिवाजी पार्क की अपनी दशहरा रैली में जहां उद्धव ठाकरे 5 अक्टूबर को अपने जोशीले उद्बोधन में भाजपा को पानी-पी कर कोस रहे थे, तो नवरात्रि के मौके पर मुकेश अंबानी के घर उद्धव की पत्नी रश्मि ठाकरे और महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस की एक अहम मुलाकात हो चुकी थी, ऐसा विश्वस्त सूत्रों का दावा है। सूत्रों की मानें तो फड़णवीस लगातार इस कोशिश में जुटे हैं कि महाराष्ट्र में एक बार फिर से भाजपा और उद्धव की शिवसेना में समझौता हो जाए। कहते हैं इस नवरात्रि पार्टी का आयोजन नीता अंबानी ने किया था, चूंकि उद्धव की पत्नी रश्मि ठाकरे नीता अंबानी की अभिन्न मित्रों में शुमार होती हैं, सो उन्हें पहले ही न्यौता भेजा जा चुका था। देवेंद्र फड़णवीस को इस आयोजन में आमंत्रित करते हुए अंबानी परिवार ने उन्हें बता दिया था कि ‘रश्मि भी आने वाली हैं।’ सूत्रों की मानें तो इस पर फड़णवीस ने कहा-’चलो अच्छा है।’ कहते हैं इसके बाद अंबानी के घर में फड़णवीस और रश्मि ठाकरे की यह मुलाकात कोई डेढ़ घंटे तक चली। सूत्रों के मुताबिक फड़णवीस ने रश्मि से कहा कि ’अगर आपकी शिवसेना सीएम पद की दावेदारी छोड़ दें तो हम फिर से साथ आ सकते हैं, इसका फायदा आपको बीएमसी चुनावों में भी मिल सकता है। फड़णवीस ने आगे यह भी कहा कि ’इस गठबंधन में आदित्य ठाकरे का पूरा सम्मान रखा जाएगा, पर हमें एक-दूसरे पर निजी हमलों से बचना चाहिए।’ रश्मि ने भोलेपन से पूछा कि ’आपकी इस योजना को क्या दिल्ली से ’हां’ मिली हुई है और अगर ऐसा होता है तो आप एकनाथ शिंदे का क्या करेंगे?’ फड़णवीस ने कहा कि ’शिंदे हमारी प्राब्लॉम हैं, उन्हें हम पर छोड़ दीजिए, उनके पास विधायक हैं, जो आपके पास नहीं हैं।’ रश्मि ने फड़णवीस को आश्वासन दिया है कि वे इस बारे में उद्धव से बात करेंगी। वादा भी फिर मिलने का हुआ है यानी नई संभावनाओं के द्वार खुल चके हैं।

Comments Off on क्या लौट के उद्धव पुराने घर आएंगे?

नीतीश की कुर्मी राजनीति के ’रोड मैप’ को अखिलेश की ‘ना’

Posted on 31 October 2022 by admin

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 2024 के आम चुनाव को किंचित बहुत गंभीरता से ले रहे हैं संभावना है कि 24 के चुनाव में नीतीश की जदयू बिहार की 17 लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ेगी, शेष सीटों में 17 सीटें राजद को तो बाकी बची 6 सीटें कांग्रेस और लेफ्ट के हिस्से आ सकती हैं चुनाव लड़ने के लिए। सो, नीतीश के बेहद मुंहलगे संजय झा ने उन्हें सलाह दी है कि ’जदयू को बिहार से बाहर की 15 कुर्मी बाहुल्य सीटों पर और चुनाव लड़ना चाहिए।’ ऐसी सबसे ज्यादा सीटें झा ने यूपी में चिन्हित कर रखी है, इसके अलावा नीतीश का इरादा मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा व गुजरात से भी जदयू उम्मीदवार उतारने का है। सूत्रों की मानें तो नीतीश के विशेष दूत के तौर पर संजय झा लखनऊ पहुंचे और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से आग्रह किया कि ’वे बस्ती, श्रावस्ती, सीतापुर, मिर्जापुर और बरेली जैसे कुर्मी बहुल जिलों नीतीश के लिए सभाएं रखें।’ अखिलेश ने ध्यानपूर्वक संजय झा की बातों को सुना और कहा-’सोचने का वक्त दीजिए, बताता हूं।’ जब काफी दिनों तक अखिलेश का फोन नहीं आया तो फिर नीतीश के कहने पर तेजस्वी ने अखिलेश को फोन लगाया और उनसे पूछा कि ’इस बारे में आखिर उनकी राय क्या है?’ अखिलेश पहले से भरे बैठे थे, छूटते ही बोले-’इस वक्त हमारी पार्टी में संगठनात्मक चुनाव चल रहे हैं सो, जनवरी से पहले ऐसा कुछ भी कर पाना संभव नहीं होगा। वैसे भी जब मेरी पार्टी बिहार में नहीं घुस रही है तो आप लोग यूपी में क्यों आना चाहते हैं?’ तेजस्वी ने अखिलेश के कहने का मर्म भांप लिया। इस बारे में ममता बनर्जी के भी कुछ ऐसे ही विचार थे। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने काफी टाल-मटोल के बाद कहा कि ’वे समझौते के तहत नीतीश जी के लिए अपनी एक सीट छोड़ सकते हैं।’ मध्य प्रदेश का रीवां भी एक कुर्मी बाहुल्य सीट है, जहां से 1996 में बसपा के एक कुर्मी नेता बुद्दसेन पटेल पहली बार चुनाव जीत कर आए। पर नीतीश के हाथ से यूपी फिसल रहा है जहां बिहार के बाद सबसे ज्यादा कोई 9 प्रतिशत कुर्मी आबादी है। संजय झा को भी उम्मीद है कि वे आज न कल अखिलेश को इसके लिए मना ही लेंगे।

Comments Off on नीतीश की कुर्मी राजनीति के ’रोड मैप’ को अखिलेश की ‘ना’

फिर भी कांग्रेस सुधरती नहीं

Posted on 31 October 2022 by admin

कांग्रेस के पार्टी संविधान को धत्ता बताते हुए आनन-फानन में उत्तर प्रदेश कांग्रेस को एक नया अध्यक्ष दे दिया गया है, वे हैं बृजलाल खाबरी, प्रियंका करीबी संदीप सिंह की अपरंपार महिमा की वजह से ऐसा संभव हो पाया है। जबकि कांग्रेस में इस वक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया चल रही है और घोषित मानकों के अनुसार जब भी संगठन का कोई ऐसा महत्वपूर्ण चुनाव चल रहा होता है, इसके अधबीच नई नियुक्तियों की परंपरा नहीं है। वैसे भी खाबरी की नियुक्ति को लेकर यूपी कांग्रेस में कोई नए उत्साह का संचार नहीं हुआ है, इसके विपरीत उन्हें प्रदेश की कमान दिए जाने से पार्टी कैडर में व्यापक रोश देखा जा सकता है। खाबरी पिछले दो चुनावों में लगातार अपनी जमानत जब्त करा चुके हैं, 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में महरौनी सीट पर इन्हें मात्र 4 हजार 344 वोट आए थे। खाबरी कांग्रेस में आने से पूर्व बसपा के जोनल कोऑर्डिनेटर भी रह चुके हैं, जब ये बसपा में थे तो भू-माफिया से सांठगांठ के आरोप में मायावती ने इन्हें पार्टी से निकाल दिया था, इसके बाद ही इन्होंने कांग्रेस का दामन थामा था।

Comments Off on फिर भी कांग्रेस सुधरती नहीं

गहलोत से सोनिया ने क्या कहा?

Posted on 31 October 2022 by admin

जब राजस्थान का ड्रामा अपने पूरे शबाब पर था तब अशोक गहलोत केसी वेणुगोपाल को साथ लेकर सोनिया गांधी से मिलने पहुंचे थे। सोनिया इस मुलाकात के लिए जब कमरे में आईं तो उन्होंने इशारों में वेणुगोपाल को कमरे से बाहर जाने को कहा, फिर उन्होंने गहलोत से दो टूक बात की। सूत्रों की मानें तो उस मौके पर भावुक हो गईं सोनिया ने गहलोत से कहा-’मैंने सिर्फ दो लोगों पर हमेशा आंख मूंद कर भरोसा किया, एक थे अहमद पटेल, दूसरे हैं आप। पर आपने तो मेरे भरोसे से दगा किया है, आपने तो गांधी परिवार को अपमानित करने का भी कार्य किया है।’ गहलोत ने सफाई पेश करते हुए कहा-’मैडम, गलती आपके लोगों ने की है, अजय माकन बेहद जल्दबाजी में थे। मैं तो अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने से पहले ही सीएम पद छोड़ने को तैयार था, पर आपके लोगों ने विधायकों पर पहले से दबाव बनाना शुरू कर दिया कि उन्हें अपना नया नेता अभी चुनना है या कम से कम अपनी भावनाओं से हाईकमान को अवगत कराना है, मैंने कोशिश की कि माकन और खड़गे जी से मिल कर उन्हें समझा पाऊं, पर उन दोनों ने तो मुझसे मिलना भी जरूरी नहीं समझा। जबकि अजय माकन ने उस दिन कम से कम दस बार सचिन पायलट से बात की। तो क्या मैं अपना बचाव भी नहीं करता?’ इस पर सोनिया ने कहा कि ’राजस्थान में कांग्रेस को ‘फेस सेविंग’ करनी होगी, ‘डैमेज कंट्रोल’ भी करना होगा।’ सो, दोनों नेताओं के बीच तय हुआ है कि कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव के बाद दिल्ली से राजस्थान केंद्रीय पर्यवेक्षक भेजे जाएंगे जो 5-5 के ग्रुप में वहां के विधायकों से बात करेंगे, उनका मन टटोलेंगे तब ही नए नेतृत्व के बारे में कोई फैसला होगा।

Comments Off on गहलोत से सोनिया ने क्या कहा?

क्या ममता का करिश्मा फीका पड़ रहा है?

Posted on 24 September 2022 by admin

’यह आना-जाना तो लगा रहता है, आसमां के घर कौन सगा रहता है
कहां कौन लिख कर देता है पर्चियां, हर एक के पहलू में दगा रहता है’

तृणमूल नेत्री ममता बनर्जी यूं तो जाहिरा तौर पर विपक्षी एका की नई सिरमौर बनने की मशक्कत में जुटी हैं, पर लगता है कि उनके अपने घर को ही दुश्मनों की नज़र लग गई है। दल-बदल की चैंपियन धरती गोवा की ही मिसाल ले लीजिए, लुईजिन्हो फ्लेरियो जो गोवा चुनाव से ऐन पहले टीएमसी में आए, विधानसभा का चुनाव भी नहीं लड़े, सीधे राज्यसभा की ठौर पकड़ ली, इनसे इन दिनों ममता बेहद नाराज़ बताई जाती हैं। गोवा के पूर्व सीएम रह चुके फ्लेरियो ने विधानसभा के सात चुनाव जीते हैं, बावजूद इसके ममता ने उन्हें टीएमसी के गोवा के कोर कमेटी में जगह नहीं दी। ममता को शायद इस बात का इल्म हो चुका है कि फ्लेरियो इन दिनों अपनी ख्वाहिशों पर भगवा रंग चढ़ा रहे हैं, सो राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति के चुनावों में उन्होंने टीएमसी से इतर एनडीए लाइन का समर्थन किया, इनके वोट द्रौपदी मुर्मू और जगदीप धनखड़ के समर्थन में गए। ममता को सूचना मिल गई है कि फ्लेरियो बहुत जल्द भाजपा के पाले में जा सकते हैं। सूत्र खुलासा करते हैं कि इसकी एक बड़ी वजह है, फ्लेरियो परिवार का एक बड़ा और आलीशान रिसार्ट कोस्टल क्षेत्र में है, जो कानूनी परिभाषा में अब भी अवैध दर्जे में आता है, सरकार चाहे तो इसे कानूनी परिभाषा के अंतर्गत ला सकती है पर यह प्रक्रिया बेहद जटिल और लंबी है, इसे वैध करने की प्रक्रिया में तीन साल तक का समय लग सकता है। गोवा में भाजपा की सरकार बने अभी छह महीने भी नहीं गुजरे हैं, कांग्रेस के 8 विधायक पहले ही टूट कर भाजपा के पाले में आ चुके हैं, विपक्ष के नाम पर गोवा में एक बड़ा शून्य रह गया है, सो फ्लेरियो अब किसी किस्म का रिस्क नहीं लेना चाहते।

Comments Off on क्या ममता का करिश्मा फीका पड़ रहा है?

Download
GossipGuru App
Now!!